मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के खिलाफ थे : अन्ना हजारे
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने 26 दिसंबर को देर रात 9:51 बजे दिल्ली AIIMS में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर फैल गई. वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और मनमोहन सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना हजारे ने भी पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के निधन पर उन्हें याद किया है. अन्ना हजारे ने कहा कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के खिलाफ थे. पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि मनमोहन सिंह ने देश और समाज के कल्याण को हमेशा प्राथमिकता दी.
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने शुक्रवार को उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने हमेशा देश और समाज के कल्याण को प्राथमिकता दी. अन्न हजारे ने अहिल्यानगर जिले स्थित अपने गांव में कहा, ‘जिसने जन्म लिया उसकी मृत्यु तय है, लेकिन कुछ लोग अपने पीछे अपनी यादें और विरासत छोड़ जाते हैं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी थी.’ अन्ना हजारे ने इस मौके पर मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान 2010 के दशक के शुरुआती दौर में छेड़े गए भ्रष्टाचार रोधी प्रदर्शन को भी याद किया.
भ्रष्टाचार के खिलाफ थे मनमोहन सिंह- अन्ना हजारे
अन्ना हजारे ने मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी. देशभर में इसकी गूंज सुनाई दी थी. मनमोहन सिंह के निधन पर वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, ‘वह (डॉ. मनमोहन सिंह) भ्रष्टाचार के खिलाफ थे. उन्होंने लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट को लेकर तत्काल फैसले लिए थे. वह हमेशा अपने देश और यहां के लोगों को लेकर सबसे बेहतर कैसे किया जाए इसके बारे में सोचते थे. मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी और इसे विकास के रास्ते पर लाया.’ बता दें कि मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे.
‘हमेशा यादों में रहेंगे’
अन्ना हजारे ने मनमोहन सिंह के निधन पर दिल को छू लेने वाली बात कही है. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने शारीरिक तौर पर भले ही इस दुनिया को छोड़ दिया है, लेकिन वह लोगों की यादों में हमेशा बने रहेंगे. 1990 के दशक में जब देश गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रह था और बैलेंस ऑफ पेमेंट का मुद्दा गहराता जा रहा था, तब मनमोहन सिंह ने देश को उबारा. प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले मनमोहन सिंह ने देश को आर्थिक संकट से उबारते हुए उसे आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद की.

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