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 स्पैडेक्स परीक्षण भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन, आगे के मिशन में मददगार होगा: जितेंद्र सिंह

 नयी दिल्ली।  भारत नए साल में अपने दो उपग्रहों के ‘डॉकिंग' परीक्षण में कामयाबी की उम्मीद कर रहा है। इसके साथ ही, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ तालमेल में सबसे महंगे पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित करने को लेकर भी देश आशान्वित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पहला उपग्रह डॉकिंग प्रयोग (स्पेडैक्स) सात जनवरी को होने वाला है, जिससे भारत के इस जटिल तकनीक में महारत हासिल करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल होने की संभावना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह पहला मिशन छोटे उपग्रहों वाला है। हम इसे भारी उपग्रहों के साथ आगे बढ़ाएंगे और यह डॉकिंग (उपग्रहों के जुड़ने की) प्रौद्योगिकी हमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और उसके बाद के मिशन की स्थापना में मदद करेगी।'' सिंह ने कहा, ‘‘इसरो का स्पैडेक्स मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नए युग की शुरुआत है, जो भारत की तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। ‘डॉकिंग' क्षमता भविष्य के मिशनों को अंतरिक्ष में पेलोड के स्थानांतरण के माध्यम से अकल्पनीय परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी, जो एक तरह का चमत्कार होगा और विकसित भारत का प्रमाण होगा।'' उन्होंने कहा कि नए साल में इसरो मार्च तक नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है, जिसे अपनी तरह का सबसे महंगा उपग्रह बताया जा रहा है। नए साल में श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण होगा, जब जनवरी में जीएसएलवी ‘नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन' (नाविक) सेवाओं के लिए एनवीएस-दो उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। एचएएल-एलएंडटी उद्योग संघ द्वारा निर्मित ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) में से पहला, पहली तिमाही में उच्च थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली को शामिल करते हुए एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह लॉन्च करेगा, जिसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय ग्राहक के लिए एलवीएम3 का वाणिज्यिक मिशन होगा। गगनयान के पहले मानवरहित मिशन को भी नए साल की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है। इस मिशन में व्योममित्र रोबोट को शामिल किया जाएगा। सिंह ने कहा, ‘‘हमारा मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान गगनयान 2025 के अंत तक या 2026 की शुरुआत में होगा।'' उन्होंने कहा कि यह मिशन मानव रहित मिशन की सफलता पर निर्भर करता है। इसरो ने मार्च से पहले गगनयान मिशन के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम' का परीक्षण करने की भी योजना बनाई है।
 
 

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