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उड़ान-आईसी814 के कैप्टन देवी शरण सेवानिवृत्त

नयी दिल्ली. विमानन कंपनी में चार दशकों तक कमर्शियल पायलट के पद पर सेवा देने के बाद ‘कॉकपिट' को अलविदा कहते हुए कैप्टन देवी शरण ने कहा कि यह बहुत सुखद होता है जब स्वाभाविक रूप से पूर्ण विराम आता है। इंडियन एयरलाइंस की उड़ान संख्या-आईसी814 को आतंकवादियों द्वारा अपरहण किए जाने पर रुपिन कत्याल नामक यात्री की जान न बचाए जाने का अफसोस आज भी कैप्टन देवी शरण को है। साल 1999 में क्रिसमय के पर्व पर हाईजैक हुई इंडियन एयरलाइंस की उड़ान संख्या ‘आईसी-814' के कैप्टन रहे देवी शरण एअर इंडिया से सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्होंने चार दशक तक इंडियन एयरलाइंस की सेवा की। शरण (65) ने चार जनवरी को मेलबर्न से दिल्ली तक ‘ड्रीमलाइनर' विमान की कमान संभाली थी। यह उनकी आखिरी उड़ान थी। उन्होंने 1985 में पहली बार विमान संचालन किया था। शरण ने कमर्शियल पायलट के तौर पर सेवानिवृत्त होने का जिक्र करते हुए  कहा, ‘‘यह बहुत खूबसूरत होता है जब पूर्ण विराम स्वाभाविक रूप से आता है... 40 साल बीत गए हैं और इन पलों में मैंने बहुत सारी खूबसूरत यादें संजोई हैं।'' शरण ने विमानन कंपनी में अपने 40 साल के करियर के दौरान चार प्रकार के विमान उड़ाए हैं, जिसमें एयरबस 300, 330 तथा बोइंग 737 और 787 शामिल है। हालांकि, वह पिछले 14 साल से वाइड-बॉडी बोइंग 787 विमान की कमान संभाल रहे थे। कमर्शियल पायलट की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है।
 ‘कंधार विमान अपहरण' प्रकरण के बाद से देवी शरण को केवल एक ही बात का अफसोस रह गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा सोचता हूं कि काश मैं (रुपिन) कत्याल को बचा पाता।'' जब उनसे कंधार प्रकरण के बारे में पूछा गया तो कैप्टन ने कहा कि एक कमरे में बैठकर इसके बारे में चर्चा करना बहुत आसान है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी अपहरण एक जैसा नहीं होता और परिस्थिति के अनुसार काम करना पड़ता है। दिशानिर्देश मिल सकते हैं, लेकिन कोई खास बात नहीं हो सकती है। पेशेवर के तौर पर किसी भी खतरे के लिए तैयार रहना पड़ता है।'' काठमांडू से दिल्ली आने वाली ‘इंडियन एयरलाइंस' की उड़ान संख्या आईसी-814 का 24 दिसंबर 1999 को अपहरण कर लिया गया था। जब विमान 26,000 फुट की ऊंचाई पर था तब कैप्टन शरण को विमान में नकाबपोश आतंकवादी की मौजूदगी का पता चला था, जिसके हाथ में एक हथगोला और रिवॉल्वर थी। जब विमान का अपहरण किया गया था तब उसमें 180 यात्री थे और इनमें से अधिकांश को आठ दिनों तक कष्टदायक समय का सामना करना पड़ा था क्योंकि लोगों की जान बचाने के कारण विमान चालक (कैप्टन) को विमान को अमृतसर, लाहौर, दुबई और कंधार में उतारना पड़ा था। हालांकि, इस हादसे में रुपिन की मौत भी हो गई थी। इंडियन एयरलाइंस का 2007 में एयर इंडिया में विलय कर दिया गया।
 शरण ने सेवानिवृत्ति के मौके पर अपने संदेश में अपने शानदार और यादगार करियर के लिए एयर इंडिया के अपने मित्रों और सहकर्मियों को धन्यवाद दिया। शरण ने उन यात्रियों का भी आभार जताया, जिन्होंने वर्षों तक उन्हें (शरण) विमान संचालन का मौका दिया। ‘एयर इंडिया' ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें शरण के विमानन कंपनी के साथ बिताए गए दिनों की झलकियां दिखाई गई हैं। कंपनी ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, ‘‘आसमान सिर झुकाता है, रनवे विमान ‘आईसी-814' के कैप्टन को सलाम करता है।'' जब उनसे युवा पीढ़ी को कुछ संदेश दिए जाने के बारे में कहा गया तो उन्होंने कहा कि शरण ने कहा कि निरंतरता, धैर्य और कड़ी मेहनत बहुत महत्वपूर्ण है। विमानन कंपनी से सेवानिवृत्ति के बाद उनकी अगली योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं लंबी छुट्टियों की योजना बना रहा हूं।

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