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एचएमपीवी: राज्यों से श्वसन संबंधी रोगों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया; नागपुर में 2 संदिग्ध मामले

नयी दिल्ली. भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के पांच मामले सामने आने के बाद केंद्र ने राज्यों को ‘आईएलआई' और ‘एसएआरआई' सहित श्वसन संबंधी बीमारियों की निगरानी बढ़ाने तथा एचएमपीवी संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। आईएलआई, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी है जबकि एसएआरआई, गंभीर तीव्र श्वसन संबंधी रोग है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर से एचएमपीवी संक्रमण के दो संदिग्ध मामले सामने आए। दोनों मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अधिकारी ने बताया कि उनके नमूने नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान को भेजे गए हैं। देश में सोमवार को एचएमपीवी का पहला मामला सामने आया, जब कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में पांच बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा है कि सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और चिंता की कोई बात नहीं है। एचएमपीवी वायरस एक रोगजनक है जो सभी आयु वर्ग के लोगों में श्वसन संक्रमण का कारण बनता है।
 केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक डिजिटल बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने देश में श्वसन संबंधी बीमारियों और एचएमपीवी मामलों एवं उनके प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का जायजा लिया गया। बैठक चीन में एचएमपीवी मामलों में वृद्धि की खबरों के बीच आयोजित की गई थी तथा उसी दिन कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में एचएमपीवी के पांच मामलों की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) से प्राप्त आंकड़े देश में कहीं भी आईएलआई और एसएआरआई जैसी बीमारियों में असमान्य वृद्धि का संकेत नहीं देते हैं। बयान में कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों के लिए चिंता का कोई कारण नहीं है, क्योंकि एचएमपीवी 2001 से ही वैश्विक स्तर पर मौजूद है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि एचएमपीवी 2001 से ही विश्व स्तर पर मौजूद है। नागपुर में एचएमपीवी के दो संदिग्ध मामले सामने आये, दोनों बच्चे सात और 14 साल के हैं, जिनका इलाज एक निजी अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में किया गया। नागपुर के जिलाधिकारी विपिन इटनकर ने संवाददाताओं को बताया कि उनके नमूनों की जांच की गई और उन्हें संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘नागपुर में एचएमपीवी रोगियों के बारे में मीडिया की रिपोर्ट गलत है।''
मंगलवार को स्वास्थ्य अधिकारियों ने दोहराया कि खतरे की कोई वजह नहीं है, लेकिन कई राज्य सरकारों ने कहा है कि वे अलर्ट पर हैं। तमिलनाडु के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा सुब्रमण्यम ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। सोमवार को सामने आए पांच मामलों में से दो तमिलनाडु से हैं। मंत्री ने कहा कि वायरस ने भारत और विशेष रूप से राज्य में कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाला है। उन्होंने कहा कि सोमवार को संक्रमण की पुष्टि वाले 45 और 69 वर्षीय दो मरीज ठीक हैं। इस बीच, ओडिशा सरकार ने राज्य में सभी चिकित्सा सुविधाओं और प्रयोगशालाओं को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। मंगलवार सुबह भुवनेश्वर में एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में एचएमपीवी के कुछ मामले सामने आए हैं। हालांकि, ओडिशा में अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस बीच, कर्नाटक में भाजपा ने राज्य सरकार से वायरस को हल्के में नहीं लेने का आग्रह किया क्योंकि इसने चीन में ‘‘तबाही'' मचा दी है। सोमवार को बेंगलुरु में दो बच्चों के वायरस से संक्रमित पाए जाने के मद्देनजर विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि प्रशासन को तुरंत सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और आईसीयू बिस्तर की स्थिति की जांच करनी चाहिए। यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अशोक ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव के लोगों से शांत रहने के बयान का उद्देश्य लोगों को घबराने से रोकना था, लेकिन जब जनता को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं हो तो किसी भी वायरस को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। राज्यों को यह भी सलाह दी गई कि वे वायरस के संक्रमण की रोकथाम के बारे में लोगों के बीच सूचना और जागरूकता फैलाएं, जैसे कि साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोना, गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह को नहीं छूना, रोग के लक्षण वाले लोगों के साथ निकट संपर्क से बचना और खांसते एवं छींकते समय मुंह एवं नाक को ढंकना। बयान में कहा गया कि श्रीवास्तव ने दोहराया कि श्वसन संबंधी बीमारियों में आमतौर पर सर्दियों के महीनों में वृद्धि देखी जाती है और देश ऐसे मामलों में किसी भी संभावित वृद्धि की आशंका को लेकर पूरी तरह तैयार है। इस बीच, शिमला में हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने मंगलवार को कहा कि एचपीएमवी एक सामान्य वायरस है और इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। एचपीएमवी से संबंधित चिंताओं पर यहां स्वास्थ्य अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए शांडिल ने कहा कि एचपीएमवी चिंता का विषय नहीं है और इसे सामान्य वायरल के रूप में ही माना जाना चाहिए। यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एचपीएमवी के प्रसार या गंभीरता पर लगातार नजर रख रहा है। वहीं, केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि उनके राज्य सहित कई अन्य राज्यों में एचएमपीवी के मामले सामने आए हैं इसलिए, चिंता की कोई बात नहीं है। तिरूवनंतपुरम में पत्रकारों से बात करते हुए, जॉर्ज ने लोगों से वायरस के बारे में फर्जी खबरें न फैलाने का आग्रह किया। साथ ही, मंत्री ने एचएमपीवी सहित किसी भी वायरल संक्रमण से बचने के लिए एहतियात के तौर पर मास्क पहनने की सलाह दी।

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