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टोटलाइजर जैसे प्रमुख चुनावी सुधारों के लिए राजनीतिक सहमति की जरूरत: सीईसी

 नयी दिल्ली. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने मंगलवार को कहा कि मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने और मतदान के प्रारूप को गुप्त रखने लिए दो प्रमुख चुनावी सुधारों की तैयारी पूरी है, लेकिन इन्हें लागू करने के लिए राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी। दिल्ली विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कई ईवीएम को जोड़ने और बूथ-वार मतदान के प्रारूप को गुप्त रखने की तकनीक ‘टोटलाइजर' चुनाव आयोग के पास तैयार है, लेकिन इसका उपयोग केवल राजनीतिक सहमति के बाद ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मतदाताओं की ‘प्रोफाइलिंग' (किसने किसे वोट दिया) समाप्त होनी चाहिए।''
 उन्होंने यह भी कहा कि इससे मतदाताओं को दिए गए प्रलोभनों का विवरण उम्मीदवारों द्वारा मांगे जाने के चलन पर अंकुश लगेगा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में मतों की गिनती मतदान केंद्रों के अनुसार की जाती है, जिससे ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं जिनमें विभिन्न इलाकों या क्षेत्रों में मतदान के प्रारूप का पता चल जाता है। इस मुद्दे को हल करने के लिए, सरकारी उपक्रम ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने ‘टोटलाइजर' तकनीक विकसित की, जिसका उपयोग अलग-अलग मशीनों के मतों को उजागर किए बिना कुल 14 ईवीएम के परिणाम एकसाथ दिए जा सकते हैं। इस उपकरण का निर्माण एक दशक से भी अधिक समय पहले किया गया था, लेकिन अभी तक इसका उपयोग नहीं किया गया है क्योंकि सरकार से मंजूरी मिलनी बाकी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने ईवीएम के मुद्दे को लेकर कहा कि वोटिंग मशीन और ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल' (वीवीपीएटी) पर्चियों के जरिए गिने गए वोटों में एक भी विसंगति नहीं पाई गई है। 

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