महाकुंभ में प्राकृतिक खेती का हुनर सिखा रहे 'राष्ट्रीय किसान पुरस्कार' से सम्मानित प्रदीप कुमार
महाकुंभ नगर . प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में राष्ट्रीय किसान पुरस्कार से सम्मानित प्रदीप कुमार दीक्षित यहां आए श्रद्धालु किसानों के बीच प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार और उसके उत्पादों से मुनाफा कमाने का हुनर सिखा रहे हैं। उप्र के हरदोई जिले में करीब आठ एकड़ कृषि भूमि पर गौ आधारित प्राकृतिक खेती करने वाले वाणिज्य स्नातक 50 वर्षीय दीक्षित ने महाकुंभ के सेक्टर आठ में ''प्राकृतिक किसान परिवार'' नामक एक शिविर स्थापित किया है। उन्होंने त्रिवेणी मार्ग पर आदर्श क्षेत्रीय खादी प्रदर्शनी में गौ आधारित प्राकृतिक कृषि उत्पाद के स्टॉल भी लगाए हैं। दीक्षित ने कहा कि सैकड़ों प्रगतिशील किसानों ने शिविर में आकर गौ आधारित खेती में रूचि ली है। 2009 में उन्होंने पद्मश्री सुभाष पालेकर व आचार्य देवव्रत से प्रशिक्षण प्राप्त कर प्राकृतिक खेती की राह चुनी। मूलत: गोंडा निवासी प्रदीप दीक्षित ने उप्र की राजधानी लखनऊ से करीब 50 किलोमीटर दूर हरदोई जिले में करीब आठ एकड़ खेत में निराश्रित 15 गायों की एक गौशाला स्थापित करने के बाद प्राकृतिक खेती शुरू की। बाद में कृषि विज्ञान स्नातक उनके 23 वर्षीय पुत्र अनुपम दीक्षित भी इस अभियान में शामिल हो गये। उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने महाकुंभ मेले में दीक्षित की ओर से गौ आधारित प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदीप दीक्षित खेती आधारित उत्पादों की पैकेजिंग का भी काम करते हैं और महाकुंभ में किसानों को गौ आधारित खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरकार की ओर से निरंतर प्रोत्साहन मिलने पर आभार जताते हुए दीक्षित ने बताया, '' हम मोटा अनाज (श्री अन्न का नाम दिया है) जिनमें सांवा, कोदो, काकुन, कुटकी, ज्वार-बाजरा और तिलहन आदि की खेती करते हैं।'' तिलहन को हरदोई जिले का ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) घोषित किया गया है।
उन्होंने कहा,''श्री अन्न के उत्पादों से हम अपनी आय दोगुनी करने के साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी पकवान खा रहे हैं और यही बात अपने शिविर और स्टॉल पर आने वाले किसानों को भी सिखा रहे हैं।'' गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि उप्र में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती बढ़ रही है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक माह पहले ही एक करोड़ किसानों को गौ आधारित खेती करने के लिए 2481 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। किसान प्रदीप दीक्षित ने बताया कि गौ आधारित खेती में कृषि लागत कम होती है और पशुधन का भी संरक्षण होता है। उन्होंने कहा कि इसका दूरगामी प्रभाव यह होता है कि मिट्टी और पानी के साथ ही मनुष्य की सेहत भी बेहतर होती है। श्याम बिहारी गुप्ता ने सरकार के आंकड़ों के हवाले से दावा किया कि उप्र में 23,500 हेक्टेयर में बुंदेलखंड और सवा लाख हेक्टेयर में उप्र में गौ आधारित खेती हो रही है। दीक्षित ने बताया कि शिविर 26 फरवरी तक मेले में रहेगा जिसमें शिविर में प्रतिदिन हवन और ध्यान साधना सत्र के साथ ही गाय के गोबर से रोजगार प्राप्त करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किया जाता है। पिछले वर्ष दिसंबर माह में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने दीक्षित को राष्ट्रीय किसान पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्हें मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन और प्राकृतिक खेती के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
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