मुगल-ए-आजम का संगीतमय मंचन आखिरी बार दिल्ली में
नयी दिल्ली/ मुंबई के एनसीपीए में अक्टूबर 2016 में संगीतमय नाटक ‘मुगल-ए-आजम' के मंचन से तीन दिन पहले नाटक के निर्देशक फिरोज अब्बास खान ‘नर्वस ब्रेकडाउन' (अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति) के करीब पहुंच गए थे। खान ने तब इस नाटक के मंचन को अपने जीवन की सबसे बड़ी मुसीबत के रूप में देखा और खुद को ऐसा कुछ करने के लिए कोसा, जो ‘असंभव' था। लगभग नौ साल बाद, दिलीप कुमार और मधुबाला अभिनीत फिल्म पर आधारित इस नाटक का 300 से अधिक बार मंचन हो गया है। भारतीय रंगमंच के इतिहास में सबसे शानदार इस संगीतमय नाटक का मंचन आठ देशों में हो चुका है और अब संभवतः आखिरी बार दिल्ली में हो रहा है। खान ने कहा, “जब भी मैं कोई शो करता हूं, तो मुझे घबराहट होती है। यह चीज मुझे परेशान करती रहती है। मैं लगभग ‘नर्वस ब्रेकडाउन' की स्थिति में पहुंच गया था, क्योंकि कुछ भी काम नहीं कर रहा था, सब कुछ गलत हो रहा था। मैं बैठा और मैंने कहा ‘मैंने ऐसा क्यों किया, मुझे ऐसा करने की जरूरत नहीं थी। मैंने ऐसा कुछ क्यों किया, जो असंभव है'।” शो में मनीष मल्होत्रा द्वारा डिजाइन किए गए 550 से अधिक बेहतरीन परिधान, नील पटेल व डेविड लैंडर जैसे कलाकारों द्वारा बनाए गए भव्य सेट, मुकेश छाबड़ा द्वारा 150 से अधिक कलाकारों की कास्टिंग, मयूरी उपाध्याय द्वारा शानदार कथक कोरियोग्राफी और पीयूष कनौजिया का संगीत शामिल है। पीछे मुड़कर देखते हुए खान कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता था कि यह 50 से ज़्यादा शो चला पाएगा। और अब देखिए यह कहां पहुंच गया है। शापूरजी पल्लोनजी समूह के दीपेश सालगिया द्वारा निर्मित इस नाटक में निसार खान ने अकबर और शहाब अली ने सलीम की भूमिका निभाई है। ‘मुगल-ए-आजम' फिल्म में क्रमशः इन किरदारों को पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार ने निभाया था। इस संगीतमय नाटक में मूल फिल्म के 12 गीत शामिल हैं, जिनमें कव्वाली ‘तेरी महफिल में किस्मत', ‘मोहे पनघट पे' और विद्रोही प्रेम गीत ‘प्यार किया तो डरना क्या' शामिल हैं।










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