केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने सौर परियोजनाओं के साथ भंडारण प्रणाली के लिए जारी किया परामर्श
नयी दिल्ली/केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने बुधवार को सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ही ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को स्थापित करने को लेकर एक परामर्श जारी किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रिड की दक्षता और स्थिरता को बढ़ाना है। यह परामर्श सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों/सचिव (बिजली/ऊर्जा), केंद्रीय बिजलीघरों और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईआईए) के प्रमुखों को जारी किये गये हैं। भारत ने 2030 तक हरित ईंधन स्रोतों का उपयोग करके 500 गीगावाट बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता है। यह स्थिति ग्रिड स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसका कारण ऊर्जा के ये स्रोत हर समय एक ही क्षमता के साथ बिजली उत्पादन नहीं करते और संभव है कि उच्च मांग की अवधि के दौरान बिजली उपलब्ध नहीं हो। इस संदर्भ में, सीईए ने कहा कि ग्रिड स्थिरता, विश्वसनीयता और अनुकूलतम ऊर्जा उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) आवश्यक है। भंडारण प्रणाली से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से कम उत्पादन के दौरान की चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिल सकती है। यह अधिक भरोसेमंद और स्थिर ग्रिड सुनिश्चित कर सकती है। इसमें कहा गया है कि दिसंबर, 2024 तक ऊर्जा भंडारण प्रणाली की स्थापित क्षमता 4.86 गीगावाट है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, 2031-32 तक 364 गीगावाट सौर और 121 गीगावाट पवन क्षमता को एकीकृत करने के लिए, भारत को 73.93 गीगावाट भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी। परामर्श में कहा गया, ‘‘इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सभी नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईआईए) और राज्य बिजली कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य के सौर निविदाओं में स्थापित सौर परियोजना क्षमता के 10 प्रतिशत के बराबर (न्यूनतम दो घंटे) की ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) को शामिल करें। इसमें कहा गया, ‘‘यह कदम सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में निरंतरता की कमी के मुद्दों को कम करने में मदद करेगा और अधिकतम मांग के समय महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करेगा। सौर परियोजना से बिजली उत्पादन नहीं होने के दौरान भंडारण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बोली दस्तावेज में एक उपयुक्त अनुपालन व्यवस्था का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जा सकता है।'' वितरण लाइसेंस लेने वाली कंपनियां छत पर सौर संयंत्रों के साथ दो घंटे के भंडारण को अनिवार्य करने पर भी विचार कर सकती हैं। इससे उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार होगा।










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