ब्रेकिंग न्यूज़

बंगाल के न्यायाधिकरणों को मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी अपीलों पर तत्काल सुनवाई करने का आदेश

नयी दिल्ली.  उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपीलीय न्यायाधिकरणों से कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिन लोगों का नाम जोड़ने के लिए तत्काल सुनवाई का मामला बनता है, उनकी याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। सुनवाई की शुरुआत में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान पर खुशी जताई। पश्चिम बंगाल में 152 विधानसभा क्षेत्रों के लिए हुए पहले चरण के चुनाव में रिकॉर्ड 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सीजेआई ने कहा, ''भारत के एक नागरिक के रूप में, मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुश हूं। जब लोग मतदान के अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।'' न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी पीठ में शामिल हैं। पीठ राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी भारी मतदान प्रतिशत की सराहना की और राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में केंद्रीय बलों की भूमिका की प्रशंसा की। पश्चिम बंगाल में चुनावों में हिंसा का इतिहास रहा है। शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों से कहा कि वे लंबित मुद्दों के निस्तारण के लिए अदालत द्वारा नियुक्त 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों का रुख करें, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले भी शामिल हैं। न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरणों से कहा कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए तत्काल सुनवाई का मामला बनता है, उन्हें प्राथमिकता देकर सुनवाई की जाए। मतदाता सूचियों में शामिल किए जाने या न किए जाने के मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश ने पीड़ित व्यक्तियों को प्रशासनिक और न्यायिक दोनों पक्षों से शिकायतों के निवारण के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की छूट भी प्रदान की। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ''हमारे 13 अप्रैल के आदेश में अधिकांश मुद्दों का व्यापक रूप से जवाब दिया जा चुका है। हालांकि हम समझ सकते हैं कि कुछ समस्याएं रोज़ाना के आधार पर उत्पन्न होती रहेंगी, जिन पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या अपीलीय न्यायाधिकरण का ध्यान आवश्यक हो सकता है। लंबित मामलों के निपटारे के लिए प्रशासनिक पक्ष पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी जाती है।'' इससे पहले शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि जिन लोगों की याचिकाएं अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा 21 अप्रैल या 27 अप्रैल से पहले स्वीकार कर ली गई थीं, उन्हें क्रमशः चुनाव के पहले या दूसरे चरण में मतदान करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल अपील लंबित होने मात्र से किसी को मतदान का अधिकार नहीं मिल जाएगा। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए थे, उनके लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या बाहर किए जाने के खिलाफ अपीलों के निपटारे के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरण गठित किए हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मतदाता सूची में बने रहने के अधिक महत्वपूर्ण अधिकार पर पीठ बाद में विचार करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने भी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान की सराहना की और कहा कि लोग देश के हर कोने से वोट डालने आए क्योंकि उन्हें डर था कि यदि इस बार मतदान नहीं किया तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के केवल 139 दावों या अपीलों पर ही अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा अब तक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे 27 लाख लोग सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english