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राहुल संसद में बहस से डरते हैं, आरएसएस पर निराधार आरोप लगाते हैं: भाजपा

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बुधवार को तीखा हमला करते हुए उन्हें ''अपरिपक्व'' और ''अंशकालिक'' नेता प्रतिपक्ष बताया तथा आरोप लगाया कि वह संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं क्योंकि वह नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की तुलना पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से होने से डरते हैं। सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस नेता पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ ''निराधार'' टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया। गांधी ने मंगलवार को पूर्व सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा था कि देश के छात्र ''गहरी पीड़ा'' में हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माफी नहीं चाहिए बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार की कार्रवाई के लिए मोदी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्र इसलिए सड़कों पर हैं क्योंकि आरएसएस देश के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। गांधी ने कहा था कि भारत अपने इतिहास को किसी के द्वारा रौंदे जाने को स्वीकार नहीं करेगा। गांधी ने कहा था कि प्रत्येक राज्य को अपनी संस्कृति और भाषा के साथ समान व्यवहार पाने का अधिकार है, लेकिन आरएसएस चाहता है कि केवल उसी के दृष्टिकोण वाला इतिहास स्वीकार किया जाए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ''अपरिपक्व'', ''अंशकालिक'' और ''गैर-जिम्मेदार'' नेता प्रतिपक्ष हैं तथा संसद की कार्यवाही इसलिए बाधित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि मोदी सरकार के कामकाज से तुलना होने पर कांग्रेस की पोल खुल जाएगी। भाटिया ने दावा किया, ''राहुल गांधी डरे हुए हैं। उन्हें पता है कि जब प्रभावशाली मोदी सरकार और 2004 से 2014 तक की रीढ़विहीन कांग्रेस नीत सरकार की तुलना होगी तो  कांग्रेस बेनकाब हो जाएगी। इसलिए संसद में व्यवधान डाला जा रहा है।'' भाजपा और आरएसएस पर राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ''मोदी-भय'' और ''आरएसएस-भय'' से ग्रस्त हैं तथा बिना किसी प्रमाण के संघ की विचारधारा को बार-बार ''जहरीली'' बताते हैं। उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी मोदी-भय और आरएसएस-भय से ग्रस्त हैं। जिस विचारधारा ने पूरी निष्ठा से देश की सेवा की है, उसे 'जहरीली' कहना आसान है, लेकिन बिना किसी सबूत के इसे सिद्ध करना संभव नहीं है।'' छात्रों और परीक्षा सुधारों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कांग्रेस नेता चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा, ''झारखंड में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। कर्नाटक में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। केरल में प्रश्नपत्र लीक हुआ तो राहुल गांधी गायब हैं। यह दोहरा मापदंड और यह पाखंड क्यों?'' संसद में गतिरोध से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन में चर्चा के दौरान सरकार के तर्कों का जवाब नहीं दे पाते, इसलिए सदन से ''भाग जाते'' हैं। उन्होंने कहा, ''जब संसद का सत्र चल रहा हो तो क्या नेता प्रतिपक्ष को पूरी तैयारी के साथ सदन में नहीं आना चाहिए? राहुल गांधी संसद से भी भागते हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और अमित शाह तथ्यों के साथ बोलते हैं तो राहुल गांधी के पास कोई जवाब नहीं होता।'' भाटिया ने विदेशों से भगोड़ों को वापस लाने के मामले में मोदी सरकार के रिकॉर्ड का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि इससे राजग और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा, ''2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। यानी औसतन हर वर्ष 40 भगोड़ों को वापस लाया गया। इसकी तुलना संप्रग सरकार से करें, जिसके कार्यकाल में औसतन केवल चार भगोड़ों को हर वर्ष वापस लाया गया।'' आर्थिक अपराध करने वालों का ज़िक्र करते हुए भाटिया ने कहा कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और दावा किया कि सरकार की कोशिशों से जनता के हजारों करोड़ रुपये वापस पाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, ''वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी लोगों में (जिनमें विजय माल्या जैसे लोग शामिल हैं जिनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है) से जुड़े नौ मामले हैं, जबकि 45 अन्य लोग अलग-अलग तरह के अपराधों के आरोपी हैं।'' उन्होंने कहा, ''जो भगोड़े वापस लाए गए हैं, उनकी वजह से लगभग 19,000 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। यह रकम इसके असली मालिकों को वापस मिल गई है।'' अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाटिया ने पांच अगस्त को ''ऐतिहासिक दिन'' बताया और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा, ''अनुच्छेद 370 की शुरुआत 'अस्थायी' शब्द से हुई थी, लेकिन इसे हटाने की इच्छाशक्ति किसी में नहीं थी। पांच अगस्त, 2019 को, जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया, तो संविधान की असली भावना का सम्मान किया गया। अमित शाह जी ने सरदार पटेल जैसी इच्छाशक्ति दिखाई जिससे ऐसा किया जाना सुनिश्चित हुआ।

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