चीन से दुर्लभ मृदा चुंबकों के आयात का भारतीय कंपनियों को मिला लाइसेंस
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि कुछ भारतीय कंपनियों को चीन से दुर्लभ मृदा चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट)के आयात के लिए लाइसेंस प्राप्त हुए हैं। चुंबकों के आयात के लिए कम से कम तीन भारतीय कंपनियों कॉन्टिनेंटल इंडिया, हिताची और जय उशिन को प्रारंभिक सरकारी मंजूरी मिल गई है। ये कंपनियां भारत के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए पुर्जे उपलब्ध कराती हैं।
अप्रैल की शुरुआत में बीजिंग द्वारा इन चुंबकों के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लगाए जाने के बाद से यह पहली मंजूरी है। इस कदम का उद्देश्य आपूर्ति संबंधी उन समस्याओं को दूर करना है, जिनका भारत के प्रमुख उद्योगों पर असर पड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि अमेरिका और चीन के बीच वार्ता हमारे क्षेत्र में किस प्रकार से प्रभाव डालेगी।
आयात लाइसेंस में विशिष्ट शर्तें जुड़ी हैं। आयातित चुंबकों को यूएस को पुनः निर्यात नहीं किया जा सकता और न ही उनका उपयोग रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में पहले ही पुष्टि कर दी थी कि वह दुर्लभ मृदा सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और व्यापार आपूर्ति शृंखला में पूर्वानुमानशीलता लाने के लिए चीन के साथ बातचीत कर रहा है।
भारत सरकार और उद्योग निकाय आपूर्ति संबंधी बाधाओं का समाधान खोजने के लिए काम कर रहे हैं। ऑटोमोटिव क्षेत्र, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माता, निर्यात प्रतिबंधों से विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। लाइसेंसों के इस प्रारंभिक अनुदान से दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है।




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