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 परंपरा को तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर

-पी.एम. विश्वकर्मा योजना से कुम्हार कला को मिली नई पहचान और रोजगार
 रायपुर। राज्य एवं केंद्र शासन की योजनाएं पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कोरबा जिले के रामकुमार प्रजापति इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने पी.एम. विश्वकर्मा योजना के माध्यम से अपने पारंपरिक कुम्हार व्यवसाय को नई दिशा और पहचान दी है।
रामकुमार प्रजापति वर्षों से अपने पारंपरिक कुम्हार कार्य से जुड़े हुए हैं। मिट्टी को आकार देने की कला उन्हें पारिवारिक परंपरा में विरासत के रूप में मिली है। हालांकि समय के साथ बाजार की मांग, आधुनिक डिज़ाइन और तकनीकी संसाधनों के अभाव के कारण उनका व्यवसाय सिमट गया था। ऐसे समय में शासन की पी.एम. विश्वकर्मा योजना उनके लिए परिवर्तनकारी साबित हुई।
योजना के अंतर्गत रामकुमार प्रजापति ने लाइवलीहुड कॉलेज, कोरबा में कुम्हार ट्रेड का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक चाक के उपयोग की तकनीक सीखी, जिससे विभिन्न प्रकार के सुंदर, आकर्षक और टिकाऊ मिट्टी के पात्रों का निर्माण संभव हो सका। आधुनिक तकनीक के प्रयोग से उनके कार्य में गुणवत्ता, गति और डिज़ाइन की विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान शासन द्वारा प्रदत्त 4,000 रुपये की स्टाइपेंड राशि भी मिली।  इसके अतिरिक्त, बिना गारंटर एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्होंने आवश्यक उपकरण क्रय कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। वर्तमान में वे पाली क्षेत्र के बाजारों में नियमित रूप से अपनी दुकान लगाकर स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका अर्जित कर रहे हैं।

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