UGC 2026 के नए नियमों को तत्काल रद्द करने की मांग
प्रधानमंत्री को छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने लिखा पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations–2026 को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। इस संबंध में संस्था के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन पत्र भेजा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2026 के ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाने के उद्देश्य से लाए जाने का दावा करते हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह अपने घोषित लक्ष्य से भटके हुए प्रतीत होते हैं। संस्था का आरोप है कि यह व्यवस्था शिक्षा में गुणवत्ता और निष्पक्षता को बढ़ाने के बजाय राजनीतिक लाभ का साधन बन सकती है।
75 साल से लागू जाति आधारित आरक्षण समानता लाने में विफल रहा है अतः इसे निरस्त करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने स्पष्ट किया है कि यदि उच्च शिक्षा में वास्तविक समानता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है, तो विश्वविद्यालयों को जाति और धर्म से निरपेक्ष रखते हुए चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया जाना चाहिए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले 75 वर्षों से लागू जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के कारण उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रतिभा का क्षरण, ब्रेन ड्रेन और शोध व नवाचार के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति न होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
संस्था ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि यदि उच्च शिक्षा में किसी प्रकार के आरक्षण की आवश्यकता हो, तो उसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर नए और संतुलित मापदंड तय किए जाएं।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि इस मुद्दे को लेकर जन असंतोष बढ़ रहा है, जिससे सामाजिक असंतुलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
अंत में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने केंद्र सरकार से UGC के 2026 के इन नियमों को तत्काल रद्द करने की मांग दोहराई है।



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