माताधाम मंदिर में महिलाओं ने की अखंड सुहाग के लिए कुमकुम पूजा
-माता दुर्गा, मंकिनम्मा और राजराजेश्वरी का विशेष रूप से श्रृंगार कर आरती की गई
टी सहदेव
भिलाई नगर। सेक्टर 07 स्थित माताधाम मंदिर में मंगलवार को मां मंकिनम्मा जनकल्याण सेवासमिति के तत्वावधान में महिलाओं ने अखंड सुहाग और संतानों की दीर्घायु के लिए सुबह कुमकुम पूजा की। इससे पहले पंडित साईं प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में माताओं दुर्गा, मंकिनम्मा और राजराजेश्वरी का विशेष रूप से श्रृंगार कर आरती की गई। उसके बाद मुख्य कलश को पूजा स्थल पर दुर्गा माता के समक्ष स्थापित कर घट पूजा की गई। घट पूजा के दौरान पंडित ने माता दुर्गा की षोडशोपचार पूजा कर श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पठन किया। जिसमें देवी भगवती के 108 नामों का पाठ किया गया, ऐसी मान्यता है कि इस स्तोत्र के श्रवण से देवी भगवती उस व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाती हैं और उसका कल्याण करती हैं।
सनातन विधि से कुमकुम पूजा
कुमकुम पूजा के लिए महिलाओं ने श्रद्धाभाव से पूजा की थाली में अक्षत, कलश और उसके ऊपर श्रीफल, कुमकुम और हल्दी से निर्मित भगवान गणेश की प्रतीकात्मक प्रतिमा रखकर माता से अखंड सुहाग तथा संतानों की दीर्घायु की कामना की। हिंदू मान्यता के अनुसार पूजा के अलावा मांगलिक कार्यों में भी कुमकुम का विशेष महत्व है। इसलिए पूजा की थाली में यह सबसे जरूरी सामग्रियों में से एक है। इसका लाल रंग प्रेम, उत्साह, उमंग, साहस और शौर्य का प्रतीक है, साथ ही साथ पति-पत्नी के बीच प्रेम का संचार भी करता है। इसलिए सुहागिनें थाली में कुमकुम रखना नहीं भूलतीं।
नवमी को ज्योत जवारा विसर्जन
कुमकुम पूजा के उपरांत दोपहर को महिलाओं ने भोग ग्रहण किया। शाम को पुनः आरती की गई और उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। सेवासमिति के अध्यक्ष नीलम चन्ना केशवलु ने बाकी दिनों के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को सुबह हर दिन की तरह माताओं का श्रृंगार कर पूजा अर्चना की जाएगी और शाम को माताओं को छप्पन भोग लगाया जाएगा। अष्टमी को सुबह नित्य की भांति पूजा और शाम को महा आरती जाएगी। अंतिम दिन सुबह रामनवमी पूजा होगी तथा दोपहर को कन्या पूजन के बाद कन्या भोग होगा और संध्या को ज्योत जवारा विसर्जन होगा।














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