राही जीवन-पथ के सुन ले...
-विष्णुपद छंद गीत
-लेखिका- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
राही जीवन-पथ के सुन ले,
राह नई गढ़ना ।
फूल मिले या शूल तुम्हें नित ,
आगे ही बढ़ना ।
यत्न सतत कर लक्ष्य-प्राप्ति हो,
तब तक तुम चलना ।
करनी होगी कठिन साधना ,
साधक तुम बनना ।
अपने कदम जमा धरती पर ,
ऊपर तुम चढ़ना ।।
सिक्के के दोनों पहलू को
देखो और कहो ।
सुख-दुख जीवन की सच्चाई ,
जीवन सार गहो ।
अंतस् के कोरे कागज पर ,
फूल खुशी कढ़ना ।।
सत्य-झूठ की धूप-छाँव में ,
सही राह चुनना ।
दुविधा में जब मन डोले तो,
मन की तुम सुनना ।
ढाई आखर की पोथी को ,
सीखो तुम पढ़ना ।।






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