जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की व्यवस्थित पहचान कर किया जाएगा सूचीकरण
-प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण की दिशा में कदम
-ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान की समीक्षा
दुर्ग / ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आज मुख्य सचिव श्री विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की व्यवस्थित पहचान कर उनका सूचीकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी जिलों में पाण्डुलिपियों का समयबद्ध एवं व्यवस्थित सर्वेक्षण करना है। इसके अंतर्गत संस्थागत और निजी संग्रहों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की पहचान, प्रलेखन और सूचीकरण किया जाएगा। साथ ही उनके डिजिटलीकरण एवं संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, ताकि एक पाण्डुलिपि डेटाबेस तैयार हो सके। उन्होंने बताया कि पाण्डुलिपि वह मूल हस्तलिखित दस्तावेज या रचना होती है, जो छपाई के आविष्कार से पहले कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र, धातु, कपड़े या चमड़े पर लिखी जाती थी। ये पाण्डुलिपियाँ इतिहास, साहित्य, धर्म, विज्ञान, गणित, ज्योतिष और चिकित्सा जैसे विषयों के प्राचीन ज्ञान का महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं।
मुख्य सचिव ने जानकारी दी कि 12 सितम्बर 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा ज्ञान भारतम् वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया था। उन्होंने सभी कलेक्टरों को कार्ययोजना बनाकर अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। जिलों में मास्टर ट्रेनर तथा ग्राम एवं क्षेत्र स्तर पर सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। सर्वेक्षण कार्य 16 मार्च से 15 जून तक तीन माह की अवधि में पूरा किया जाएगा। जिला कलेक्टर को जिले के अंतर्गत पाण्डुलिपि संग्रह केन्द्रों संस्कृत महाविद्यालय, पाठशालाएं, निजी/सरकारी पुस्तकालय, संग्रहालय, शिक्षण एवं शोध संस्थान, मंदिर, मठ, आश्रम, गुरूकुल, ट्रस्ट आदि तथा इसी प्रकार निजी संग्रहकर्ता, पुरोहित, धर्माचार्य, ज्योतिषाचार्य, संस्कृत एवं प्राचीन भाषाओं के विद्यानों आदि के संग्रह में उपलब्ध पाण्डुलिपियों का चिन्हांकन एवं सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए।


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