आशा भोंसले का वो सुपरहिट गाना, जिसे रेडियो और दूरदर्शन पर कर दिया गया बैन
नई दिल्ली। दिग्गज गायिका आशा भोंसले ने म्यूजिक इंडस्ट्री में हजारों गाने गाए हैं, लेकिन साल 1971 की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का एक ऐसा गाना है, जिसने इतिहास रच दिया. आर.डी. बर्मन का संगीत और आशा ताई की आवाज का ऐसा तालमेल था कि गाना रातों-रात पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया. लेकिन इस गाने के साथ एक बड़ा विवाद भी जुड़ गया था. फिल्म में जीनत अमान को जिस अंदाज में हिप्पी कल्चर और नशे में दिखाया गया था, उसे देखकर उस जमाने में लोग भड़क गए थे. गाने के बोल और जीनत अमान के उस बिंदास लुक ने हंगामा खड़ा कर दिया था.
हम बात कर रहें हैं फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा' के गाने 'दम मारो दम’ के बारे में. उस समय लोगों को लगा कि यह गाना युवाओं को नशे की लत की तरफ उकसा रहा है. जबकि सच्चाई कुछ और ही थी. फिल्म के डायरेक्टर देवानंद का मकसद तो नशे के खिलाफ आवाज उठाना था. वे काठमांडू के हिप्पी कल्चर की कड़वी सच्चाई दिखाना चाहते थे, जहां युवा अपने काम को भूलकर बर्बादी की तरफ बढ़ रहे थे. लेकिन गाने की धुन इतनी ज्यादा कैची और मॉडर्न थी कि इसका संदेश लोगों तक पहुंचने के बजाय, इसका स्टाइल ज्यादा चर्चा का विषय बन गया.
विवाद इतना बढ़ा कि 'दम मारो दम' को लेकर कड़े कदम उठाए गए. ऑल इंडिया रेडियो ने इसे बजाना बंद कर दिया और दूरदर्शन पर जब भी फिल्म दिखाई जाती, इस गाने को सेंसर की कैंची का शिकार होना पड़ता था. लोग इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ मान रहे थे. हालांकि, इन सब मुश्किलों के बावजूद यह गाना हिट रहा. यह इस कदर लोकप्रिय हुआ कि आज भी पार्टियों और कॉन्सर्ट्स में इसे बजाए बिना महफिल अधूरी लगती है. आशा भोंसले को इस गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला.
आज इतने सालों बाद देखें तो 'दम मारो दम' सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उस दौर के बदलते बॉलीवुड का एक बड़ा रिफ्लेक्शन है. आशा भोंसले ताई ने अपनी आवाज में जो स्वैग दी, उसने इस गाने को सदाबहार बना दिया. आशा जी ने एक विवादित गाने को क्लासिक का दर्जा दिला दिया.

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