ब्रेकिंग न्यूज़

जनभागीदारी, जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन के सफल क्रियान्वयन से ग्राम घुपसाल बना मिसाल

- ग्राम के किसानों ने 300 एकड़ में मक्का एवं लगभग 50 एकड़ में दलहन-तिलहन फसल लगाई
 - कलेक्टर ने किसानों एवं स्वच्छता दीदियों का किया सम्मान
राजनांदगांव  । छुरिया विकासखंड का ग्राम घुपसाल जनभागीदारी, जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन के सफल क्रियान्वयन से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने ग्राम के दौरे के दौरान किसानों एवं स्वच्छता दीदियों को सम्मानित करते हुए ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास, एकजुटता एवं जनशक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलों को अपनाने और जल संरक्षण के उपायों के कारण ग्राम में भू-जल स्तर में सुधार हुआ है तथा जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत है। कलेक्टर ने कहा कि ग्राम घुपसाल ने जिस प्रकार अधिक पानी वाली फसल धान के स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाया है, वह एक अनुकरणीय पहल है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी सार्थक कदम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां धान की फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, वहीं मक्का एवं अन्य दलहन-तिलहन फसलों में अपेक्षाकृत बहुत कम पानी लगता है। कलेक्टर ने ग्राम की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि जहां एक परिवार में भी निर्णय लेना कठिन होता है, वहां पूरे गांव द्वारा एकमत होकर फसल परिवर्तन करना ग्राम की जागरूकता और सामाजिक एकता को दर्शाया है। उन्होंने बताया कि ग्राम घुपसाल का यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बन गई है और इसकी सराहना की जा रही है।
कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर ने ग्रामीणों द्वारा नाला एवं तालाब में पचरी निर्माण की मांग पर शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि दीर्घकालीन लाभ सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना से सोलन पैनल लगाने पर केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे भविष्य में बिजली बिल में कमी आएगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रखने एवं पढ़ाई तथा खेलकूद की ओर प्रेरित करने कहा। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों के साथ है और किसी भी समस्या के समाधान के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही गांवों का समग्र विकास संभव है। ग्राम घुपसाल का यह प्रयास अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि ग्राम के किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों ने मिलकर जो कार्य किया है, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पहले जहां अधिक पानी वाली धान फसल के कारण गर्मी में जल संकट उत्पन्न होता था, वहीं अब मक्का एवं अन्य कम पानी वाली फसलों के कारण गांव में पर्याप्त जल उपलब्ध है। यह परिवर्तन ग्रामीणों की मेहनत और जागरूकता का परिणाम है। ग्राम घुपसाल का यह प्रयास न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने सभी ग्रामीणों को इस कार्य के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार मिल-जुलकर कार्य करने की अपील की।
पद्मश्री श्रीमती फूल बासन यादव ने सराहना करते हुए कहा कि ग्राम घुपसाल में जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन अभियान की ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल किसी एक व्यक्ति, अधिकारी या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे गांव, किसानों, महिला समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा जिला एवं जनपद प्रशासन के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में धन, संसाधन और सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, लेकिन पानी का कोई विकल्प नहीं है। यदि समय रहते जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। ग्राम घुपसाल ने जनभागीदारी के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि सामूहिक संकल्प से बड़े से बड़े कार्य संभव हैं।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत सरपंच एवं ग्राम के किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले ग्राम में पानी की बहुत समस्या होती थी। लेकिन इस वर्ष धान की जगह मक्का एवं दलहन-तिलहन फसल लेने से पानी की समस्या नहीं हो रही है। किसानों ने बताया कि पूर्व में गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर नीचे चले जाने से सूखे जैसी स्थिति बन जाती थी। मार्च माह के बाद गांव के तालाब, हैंडपंप एवं नालों में पानी नहीं रहता था, जिससे पेयजल एवं निस्तारी की गंभीर समस्या उत्पन्न होती थी। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम के सामूहिक प्रयास एवं महत्वपूर्ण निर्णय से इस वर्ष लगभग 350 एकड़ से अधिक रकबे में रबी मौसम में मक्का एवं अन्य दलहन-तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों का उत्पादन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप ग्राम में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है तथा पेयजल एवं निस्तारी कार्यों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां पूर्व में फागुन माह के बाद तालाब सूख जाते थे, वहीं इस वर्ष अभी भी निस्तारी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, सीईओ छुरिया श्री होरी लाल साहू, सरपंच श्री नरेश शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान उपस्थित थे।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english