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भारत आने वाले पांच वर्ष में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है: मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में बढ़ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और करदाताओं की बढ़ती संख्या सहित अन्य आंकड़ों का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि पिछले 10 वर्ष में सरकार के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है और इन्हीं मजबूत आधारों पर भारत आने वाले पांच वर्ष में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। टीवी 9 के वैश्विक शिखर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह दावा भी किया कि साल 2014 के बाद उनके नेतृत्व वाली सरकार के विकास मॉडल से ग्रामीण भारत भी सशक्त हुआ है। उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के 10 वर्षों के दौरान भारत ने एफडीआई में केवल 300 बिलियन डॉलर आकर्षित किए। हमारी सरकार के 10 वर्षों में, भारत ने 640 बिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त किया।" प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल क्रांति, कोविड-19 महामारी के दौरान टीकों में विश्वास और 10 वर्षों में करदाताओं की बढ़ती संख्या साबित करते हैं कि सरकार के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 में लोगों ने म्यूचुअल फंड में 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था जबकि 2024 में म्यूचुअल फंड में 52 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ है। उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग देश की क्षमता में विश्वास करते हैं। भारत एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है तो उसके पीछे 10 साल का एक पावरफुल लॉन्चपैड है।" उन्होंने कहा, "हमारे तीसरे कार्यकाल में भारत के सामर्थ्य को नई ऊंचाई तक पहुंचाना है। विकसित भारत की संकल्प यात्रा में आने वाले पांच वर्ष हमारे देश की प्रगति और प्रशस्ति के वर्ष हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 21वीं सदी के भारत ने छोटा सोचना छोड़ दिया है। आज वह जो करता है, वह सर्वश्रेष्ठ और सबसे बड़ा होता है। उन्होंने कहा, "आज भारत की उपलब्धियां देखकर दुनिया हैरान है। दुनिया, भारत के साथ चलने में अपना फायदा देख रही है।" पूर्ववर्ती सरकारों, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक जिन्होंने सरकार चलाई, उनका भारतीयता के सामर्थ्य पर ही विश्वास नहीं था। मोदी ने कहा, "उन्होंने भारतीयों के सामर्थ्य को कम करके आंका। तब लाल किले से कहा जाता था कि हम भारतीय निराशावादी हैं, पराजय भावना को अपनाने वाले हैं।" उन्होंने कहा कि लाल किले से ही भारतीयों को आलसी कहा गया, मेहनत से जी चुराने वाला कहा गया। उन्होंने कहा कि जब देश का नेतृत्व ही निराशा से भरा हुआ हो तो फिर देश में आशा का संचार कैसे होता। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए देश के अधिकांश लोगों ने भी ये मान लिया था कि देश तो अब ऐसे ही चलेगा।
उन्होंने कहा, "पिछले 10 वर्ष में ऐसा क्या बदला कि आज हम यहां पहुंचे हैं? ये बदलाव है सोच का, ये बदलाव है आत्मविश्वास का, भरोसे का। ये बदलाव है सुशासन का।" मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने गांव को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया, गांव और शहर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई और रोजगार के नए अवसर तैयार किए गए तथा महिलाओं की आय बढ़ाने के साधन विकसित किए गए। उन्होंने कहा कि विकास के इस मॉडल से ग्रामीण भारत सशक्त हुआ है।
 प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों की एक और सोच यह थी कि वे देश की जनता को अभाव में रखना पसंद करती थीं। उन्होंने कहा,‘‘ अभाव में रह रही जनता को यह लोग चुनाव के समय थोड़ा बहुत देकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते थे। उसके चलते ही देश में एक वोट बैंक पॉलिटिक्स का जन्म हुआ यानी सरकार केवल उसके लिए काम करते थी जो उन्हें वोट देता था।

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