एनएमसी ने मेडिकल छात्रों की आत्महत्या से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिए कार्य बल गठित किया
नयी दिल्ली। मेडिकल छात्रों के अवसाद से ग्रसित होने और उनके आत्महत्या करने से जुड़ी चिंताओं का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने एक राष्ट्रीय कार्य बल गठित किया है। कार्य बल चुनौतियां उत्पन्न करने वाले कारकों का विश्लेषण करेगा और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए साक्ष्य आधारित रणनीतियों का प्रस्ताव करेगा। यह 15 सदस्यीय कार्य बल होगा। इसके अध्यक्ष राष्ट्रीय मानसिक और स्नायु विज्ञान संस्थान (निमहांस) के मनोचिकित्सा विभाग में प्रोफेसर डॉ. बी.एम. सुरेश होंगे। पिछले सप्ताह जारी एक सरकारी आदेश में कहा गया, ‘‘हाल के दिनों में मेडिकल छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य चिंता का विषय रहा है, जिसके कारण मेडिकल छात्र अवसादग्रस्त हो रहे हैं और आत्महत्या तक कर रहे हैं। इस मुद्दे के समाधान के लिए एनएमसी की रैगिंग-रोधी समिति द्वारा एक राष्ट्रीय कार्य बल का गठन किया गया है।'' कार्य बल मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके आत्महत्या करने से जुड़े आंकड़ों एवं रिपोर्ट का अध्ययन करेगा, इन चुनौतियों को उत्पन्न करने वाले विभिन्न कारकों का विश्लेषण करेगा और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए साक्ष्य आधारित रणनीतियों का प्रस्ताव करेगा। यह उन कॉलेजों का भी दौरा करेगा, जहां आत्महत्या की घटनाएं हुई हैं।
कार्य बल मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए प्रमुख निष्कर्षों और कार्रवाई योग्य सिफारिशों को रेखांकित करते हुए 31 मई, 2024 तक एक व्यापक रिपोर्ट सौंपेगा। कार्य बल मासिक प्रगति रिपोर्ट रैगिंग रोधी प्रकोष्ठ को सौंपेगा।

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