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ईवीएम से जुड़े सवाल पर सीईसी का कटाक्ष: अधूरी हसरतों का इल्जाम हम पर लगाना ठीक नहीं...

नयी दिल्ली.  मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़े तमाम सवालों एवं दावों को खारिज करते हुए शनिवार को कहा कि वोटिंग मशीनें शत प्रतिशत सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की अदालतों ने 40 बार ईवीएम को लेकर दी गई चुनौतियों को खारिज किया है और अब तो अदालतें जुर्माना भी लगाने लगी हैं। सीईसी के अनुसार, ‘‘40 बार इस देश की संवैधानिक अदालतों ने ईवीएम से जुड़ी चुनौतियों को देखा है...कहा गया था कि ईवीएम हैक हो सकती है, चोरी हो जाती है, खराब हो सकती हैं, नतीजे बदल सकते हैं...हर बार संवैधानिक अदालतों ने इसे खारिज कर दिया।'' उन्होंने कहा, ‘‘अदालतों ने कहा कि इसमें वायरस नहीं हो सकता, छेड़छाड़ नहीं हो सकती...अब तो अदालत ने जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।'' कुमार ने एक किताब दिखाते हुए कहा, ‘‘थोड़ा पढ़ने की कोशिश करिये। हमारी वेबसाइट पर है...कोई भी विशेषज्ञ बन जाता है।'' उन्होंने कहा कि ईवीएम के युग में कई छोटे राजनीतिक दल अस्तित्व में आए, जबकि मतपत्रों के दौर में ऐसा नहीं था। कुमार का कहना था कि उम्मीदवारों के सामने ‘मॉक पोल' होता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो। बाद में गोया परिणाम आता है तो उस पर कायम नहीं रहते।'' मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, ‘‘यह मैं नहीं, ईवीएम कह रही है।''
उन्होंने कहा, ‘‘ईवीएम 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं। हमने बहुत सारे सुधार किए हैं। एक-एक ईवीएम का नंबर उम्मीदवारों को दिया जाएगा।'' मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि कई ईवीएम को जोड़ने और बूथ-वार ‘वोटिंग पैटर्न' को छिपाने की एक तकनीक भारतीय चुनाव आयोग के पास तैयार है, लेकिन इस पर अमल करने का समय अभी नहीं आया है। कुमार ने यह भी उल्लेख किया कि आयोग ‘ब्लॉकचेन' जैसी रिमोट वोटिंग तकनीक पर काम कर रहा है। कई इवीएम को जोड़ने और परिणामों को संयोजित करने वाली तकनीक ‘टोटलाइज़र' है।
कुमार ने कहा, ‘‘लेकिन, यहां लोगों को एक मशीन के नतीजे पर भरोसा नहीं है।'' उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक व्यवस्था को खुद परिपक्व होने दीजिए, जरूरत समग्रता लाने की है। हम तैयार हैं, तकनीक तैयार है लेकिन पूरे परिदृश्य में काम करना होगा। इसे और परिपक्व होने दीजिए।'' इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में वोटों की गिनती मतदान केंद्रों के अनुसार की जाती है, जिससे ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं जिनमें विभिन्न इलाकों या इलाकों में मतदान के पैटर्न का पता चल जाता है। इस मुद्दे को हल करने के लिए, सरकारी उपक्रम ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' और ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' ने ‘टोटलाइज़र' तकनीक विकसित की, जिसका उपयोग विभिन्न ईवीएम में अलग-अलग मतों को उजागर किए बिना 14 ईवीएम के समूह के परिणाम एकसाथ हासिल करने के लिए किया जा सकता है।

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