बैंक, बीमाकर्ता को दुर्घटना में घायल मुंबई पुलिसकर्मी को 30 लाख रु का भुगतान करने का निर्देश
मुंबई. उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को उस पुलिसकर्मी को ब्याज सहित 30 लाख रुपये का बीमा दावा देने का निर्देश दिया है, जो 2017 में एक दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से विकलांग हो गया था। दक्षिण मुंबई स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 11 मार्च को पारित एक आदेश में कहा कि तथ्यों के अनुसार बैंक और मुंबई पुलिस के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत बैंक एवं बीमा कंपनी पुलिसकर्मियों को बीमा कवर प्रदान करने के लिए सहमत थे। इसने कहा कि पुलिसकर्मी के बीमा दावे को ‘मनमाने ढंग से खारिज/अस्वीकृत' कर दिया गया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह ‘गलत व्याख्या' पर आधारित है और इसलिए (बीमा दावा) अस्वीकृति का आदेश कानून के तहत टिकाऊ नहीं है।'' आदेश की एक प्रति रविवार को उपलब्ध कराई गई थी।
दावाकर्ता राजेश पवार दिसंबर 2020 में शिकायत दर्ज कराने के समय उपनगरीय बोरीवली के कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन (आदेश में पदनाम का उल्लेख नहीं है) में तैनात थे। उन्होंने दावा किया कि 2015 में बैंक और पुलिस विभाग के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुसार, जब कर्मी बैंक में खाता खोलेंगे, तो उन्हें 10 लाख रुपये के व्यक्तिगत दुर्घटना और 25 लाख रुपये के हवाई दुर्घटना बीमा लाभ के साथ एक ‘पावर सैल्यूट डेबिट सह एटीएम कार्ड' दिया जाएगा। परिणामस्वरूप, उन्होंने दादर (पूर्व) में बैंक की शाखा में एक खाता खोला था।
शिकायतकर्ता अक्टूबर 2017 में एक दुर्घटना का शिकार हो गए और उन्होंने कहा कि वह लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। शिकायतकर्ता ने कहा कि दुर्घटना के कारण उन्हें लगभग एक साल तक काम से दूर रहना पड़ा और स्थायी रूप से दिव्यांग हो गये। सरकारी चिकित्सा प्राधिकरण की ओर से जारी प्रमाण पत्र के अनुसार, पुलिसकर्मी ‘71 प्रतिशत तक दिव्यांग' है। चोटों से उबरने के बाद शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2019 में आवश्यक दस्तावेज जमा करके बैंक से बीमे का दावा किया। बीमा कंपनी ने दस्तावेज देरी से जमा करने और आंशिक दिव्यांगता को बीमा शर्तों में शामिल नहीं किए जाने के आधार पर दावे को खारिज कर दिया। बैंक ने एक लिखित जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता ने ‘झूठा दावा' किया था।
पुलिसकर्मी को हर महीने बिना किसी रुकावट के वेतन मिलता है। बैंक ने दावा किया कि इस प्रकार, न तो रोजगार का कोई नुकसान हुआ है और न ही कोई मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न हुआ है। बीमा कंपनी ने भी दावे का विरोध करते हुए कहा कि बीमा राशि का दावा करने के लिए बीमित व्यक्ति को जहां तक संभव हो तुरंत पूरे विवरण के साथ नोटिस देना होगा। बीमाकर्ता ने कहा कि वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता ने एक वर्ष और सात महीने के अंतराल के बाद सूचित किया। इसके अलावा, बीमा कंपनी ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि बैंक और मुंबई पुलिस के बीच क्या बातचीत हुई। बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि चूंकि उसने मुंबई पुलिस के साथ कोई समझौता नहीं किया है, इसलिए बैंक और मुंबई पुलिस के बीच समझौता उसके लिए बाध्यकारी नहीं है। आयोग ने सभी दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि तथ्यों से पता चलता है कि बैंक और मुंबई पुलिस के बीच एमओयू के अनुसार दोनों प्रतिवादी पुलिसकर्मियों को बीमा कवर प्रदान करने के लिए सहमत थे। आयोग ने कहा, ‘‘इस प्रकार, प्रतिवादी के आचरण से यह पता चलता है कि बीमा की देनदारी से बचने के लिए दावे को मनमाने ढंग से खारिज/अस्वीकार कर दिया गया है।








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