22वें विधि आयोग का कार्यकाल शनिवार को समाप्त होगा, यूसीसी पर रिपोर्ट तैयार करने का कार्य अब भी जारी
नयी दिल्ली । गत कुछ महीनों से बिना अध्यक्ष कार्य कर रहे 22वें विधि आयोग का कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है। लेकिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर आयोग द्वारा अहम रिपोर्ट तैयार करने का कार्य जारी है। आयोग की कार्य प्रणाली की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों ने बताया कि देश में एक साथ चुनाव कराने के संबंध में विधि आयोग की रिपोर्ट तैयार है और इसे विधि मंत्रालय को सौंपा जाना है। उन्होंने बताया कि आयोग का अध्यक्ष नहीं होने की वजह से रिपोर्ट सौंपी नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रितु राज अवस्थी 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष थे जिन्हें कुछ महीने पहले भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकपाल का सदस्य नियुक्त किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने मार्च में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर एक रिपोर्ट सौंपी थी। निवर्तमान आयोग ने पिछले वर्ष समान नागरिक संहिता पर नए सिरे से विचार-विमर्श शुरू किया था। समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त करने के बाद, जब रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया जा रहा था, तभी न्यायमूर्ति अवस्थी को लोकपाल नियुक्त कर दिया गया। इसी महीने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समान नागरिक संहिता के लिए नए सिरे से जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के लिए ‘‘धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता'' समय की मांग है। प्रधानमंत्री ने मौजूदा कानूनों को ‘‘सांप्रदायिक नागरिक संहिता'' करार देते हुए उन्हें भेदभावपूर्ण बताया था। मोदी ने कहा था कि ऐसे कानून जो देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटते हैं और असमानता का कारण बनते हैं, उनके लिए आधुनिक समाज में कोई जगह नहीं है। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। समान नागरिक संहिता भाजपा के चुनावी घोषणापत्रों में प्रमुख मुद्दा रहा है।
सरकार ने 22वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को तीन वर्ष की अवधि के लिए किया था और न्यायमूर्ति अवस्थी ने नौ नवंबर, 2022 को अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2023 में 22वें विधि आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया था।










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