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जलवायु परिवर्तन से निपटने का मुद्दा अहम : प्रधानमंत्री मोदी

 नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ऊर्जा के नए क्षेत्रों जैसे हरित हाइड्रोजन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बुधवार को कहा कि यह भविष्य का मामला नहीं है बल्कि अब इस दिशा में कार्रवाई की आवश्यकता है। ‘ग्रीन हाइड्रोजन इंडिया 2024' पर दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को एक वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन केवल भविष्य का मामला नहीं है बल्कि इसका प्रभाव अभी से महसूस किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचने के लिए प्रयास करने का समय यही और अभी है।'' उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन और स्थिरता वैश्विक नीतिगत चर्चा का केंद्र बन गए हैं।प्रधानमंत्री ने स्वच्छ और हरित धरती बनाने की दिशा में राष्ट्र की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि भारत हरित ऊर्जा पर अपने पेरिस संकल्पों को पूरा करने वाले पहले जी20 देशों में से एक है। उन्होंने कहा, ‘‘ये संकल्प 2030 के लक्ष्य से 9 साल पहले ही पूरी हो गए।''
 पिछले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में लगभग 300 प्रतिशत और सौर ऊर्जा क्षमता में 3,000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘‘हम इन उपलब्धियों पर आराम नहीं कर रहे हैं बल्कि राष्ट्र मौजूदा समाधानों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और साथ ही नए तथा अभिनव क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहा है।'' उन्होंने कहा कि ऐसे ही हरित हाइड्रोजन की तस्वीर सामने आती है।
 प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हरित हाइड्रोजन दुनिया के ऊर्जा परिदृश्य में आशाजनक विकल्प के रूप में उभर रहा है। हरित हाइड्रोजन उन उद्योगों को वातावरण से कार्बन डाय-ऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों को हटाने (डीकार्बोनाइज़ेशन) में मदद कर सकता है, जिनका विद्युतीकरण करना मुश्किल है।'' उन्होंने रिफाइनरियों, उर्वरकों, इस्पात, भारी शुल्क वाले परिवहन और कई अन्य क्षेत्रों का उदाहरण दिया, जिन्हें इससे लाभ होगा। मोदी ने यह सुझाव भी दिया कि हरित हाइड्रोजन का उपयोग अधिशेष अक्षय ऊर्जा के भंडारण समाधान के रूप में किया जा सकता है। साल 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लक्ष्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन नवाचार, बुनियादी ढांचे, उद्योग और निवेश को बढ़ावा दे रहा है।'' उन्होंने अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास में निवेश, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी और इस क्षेत्र के स्टार्ट-अप एवं उद्यमियों को प्रोत्साहन पर भी प्रकाश डाला और साथ ही हरित नौकरियों के परितंत्र के विकास की बड़ी संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने इस क्षेत्र में देश के युवाओं के लिए कौशल विकास की दिशा में सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण की वैश्विक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कहा कि वैश्विक चिंताओं का जवाब भी वैश्विक होना चाहिए। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन में कमी पर हरित हाइड्रोजन के प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि उत्पादन को बढ़ाना, लागत को कम करना और सहयोग के माध्यम से बुनियादी ढांचे का निर्माण तेजी से हो सकता है। उन्होंने प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान और नवाचार में संयुक्त रूप से निवेश करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। 

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