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नर्स बेहतर सेवा के लिए स्थानीय भाषा को सिखें : सीतारमण

 
कांचीपुरम(तमिलनाडु).केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नर्सिंग को पेशे के रूप में अपनाने के इच्छुक विद्यार्थियों से अपील की कि उन्हें जहां भी सेवा का अवसर मिले, वहां की स्थानीय भाषा सीखें। सीतारमण ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय नर्स की भारी मांग है और किसी भी देश की भाषा सीखने से लाभ मिलेगा। उन्होंने दूसरे देशों में भारतीय नर्स को कितना महत्व दिया जाता है इसका विवरण देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सिंगापुर में अपने समकक्ष के साथ बैठक से पहले अपनी वहां की यात्रा को याद किया। सीतारमण ने यहां शंकर कॉलेज ऑफ नर्सिंग (महिला) का उद्घाटन करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले करीब चार कैबिनेट मंत्री वहां गए थे और सिंगापुर के प्रधानमंत्री के साथ हमारी बातचीत के दौरान यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि भारतीय चिकित्सा, नर्स और फिजियोथेरेपिस्ट को कितना महत्व दिया जाता है।'' उन्होने कहा कि केंद्र सरकार चिकित्सा क्षेत्र को महत्व दे रही है और अधिक से अधिक युवाओं को नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सीतारमण ने कहा कि भारत से लगभग 800 नर्स फिर चाहे वे तमिलनाडु की हों या असम की, पिछले दो-तीन साल में सेवा करने के लिए सिंगापुर गई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल सिंगापुर तक ही सीमित नहीं है। यह (भारतीय नर्सिंग पेशेवरों की आवश्यकता) जापान, यूरोप में भी देखी जाती है और इन देशों में बुजुर्गों की संख्या अधिक होने के कारण, वहां भारतीय नर्स और उन लोगों की आवश्यकता है जो घर पर उनकी देखभाल कर सकें।'' केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि उन देशों की सरकारें भारतीय नर्स की भर्ती करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए नर्सिंग कॉलेज महत्वपूर्ण हो जाते हैं और यदि छात्रों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए तो विदेशों में भर्ती होने का बड़े अवसर हैं।'' सीतारमण ने कहा कि जो लोग विदेश में काम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए एकमात्र शर्त स्थानीय भाषा सीखना है। उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह हम किसी दूसरे देश से आए व्यक्ति से तमिलनाडु में तमिल में बात करने की उम्मीद करते हैं, उसी तरह जब हम जापान में काम करने की योजना बनाते हैं तो हमें जापानी भाषा सीखनी चाहिए।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्थानीय भाषा सीखने से न केवल विदेश में बल्कि यहां तक ​​कि एक छात्र को उत्तर भारत में भी नर्स के रूप में काम करने का अवसर मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘स्थानीय भाषा सीखना जरूरी है। आपको पंजाबी या बंगाली में बात करनी पड़ सकती है। मैं यह नहीं कह रही हूं कि आप अपनी मातृभाषा भूल जाएं। जब आप कहीं काम करने जा रहे हों तो स्थानीय भाषा (मातृभाषा के अलावा) सीखना बेहतर होता है।''

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