राजस्थान, छत्तीसगढ़ ने केंद्र से एनसीएपी में और शहरों को शामिल करने का अनुरोध किया
नयी दिल्ली. राजस्थान ने केंद्र से राज्य के पांच और शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में शामिल करने का अनुरोध किया है। आधिकारिक रिकॉर्ड से यह जानकारी मिली। राजस्थान ने राज्य की शुष्क भौगोलिक स्थिति और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों का हवाला देते हुए यह अनुरोध किया है। छत्तीसगढ़ ने भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से रायगढ़ जिले को एनसीएपी के दायरे में लाने का अनुरोध किया है। एनसीएपी के अंतर्गत ‘नेशनल एपेक्स कमेटी' की बैठक के दौरान राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अनुरोध किया कि राज्य की शुष्क भौगोलिक स्थिति और जलवायु परिस्थितियों के मद्देनजर अजमेर, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा और जैसलमेर को इसमें शामिल किया जाए। छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विभाग की प्रमुख सचिव आर. संगीता ने भी ‘‘बढ़ते प्रदूषण स्तर'' के कारण रायगढ़ को कार्यक्रम में शामिल करने का अनुरोध किया। जुलाई में, केंद्र ने रायगढ़ जिले में एक कोयला खनन परियोजना को मंजूरी दे दी, जबकि उसके छह महीने बाद ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इसकी पर्यावरणीय मंजूरी रद्द कर दी थी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-पटना द्वारा किए गए वहन क्षमता और संचयी प्रभाव आकलन में पाया गया कि रायगढ़ में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा के भीतर है, लेकिन अति सूक्ष्म कण (पीएम) का स्तर औद्योगिक क्षेत्रों के लिए मान्य अधिकतम स्तर के करीब पहुंच रहा है। भारत ने 2019 में एनसीएपी की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य 2017 के स्तर की तुलना में 2024 तक पीएम प्रदूषण में 20-30 प्रतिशत की कमी लाना था। बाद में सरकार ने इसमें संशोधन कर 2019-20 के स्तर से 2026 तक 40 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य तय किया।










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