आंध्र प्रदेश में मंदिर समितियों में केवल हिंदूओं को ही नियुक्त किया जाए: विहिप
नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को कहा कि आंध्र प्रदेश में मंदिर समितियों में केवल ‘हिंदू धर्म का पालन करने वाले' लोगों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए और इन समितियों में कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए। विहिप ने यह भी मांग की कि इन मंदिरों में केवल ‘हिंदुओं' को कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किया जाए और मंदिर के कर्मचारियों के रूप में नियुक्त ‘गैर-हिंदुओं' को तुरंत उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया जाए। विहिप ने एक बयान में कहा, ‘‘नेता अपने चुनाव प्रचार के दौरान न सिर्फ यह कहते हैं कि वे धर्मनिरपेक्ष हैं और सभी धर्मों को समान मानते हैं बल्कि विभिन्न धार्मिक स्थलों में प्रार्थना कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं।'' इसमें कहा गया है, ‘‘इस मामले में अगर मंदिर समितियों में राजनीतिक व्यक्ति है तो संभावना है कि वे हिंदुओं के कल्याण के बजाय अपनी धर्मनिरपेक्ष भावनाओं को प्राथमिकता देंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘हिंदू मंदिर धर्मनिरपेक्ष केंद्र नहीं हैं। वे आध्यात्मिक हिंदू धार्मिक केंद्र हैं और उनकी समितियों में केवल हिंदुओं को होना चाहिए।'' विहिप ने कहा कि मंदिर समितियों में धार्मिक संगठनों, हिन्दू, अध्यात्मवादियों और 'धर्माचार्यों' के प्रतिनिधि होने चाहिए। उसने मांग की कि दक्षिणी राज्य की सरकार उचित संशोधनों के साथ तत्काल आदेश जारी करे। विहिप कहा, ‘‘विश्व हिंदू परिषद मांग कर रही है कि मंदिर समितियों में कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं होना चाहिए। मंदिर समितियों में केवल हिंदू धर्म का पालन करने वाले को ही नियुक्त किया जाना चाहिए।'' विहिप ने यह भी कहा कि केवल ‘अभ्यास करने वाले हिंदुओं' को ही मंदिरों में कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है, ‘‘गैर-हिंदुओं और गैर-अभ्यास करने वाले हिंदुओं को जो पहले से ही पिछले सरकारी आदेश के बाद नियुक्त किए गए हैं, उन्हें तुरंत उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए।'' विहिप ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार को अपने बंदोबस्ती विभाग द्वारा जारी किए गए पिछले आदेश को भी तुरंत वापस लेना चाहिए, जिसमें बंदोबस्ती कर्मचारियों को ‘धर्मनिरपेक्ष कर्मचारी' कहा गया है। विहिप ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि मंदिर धर्मनिरपेक्ष केंद्र नहीं है। एक मंदिर हिंदुओं के लिए पूजा का एक धार्मिक स्थान है। इसके धार्मिक पहलू हैं लेकिन धर्मनिरपेक्ष पहलू नहीं हैं। यह सभी धर्मों का केंद्र नहीं है।''

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