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सरकार ने शत्रु संपत्तियों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देशों में संशोधन किया

नयी दिल्ली. केंद्र ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित एक करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति और शहरी क्षेत्रों में स्थित पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति के निस्तारण के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति - ज्यादातर 1947 और 1962 के बीच - शत्रु संपत्ति कहलाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में एक करोड़ रुपये से कम और शहरी क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति का निस्तारण करते समय संरक्षक को पहले अधिभोगी को खरीद का प्रस्ताव देना होगा और यदि वह खरीद के प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है तो शत्रु संपत्ति का निस्तारण पहले से निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाएगा, अर्थात निविदा आमंत्रित करके या सार्वजनिक कार्रवाई करके। गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘ग्रामीण क्षेत्र' का तात्पर्य राज्य के किसी भी क्षेत्र से है, सिवाय उन क्षेत्रों के जो किसी शहरी स्थानीय निकाय या छावनी बोर्ड के अंतर्गत आते हैं। इसी प्रकार, ‘शहरी क्षेत्र' से तात्पर्य किसी नगर निगम या नगर पालिका की सीमा के भीतर के किसी क्षेत्र से है, अथवा केन्द्रीय सरकार जनसंख्या, उद्योगों के संकेन्द्रण, क्षेत्र की समुचित योजना की आवश्यकता तथा अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा शहरी क्षेत्र घोषित कर सकती है। सरकार ने शत्रु संपत्तियों को भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक, जो कि केन्द्र सरकार के अधीन स्थापित एक कार्यालय है, को सौंप दिया है। शत्रु संपत्ति अधिनियम 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, 1968 में लागू किया गया, जो ऐसी संपत्तियों को विनियमित करता है और संरक्षक की शक्तियों को सूचीबद्ध करता है। अधिकारियों ने बताया कि देश में कुल 12,611 प्रतिष्ठान शत्रु संपत्ति कहलाते हैं, जिनकी अनुमानित कीमत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

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