अयोध्या में दिख रहा त्रेता युग का नजारा : संत
अयोध्या।. अयोध्या में इस साल के प्रारंभ में नवनिर्मित भव्य मंदिर में भगवान श्री रामलला के विराजमान होने के बाद बुधवार को आयोजित हो रहे पहले दीपोत्सव समारोह को लेकर राम नगरी के संतों और भक्तों के बीच खासा उत्साह है। अयोध्या के दशरथ महल के महंत बिंदु गद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य ने दीपोत्सव को सनातन धर्म की विरासत बताया। उन्होंने कहा, ‘‘दीपावली और दीपोत्सव सनातन धर्म की नींव हैं और इस साल का दीपोत्सव खास है क्योंकि भगवान श्री राम अयोध्या मंदिर में अपने निवास पर लौट आए हैं। यह उत्सव भगवान श्री राम के प्रति हमारी आस्था और भक्ति को व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।'' संतों का मानना है कि अयोध्या नगरी एक बार फिर त्रेतायुग के दृश्य को प्रतिबिंबित करती है।
संत समुदाय ने श्री रामलला के अभिषेक के दिव्य अवसर को सरकार के समर्पित प्रयासों का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया है और इससे पूरा संत समुदाय हर्षोल्लास से भर गया है। चौभुजी मंदिर के महंत बृजमोहन दास महाराज ने स्वरचित छंदों के जरिये अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि श्री रामलला की उपस्थिति पर केवल संतों को ही नहीं बल्कि पूरी अयोध्या को गर्व है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी श्रद्धा में एकजुट होकर अपार उत्साह के साथ इस दीपोत्सव को मना रहे हैं।
बधाई भवन मंदिर के महंत राजीव लोचन शरण महाराज ने कहा, ‘‘त्रेता युग के दौरान भगवान राम के अयोध्या आगमन पर देखा गया दिव्य दृश्य आज हमारे सामने फिर से प्रकट हुआ है। हम इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर अत्यंत प्रसन्न हैं और पूरे उत्साह के साथ दीपोत्सव में भाग ले रहे हैं।''










Leave A Comment