दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने वाली 33 संस्थाएं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
नयी दिल्ली. देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने से लेकर शहरी वातावरण में बदलाव लाने तक के लिए मंगलवार को 33 व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित किए गए लोगों में समावेशिता और बाधाओं को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भी शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार 2024 प्रदान किए। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में शिक्षा, खेल, कला और सामाजिक उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले शामिल हैं। इयथा मल्लिकार्जुन को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अवसर पैदा करने में उनके योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन के रूप में मान्यता दी गई। मल्लिकार्जुन 88 प्रतिशत गतिहीनता के साथ जी रहे हैं, उन्होंने समावेशी दिव्यांगजन उद्यमी संघ (आईडीईए) की स्थापना की और 1,060 से अधिक दिव्यांग उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के अलावा 2,500 से अधिक लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। पोलियो के बाद पक्षाघात पर काबू पाने से लेकर सशक्तिकरण की मिसाल बनने तक की उनकी यात्रा ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिलाया। एक और प्रेरणादायक कहानी बेंगलुरु के सामाजिक उद्यमी और ‘रैम्प माई सिटी' के संस्थापक प्रतीक खंडेलवाल की है। उन्हें शहरी परिदृश्यों को दिव्यांगों के लिए सुलभ स्थानों में बदलने के लिए सम्मानित किया गया। करीब 75 प्रतिशत गति-बाधित दिव्यांगता के साथ जीवन जीते हुए खंडेलवाल की पहल ने हजारों लोगों को सशक्त बनाया है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा भी मिली है। शिक्षिका कनिका मुकेश अग्रवाल को नवीन द्विभाषी कार्यक्रमों के माध्यम से बधिर शिक्षा प्रणाली में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। दृष्टिबाधित अधिवक्ता अमर जैन को भारत में दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता और नीतिगत सुधारों में उनके योगदान के लिए उनकी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा अन्य श्रेणियों में यह पुरस्कार प्रदान किए गए।










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