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दंड, माफी , मुखबिर तंत्र : खेल मंत्रालय ने एनसीएएएफएस मसौदा फीडबैक के लिये जारी किया

 नयी दिल्ली. एक समान दंड, माफी योजना और मुखबिर तंत्र खेलों में आयु धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय संहिता (एनसीएएएफएस) के मसौदे की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं जिसे खेल मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। एनसीएएएफएस 2025 के मसौदे में 31 मार्च तक आम जनता से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गई है ।

 
मंत्रालय ने एक बयान में कहा ,‘‘युवा मामले और खेल मंत्रालय ने परामर्श प्रक्रिया के हिस्से के रूप में आम जनता और हितधारकों से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करने के लिए खेलों में आयु धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय संहिता (एनसीएएएफस) 2025 का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है ।'' इसमें कहा गया ,‘‘ इसमें आयु संबंधी धोखाधड़ी से निपटने, असल खिलाड़ियों की सुरक्षा और देश भर में खेल प्रतियोगिताओं की अखंडता को बनाये रखने के प्रावधान हैं ।'' बयान में कहा गया ,‘‘ यह संशोधन लगभग 15 वर्ष बाद किया गया है जो भारतीय खेलों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, नैतिक प्रशासन और बढ़ी हुई जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा ढांचे में एक महत्वपूर्ण अपडेट है ।'' मसौदे में दस प्रमुख बिंदु हैं जिनमें अनिवार्य आयु प्रमाणन और डिजिटल लॉकिंग , आयु संबंधी अनियमितताओं के लिये मेडिकल जांच, दो स्तरीय अपीली तंत्र , राष्ट्रीय डाटाबेस और क्यू आर वाले आई डी कार्ड शामिल हैं । इसके तहत पहली बार उल्लंघन करने वाले खिलाड़ी पर हर प्रतिस्पर्धा से दो साल का प्रतिबंध और उसके जीते हुए खिताब या पदक वापिस लेना शामिल है । इसमें कहा गया ,‘‘ दूसरे उल्लंघन पर आजीवन प्रतिबंध और अपराध संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करना शामिल है । दोषी पाये गए अन्य अधिकारियों और कोचों पर भी निलंबन लगाया जायेगा और उन्हें काम से हटा दिया जायेगा ।'' माफी योजना के तहत एक बार छह महीने की विंडो दी जायेगी जिसमें खिलाड़ी स्वत: दंड के बिना अपनी गलती सुधारकर सही उम्र बता सकता है । मंत्रालय ने कहा ,‘‘ माफी कार्यक्रम में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जायेगी और उसके बाद उन्हें सही आयुवर्ग में डाला जायेगा ।'' इसके अलावा एक मुखबिर तंत्र भी होगा जो आयु में धोखाधड़ी के मामलों की गुमनाम जानकारी देने वालों के लिये होगा । इसके तहत पुरस्कार भी दिये जायेंगे । इसके अलावा दो स्तरीय अपीली तंत्र भी होगा जो आयु निर्धारण से जुड़े विवादों का निपटान करेगा ।
 
मसौदे में यह भी कहा गया कि खिलाड़ियों को क्यू आर कोड वाले पहचान पत्र दिये जायेंगे जो डिजिलॉकर प्लेटफार्म के जरिये मिलेंगे और हर प्रतियोगिता में इन्हें दिखाना अनिवार्य होगा ।

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