राष्ट्रपति मुर्मू ने वंदे मातरम् को 'राष्ट्र वंदना' का स्वर बताया
नयी दिल्ली ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव मनाये जा रहे हैं और इसे ''राष्ट्र-वंदना'' का एक स्वर बताया जो हर भारतीय में देशभक्ति की भावना पैदा करता है। मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों का आयोजन पिछले साल सात नवंबर से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में 'वन्दे मातरम् येन्बोम्' अर्थात 'हम वन्दे मातरम् बोलें' इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। उन्होंने बताया कि समय के साथ-साथ वंदे मातरम् के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी लोकप्रिय हो गए, जिससे इसका संदेश पूरे देश में और अधिक फैल गया। मुर्मू ने दार्शनिक एवं स्वतंत्रता सेनानी श्री अरबिंदो की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने गीत का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिससे इसके सार का व्यापक स्तर पर प्रसार करने में मदद मिली। राष्ट्रपति ने कहा, ''बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक चेतना में एक अद्वितीय स्थान रखता है और यह हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।

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