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कांग्रेस ने बोडो समझौते का मजाक उड़ाया, लेकिन इससे क्षेत्र में शांति स्थापित हुई : अमित शाह

कोकराझार . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो कांग्रेस ने उसका मजाक उड़ाया था, लेकिन इस समझौते से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई और विकास को गति मिली। शाह ने असम के कोकराझार में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) के 57वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के युवा अब बंदूकों की जगह तिरंगा लेकर चलते हैं और यह जनवरी 2020 में बोडो समझौते पर हस्ताक्षर के कारण संभव हुआ है। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘बीटीआर में शांति, विकास और उत्साह का माहौल समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले एबीएसयू की वजह से ही संभव हो पाया है। अगर एबीएसयू ने पहल नहीं की होती, तो इस क्षेत्र में न तो समझौता होता और न ही शांति कायम होती।'' शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने भले ही यह कहकर हमारी हंसी उड़ाई हो कि बीटीआर में शांति स्थापित नहीं होगी और यह समझौता एक मजाक साबित होगा, लेकिन बोडो समझौते की 82 फीसदी शर्तों को लागू किया जा चुका है। अगले दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इसका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन होगा, जिससे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति कायम होगी।'' भाजपा नेता ने कहा, ‘‘समझौते की शर्तों के अनुसार, हमने 2022 में पूरे बीटीआर क्षेत्र को सशस्‍त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा) के दायरे से बाहर कर दिया है।'' उन्होंने कहा कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) ने भी हथियार डाल दिए हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारों ने उसके (एनडीएफबी) कैडर के पुनर्वास के लिए कई पहल की हैं। शाह ने कहा, ‘‘पिछले तीन वर्षों में 4,881 एनडीएफबी कैडर ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है और उनके पुनर्वास पर 287 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें से 90 प्रतिशत केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा दिया गया है।'' उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को गैर-सरकारी संगठनों की मदद से विभिन्न कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। शाह ने इनमें से 400 युवाओं को राज्य कमांडो बल में शामिल करने की असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पहल की भी सराहना की। बोडो शांति समझौते पर 27 जनवरी 2020 को केंद्र, राज्य सरकार और एबीएसयू एवं एनडीएफबी सहित बोडो समूहों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। शाह ने कहा कि केंद्र ने बोडोलैंड के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये दिए हैं, जिसकी आबादी 35 लाख है।
 भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि बोडो समझौते की 82 फीसदी शर्तों का क्रियान्वयन हो चुका है और शेष शर्तें अगले दो वर्षों में लागू कर दी जाएंगी। शाह ने बोडो युवाओं से 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारी शुरू करने का भी आह्वान किया, जिसका आयोजन गुजरात के अहमदाबाद शहर में प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि अप्रैल के पहले सप्ताह में नयी दिल्ली में एबीएसयू के संस्थापक अध्यक्ष बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा के नाम पर एक सड़क का उद्घाटन और उनकी प्रतिमा का लोकार्पण किया जाएगा। शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार बोडोफा के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
 

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