बागवानी वैज्ञानिक कृष्ण लाल चड्ढा का निधन
नयी दिल्ली. बागवानी वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कृष्ण लाल चड्ढा का बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। उनके परिजन ने रविवार को यह जानकारी दी। कृष्ण लाल चड्ढा (88) के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
चड्ढा को 2012 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कृषि और बागवानी पर 30 पुस्तकें लिखीं हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व राष्ट्रीय प्राध्यापक चड्ढा का जन्म 1936 में सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उच्च शोध के लिए उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नयी दिल्ली में प्रवेश लिया और 1964 में पीएचडी की। उन्होंने कई सरकारी और पेशेवर एजेंसियों की अध्यक्षता की, इसके अलावा वे बागवानी विकास के लिए राष्ट्रीय योजना आयोग के कार्य समूह, तेल पाम की खेती के लिए एक राष्ट्रीय समिति, कीटनाशकों के लिए एक पंजीकरण समिति और पश्चिम बंगाल, हरियाणा तथा गुजरात राज्यों में बागवानी के लिए उच्च-शक्ति समितियों के सदस्य भी रहे। वह जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य भी रहे।
चड्ढा ने ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स', ‘इंटरनेशनल मैंगो वर्किंग ग्रुप' और ‘इंडियन एग्रीबिजनेस सिस्टम्स (एग्रीवॉच)' में अध्यक्ष पद संभाला तथा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सलाहकार भी रहे। वह बागवानी विज्ञान के लिए ‘इंटरनेशनल सोसायटी फॉर हार्टिकल्चरल साइंस के फेलो भी थे।


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