सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना जागृत करती आ रही है: पीएम मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोमनाथ धाम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला और इसे पीढ़ियों से भारतीयों के लिए आस्था, साहस और स्वाभिमान का एक शाश्वत स्रोत बताया।
पीएम मोदी ने एक्स (X) पर एक संदेश किया साझा
इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक संदेश साझा किया, जिसमें इस पवित्र स्थल की स्थायी विरासत पर जोर दिया गया। अपने पोस्ट में, पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ धाम ने सदियों से लोगों की सामूहिक चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो अटूट आस्था और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा…
प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में लिखा “पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।”
पीएम मोदी ने सोमनाथ के आध्यात्मिक सार और भगवान शिव के साथ इसके जुड़ाव को दर्शाने वाला एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया। यह श्लोक सोमनाथ को एक पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र के रूप में उजागर करता है जहां आध्यात्मिक पूर्णता और मुक्ति प्राप्त होती है।
आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।
आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।
प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक का अर्थ है “भगवान शिव ने, आदिनाथ के रूप में, सभी जीवों के कल्याण के लिए, अपने शाश्वत सिद्धांत के माध्यम से इस पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली क्षेत्र (प्रभास खंड) को प्रकट किया। दिव्य आभा से नहाया हुआ, यह पवित्र स्थान वह है जहां मनुष्य आध्यात्मिक पूर्णता, सद्गुण और मुक्ति मोक्ष प्राप्त करते हैं।”
इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की अपनी पिछली यात्राओं की यादें साझा कीं, और मंदिर पर बार-बार हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद आस्था की दृढ़ता पर रोशनी डाली।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले, जिसके बाद कई और हमले हुए, लोगों के आध्यात्मिक संकल्प को कमजोर करने में विफल रहे।”
हज़ार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर पर इतिहास का पहला हमला हुआ था। 1026 के हमले और उसके बाद हुए कई हमलों से भी हमारा अटूट विश्वास नहीं डिगा। इसके उलट, इसने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को और मजबूत किया और सोमनाथ मंदिर को बार-बार फिर से बनाया गया। मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूं। अगर आप भी सोमनाथ गए हैं, तो कृपया अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ शेयर करें।”
बताना चाहेंगे, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले के 1,000 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है।








.jpg)
Leave A Comment