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ईरान: विरोध-प्रदर्शनों में अब तक 35 लोगों की मौत, 1,200 हिरासत में

दुबई. ईरान में अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति और राजनीतिक दमन को लेकर एक हफ्ते से अधिक समय से जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। एक मानवाधिकार एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस बीच, ईरान सरकार ने देश के पश्चिमी प्रांत ईलम में हिंसा की बात स्वीकार की है, जहां सुरक्षाबलों ने एक अस्पताल पर कथित तौर पर धावा बोला और आम नागरिकों पर गोलीबारी भी की। अमेरिका की ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' ने बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 27 में 250 से अधिक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। उसने बताया कि इन विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षा बल के दो सदस्य मारे गए हैं। यह एजेंसी ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिये आंकड़े जुटाती है और अशांति के पिछले दौर के दौरान इसकी रिपोर्टिंग सही साबित हुई थी। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स' ने सोमवार देर रात बताया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल रेवोल्यूशनरी गार्ड बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में कोई समग्र आंकड़े या जानकारी प्रदान नहीं की है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोमवार रात आंतरिक मामलों के मंत्रालय को ईलम प्रांत में हो रही घटनाओं की “गहन जांच” के लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। राजधानी तेहरान से लगभग 515 किलोमीटर दूर ईलम प्रांत के मालेकशाही काउंटी से सामने आए वीडियो में सुरक्षाबलों को आम नागरिकों पर कथित तौर पर गोलीबारी करते देखा जा सकता है। राष्ट्रपति कार्यालय ने “ईलम के एक अस्पताल में हुई उस घटना को भी स्वीकार किया”, जिससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। इन वीडियो में दंगा रोधी गियर पहने सुरक्षाबलों को कथित तौर पर उस अस्पताल पर धावा बोलते देखा जा सकता है, जहां विरोध-प्रदर्शनों में घायल प्रदर्शनकारियों को भर्ती कराया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईलम के अस्पताल पर ईरानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और उसे “आपराधिक कृत्य” करार दिया। विभाग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “अस्पतालों में घुसना, चिकित्सा कर्मियों को पीटना और घायलों पर आंसू गैस के गोले दागना और हथियारों से हमला करना मानवता के खिलाफ स्पष्ट अपराध है। अस्पताल युद्धक्षेत्र नहीं हैं।” समाचार एजेंसी ‘फार्स' की खबर में आरोप लगाया गया है कि ईलम में प्रदर्शनकारियों के पास आग्नेयास्त्र और ग्रेनेड थे। हालांकि, खबर में इन आरोपों के संबंध में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। आर्थिक रूप से पिछड़े ईलम प्रांत में मुख्य रूप से कुर्द और लूर जातीय समूहों के लोग रहते हैं।
ईरान में विरोध-प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ ही आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान शांतिपूर्वक विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो अमेरिका “उन्हें बचाने के लिए आगे आएगा।” हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ईरान में हस्तक्षेप करेंगे या नहीं और अगर करेंगे तो किस तरह करेंगे, लेकिन उनके बयानों को लेकर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर लागू कठोर प्रतिबंधों के कारण पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही ईरानी अर्थव्यवस्था को पिछले साल इजराइल के साथ 12 दिन के युद्ध के चलते और झटका लगा। दिसंबर 2025 में ईरानी रियाल की कीमत गिरकर 14 लाख ईरानी रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर पहुंच गई, जिससे देशभर में अर्थव्यस्था की लगातार खस्ताहाल होती स्थिति को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। मंगलवार को ईरानी रियाल की कीमत 14.6 लाख ईरानी रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई।
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शनिवार को “दंगाइयों के खिलाफ सख्ती करने” की बात कहने के बावजूद ईरान में विरोध-प्रदर्शन थमते नजर नहीं आ रहे हैं।

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