पश्चिम बंगाल के गवर्नर ने राज्य विधानसभा की भंग, हार के बावजूद ममता बनर्जी ने नहीं दिया था इस्तीफा
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने आज गुरुवार को राज्य में नई सरकार के गठन से पहले विधानसभा भंग कर दी। राज्यपाल ने 7 मई से पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने जा रही है। पार्टी ने शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों की बैठक कल होने की संभावना है, जिसमें विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की एक बैठक को संबोधित किया और कहा कि वह विधानसभा चुनाव परिणामों के मद्देनजर अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी और केंद्र सरकार उन्हें बर्खास्त कर सकती है। ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों को चुनावों में जबरदस्ती हराया गया उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के 1500 से अधिक कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया।
टीएमसी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा कि वह अपना संघर्ष जारी रखेंगी। मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। चाहे वे मुझे बर्खास्त कर दें। उन्होंने बताया कि ममता ने कहा, “मैं चाहती हूं कि यह काला दिन साबित हो। हमें मजबूत रहना होगा। विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनें। जिन्होंने धोखा दिया है, उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा। मैं हंस रही हूं। मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है। मैं एक स्वतंत्र पंछी हूं। मैंने सबके लिए काम किया है। हम भले ही हार गए हों, लेकिन हम लड़ेंगे। गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सीधे तौर पर शामिल हैं।”
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने कहा कि जो लोग हारे, उन्हें जबरदस्ती हराया गया। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ, भाजपा समर्थक मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग की निंदा करती हूं। 1500 से अधिक पार्टी कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया। मुझे धक्का-मुक्की की गई और मेरे साथ बदसलूकी की गई।
गौरतलब हो कि ममता बनर्जी के पद छोड़ने से इनकार करने के कारण राज्य में अभूतपूर्व स्थिति और एक प्रकार का संवैधानिक संकट पैदा हो गया था। इसके मद्देनजर 2026 के चुनाव प्रक्रिया के पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल के मौजूदा गवर्नर ने एक बड़ा कदम उठाया। विधानसभा भंग कर दिये जाने के बाद ममता बनर्जी अब स्वाभाविक रूप से राज्य की मुख्यमंत्री नहीं रहीं।









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