समुद्री सुरक्षा और निगरानी होगी मजबूत, नौसेना में शामिल हुई ‘श्रुति’
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के बेड़े में मंगलवार को नई पीढ़ी की स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत ‘श्रुति’ शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यार्ड 3037 ‘श्रुति’ का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता में जलावतरण किया गया। इस पोत को देश में ही डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है। नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों की यह श्रृंखला भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों को समुद्री डकैती रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्र में महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। इन पोतों से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पोत का नाम ‘श्रुति’ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और वैदिक विरासत से लिया गया है। ‘श्रुति’ चारों वेदों को संदर्भित करता है। पोत के प्रतीक चिह्न में उर्सा मेजर तारामंडल और लाल एवं सफेद रंग का प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है। प्रकाशस्तंभ समुद्र में मार्गदर्शन और सुरक्षा का प्रतीक है, जबकि तारामंडल समुद्री दिशा-निर्धारण और नौवहन की परंपरा को दर्शाता है।
जलावतरण समारोह में नौसेना के युद्धपोत निर्माण एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में मनिका साधु ने पोत का जलावतरण किया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
नई पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोतों का निर्माण एक साथ दो भारतीय पोत निर्माण कंपनियों में किया जा रहा है। इनमें गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता शामिल हैं। इन पोतों को देश में ही डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है, जो भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। नई पीढ़ी की ये गश्ती पोत भारतीय नौसेना के मौजूदा अपतटीय गश्ती पोत बेड़े की क्षमता को और बढ़ाएंगी। इनका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के अभियानों के लिए किया जा सकेगा। निगरानी, सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया से जुड़े अभियानों में इनकी तैनाती से नौसेना की समुद्री क्षेत्र में परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
‘श्रुति’ का जलावतरण भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इन पोतों का देश में डिजाइन और निर्माण किया जाना भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों के अनुरूप है। भारतीय पोत निर्माण कंपनियों में युद्धपोतों और गश्ती पोतों के निर्माण से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ स्वदेशी रक्षा उद्योग और उससे जुड़े उद्योगों को भी मजबूती मिल रही है। इसी वजह से यार्ड 3037 ‘श्रुति’ का जलावतरण भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।









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