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- 0- धौराभाठा स्थित एसजे फार्म पहंुचे कलेक्टर, जिले के सबसे बड़े जैविक और हाई-टेक डेयरी फार्म का भी किया निरीक्षण0- धौराभांठा स्थित एसजे डेयरी फार्म में कलेक्टर श्री सिंह ने गायों को खिलाया गुड़दुर्ग. केंद्र एवं राज्य शासन की महत्वाकांक्षी (नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल) ऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिले में ऑयल पाम खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज धमधा विकासखण्ड के ग्राम कंदई और धौराभाठा पहुंचकर आयॅल पाम खेती का निरीक्षण किया। इसके साथ ही विभिन्न कृषि गतिविधियों का भी निरीक्षण किया।ग्राम कंदई में कृषक श्री पवन कुमार साहू, श्री तुमेन्द्र कांत साहू, श्री विश्वदीप साहू द्वारा कुल 7.45 हेक्टेयर रकबे में से 2 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम पौधरोपण किया गया है। शेष क्षेत्र में गड्ढा खुदाई का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा आगामी दो से तीन दिनों में पौधरोपण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद कलेक्टर श्री सिंह ने ग्राम धौराभांठा के कृषक श्री नवीन लोहान एवं श्रीमती लतिका शर्मा के 4 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित ऑयल पाम प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लगभग 500 एकड़ खेत में लगाए गए ड्रैगन फ्रूट, आम की विभिन्न किस्मों, मौसंबी, पपीता, अमरूद, केला तथा जल संरक्षण के लिए निर्मित तालाब का अवलोकन किया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री सिंह ने धौराभांठा में जामुन का पौधा भी रोपित किया।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने धौराभांठा में स्थित एसजे फार्म सबसे बड़े जैविक और हाई-टेक डेयरी फार्म का भी निरीक्षण किया। यहां मुख्य रूप से गिर नस्ल की गाये पाली जाती हैं। इस विशाल फॉर्म में गायों के गोबर का उपयोग करके पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक तरीके से फल व सब्जियां उगाई जाती हैं। इस दौरान कलेक्टर ने डेयरी फार्म में गायों को गुड़ खिलाया ।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने निरीक्षण के दौरान किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ऑयल पाम की खेती किसानों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकती है। शासन द्वारा इस योजना में विभिन्न मदों पर अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसानों को नई खेती अपनाने में आर्थिक सहायता मिल रही है।उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में दुर्ग जिले को एनएमईओ-ओपी योजना के तहत 150 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिले में योजना का संचालन उद्यानिकी विभाग एवं शासन द्वारा अधिकृत 3 एफ ऑयल पाम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सहयोग से किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में 28 किसानों का चयन कर ले-आउट एवं गड्ढा खुदाई का कार्य कराया जा रहा है।इस दौरान उप संचालक श्री नारायण सिंह लावत्रे, उद्यान विकास अधिकारी श्री रविश कुमार साहू, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्री प्रमोद कुमार धलेन्द्र, कंपनी के स्टेट हेड श्री डोमेन्द्र साहू, कलस्टर मैनेजर श्री रोहित साहू, कलस्टर ऑफिसर श्री देवानंद साहू उपस्थित रहे।
- दुर्ग. आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर प्रदेश के किसान अब अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। इसी कड़ी में दुर्ग जिले के ग्राम डूंडेरा के प्रगतिशील किसान श्री पुरेंद्र कुमार यादव ने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर खेती में सकारात्मक और अनुकरणीय परिणाम प्राप्त किए हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में नैनो उर्वरकों का प्रयोग करने से उनकी फसल को संतुलित पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।श्री यादव के अनुभवों के अनुसार, पारंपरिक बोरा बंद उर्वरकों की तुलना में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से खेती की लागत में भारी कमी आई है। बेहद कम मात्रा में उपयोग होने के बावजूद फसल को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी रूप से प्राप्त हुए, जिससे न केवल पैसों की बचत हुई बल्कि समय, श्रम और परिवहन जैसे संसाधनों की भी बड़ी बचत हुई है। धान की फसल में नैनो उर्वरकों के प्रयोग से मिले अपेक्षा से बेहतर परिणाम और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन से वे बेहद संतुष्ट हैं। अपने इस सफल अनुभव के आधार पर श्री पुरेंद्र कुमार यादव ने अन्य किसान भाइयों से भी पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों को अपनाने की अपील की है।उन्होंने अपना संदेश साझा करते हुए कहा, “नैनो डीएपी और नैनो यूरिया आने वाले समय में हम किसान भाइयों के लिए एक भरोसेमंद साथी साबित होंगे। इससे खेती की लागत कम होती है, फसल को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है।" उन्होंने अन्य सभी किसान भाइयों से भी इन उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर इसके लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि जिले में नैनो उर्वरकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त हो रहा है। कृषि विभाग के सहयोग से लिया गया यह फैसला खेती को अधिक वैज्ञानिक, पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
- 0- इजराइल में ’होम बेस्ड केयर गिवर’ के 3500 पदों पर भर्ती, मिलेगा ₹1.99 लाख प्रति माह वेतनदुर्ग. प्रदेश के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार पाने का एक सुनहरा अवसर सामने आया है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) के अंतर्गत भारत-इजराइल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत इजराइल में ’होम बेस्ड केयर गिवर’ के कुल 3,500 पदों पर सीधी भर्ती की जा रही है। जिला रोजगार कार्यालय के उप संचालक के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए इस अवसर के तहत चयनित उम्मीदवारों को लगभग 2 लाख रुपये प्रति माह का प्रारंभिक वेतन मिलेगा। विभिन्न कटौतियों (जैसे चिकित्सा बीमा, आवास और भोजन भत्ता) के बाद आवेदकों को शुद्ध रूप से 1,99,770 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाएगा।यह नियुक्ति शुरुआती तौर पर दो वर्ष के अनुबंध (कॉन्ट्रेक्ट) पर होगी, जिसे आवश्यकतानुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा नियोक्ता द्वारा आवास, भोजन, चिकित्सा बीमा सहित 9 दिनों के राष्ट्रीय अवकाश, 16 दिनों के वार्षिक अवकाश और सप्ताह में 6 दिन कार्य की सुविधा दी जाएगी। इस पद के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुसार आवेदकों की आयु 25 से 45 वर्ष के बीच, न्यूनतम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होने के साथ इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी विषय का होना अनिवार्य है। साथ ही आवेदक के पास न्यूनतम 3 वर्ष की वैधता वाला पासपोर्ट होना चाहिए, वह शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हो, लंबाई 1.5 मीटर से अधिक और वजन 45 किलोग्राम से अधिक होना चाहिए। इसके अलावा आवेदक ने पूर्व में इजराइल में कार्य न किया हो। शैक्षणिक योग्यता के रूप में भारतीय नियामक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त 990 घंटे का ओजेटी (ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग) सहित केयर गिविंग प्रमाणपत्र अनिवार्य है, अथवा जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, फिजियोथेरेपी या नर्स असिस्टेंट में से कोई एक प्रमाणपत्र होना आवश्यक है।उल्लेखनीय है कि भर्ती की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है, जिसमें छत्तीसगढ़ रोजगार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन, दस्तावेजों की जांच व सत्यापन, स्वास्थ्य परीक्षण, पुलिस क्लीयरेंस और अंत में इजराइल के नियोक्ता द्वारा वीडियो साक्षात्कार के माध्यम से अंतिम चयन किया जाएगा। इच्छुक और पात्र आवेदक छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल पर जारी लिंक के माध्यम से तुरंत अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। उपसंचालक (रोजगार), जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, दुर्ग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की शंका या संदेह होने पर युवा प्रदेश के किसी भी शासकीय रोजगार कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं, साथ ही उन्होंने इस भर्ती के नाम पर सक्रिय दलालों से विशेष रूप से सावधान रहने की अपील की गई है।
- दुर्ग. जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, दुर्ग और कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 17 जून 2026 (बुधवार) को एक वृहद जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले का आयोजन खम्हरिया, भिलाई स्थित कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में किया जाएगा। जिला रोजगार कार्यालय के उप संचालक से मिली जानकारी के अनुसार, इस रोजगार मेले में कुल 10 प्रतिष्ठित नियोजकों की ओर से तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणी के कुल 2,029 रिक्त पदों पर भर्तियां की जाएंगी।मेले में शामिल होने के लिए विभिन्न शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं, जिनमें कक्षा 10वीं, 12वीं, स्नातक (बीए, बीएससी आदि), स्नातकोत्तर, आईटीआई, डिप्लोमा इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग स्नातक, एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम और डिप्लोमा पैरामेडिकल उत्तीर्ण आवेदक शामिल हो सकते हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आवेदकों का रोजगार कार्यालय में पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) होना अनिवार्य है। भर्ती और रिक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी रोजगार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.erojgar.cg.gov.in या छत्तीसगढ़ रोजगार ऐप (सीजी रोजगार ऐप) पर जाकर देखी जा सकती है। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी या सहायता के लिए आवेदक जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, मालवीय नगर चौक, दुर्ग में सीधे संपर्क कर सकते हैं।
- 0- ग्राम ढौर एवं डूमर में हो रहा नील-हरित काई का उत्पादनदुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज धमधा विकासखण्ड के ग्राम ढोर एवं डूमर पहुंचकर नील-हरित काई उत्पादन टांकों का निरीक्षण किया तथा किसानों से चर्चा कर इसके लाभों की जानकारी ली। जिले में किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के उद्देश्य से नील-हरित काई (ब्लू ग्रीन एल्गी-बीजीए) उत्पादन एवं उपयोग अभियान चलाया जा रहा है। जिले में वर्तमान में लगभग 217 नील-हरित काई उत्पादन टांकों का निर्माण किया गया है। यह तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी और किफायती है, जिसे वे अपने घर या खेत की खाली भूमि पर कम खर्च में तैयार कर सकते हैं।कलेक्टर श्री सिंह ने निरीक्षण के दौरान किसानों को अधिक से अधिक संख्या में इस नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि जैविक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में नील-हरित काई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कलेक्टर श्री सिंह ने कृषि विभाग के उप संचालक को निर्देश दिए कि कृषि मित्रों, कृषि सखियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों को जागरूक कर इस तकनीक के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए। नील-हरित काई धान की खेती में प्राकृतिक नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता में सुधार होता है। इसका लाभ धान फसल के साथ-साथ धान कटाई के बाद ली जाने वाली रबी फसलों को भी मिलता है। इस दौरान कृषि विभाग उप संचालक श्री संदीप भोई सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- दुर्ग. संचालनालय कृषि रायपुर के निर्देशानुसार संभागीय संयुक्त संचालक कृषि, दुर्ग द्वारा संभाग के नवीन उर्वरक निरीक्षकों का दो दिवसीय संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान, रुआबांधा (दुर्ग) में आयोजित किया गया। सहायक संचालक कृषि कार्यालय संयुक्त संचालक कृषि संभाग दुर्ग से प्राप्त जानकारी अनुसार 04 और 05 जून 2026 तक चले इस विशेष प्रशिक्षण में उपस्थित संभाग के 38 उर्वरक निरीक्षकों को श्रीमती गोपिका गबेल, संभागीय संयुक्त संचालक कृषि दुर्ग द्वारा प्रशिक्षण की महत्ता बताते हुए विभिन्न विषयों पर संक्षिप्त उद्बोधन दिया गया। उनके कार्यालय के सहायक संचालक कृषि श्री संजय कुमार डहरिया एवं श्री हेमन्त कुमार बघेल द्वारा उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण करने और नमूना लेने की विधि के संबंध में विस्तार से प्रस्तुतीकरण किया।अग्रणी उर्वरक कंपनी ईफको, कृषको एवं आई.पी.एल. के राज्य एवं संभाग के विपणन अधिकारी द्वारा उर्वरकों की आपूर्ति की प्रक्रिया, कृषकों को उर्वरक पर देय अनुदान तथा दानेदार रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर नैनो उर्वरकों के उपयोग से होने वाले लाभ के बारे में अवगत कराया गया। विशेष प्रशिक्षक के रूप में आहूत श्री एन. के. दीक्षित (सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक कृषि) द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, उर्वरक (संचलन नियंत्रण) आदेश 1973 एवं उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के विभिन्न प्रावधानों (नियमों / खण्डों / धाराओं) से अवगत कराया गया। उनके अंतर्गत विहित रासायनिक, जैव / जैविक, नैनो आदि उर्वरकों के स्पेसिफिकेशन की जानकारी दी गयी। नमूना लेने की प्रक्रिया, विक्रय केन्द्रों के निरीक्षण एवं प्रावधानों के उल्लंघन किये जाने पर की संबंधित के विरूद्ध क्या-क्या कार्यवाही किस प्रकार की जाती है इन सब के बारे में सविस्तारपूर्वक बताया गया।प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी निरीक्षकों को निकटस्थ सेवा सहकारी समिति, कोड़िया एवं बोरीगारका का भ्रमण कराया गया। वहाँ उन्हें उर्वरक के रख-रखाव, स्टॉक मिलान और नमूना लेने की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन करके दिखाया गया। इसके बाद सभी प्रशिक्षुओं से स्वयं इन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। अंत में प्रशिक्षु उर्वरक निरीक्षकों को उनके दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन की शुभकामनाओं के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनकी सक्रियतापूर्वक सहभागिता हेतु उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
- 0- 18 जून तक दावा आपत्ति आमंत्रितदुर्ग. महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला-दुर्ग द्वारा मिशन शक्ति अंतर्गत सखी निवास में रिक्त पदों की पदपूर्ति हेतु महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। इस संबंध में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व में आमंत्रित किए गए आवेदन पत्रों का जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा बारीकी से परीक्षण व स्क्रूटनी कर पात्र तथा अपात्र आवेदकों की प्रारंभिक सूची तैयार कर ली गई है। इस तैयार सूची का अवलोकन सभी संबंधित अभ्यर्थी जिले की आधिकारिक वेबसाइट www.durg.gov.in पर जाकर अथवा कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला-दुर्ग के सूचना पटल (नोटिस बोर्ड) पर प्रत्यक्ष रूप से कर सकते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी आवेदक को इस प्रारंभिक सूची पर कोई आपत्ति है, तो वे आगामी 18 जून 2026 को कार्यालयीन समय में सायं 5.30 बजे तक अपनी दावा आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा और कार्यालय में प्रदर्शित सूची को ही अंतिम मान लिया जाएगा। आवेदकों को अपनी दावा आपत्ति केवल स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही प्रस्तुत करली होगी। इसके अतिरिक्त किसी अन्य माध्यम जैसे ईमेल, कूरियर या स्वयं कार्यालय में उपस्थित होकर प्रस्तुत की गई दावा आपत्ति को मान्य नहीं किया जाएगा।
- दुर्ग. प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी पॉलीटेक्निक कॉलेजों के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, सीडीडीएम/आईडी, एमओएम/एचएमसीटी और लैटरल एंट्री) में प्रवेश के लिए राज्य-स्तरीय ऑनलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। जारी शेड्यूल के अनुसार, प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन 11 जून (पूर्वान्ह 10.00 बजे) से 15 जून 2026 (रात्रि 11.59 बजे) तक होगा। इसके ठीक बाद 16 जून को मेरिट सूची जारी होगी, जिस पर 17 जून तक दावा-आपत्ति की जा सकेगी। दावा-आपत्ति के निराकरण के पश्चात प्रथम चरण का सीट आवंटन 19 जून को किया जाएगा, जिसके तहत चयनित छात्रों को 20 से 24 जून 2026 के बीच आवंटित संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश लेना होगा। यदि प्रथम चरण के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो द्वितीय चरण की काउंसलिंग 26 से 30 जून तक चलेगी, जिसका आबंटन 3 जुलाई और प्रवेश प्रक्रिया 4 से 9 जुलाई तक पूरी की जाएगी। इसके बाद भी सीटें खाली रहने की स्थिति में 11 से 16 जुलाई तक संस्था स्तर (कॉलेज लेवल) की काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन पंजीयन खोला जाएगा, जिसके तहत छात्रों को 18 जुलाई को पूर्वान्ह 10.00 बजे संबंधित कॉलेज में दस्तावेज सत्यापन और आबंटन हेतु उपस्थित होना अनिवार्य होगा। काउंसलिंग से जुड़ी इस पूरी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्रों की सुविधा के लिए रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों में भी सभी सुविधा केंद्र और संबंधित कॉलेज खुले रहेंगे। इस संबंध में विस्तृत जानकारी व नियमों के लिए अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट https://dte.cg.gov.in/#/ का अवलोकन कर सकते हैं अथवा किसी भी समस्या के समाधान के लिए अभ्यर्थी संचालनालय के हेल्पलाइन नंबर 0771-2221376 पर संपर्क कर सकते हैं।उदय प्रसाद उदय शासकीय पॉलीटेक्निक, दुर्ग के प्राचार्य ने इस सत्र में प्रवेश लेने वाले इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं, जिनके अनुसार, आबंटन के बाद कॉलेज में दाखिला लेते समय छात्र अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से साथ लाएं। आरक्षित वर्ग के अंतर्गत लाभ लेने वाले छात्रों के लिए स्थाई जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना भी अनिवार्य होगा। संस्था स्तर पर इन मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद केवल टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र), चरित्र और माइग्रेशन प्रमाण-पत्र की मूल प्रति ही जमा रखी जाएगी और शेष सभी ओरिजिनल दस्तावेज छात्रों को तुरंत वापस कर दिए जाएंगे। प्रवेश के इच्छुक छात्र यह विशेष ध्यान रखें कि काउंसलिंग के प्रत्येक चरण के लिए पृथक आवेदन करना होगा, और यदि कोई छात्र द्वितीय चरण की काउंसलिंग में भाग लेता है, तो उसका प्रथम चरण में लिया गया प्रवेश स्वतः निरस्त हो जाएगा।
- 0- महिला उत्पीड़न से संबंधित 49 प्रकरणों पर होगी सुनवाईदुर्ग. महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आगामी 18 जून 2026 को दुर्ग जिले में एक वृहद जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह जनसुनवाई 18 जून को पूर्वान्ह 11.00 बजे से बाल गृह परिसर, पांच बिल्डिंग स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय, दुर्ग के ’प्रेरणा सभाकक्ष’ में आयोजित की जाएगी। इस सुनवाई पीठ (न्यायपीठ) की अध्यक्षता अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक एवं सदस्यगण श्रीमती ओजस्वी मण्डावी व सुश्री दीपिका शोरी द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी, जिसमें महिला उत्पीड़न से जुड़े कुल 49 निर्धारित प्रकरणों पर गंभीरता से सुनवाई कर उनका मौके पर ही निपटारा किया जाएगा।महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई के दौरान कानून व्यवस्था और सुनवाई की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए महिला आयोग द्वारा विशेष तैयारियां की गई हैं। चूंकि इस सुनवाई में प्रदेश़ के विभिन्न जिलों (दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, बलरामपुर, कांकेर, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी) से प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। इसके साथ-साथ देश के अन्य राज्यों (जैसे पूर्वी दिल्ली, राजस्थान के जैसलमेर, मध्य प्रदेश के मुरैना, तेलंगाना के हैदराबाद, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, उन्नाव, वाराणसी व प्रयागराज, पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्धमान, ओडिशा के नयापारा व बलांगीर, और हरियाणा के गुरुग्राम) से जुड़े मामलों के पक्षकार भी शामिल हो रहे हैं। संबंधित थानों को निर्देशित कर आवेदिका और अनावेदकों को समय पर नोटिस तामिल कराकर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- 0- जिले की ग्राम पंचायतों में रोजगार एवं आवास दिवस का आयोजन, श्रमिकों को दी गई योजनाओं की जानकारीदुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में 7 जून को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार एवं आवास दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री आवास योजना तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण करने, मजदूरी भुगतान से संबंधित समस्याओं के निराकरण तथा जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया।मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के अंतर्गत प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस आधारित निगरानी तथा समयबद्ध मजदूरी भुगतान की व्यवस्था की गई है।रोजगार दिवस के तहत जिले के विभिन्न कार्यस्थलों पर श्रमिकों के बीच जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। जनपद पंचायत पाटन की ग्राम पंचायत मानिकचौरी में चारागाह निर्माण कार्य एवं वाट निर्माण कार्य स्थल पर 54 श्रमिकों की उपस्थिति में रोजगार दिवस आयोजित किया गया। वहीं ग्राम पंचायत बिरझापुर में जल संचयन तालाब निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों को रोजगार एवं आवास योजनाओं की जानकारी दी गई। जनपद पंचायत धमधा की ग्राम पंचायत मोहलाई में सरारनाला से प्रहलाद निषाद के खेत तक नाला जीर्णाेद्धार कार्य में 196 श्रमिक कार्यरत रहे। ग्राम पंचायत कपसदा में जल संचयन तालाबों के नवीनीकरण कार्य में 231 श्रमिकों की सहभागिता रही। दोनों स्थानों पर आयोजित रोजगार एवं आवास दिवस में श्रमिकों को रोजगार अधिकार, मजदूरी भुगतान और आवास योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।जनपद पंचायत दुर्ग अंतर्गत ग्राम पंचायत भरदा में जैन बाड़ी से राइस मिल तक समुदाय के लिए वाटर कोर्स केनाल मरम्मत एवं रखरखाव कार्य में 182 श्रमिक कार्यरत रहे। ग्राम पंचायत करगाडीह में दशरू के खेत से भारतमाला रोड तक वाटर कोर्स रखरखाव एवं मरम्मत कार्य में 152 श्रमिकों ने सहभागिता की। इसी प्रकार ग्राम पंचायत खम्हरिया में राजपूत बाड़ी के पास समुदाय के लिए वाटर कोर्स रखरखाव एवं मरम्मत कार्य में 250 श्रमिक कार्यरत रहे। इन सभी कार्यस्थलों पर रोजगार एवं आवास दिवस का आयोजन कर श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा उनकी समस्याओं का मौके पर निराकरण किया गया।महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से दुर्ग जिले की सभी 300 ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों के जरिए जिले के 64 हजार 049 से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 3923 निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिनसे एक ओर ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढ़ हो रही है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास को भी नई दिशा मिल रही है। वर्तमान में जनपद पंचायत दुर्ग में 16 हजार 262, जनपद पंचायत धमधा में 21 हजार 676 तथा जनपद पंचायत पाटन में 26 हजार 049 श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। मनरेगा के तहत संचालित विभिन्न निर्माण कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण तथा समग्र ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रोजगार एवं आवास दिवस के माध्यम से श्रमिकों को इन योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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- नया 160 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर ऊर्जीकृत, उपकेंद्र की क्षमता बढ़कर हुई 480 एमवीए
रायपुर, । औद्येगिक क्षेत्र व शहरी इलाके में बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिये धरसीवां का कुथरेल सब स्टेशन रायपुर का चौथा सब स्टेशन बन गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने इस 220/132 केवी सब स्टेशन की क्षमता बढ़ाकर 480 एमवीए कर दी है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने आज 220/132 केवी उपकेंद्र कुथरेल (धरसीवां) में 160 एमवीए क्षमता के नए पावर ट्रांसफॉर्मर को सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया।इसके साथ ही उपकेंद्र की कुल क्षमता बढ़कर 480 एमवीए हो गई है और यह रायपुर का चौथा बड़ा 220 केवी सबस्टेशन बन गया है। इसके पूर्व उरला, सिलतरा और बोरझरा स्थित 220/132 केवी के तीनों उपकेंद्र 480-480 एमवीए क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। इस क्षमता वृद्धि से आसपास के औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति मिल सकेगी। साथ ही गर्मी के मौसम में बढ़ने वाले विद्युत भार के प्रबंधन तथा भविष्य की विद्युत मांग को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। कंट्रोल पैनल के माध्यम से ट्रांसफॉर्मर का ऊर्जीकरण किया।इस अवसर पर मुख्य अभियंता श्री ई. अब्राहम वर्गीज, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर. के. तिवारी, कार्यपालन अभियंता (उपकेंद्र) श्री जितेंद्र कुमार झा, कार्यपालन अभियंता (परीक्षण संभाग) श्री कमंजय सिन्हा तथा विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। - -सेवा, साहस और समर्पण की कहानी है ‘भारत भाग्य विधाता’ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय-26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान सेवा और साहस का परिचय देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की अनकही कहानी को समर्पित है फिल्मरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के जोरा मॉल में आयोजित ‘भारत भाग्य विधाता’ फिल्म की प्री-लॉन्च स्क्रीनिंग सेरेमनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं परिजन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रख्यात अभिनेत्री एवं सांसद सुश्री कंगना रनौत, फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया सहित फिल्म जगत से जुड़े कलाकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़े सौभाग्य का विषय है कि सुश्री कंगना रनौत की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की स्क्रीनिंग प्रदेश में आयोजित हो रही है और इस अवसर पर वे स्वयं यहां पधारी हैं। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में सुश्री कंगना रनौत का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है।मुख्यमंत्री श्री साय ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह एक ऐसी कहानी है, जो उन अनसुने और अनदेखे नायकों को सम्मान देती है, जिनके असाधारण योगदान को अक्सर पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि आज इस स्क्रीनिंग में सुश्री कंगना रनौत और उनकी टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग की बहनों की उपस्थिति इस फिल्म की भावना को और अधिक सार्थक बनाती है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व की बात है कि फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया छत्तीसगढ़ की माटी के पुत्र हैं। उन्होंने यहां जन्म लिया, यहीं पले-बढ़े और लंबे समय तक मुंबई में रहकर इस महत्वपूर्ण विषय पर आधारित फिल्म की कहानी लिखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिसमें अनेक लोगों की जान गई। उस कठिन समय में अस्पतालों में कार्यरत महिला नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना सैकड़ों लोगों की जान बचाई और घायलों की सेवा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऐसे अनेक योद्धा होते हैं, जिनकी कहानियां समाज के सामने नहीं आ पातीं। सुश्री कंगना रनौत ने स्वयं नर्स की भूमिका निभाकर उन स्वास्थ्यकर्मियों के साहस, सेवा और समर्पण की कहानी देश के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं, जो बड़े कार्य कर जाते हैं, लेकिन उन्हें उचित पहचान नहीं मिल पाती। यह फिल्म ऐसे ही लोगों को समर्पित है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह भी अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस फिल्म को ‘भारत भाग्य विधाता’ नाम प्रदान किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से सुश्री कंगना रनौत, उनकी पूरी टीम और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी कर्मियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर अभिनेत्री एवं सांसद सुश्री कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया छत्तीसगढ़ की धरती पर जन्मे हैं, यहीं पले-बढ़े हैं और इस प्रदेश के बेटे हैं। उन्होंने आग्रह किया था कि यदि फिल्म की स्क्रीनिंग छत्तीसगढ़ में आयोजित की जाए तो यह उनके लिए गर्व का विषय होगा। सुश्री रनौत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने व्यस्ततम कार्यक्रमों के बीच समय निकालकर इस आयोजन में शामिल होकर कलाकारों और पूरी टीम का सम्मान बढ़ाया है तथा सभी का उत्साहवर्धन किया है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में आपातकालीन परिस्थितियों में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले ‘भारत भाग्य विधाता वॉरियर्स’ को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में श्री जागेश्वर कुमार धीवर, श्री नारायण सिंह नायक, श्रीमती भुनेश्वरी तिवारी, श्रीमती रोहिणी वर्मा, श्रीमती उर्मिला भगत, श्रीमती रोशनी, श्री विजय शंकर कश्यप, श्रीमती मीना सिंह, श्रीमती ममता कपूर, श्रीमती मीना शर्मा, श्रीमती जमुनाबाई, श्रीमती लक्ष्मी मेनन तथा श्रीमती विजया लक्ष्मी पिल्लई शामिल हैं।इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, सांसद श्रीमती रूप कुमारी चौधरी, विधायकगण, जनप्रतिनिधि, फिल्म जगत से जुड़े कलाकार तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।
- रायपुर । उत्तर बस्तर कांकेर जिले की मेधावी छात्रा महेश्वरी कोर्राम को कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 96.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर माध्यमिक शिक्षा मंडल की टॉप-10 सूची में दसवां स्थान हासिल करने पर राज्य शासन की ओर से विशेष प्रोत्साहन दिया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में छात्रा को मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत 01 लाख रुपये तथा दोपहिया वाहन (स्कूटी) अनुदान के लिए 01 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। श्रम पदाधिकारी ने बताया कि जिले के चारामा विकासखण्ड के ग्राम कानापोड़ निवासी छात्रा महेश्वरी कोर्राम की माता श्रीमती अनिता कोर्राम श्रमिक हैं तथा श्रम विभाग के अंतर्गत भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिक है। इसी पात्रता के आधार पर श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत यह सहायता राशि स्वीकृत की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन बोर्ड के अध्यक्ष डा रामप्रताप सिंह श्रमायुक्त, श्री हिमशिखर गुप्ता मंडल के सचिव गिरीश रामटेके तथा श्रम विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (कैबिनेट ) की बैठक मंगलवार, 09 जून को सवेरे 11.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।
- -वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो-योग, स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की मिलेगी सुविधारायपुर /वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्ण, सुरक्षित एवं आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सरगुजा जिले में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थापित ‘सियान गुड़ी’ (वरिष्ठ नागरिक डे-केयर सेंटर) का शुभारंभ सोमवार को वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति में किया।इस अवसर पर वित्तमंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुखद जीवन को ध्यान में रखते हुए सियान गुड़ी की स्थापना की गई है, जहां उन्हें आवश्यक सुविधाओं के साथ आत्मीय और सकारात्मक वातावरण मिलेगा।महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त जीवनशैली के कारण कई बार बुजुर्ग स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में सियान गुड़ी उनके लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संरक्षण और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र में योग एवं प्राणायाम, फिजियोथेरेपी, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, पारिवारिक परामर्श, सांस्कृतिक गतिविधियां, इंडोर गेम्स, स्वल्पाहार और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 25 सीटर क्षमता वाले इस डे-केयर सेंटर का संचालन सप्ताह में छह दिन प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा।शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैरम और लूडो खेलकर आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर बुजुर्गों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा व्हीलचेयर और छड़ी का वितरण भी किया गया। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।मनेंद्रगढ़ रोड में स्थापित इस केंद्र का संचालन समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अनामिका वेलफेयर सोसायटी, अंबिकापुर द्वारा किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक यहां दिनभर स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का लाभ उठा सकेंगे। कार्यक्रम में विधायक श्री प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि , कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
- -कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसारायपुर /कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है।सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान श्री राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले श्री राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
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कोरिया. जिले में जंगली हाथी के हमले में दो श्रमिकों की मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रविवार देर रात जंगली हाथी ने सड़क निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों पर हमला कर दिया। इस हमले में गौरव (22) और अमर सिंह (35) की मौत हो गई। यह सड़क कोरिया जिले के रामगढ़ और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के कोटाडोल के बीच बनाई जा रही है। जिस जंगल वाले इलाके में हाथी ने हमला किया वह एमसीबी जिले के अंतर्गत है। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व एमसीबी, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में फैला हुआ है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के देवसील गांव में सड़क निर्माण कार्य जारी है। काम करने के बाद श्रमिक जब रविवार रात भोजन कर आराम कर रहे थे, तब अचानक लगभग 11.30 बजे एक जंगली हाथी वहां पहुंचा और श्रमिकों पर हमला कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल अमर सिंह ने सोनहत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और शव को अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम की औपचारिकता पूरी होने के बाद, प्रत्येक मृतक के परिवार वालों को 25 हजार रुपये की तत्काल सहायता दी जाएगी। तथा 5.75 लाख रुपये जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दिये जाएंगे। उत्तरी छत्तीसगढ़ में एक दशक से अधिक समय से हाथियां का हमला एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह समस्या मध्य क्षेत्र के कुछ जिलों में भी फैल गई है। राज्य के सरगुजा, रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, जशपुर और बलरामपुर जिलों में मानव—हाथी संघर्ष की घटनाएं अधिक होती है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ में हाथियों के हमले में 325 से अधिक लोगों की जान गई है।
- -जिला प्रशासन उठाएगा बारसे रोशन के पढ़ाई का पूरा खर्चरायपुर /छत्तीसगढ़ के अति-वनांचल (सुकमा) जिले के होनहार आदिवासी छात्र बारसे रोशन ने JEE एडवांस्ड परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पहले ही प्रयास में कैटेगरी रैंक 634 लाकर और अपनी लगन से IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) तक का सफर तय कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अंचल का नाम रोशन किया हैशिक्षा के क्षेत्र में सुदूर और वनांचल क्षेत्र सुकमा के एक आदिवासी छात्र ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विपरीत परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले एक साधारण किसान के बेटे ने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। जिले के सुदूर वनाँचल के झापरा क्षेत्र के निवासी आदिवासी छात्र बारसे रोशन ने देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस 2026 में कैटेगरी रैंक 634 हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम रोशन किया है।इस ऐतिहासिक सफलता पर छात्र का उत्साहवर्धन करने के लिए खुद कलेक्टर और जिला प्रशासन आगे आया है। तुंगल डैम में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अमित कुमार ने छात्र बारसे रोशन को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस मौके पर एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि रोशन की पढ़ाई की राह में पैसे कभी रोड़ा नहीं बनेंगे। जिला प्रशासन बारसे रोशन की उच्च शिक्षा की पूरी फीस का वहन करेगा, ताकि वह बिना किसी आर्थिक चिंता के देश के शीर्ष संस्थान (IIT) में अपनी पढ़ाई पूरी कर सके।बारसे रोशन की यह बड़ी सफलता किसी जादू का परिणाम नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की सोची-समझी दूरदर्शिता का नतीजा है। जिले के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कलेक्टर श्री अमित कुमार और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री मुकुन्द ठाकुर के सीधे निर्देशन में क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट का संचालन किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.आर. मंडावी के मार्गदर्शन और नोडल अधिकारी श्री आशीष राम के सतत पर्यवेक्षण में यह संस्थान सुकमा के आदिवासी और ग्रामीण बच्चों को IIT और मेडिकल जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए निशुल्क तैयार कर रहा है।इस बड़ी सफलता के पीछे जमीनी स्तर पर काम कर रही टीम की कड़ी मेहनत छिपी है। प्रबंधन की कमान संभाल रहे संस्थान के मैनेजर श्री सूरज सिंह ने दिन-रात मेहनत कर सुकमा में एक ऐसा अनुशासित और प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक माहौल तैयार किया है, जो आमतौर पर सिर्फ बड़े महानगरों में देखने को मिलता है। इसके साथ ही, क्षितिज संस्थान और कैम्प एकेडमी रायपुर के शिक्षक सुश्री निधि चौहान, अभिषेक नाग, रजनीश पटेल और सोनम सिंह ने बच्चों को न सिर्फ किताबी ज्ञान दिया, बल्कि परीक्षा की सटीक रणनीति और हर मोड़ पर मोटिवेशन देकर इस कठिन परीक्षा के लिए तैयार किया।बारसे रोशन के माता-पिता दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर परिवार का पेट पालते हैं। जब कलेक्टर ने खुद रोशन को सम्मानित किया और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी ली, तो माता-पिता की आंखें गर्व और खुशी से छलक उठीं। रोशन और सुनील कुमार की यह सफलता आज सुकमा के हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो अपनी गरीबी या पिछड़ेपन की वजह से बड़े सपने देखने से डरता था।जिला प्रशासन के इस संवेदनशील और दूरदर्शी कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। कलेक्टर, सीईओ और उनकी पूरी टीम ने छात्रों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले सालों में सुकमा से ऐसे कई और सितारे निकलेंगे जो देश-दुनिया में जिले का नाम चमकाएंगे।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती और मिलेट्स (मोटे अनाजों) की खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। यह मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखती है, पानी बचाती है और उपभोक्ता को जहरीले-मुक्त रसायन वाले खाद्य उत्पाद देती है। इसमें बाहर से महंगी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे किसानों की खेती की लागत काफी कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है।दंतेवाड़ा जिले में “खेत बचाओ अभियान”प्रारंभकृषि भूमि की उर्वरता को संरक्षित करने, किसानों की लागत कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा जिले में “खेत बचाओ अभियान”प्रारंभ किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार इस रणनीतिक कार्ययोजना का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पारंपरिक बीजों का संरक्षण तथा प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। “खेत बचाओ अभियान” दंतेवाड़ा को प्राकृतिक कृषि, जैव विविधता संरक्षण और किसान समृद्धि की नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।मिलेट्स को 'श्री अन्न' का दर्जाजिले की भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध आदिवासी परंपराओं और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार इस अभियान को दंतेवाड़ा के चारों विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अभियान की मूल भावना यह है कि “मिट्टी केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी सुरक्षा भविष्य की खाद्य सुरक्षा और किसान समृद्धि की गारंटी है।” ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं, इन्हें 'सुपरफूड' और 'श्री अन्न' का दर्जा दिया गया है। मिलेट्स सामान्य अनाजों की तुलना में बहुत कम पानी और खाद में उग जाते हैं, और सूखा-रोधी होते हैं।अभियान के प्रमुख लक्ष्यअभियान के तहत मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, प्राकृतिक खेती का विस्तार, पारंपरिक बीजों का संरक्षण तथा जल एवं नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को रासायनिक खेती से धीरे-धीरे प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जाएगा, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा।पांच चरणों में होगा क्रियान्वयनयोजना के तहत सबसे पहले जिले में मृदा स्वास्थ्य मैपिंग और सॉयल हेल्थ कार्ड को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके बाद रागी, कोदो, कुटकी जैसे पौष्टिक मिलेट्स एवं स्थानीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। तीसरे चरण में किसानों को जैविक खाद, ब्लू-ग्रीन एल्गी और वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का प्रशिक्षण देकर बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक बीज मंडियों और सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना कर स्थानीय बीजों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतिम चरण में खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे हरित खाद देने वाले पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।जिले में तय किए गए लक्ष्यवित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले के 135 ग्राम पंचायतों में अभियान लागू किया जाएगा। इसके तहत 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, 4,300 हेक्टेयर में मिलेट्स उत्पादन तथा 40 सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। सरकार मिलेट्स की खेती के तहत क्षेत्र को बढ़ाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से इन पौष्टिक अनाजों को वितरित करने और मिलेट्स आधारित उत्पादों के साथ काम करने वाले उद्यमियों का समर्थन करने के लिए एक ठोस प्रयास कर रही है।किसानों को होंगे कई लाभअभियान के सफल क्रियान्वयन से अगले तीन वर्षों में खेतों के जैविक कार्बन स्तर में वृद्धि होने की संभावना है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। वहीं, दंतेवाड़ा के मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी नए अवसर खुलेंगे। ये स्थूल एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। ये हृदय के लिए फायदेमंद हैं, हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं, एनीमिया को रोकते हैं, मधुमेह की शुरुआत को रोकते हैं (ये ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर कम हैं), स्वस्थ वज़न बनाए रखते हैं और आँत की सूजन में सुधार करते हैं।कृषि क्षेत्र में नई पहलदंतेवाड़ा जिले में रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी अन्य फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की पद्धति में बदलाव नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसान की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि योजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सफल होती है, तो दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन सकता है।
- रायपुर / मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के सभी विभागों के सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को शासन के सर्वाेच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को वरीयता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मानिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, ई अटेंडेंस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, टीबी मुक्त भारत, सेवा सेतु, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को विभागों के अंतर्गत रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी रखने एवं कर्मचारी चयन मंडल के कार्यों की प्रगति की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से ली।बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, सामान्य प्रशासन, जनशिकायत निवारण एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उभोक्ता संरक्षण एवं वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री ईफ्फत आरा सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।
- -निर्धारित मानकों के अनुरूप तेज गति से हो रहे निर्माण कार्य की सराहनारायपुर /जशपुर जिले के प्रभारी सचिव श्री अंकित आनंद ने आज जशपुर में निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल भवन के निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप एवं तेज गति से संचालित किए जाने पर संबंधित एजेंसी और अधिकारियों की सराहना की।निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा तथा स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी लेते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, एसडीएम जशपुर श्री विश्वास राव मस्के, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन अभियंता श्री प्रफुल्ल चौरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर मद से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में छह मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों की ढलाई का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है।प्रस्तावित अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू तथा पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था होगी। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी कक्ष, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी यूनिट, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, एमआरआई, ईसीजी, इमरजेंसी वार्ड सहित अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल के शुरू होने से जशपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।
- -दुलदुला विकासखंड में मानसून पूर्व तैयार किए जा रहे 80 हजार सीड बॉल, ग्रामीणों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारीरायपुर / पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण में वृद्धि के उद्देश्य से जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड में सीड बॉल निर्माण अभियान की शुरुआत की गई है। आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों, युवाओं एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सहभागिता से बड़े पैमाने पर सीड बॉल तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें मानसून के दौरान बंजर, पहाड़ी एवं वन क्षेत्रों में वितरित किया जाएगा।सीड बॉल मिट्टी, गोबर खाद तथा स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के बीजों से तैयार की जाती है। वर्षा होने पर ये बीज प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं, जिससे हरित क्षेत्र का विस्तार होता है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। यह तकनीक कम लागत में अधिक क्षेत्र में वनीकरण का प्रभावी माध्यम मानी जाती है।जनपद पंचायत दुलदुला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना भी है। अभियान के अंतर्गत आम, जामुन, करंज, नीम, इमली सहित विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के लगभग 80 हजार सीड बॉल तैयार किए जा चुके हैं।ग्रामीणों एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक इस अभियान में भाग लेते हुए सीड बॉल निर्माण को प्रकृति संरक्षण का सरल, प्रभावी और सामुदायिक प्रयास बताया। तैयार सीड बॉल्स को वर्षा ऋतु के दौरान उन क्षेत्रों में फैलाया जाएगा, जहां प्राकृतिक रूप से हरियाली बढ़ाने की आवश्यकता है।मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार ने जिलेवासियों से इस पर्यावरणीय अभियान में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से हरित, समृद्ध और खुशहाल जशपुर का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ-साथ हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड प्रोजेक्ट के अंतर्गत हर्षा ट्रस्ट एवं बिहान के बीपीएम की भी सक्रिय सहभागिता रही, जिससे अभियान को व्यापक जनसमर्थन और गति मिल रही है।
- -कसेकेरा के सरस्वती ग्राम गंगा विद्या मन्दिर में 10 दिवसीय 'नवीन आचार्य संकल्पना वर्ग' चल रहाबागबाहरा। सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति द्वारा प्रदेश भर में संचालित सरस्वती शिशु मन्दिर ग्रामीण विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण और गुणात्मक सुधार के लिए जिला स्तर पर 'नवीन आचार्य संकल्पना वर्ग' का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुन्द जिला के ग्राम कसेकेरा स्थित सरस्वती ग्राम गंगा विद्या मन्दिर में नवीन आचार्यों के लिए प्रशिक्षण वर्ग संचालित है। इस वर्ग के तहत रविवार को आयोजित सत्र में ग्राम भारती जिला समिति के सदस्य अनिल पुरोहित मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने 'विद्यालय के विकास में आचार्यों की भूमिका' विषय पर केंद्रित अपना सारगर्भित उद्बोधन दिया।श्री पुरोहित ने कहा आचार्य केवल किताबी ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण अंचलों में संस्कृति और संस्कारों के संवाहक हैं। एक सुदृढ़ और समृद्ध विद्यालय की नींव आचार्यों के समर्पण, नवाचार और उनके उच्च नैतिक आचरण पर टिकी होती है। श्री पुरोहित ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना आचार्यों का प्राथमिक कर्तव्य है। विद्यालय के विकास के लिए आचार्यों को ग्रामीणों और अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर एक आत्मीय संबंध बनाना चाहिए। श्री पुरोहित ने कहा कि नवीन आचार्यों को शिक्षण की नई पद्धतियों को अपनाकर स्वयं को लगातार अद्यतन (अपडेट) रखना होगा, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण छात्र-छात्राओं को मिलेगा।इस मौके पर वर्ग अधिकारी व विद्यालय के प्राचार्य वीरेन्द्र साहू मंचस्थ थे। इससे पहले प्रथम सत्र में जिला समन्वयक जयलाल प्रधान ने स्वदेशी, स्वावलम्बन, स्वास्थ्य और संस्कृति विषयों पर मार्गदर्शन किया। विदित रहे, प्रशिक्षण वर्ग में जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से 62 प्रशिक्षार्थी आचार्य-दीदीजी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
- रागम तानम पल्लवी- सीजन 4 का शानदार आयोजन-टी सहदेवभिलाई नगर। पद्मश्री घंटसाला चैतन्य वेदिका के तत्वावधान में रविवार को बालाजी मंदिर के आंध्र भवन में तेलुगु संगीत प्रेमियों के लिए विशेष सांस्कृतिक संध्या 'रागम तानम पल्लवी–सीजन 4' का शानदार आयोजन किया गया। यह सुरमयी संध्या महान पार्श्वगायक पद्मविभूषण डॉ. एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम की 80वीं जयंती की स्मृति में आयोजित की गई थी, जिसमें भिलाई और आसपास के क्षेत्रों के प्रतिभाशाली गायकों और गायिकाओं ने उनके अमर गीतों को उन्हीं के अंदाज में गाकर श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में उस समय पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा जब बालू के मानस पुत्र एवं पाडुता तीयगा फेम सेलिब्रिटी एन परमेश्वरी ने दिल को छूने वाले सुर में क्लासिकल फिल्म शंकराभरणम का गीत शंकरा नाद शरीरापरा गीत प्रस्तुत किया। आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर श्रोताओं को उनके दो और गीतों के रसास्वादन का भी अवसर मिला।तीस से ज्यादा फिल्मी गाने सुरों से सजेसंगीत प्रेमियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए इस कार्यक्रम में संगीत, स्मृतियों और सांस्कृतिक गौरव का सुंदर संगम देखने को मिला। इसी कड़ी में संगीत प्रेमियों को तेलुगु फ़िल्मों स्वाति किरणम, पवित्र बंधम, अल्लुडु मजाका, स्वराभिषेकम, वेटगाडु, गीतांजलि, मुठा मेस्त्री, प्रेमाभिषेकम, अनुबंधम सहित तीस से ज्यादा फिल्मी नगमे सुनने को मिले। अपनी गायकी से महफ़िल लूटने वालों में जी वेणुगोपाल, बी रामू, लक्ष्मण मूर्ति, विद्याशंकर श्रीनिवास, जोशना, प्रकाश, लक्ष्मीरानी, के राजू, सिरीषा, कुसुमा, शेखर, गीता, डी लता, एन चंदू, जी वेंकट, गीता और दिलीप शामिल हैं। कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों में स्वास्थ्य, खाद्य एवं स्वच्छता विभाग के अध्यक्ष लक्ष्मीपति राजू, आंध्र साहित्य समिति के अध्यक्ष पीवी राव, सचिव पीएस राव, अखिल भारतीय तेलुगु सेना के प्रदेशाध्यक्ष नीलम चन्ना केशवलु समेत विभिन्न समाज प्रमुखों की मौजूदगी भी रही।संगीत की विरासत नई पीढ़ी को सौंपीवेदिका के अध्यक्ष एएस शर्मा और महासचिव के लक्ष्मीनारायण का कहना है कि यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि तेलुगु भाषा, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के बाद गणेश वंदना से हुई, जिसे वेदिका के डायरेक्टर जी वेणुगोपाल ने सुरों से सजाया। इस मौके पर सेलिब्रिटी एन परमेश्वरी, अखिल भारतीय पंचायत परिषद के छत्तीसगढ़ प्रदेश संयोजक बीवीएस राजकुमार और रायपुर थोक सब्जी मंडी के अध्यक्ष श्रीनिवास रेड्डी को शॉल तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
- उप मुख्यमंत्री कर्मा महोत्सव में हुए शामिल, तैलीय सदन का किया लोकार्पणबिलासपुर/ उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव किरंदुल में तहसील साहू संघ द्वारा आयोजित कर्मा महोत्सव, नवीन सामाजिक भवन नामकरण एवं लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने सामाजिक पदाधिकारियों के साथ एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित भव्य तैलीय सदन का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू, दंतेवाड़ा के विधायक श्री चैतराम अटामी और किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती रुबी शैलेन्द्र सिंह भी महोत्सव में शामिल हुईं।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कर्मा महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि किरंदुल में छत्तीसगढ़ का सबसे भव्य साहू समाज का भवन बना है। इस भवन का रोज उपयोग हो, ऐसी व्यवस्था बनाएं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और मेहनत साहू समाज की ताकत और विशेषता है। हमारी इस पहचान को बनाकर रखना है।श्री साव ने कहा कि सभी समाजों के साथ साहू समाज का आत्मीय संबंध है। यह सभी के साथ मिलकर चलने वाला समाज है। साहू समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश में समाज के युवा अनेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। भक्त माता कर्मा के बताए मार्ग पर चलकर हमें समाज को ऊंचाईयों पर पहुंचाना है।छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज का तेल निकालने का पुश्तैनी काम रहा है। हमारे इस पुश्तैनी व्यवसाय को पुनर्स्थापित करना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों को तेल निकालने की मशीन लगाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तेल निकालने की मशीनों पर सरकार द्वारा 35 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। समाज के लोग इसका लाभ लेकर तेल निकालने का उद्यम कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।विधायक श्री चैतराम अटामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साहू समाज के लोग किरंदुल में सक्रियता से काम कर रहे हैं। समाज के 300 परिवार यहां रहते हैं। उन्होंने समाज की मांग पर शैक्षणिक कार्य के लिए कमरा बनाने की घोषणा की। किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती रुबी शैलेन्द्र सिंह, किरंदुल तहसील साहू समाज के अध्यक्ष श्री टीकमचंद साहू और छत्तीसगढ़ साहू समाज के संगठन सचिव श्री ओमप्रकाश साहू ने भी कर्मा महोत्सव को संबोधित किया।कार्यक्रम में उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए श्री लालाराम साहू को समाजरत्न सम्मान दिया गया। माता कर्मा प्रांगण में दीवारों कर कलाकृति बनाने वाले कलाकार श्री कामता राम कोर्राम को भी सम्मानित किया गया। भगवताचार्य श्रीमती यामिनी देवी साहू, लोक गायिका सुश्री आरू साहू, पार्षद श्री विनोद साहू और तहसील साहू समाज के संरक्षक श्री ओम साहू सहित साहू समाज के प्रदेशभर के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।


























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