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- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी के मार्गदर्शन में जिले में बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एचपीवी टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। आगामी 06 अप्रैल 2026 से जिले के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में एचपीवी टीकाकरण उपलब्ध रहेगा। इस संबंध में जिला टीकाकरण अधिकारी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाधिक होने वाला कैंसर सर्वाइकल कैंसर है, जिससे बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन अत्यंत प्रभावी है। यह वैक्सीन बालिकाओं को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से बचाकर भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक होगी। उन्होंने बताया कि यह टीकाकरण 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं के लिए निर्धारित किया गया है तथा सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में शासकीय अवकाश को छोड़कर प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक टीकाकरण किया जाएगा। 14 वा जन्मदिन मना चुकी बच्ची इस वैक्सीन के लिए पात्र होंगी। टीकाकरण के समय अभिभावकों को बालिका का फोटोयुक्त पहचान पत्र एवं आधार से लिंक मोबाइल नंबर साथ लाना अनिवार्य होगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपनी बालिकाओं को एचपीवी टीकाकरण अवश्य लगवाएं, जिससे उन्हें भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके।
- केंद्र सरकार ने लागू किए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, थोक उत्पादकों के लिए ऑन-साइट प्रोसेसिंग अब अनिवार्यभिलाईनगर | पर्यावरण संरक्षण और 'जीरो वेस्ट' के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए ये नियम कचरा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को वैज्ञानिक और जवाबदेह बनाएंगे। नगर पालिक निगम भिलाई ने स्पष्ट किया है कि अब लैंडफिल (कचरा डंपिंग साइट) पर निर्भरता कम कर चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।नए नियम 'अपशिष्ट सोपनिकी' (Waste Hierarchy) के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें कचरे के सुरक्षित निपटान से पहले उसके पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी गई है।अब केवल वही कचरा लैंडफिल में जाएगा जिसका पुनर्चक्रण संभव नहीं है। छटाई रहित कचरा फेंकने पर भारी लैंडफिल शुल्क देना होगा।कचरे को अब चार श्रेणियों में बांटना अनिवार्य है-ठोस अपशिष्ट यह घरों, कार्यालयों और दुकानों से निकलने वाला दैनिक कचरा है। इसमें प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु और भोजन के अवशेष आदि शामिल होते हैं।तरल अपशिष्ट यह घरों, उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाला पानी या तरल पदार्थ है। उदाहरण के लिए, गंदा पानी, डिटर्जेंट युक्त पानी, या औद्योगिक रसायनों वाला तरल।खतरनाक अपशिष्ट यह कचरा स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक होता है। इसमें ज्वलनशील, संक्षारक या विषाक्त पदार्थ होते हैं, जैसे बैटरियां, पेंट, कीटनाशक, और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।कार्बनिक/जैविक अपशिष्ट यह रसोई के कचरे, फलों-सब्जियों के छिलके, बगीचे के सूखे पत्ते और पौधों के अवशेषों से बनता है। इसे खाद में बदला जा सकता है।इसके अलावा, चिकित्सा क्षेत्र से निकलने वाले कचरे को बायोमेडिकल वेस्ट के रूप में भी जाना जाता है। थोक अपशिष्ट उत्पादकों केनए नियमों के दायरे में 20,000 वर्ग मीटर से बड़े भवन, प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली इकाइयां और बड़े संस्थान शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारियां निम्न प्रकार हैं:ऑन-साइट प्रोसेसिंग अंतर्गत गीले कचरे का निपटान संस्थान के भीतर ही करना अनिवार्य होगा। यदि मौके पर प्रसंस्करण संभव नहीं है, तो 'विस्तारित उत्तरदायित्व प्रमाणपत्र' प्राप्त करना आवश्यक होगा। नियमों के पालन की जांच के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी।नगर पालिक निगम भिलाई के अनुसार, इन नियमों से नगर निकायों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा और कचरा प्रबंधन में जन-भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह पहल न केवल शहरों को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि कचरे से ऊर्जा और खाद बनाने की प्रक्रिया को भी गति देगी।"अपशिष्ट प्रबंधन अब केवल सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।"
- -लगभग 106 घनमीटर ढलाई कार्य पूर्ण कर लिया गयारायपुर/ रायपुर पश्चिम विधायक और प्रदेश के पूर्व केबिनेट मन्त्री श्री राजेश मूणत और नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे के निर्देश को तत्काल संज्ञान में लेकर नगर निगम रायपुर जोन क्रमांक 1 की टीम द्वारा जोन 1 क्षेत्र अंतर्गत ठक्करबापा वार्ड क्षेत्र के दीक्षा नगर गुढ़ियारी में निर्माणाधीन जलागार में ढलाई का कार्य तेज गति से प्रारम्भ कर दिया गया है और लगभग 106 घनमीटर ढलाई का कार्य कर लिया गया है. नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर नगर निगम जोन 1 जोन कमिश्नर श्री अंशुल शर्मा सीनियर, कार्यपालन अभियंता श्री द्रोनी कुमार पैकरा, सहायक अभियंता श्री शरद देशमुख, उपअभियंता श्री गोपाल प्रधान सहित दीक्षा नगर गुढ़ियारी में निर्माणाधीन जलागार में रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत और महापौर श्रीमती मीनल चौबे द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार बारिश के पूर्व जलागार क्षेत्र में प्लीन्थ लेवल तक कार्य पूर्ण करने सतत मॉनिटरिंग निरीक्षण सहित कर रहे हैँ, ताकि बारिश में कार्य ना रुके और क्षेत्र में जलभराव ना होने पाए.
- -दुर्ग में विकास कार्यों की सौगातदुर्ग। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर दुर्ग शहर को विकास कार्यों की एक महत्वपूर्ण सौगात प्राप्त हुई है। दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक 25 संतराबाड़ी में नवनिर्मित डोमशेड का लोकार्पण किया गया, वहीं वार्ड क्रमांक 46 पद्मनाभपुर में डोमशेड निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। दुर्ग शहर विधायक एवं केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव निरंतर शहर के सर्वांगीण विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार हो रहा है।वार्ड क्रमांक 25 संतराबाड़ी स्थित गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव ने सहभागिता करते हुए वेदमाता गायत्री के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किये। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों से आत्मीय संवाद किये और उनकी आवश्यकताओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुने। मंत्री श्री यादव ने कहा कि यह भव्य डोमशेड क्षेत्र के धार्मिक एवं सामाजिक जीवन को नई दिशा देगा। अब यहां विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, सामाजिक कार्यक्रम एवं अन्य सामुदायिक आयोजन सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण में आयोजित किए जा सकेंगे।उन्होंने आगे कहा कि शासन की मंशा केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुगमता प्रदान करना है। डोमशेड निर्माण से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी विभिन्न आयोजनों के लिए एक स्थायी एवं संरक्षित स्थल उपलब्ध होगा। यह कार्य क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।इसी क्रम में वार्ड क्रमांक 46 पद्मनाभपुर में प्रस्तावित डोमशेड निर्माण कार्य के भूमिपूजन कार्यक्रम में भी मंत्री श्री यादव शामिल हुए। भूमि पूजन विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया। यह कार्य लंबे समय से क्षेत्रवासियों की मांग रही थी, जिसके पूर्ण होने से स्थानीय नागरिकों में विशेष उत्साह और संतोष का वातावरण है। मंत्री श्री यादव ने कहा कि इस डोमशेड के निर्माण से क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नया मंच मिलेगा और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री यादव ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहर के प्रत्येक वार्ड में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य एवं सामुदायिक संरचनाओं के विकास के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का सतत प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ विकास कार्यों को गति दी जाएगी और दुर्ग शहर को एक आदर्श एवं सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।इस अवसर पर सभापति श्री श्याम शर्मा, पार्षद श्रीमति मनीषा सोनी, श्री संजय अग्रवाल, श्री मनीष कोठारी, श्री गुलशन साहू, श्री युवराज कुंजाम, श्रीमति सविता साहू, भाजयुमो अध्यक्ष श्री हिमांशु सिंह, मंडल अध्यक्ष श्री बंटी चौहान, श्री कमलेश फेकर, श्री महेन्द्र लोढ़ा, श्री धीरजलाल टांक, श्री एसपी सिंह, आर.डी. महिलांग, श्री अभय सोनी, श्री राकेश झा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने इस विकास कार्य के लिए मंत्री श्री यादव का आभार व्यक्त किया और क्षेत्र के निरंतर विकास की अपेक्षा जताई।
- बालोद/ पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल ने बताया कि क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र जशपुर के द्वारा एसआईएस लिमिटेड की ओर से जिले के 10वीं पास अथवा फेल युवकों को रोजगार प्रदान करने रजिस्ट्रेशन कैंप का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि आवेदित उम्मीदवारों को पंजीकृत कर प्रशिक्षणोपरांत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा गार्ड में स्थाई रोजगार दिया जाएगा। जिसके अंतर्गत पंजीयन शिविर का आयोजन थाना गुण्डरदेही में 01 अपै्रल, थाना अर्जुंदा में 02 अपै्रल, थाना डौण्डीलोहारा में 03 अपै्रल, थाना देवरी में 04 अपै्रल, थाना मंगचुवा में 05 अपै्रल, चैकी पिनकापार में 06 अपै्रल, थाना सुरेगांव में 07 अपै्रल, थाना पुरूर में 08 अपै्रल, थाना गुरूर में 09 अपै्रल, थाना रनचिरई में 10 अपै्रल एवं थाना बालोद में 11 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 04 बजे तक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आवेदक को भर्ती से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, दो पासपोर्ट साईज फोटो, आधार कार्ड की मूल एवं छायाप्रति के साथ उपस्थित होना अनिवार्य है।
- दिव्यांग हितैषी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जताया आभारबालोद/अगर हौसला बुलंद हो और शासन का साथ मिल जाए, तो हर बाधा पार की जा सकती है। कुछ ऐसी ही कहानी है बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम छेड़िया के निवासी श्री मनीराम की। एक दर्दनाक दुर्घटना में अपना पैर गंवा देने वाले मनीराम के जीवन में आए अंधेरे को अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की श्दिव्यांग हितैषी योजनाश् ने नई रोशनी से भर दिया है।एक समय था जब मनीराम सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक सड़क दुर्घटना में अपना पैर गंवाने के बाद उनका जीवन बिस्तर तक ही सिमट कर रह गया था। चलने-फिरने में लाचारी के कारण उन्हें काम मिलना बंद हो गया, जिससे न केवल आर्थिक संकट गहराया, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्होंने अपनी उम्मीदें छोड़ दी थीं। घर की चारदीवारी ही उनकी दुनिया बन गई थी।मनीराम की इस बेबसी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार की दिव्यांग हितैषी नीति और जिला प्रशासन बालोद के प्रयासों ने संजीवनी का काम किया। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से मनीराम को निःशुल्क कृत्रिम पैर प्रदान किया गया।कृत्रिम पैर लगने के बाद मनीराम के चेहरे पर जो चमक लौटी है, वह शब्दों से परे है। अब वे बिना किसी सहारे के आसानी से चल-फिर पा रहे हैं। मनीराम का कहना है कि पैर कटने के बाद मुझे लगा था कि अब मेरा जीवन दूसरों पर बोझ बनकर ही बीतेगा, लेकिन मुख्यमंत्री जी की इस योजना ने मुझे फिर से खड़ा कर दिया है। अब मैं कहीं भी आ-जा सकता हूँ और काम भी कर सकता हूँ। मनीराम ने इस नई जिंदगी के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।
- बालोद/भारत सरकार की तिलहन प्रोत्साहन योजनाओं और जिला प्रशासन के नीर चेतना अभियान का सकारात्मक असर अब बालोद के खेतों में दिखने लगा है। कृषि विभाग द्वारा आयोजित कृषक चैपाल और फसल चक्र परिवर्तन के संदेश से प्रेरित होकर जिले के किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ तिलहन उत्पादन, विशेषकर कुसुम की खेती की ओर कदम बढ़ाए हैं। कृषि विभाग के उप संचालक श्री आशीष चंद्राकर ने बताया कि जिले में कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण का ही परिणाम है कि जिस कुसुम की खेती का रकबा पहले शून्य था, वह इस वर्ष बढ़कर 157 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। उन्नत बीजों का चयन, कतार पद्धति से बुआई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के कारण वर्तमान में फसल की स्थिति अत्यंत उत्साहजनक है।स्थानीय किसानों के अनुसार, कुसुम की खेती कई मायनों में फायदेमंद है, कम जल खपत, इसे बहुत ही सीमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है और लागत भी न्यूनतम आती है। कुसुम की खेती मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। मौसम अनुकूल रहने पर अच्छी पैदावार से किसानों की आय दोगुनी होने की प्रबल उम्मीद है। घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिले के सभी विकासखंडों के 37 ग्रामों के 194 कृषकों ने पहली बार नवीन तिलहन फसल के रूप में कुसुम का प्रदर्शन लिया है। जिले में भविष्य में कुसुम की खेती के विस्तार हेतु बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। कुल कृषकों में से 79 कृषकों ने 101 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन हेतु बीज निगम में पंजीयन कराया है। इससे आने वाले समय में जिले के किसानों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत बीज प्राप्त हो सकेंगे। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेतों का नियमित निरीक्षण और कीट प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है। बालोद जिले के किसानों का यह सामूहिक प्रयास अब आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
- -लोक निर्माण विभाग ने चारों फ्लाईओवर्स के लिए मंजूर किए हैं 360 करोड़रायपुर। राजधानी रायपुर में इस साल 4 फ्लाईओवर्स के काम शुरू होंगे। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने चारों फ्लाईओवर्स के लिए कुल 360 करोड़ 35 लाख 93 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इन फ्लाईओवर्स के निर्माण से शहर के ब्यस्त यातायात को तेज, स्मूथ और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। शहरवासी इनके निर्माण की मांग लंबे समय से कर रहे थे।लोक निर्माण विभाग ने शहर के बीच जी.ई. रोड पर गुरू तेज बहादुर उद्यान से तेलीबांधा के नेताजी सुभाष चौक तक फ्लाईओवर के लिए 172 करोड़ 86 लाख 28 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। रायपुर के रिंग रोड क्रमांक-2 में सोनडोंगरी चौक पर ओवरपास के लिए 43 करोड़ 89 लाख 17 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं।विभाग ने रायपुर में वी.आई.पी. रोड के फुंडहर चौक में ओवरपास के निर्माण के लिए 56 करोड़ सात लाख 35 हजार रुपए की स्वीकृति दी है। शहर के अटल पथ एक्सप्रेस-वे पर फुंडहर चौक में ग्रेड सेपरेटर के निर्माण के लिए भी लोक निर्माण विभाग द्वारा 87 करोड़ 53 लाख 13 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं।*”राज्य शासन रायपुर में यातायात को तेज, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। शहर में फ्लाईओवर्स और सड़कों के चौड़ीकरण के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इनसे ट्रैफिक-जॉम में कमी आएगी और लोगों की आवाजाही अधिक सहज होगी। हमारी प्राथमिकता है कि रायपुरवासियों और यहां आने वाले हर व्यक्ति को बेहतर और सुगम यातायात मिले।“- श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
- -दूरस्थ क्षेत्रों में भ्रमण कर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने को कहारायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शनिवार को जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम बेहराखार में पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने यूनिट में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मोबाइल मेडिकल यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर, सीवीसी मशीन, आवश्यक दवाइयों सहित विभिन्न उपचार उपकरण उपलब्ध हैं। साथ ही इसमें डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी तैनात रहती है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है।अवलोकन के उपरांत राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया। साथ ही अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन समुदायों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। इस अवसर पर पद्म श्री जागेश्वर यादव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- -सड़क–पुल–जल संरचना से बदलेगी तस्वीररायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने भटगांव विधानसभा क्षेत्र के ओड़गी और भैयाथान विकासखंड में 13.22 करोड़ रूपये से अधिक लागत के तीन अहम विकास कार्यों का विधिवत पूजा-अर्चना कर शुभारंभ किया।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विकासखंड ओड़गी के ग्राम हरिहरपुर (छतरंग रोड) में कागज नाला पर 419.37 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। श्रीमती राजवाड़े ने भैयाथान विकासखंड के ग्राम सांवरावा में 136.23 लाख रूपये की लागत से जलाशय जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ किया । उन्होंने प्रतापपुर–भैयाथान मुख्य मार्ग से परसापारा तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 766.37 लाख रूपये है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के लोगों के जीवन में सीधा सकारात्मक परिवर्तन आएगा और भटगांव क्षेत्र विकास की नई दिशा में अग्रसर होगा।इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क, पुल और जल संरचना का सुदृढ़ीकरण होगा, जिससे न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम में वन विकास निगम अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
- रायपुर/रायपुर नगर पालिक निगम को प्राप्त आमासिवनी, मोवा मुक्तिधाम की सफाई को लेकर प्राप्त जनशिकायतों को तत्काल संज्ञान में लेकर नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप द्वारा दिए गए आदेशानुसार और जोन 9 जोन कमिश्नर श्री राकेश शर्मा द्वारा दिए गए निर्देश पर नगर निगम जोन 9 स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आमासिवनी, मोवा मुक्तिधाम में विशेष सफाई अभियान चलाकर कचरा एकत्र कर उसका तत्काल परिवहन करवाकर जोन 9 जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री उमेश नामदेव, श्री बारोन बंजारे, स्वच्छता निरीक्षक श्री भोला तिवारी की उपस्थिति में जनहित में जनस्वास्थ्य सुरक्षा बाबत स्वच्छता कायम करते हुए प्राप्त जनशिकायतों का जोन के स्तर पर त्वरित निदान किया.
- मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में उल्लेखनीय उपलब्धि, पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलतारायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है।खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी - श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़
- -पीएम आशा योजना का लाभ लेने से किसान वंचितरायपुर। प्रदेश के रबी दलहन - तिलहन उत्पादक किसानों को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये पी एम आशा योजना का लाभ लेने से अनेकों किसान वंचित हो गये हैं । इसका कारण किसान पंजीयन पोर्टल के पहले ही गिरदावरी पोर्टल को लाक कर दिया जाना है । किसान पंजीयन हेतु शासन ने अंतिम तिथि बीते 31 मार्च निर्धारित किया था लेकिन इसके पहले ही गिरदावरी पोर्टल विभागीय तालमेल न होने की वजह से बीते 26 मार्च से बंद हो गया है जिसके चलते क्राप सर्वे का इन्द्राज नहीं हो पा रहा ।ज्ञातव्य हो कि केंद्र सरकार ने किसानों का आय बढ़ाने , फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और संकटग्रस्त बिक्री को रोकने के उद्देश्य से किसानों के हित में विभिन्न दलहन - तिलहन फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान जिसे संक्षेप में पी एम आशा योजना बनायी है । प्रदेश के कृषि विभाग ने पहले एकीकृत किसान पोर्टल में ऐसे किसानों के पंजीयन हेतु बीते 01 दिसंबर से बीते 28 फरवरी की तिथि व क्राप सर्वे रिपोर्ट इन्द्राज हेतु गिरदावरी पोर्टल 25 मार्च तक खुला रखने का निर्णय लिया था । इसी बीच कृषि संचालक व विभिन्न जिलाधीशों द्वारा डिजीटल क्राप सर्वे का डाटा तकनीकी त्रुटि के कारण अपडेट नहीं हो पाने के फलस्वरूप संबंधित पोर्टल पर कृषक पंजीयन का रकबा/ खसरा का प्रविष्टि नहीं हो पाने की जानकारी देते हुये किसान पंजीयन की समयावधि बढ़ाने की मांग किये जाने पर किसान पंजीयन की तिथि 31 मार्च तक बढ़ा दी गयी पर राजस्व विभाग द्वारा किये जाने वाले क्राप सर्वे ( गिरदावरी ) का इन्द्राज का निर्धारित तिथि विभागीय लापरवाही के चलते पूर्ववत् 25 मार्च ही रह गया । इसकी वजह से खासकर 26 से 31 मार्च तक पंजीयन कराने वाले किसानों का डिजीटल क्राप सर्वे का डाटा इन्द्राज नही हो पाने की जानकारी देते हुये किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , कृषि मंत्री रामविचार नेताम , प्रमुख सचिव विकासशील व मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को मेल से ज्ञापन भेज गिरदावरी पोर्टल आगामी 15 अप्रैल तक रबी उत्पादक किसानों के व्यापक हित में पुनः खुलवाने की मांग की है ।
- सिद्दी समुदाय के पहलवानों ने जीते तीन स्वर्ण और एक रजत पदकरायपुर/ 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे।सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है।साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।''कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।
- 0- रकबा शून्य से बढ़कर हुआ 157 हेक्टेयररायपुर। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण का परिणाम है कि बालोद जिले में जिस कुसुम की खेती का रकबा पहले शून्य था, वह इस वर्ष बढ़कर 157 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। उन्नत बीजों का चयन, कतार पद्धति से बुआई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के कारण वर्तमान में फसल लाभदायक साबित हुआ है।स्थानीय किसानों के अनुसार, कुसुम की खेती कई मायनों में फायदेमंद है, कम जल खपत, इसे बहुत ही सीमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है और लागत भी न्यूनतम आती है। कुसुम की खेती मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। मौसम अनुकूल रहने पर अच्छी पैदावार से किसानों की आय दोगुनी होने की प्रबल उम्मीद है। घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिले के सभी विकासखंडों के 37 ग्रामों के 194 कृषकों ने पहली बार नवीन तिलहन फसल के रूप में कुसुम का प्रदर्शन लिया है। भविष्य में कुसुम की खेती के विस्तार हेतु बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कुल कृषकों में से 79 कृषकों ने 101 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन हेतु बीज निगम में पंजीयन कराया है। इससे आने वाले समय में जिले के किसानों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत बीज प्राप्त हो सकेंगे। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेतों का नियमित निरीक्षण और कीट प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है। बालोद जिले के किसानों का यह सामूहिक प्रयास अब आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
- 0- दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में पहुंच रही बस, सफर हुआ आसानरायपुर। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने ग्रामीण अंचलों में परिवहन व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित बस सेवा योजना अंतर्गत दूरस्थ जनजातीय गांवों को जिला एवं विकासखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली 4 नई बस सेवाओं की शुरुआत की गई है। पहले कई गांव ऐसे थे जहाँ नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं थी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी, पैदल या महंगे निजी साधनों से तय करनी पड़ती थी। किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई होती थी। लेकिन बस सेवाओं के संचालन से ग्रामीणों को सुरक्षित, सुलभ परिवहन सुविधा मिल रही है। विद्यार्थी अब समय पर स्कूल और कॉलेज पहुंच पा रहे हैं। किसान अपनी उपज सीधे बाजार तक ले जा पा रहे हैं। श्रमिकों और व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। राजपुर, रामानुजगंज, शंकरगढ़, वाड्रफनगर के अनेक गांव अब सीधे बस सेवा से जुड़ गए हैं। इससे ग्रामीणों के समय की बचत हो रही है।रामानुजगंज से मर्मा जा रही नगोई बाई अपने पुराने दिनों को साझा करते हुए बताती है कि पहले कही जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था या महंगे साधन लेना पड़ता था। अब बस सेवा से परिवहन करना आसान हो गया है। राजपुर से नरसिंहपुर जा रही महिला श्रीमती श्यामा ने कहा कि अब अस्पताल, बाजार या अन्य जरूरी कामों के लिए हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। बस सेवा से हमारी जिंदगी काफी आसान हो गई है।रामानुजगंज से लोधा जा रहे दशरथ मरावी का कहना है कि पहले परिवहन सुविधा न होने के कारण गांव से बाहर जाने में परेशानी होती थी। लेकिन अब बस संचालन से हम आसानी से विकासखण्ड एवं जिला मुख्यालय तक पहुंच जाते हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। योजना के माध्यम से उन्हें निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो गई है।मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत जिले में 4 बस सेवाएं प्रदान की गई है। सुदूर वंनांचलों में रहने वाले लोगों के आवागमन सुविधा से सहुलियत मिल रही है। इसके लिए जिले में 4 मार्गों का चयन किया गया है। जिसके अंतर्गत राजपुर से नरसिंहपुर (व्हाया, राजपुर, परसागुड़ी, चिलमा कला, नरसिंहपुर)।इसी प्रकार रामानुजगंज से भीतरचुरा (व्हाया रामचन्द्रपुर, बाहरचुरा, चरगढ़, चेरवाडीह, भीतरचुरा) एवं शंकरगढ़ से पटना (व्हाया पटना, जगिमा, डीपाडीहखुर्द, हरगावां, घुघरीखुर्द, चलगली, शंकरगढ़) तथा रामानुजगंज से वाड्रफनगर (व्हाया छतवा, लोधा, डाटम, बाहरचुरा, विमलापुर, डिण्डो, सलवाही, कसरईया, गोबरा, फुलीडुमर) में बस परिवहन सेवा शुरू की गई। ग्रामीण बस सेवा शुरू होने से यात्रा करने वाले ग्रामीणों को अब अधिक सुगम, सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल रही है।मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम कर सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। जो समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है और ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में विकास को नई गति मिल रही है और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना अंतर्गत ग्रामीण परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होने से गांव और शहर के बीच की दूरी कम हुई है और लोगों का जीवन आसान हुआ है।
- 0- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की मेहनत से खत्म हुआ जल संकट0- पानी के लिए नहीं भटकेंगे ग्रामीण, 117 घरों में पहुंचा अमृतरायपुर। कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम लखापाल में विकास की वह रोशनी पहुंची है, जिसकी यहां वर्षों से प्रतीक्षा थी।जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार पानी के लिए बोरिंग, कुएं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर इतना नीचे चला जाता था कि ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को कई बार दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था। समय और मेहनत के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी लगातार बना रहता था।सुकमा जिले के कार्यपालन अभियंता श्री विनोद कुमार राम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकी स्थापित की गई। इसके माध्यम से गांव में 117 घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। गांव की कुल जनसंख्या 465 है, और अब हर परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।गांव की महिला श्रीमती लखे तेलाम भावुक होकर बताती हैं कि पहले पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था। कई बार मौसमी बीमारी हो जाती थी। महुआ बीनकर लौटने के बाद पानी लेने जाना बहुत मुश्किल होता था। अब नल से घर में ही दिनभर पानी मिलता है। हम बहुत खुश हैं। शासन की योजना बहुत अच्छी है। उनकी बातों में केवल राहत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की उम्मीद झलकती है।गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं कि पहले लखापाल में भय का माहौल था। हमारा गांव पहले नक्सल समस्या से प्रभावित था। लोग ख़ौफ़ में जीते थे। बिजली, पानी और सड़क की समस्या थी। गांव में पहले नक्सलियों की मीटिंग होती थी। गांववालों से पैसा और चावल-दाल जमा कराया जाता था। लेकिन अब बदलाव आ गया है। अब पंचायत की मीटिंग ग्राम विकास के लिए होती है। बिजली, पानी, राशन और सड़क की सुविधा मिल रही है।” उनके शब्द साफ कहते हैं अब गांव में डर नहीं, विकास की चर्चा होती है।जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद लखापाल में सिर्फ पानी की सुविधा नहीं आई, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। अब जलजनित बीमारियों में कमी आई है और स्वच्छ पेयजल के कारण ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।नल जल योजना से पानी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खेती और बाड़ी की ओर कदम बढ़ाया है। अब गांव के लोग अपने घर के आसपास टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगा रहे हैं। इससे न केवल घर में सब्जी की व्यवस्था हो रही है, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने का खर्च भी बच रहा है।कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाकर विकास की रोशनी हर क्षेत्र तक पहुंचाई जाएगी।*ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक हुआ है।जल जीवन मिशन ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है। आज लखापाल गांव केवल पानी की सुविधा नहीं पा रहा बल्कि वह भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।--
- 0- दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडलरायपुर। दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी।द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है।इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं।अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं।इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।
- रायपुर । प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिला अब अपनी समृद्ध पुरातात्विक धरोहर के कारण भी विशेष पहचान बना रहा है। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में मिले आदिमकालीन शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव जीवन की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। यह स्थल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत आकर्षक बनता जा रहा है।ग्राम पंचायत डड़गांव के आश्रित ग्राम जयमरगा की आबादी लगभग 1400 है और यहां तक सड़क मार्ग से सहज पहुंचा जा सकता है। गांव से लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर चढ़ाई करने के बाद गढ़पहाड़ की इस प्राकृतिक गुफा तक पहुंचा जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित यह गुफा आज भी स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं।पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की एवं श्री बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पहाड़, जंगल और नदी की उपलब्धता के कारण प्राचीन मानव के लिए भोजन, पानी और आश्रय की समुचित व्यवस्था रही होगी। इसी कारण यह क्षेत्र आदिमानवों के निवास का प्रमुख केंद्र रहा प्रतीत होता है।गुफा में प्राप्त शैलचित्र मध्य पाषाण काल से संबंधित माने जा रहे हैं। इन चित्रों में मानव आकृतियों के साथ-साथ पशु आकृतियाँ, ज्यामितीय आकृतियाँ तथा कुछ रहस्यमयी आकृतियाँ भी अंकित हैं। लाल एवं सफेद रंगों से बनाए गए ये चित्र उस समय की कलात्मक अभिव्यक्ति और जीवन शैली को दर्शाते हैं। विशेष रूप से बैल, तेंदुआ, हिरण और मानवविशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा संभवतः प्राचीन काल में पहरेदारी स्थल के रूप में प्रयुक्त होती रही होगी, जहां से शिकारी वन्यजीवों पर नजर रखते थे। यहां हेमाटाइट पत्थर की उपलब्धता भी पाई गई है, जिसका उपयोग रंग बनाने में किया जाता था। इसके अतिरिक्त, स्थल से माइक्रोलिथिक उपकरण जैसे लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड भी प्राप्त हुए हैं, जो उस समय के मानव द्वारा शिकार एवं दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे। गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किए जाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के इस अद्भुत साक्ष्य से परिचित हो सकें।--
- 0- शुगरबीट की किस्म एलएस-6 की खेती एवं गन्ना के साथ अंतफसली पर अनुसंधान प्रारंभ0- किसानों के आय बढ़ाने में होगी सहायकरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि एवं जैव ईंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पहली बार राज्य में सफेद चुकंदर (शुगरबीट) के किस्म एलएस-6 की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ गन्ना की फसल के साथ अंतफसली प्रणाली पर एक संयुक्त अनुसंधान परियोजना प्रारंभ की गई है।यह परियोजना छत्तीसगढ़ जैव ईंधन विकास प्राधिकरण, रायपुर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ एवं राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के संयुक्त सहयोग से संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम में डॉ सीमा परोहा निदेशक, डॉ लोकेश बाबर, सहायक आचार्य (कृषि रसायन), राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर एवं श्री सुमित सरकार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्री संतोष कुमार मैत्री, सहायक परियोजना अधिकारी, छत्तीसगढ़ जैव ईंधन प्राधिकरण, रायपुर, द्वारा सयुंक्त रूप से कार्य किया जा रहा है।उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सफेद चुकंदर से बायो-एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं, उसकी आर्थिक व्यवहार्यता तथा किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना है। साथ ही, गन्ना के साथ शुगरबीट की अंतफसली प्रणाली के माध्यम से एक ही भूमि पर दो फसलों का उत्पादन कर किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।गन्ना एक दीर्घकालीन फसल है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में खेत का कुछ हिस्सा खाली रहता है। इस खाली स्थान का उपयोग सफ़ेद चुकुन्दर जैसी अल्पकालीन फसल (6 माह) के लिए किया जा सकता है, जिससे किसानों को गन्ने के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। यह मॉडल किसानों के लिए अतिरिक्त आय स्रोत, भूमि की बेहतर उपयोगिता तथा जैव ईंधन क्षेत्र के लिए वैकल्पिक कच्चा माल उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो सकता है। यह पहल छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलते हुए राज्य को जैव ईंधन क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- 0- देशभर में बढ़ रही मांग, बेंगलुरु से कारगिल तक पहुंच रहा सुगंधित चावल0- प्राकृतिक खेती और बेहतर विपणन से किसानों को मिल रहा लाभ0- राज्य सरकार की किसान हितैषी नीति और फैसलों से किसानों में उत्साह का माहौल0- लैलूंगा में जंवाफूल की खेती 700 एकड़ से बढ़ाकर 2000 एकड़ तक करने का लक्ष्यरायपुर। रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां-दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक, इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें।--
- 0- वन विकास निगम ने बीट स्तर पर किया सघन सर्वे, डिजिटल तकनीक का किया उपयोगरायपुर. वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल, जगदलपुर में ‘अखिल भारतीय बाघ आंकलन 2026’ के अंतर्गत फील्ड स्तर का सर्वे कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस दौरान निगम के अमले ने अपने प्रबंधन वाले वन क्षेत्रों में बीट स्तर पर व्यापक सर्वे अभियान चलाया। सर्वे कार्य वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर किया गया। मैदानी कर्मचारियों ने प्रत्येक बीट में ट्रेल और ट्रांसेक्ट सर्वे के माध्यम से वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की।लाइन ट्रांसेक्ट सर्वे के तहत निर्धारित लाइनों पर पैदल चलकर शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या, घनत्व और उनके निवास क्षेत्र की गुणवत्ता का आकलन किया गया। ट्रेल सर्वे के अंतर्गत वन क्षेत्रों की पगडंडियों और जलस्रोतों के आसपास बाघ, तेंदुआ सहित अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष साक्ष्यों का निरीक्षण किया गया। इसमें पगमार्क, मल (स्कैट) और पेड़ों पर खरोंच के निशानों का अध्ययन शामिल रहा। इस पूरे अभियान में आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग किया गया। सभी जानकारी को M-STrIPES ऐप के माध्यम से रियल टाइम में दर्ज किया गया, जिससे डेटा की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित हुई।वन विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार, औद्योगिक वृक्षारोपण क्षेत्रों में सागौन सहित अन्य प्रजातियों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही से जुड़े आंकड़े भविष्य की संरक्षण और प्रबंधन योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होंगे। यह सर्वे यह भी दर्शाता है कि वन विकास निगम के अधीन क्षेत्र केवल व्यावसायिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।फील्ड स्तर पर डेटा संग्रहण पूर्ण होने के बाद अब इसे अंतिम विश्लेषण के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार के आंकलन में जगदलपुर क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या और विविधता में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिला l
- 0- वन विकास निगम की गश्त से मिली सफलतारायपुर। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अतिक्रमण और उत्खनन पर रोक लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रबंध संचालक के निर्देश पर सभी परियोजना मंडलों में नियमित गश्त और निगरानी की जा रही है, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है।इसी क्रम में कोटा परियोजना मंडल, बिलासपुर की टीम ने गश्त के दौरान बड़ी कार्रवाई की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर भैंसाझार परिक्षेत्र के बछाली बीट में ग्राम नवापारा और उमरमरा के बीच सड़क मार्ग पर एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की गई। जांच के दौरान वाहन में साल प्रजाति की 27 नग लकड़ी (चिरान/चौखट) अवैध रूप से परिवहन करते हुए पाई गई। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जितो प्लस पिकअप वाहन (क्रमांक CG-10BL-4663) को जब्त कर लिया।इस मामले में वाहन चालक रघुवीर कश्यप के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 41(2) (ख) और धारा 52 के तहत वन अपराध दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर और मंडल प्रबंधक कोटा के मार्गदर्शन में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में की गई। टीम में सहायक क्षेत्रपाल, क्षेत्ररक्षक एवं अन्य वन कर्मचारी शामिल रहे।वन विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार ने इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए टीम को बधाई दी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इसी तरह सतर्क रहकर वन सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि आगामी गोपनीय प्रतिवेदन में वन संरक्षण और सुरक्षा में कर्मचारियों के योगदान को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा l--
- 0- शकुन बाई ने अपनी बाड़ी में उगाए गए मुनगा (सहजन) को कलेक्टर को भेंट किया तथा पारंपरिक ‘मड़िया पेय’ से आत्मीय स्वागत0- कलेक्टर ने शकुन बाई की सराहना करते हुए इसे जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोतधमतरी। धमतरी विकासखंड के ग्राम उरपुटी की कृषक श्रीमती शकुन बाई कुजांम आज उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए नवाचार और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, लगन और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।शकुन बाई के पास कुल 7 एकड़ कृषि भूमि है, जो ट्यूबवेल से सिंचित है। उनके पास ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्टी क्रॉप थ्रेसर एवं रीपर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध हैं। उनके परिवार के 5 सदस्य खेती में सक्रिय सहयोग करते हैं, जिससे कृषि कार्य व्यवस्थित ढंग से संचालित हो पाता है।रबी सीजन में शकुन बाई ने 3 एकड़ क्षेत्र में लघु धान्य फसल रागी (छत्तीसगढ़ रागी-2) की खेती की। उन्होंने बीजोपचार के लिए बीजामृत, तथा खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी एवं केएसबी का उपयोग किया। वैज्ञानिक विधियों से की गई खेती के परिणामस्वरूप उन्हें 28.50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ।कुछ वर्ष पहले बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत रागी की खेती से उन्हें 5200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 1,48,200 रुपये की आय हुई। इस उत्पादन में कुल लागत 27,000 रुपये रही, जिससे उन्हें 1,21,200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह उनकी मेहनत और उन्नत कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष परिणाम है।कृषि विभाग द्वारा संचालित ‘आत्मा’ (ATMA) कार्यक्रम के तहत उन्हें निरंतर मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन और लघु धान्य फसलों की खेती को सफलतापूर्वक अपनाया। फसल कटाई के बाद वे ग्रीष्मकालीन जुताई भी करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।इस प्रेरक सफलता की जानकारी मिलने पर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा आज स्वयं शकुन बाई के घर पहुंचे और उनकी खेती-किसानी के संबंध में बातचीत की । उन्होंने शकुन बाई की सराहना करते हुए इसे जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इस अवसर पर शकुन बाई ने अपनी बाड़ी में उगाए गए मुनगा (सहजन) को भेंट स्वरूप प्रदान किया तथा पारंपरिक पत्तल-दोना में ‘मड़िया पेय’ से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। यह ग्रामीण संस्कृति और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण रहा। इस अवसर पर एसडीएम श्री पीयूष तिवारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।शकुन बाई की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय करें, तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। उनकी सफलता न केवल उनकी आर्थिक सुदृढ़ता का आधार बनी है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक नई दिशा और प्रेरणा का स्रोत बनी है।--
- 0- आर्थिक सहायता मिलने से हेमा सिंग बनीं आत्मनिर्भर0- आर्थिक सहायता मिलने से हेमा सिंग बनीं आत्मनिर्भरपेंड्रा। महिलाओं के साथ असमानता को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार लाने, आर्थिक स्वावलंबन तथा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कृत संकल्पित है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, परिवार में उनकी निर्णय लेने की भूमिका को सुदृढ़ करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा महतारी वंदन योजना लागू की गई है। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी, जिसे मलिाओं ने इसे एक अवसर के रूप में देखा और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने उपयोग करने लगी। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के छोटे से ग्राम मझगंवा की श्रीमती हेमा सिंग की कहानी आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली हेमा सिंग ने आज अपने आत्मविश्वास और सरकारी योजना के सहयोग से अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। जिसे हेमा सिंग ने इसे एक अवसर के रूप में देखा। हेमा सिंग ने इस राशि को बचाकर अपने घर के पास एक छोटा सा किराना स्टोर शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी दुकान चल निकली। गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा करते हुए उनका व्यवसाय बढ़ने लगा और आय में भी स्थिरता आने लगी। आज उनकी दुकान न सिर्फ उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बनी है, बल्कि उनके परिवार के जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव लाई है। हेमा सिंग अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं और भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं।पहले जहां रोजमर्रा के खर्चों को लेकर चिंता बनी रहती थी, वहीं अब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष साफ नजर आता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को लगातार आर्थिक मजबूती मिल रही है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में नई आशा और अवसर लेकर आया है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अपनी सफलता का श्रेय देते हुए हेमा सिंग कहती हैं कि महतारी वंदन योजना उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को आभार व्यक्त किया और कहा कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।--

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