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- - दुर्ग जिले के पांच गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम प्रारंभदुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा), नई दिल्ली द्वारा जारी “मुकदमे-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में सामुदायिक मध्यस्थता” मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के पांच ग्रामों घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है।इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालय पहुंचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में निराकरण सुनिश्चित करना है। सामुदायिक मध्यस्थता की इस व्यवस्था से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहायता मिलेगी, बल्कि गांवों में सामाजिक समरसता, भाईचारा एवं आपसी विश्वास को भी मजबूती प्राप्त होगी।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा चिन्हांकित इन ग्रामों में सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, पैरामलीगल वालंटियर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीण नागरिकों को मध्यस्थता की प्रक्रिया एवं उसके लाभों से अवगत कराया जाएगा।सामुदायिक मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली है, जिसमें पक्षकारों की स्वैच्छिक सहभागिता एवं आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान किया जाता है। यह प्रक्रिया सरल, त्वरित, कम खर्चीली तथा संबंधों को बनाए रखने वाली व्यवस्था के रूप में ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे विवादों के समाधान हेतु संवाद एवं मध्यस्थता की संस्कृति को अपनाएं तथा ग्राम स्तर पर शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएं। यह पहल वाद-मुक्त ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण समाज में स्थायी शांति एवं सामाजिक एकता को बढ़ावा देगी।
- दुर्ग ।बाल सक्षम नीति 2022 के अंतर्गत 1 जून से 30 जून 2026 तक सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के स्थायी रेस्क्यू एवं पुनर्वास के उद्देश्य से जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों में अभियान चलाकर सड़क पर रहने, घूमने तथा भिक्षावृत्ति, बाल श्रम में संलग्न बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में आज जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री राजकुमार जांबुलकर एवं जिला महिला बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू (महिला एवं बाल विकास विभाग) के नेतृत्व में आईसीपीएस एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम द्वारा बाल सक्षम नीति 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मार्केट और आस-पास के स्थानों पर बाल सक्षम नीति 2022 के विषय में सभी नागरिकों को जागरूक किया गया। साथ ही किसी प्रकार के आपात समय मे बालक /बालिका की सुरक्षा व सुरक्षित रेस्क्यू सहायता हेतु टोल फ्री नंबर 1098/112 मे कॉल करने की जानकारी प्रदान की गई।
- दुर्ग / दुर्ग संभाग में खेत बचाओ अभियान अंतर्गत ग्राम खैरझिटी में विगत दिनों आयोजित कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य जाँच कराने, नील हरित शैवाल, हरी खाद, जैव उर्वरक, जीवामृत आदि जैविक खादों तथा जैविक कीटनाशकों के उपयोग से टिकाउ खेती करने की सलाह दी गई। डी.ए.पी. उर्वरक के स्थान पर एस.एस.पी. व टी.एस.पी. नैनो डी.ए.पी. के उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन लेने की समझाइश दी गई।संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल से प्राप्त जानकारी अनुसार विगत खरीफ में धान फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्हांेने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 15 हजार रुपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि दिए जाने के निर्णय एवं खरीफ वर्ष 2026 में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषको को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 10 हजार रूपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि से किसानों को अवगत कराते हुए, उन्हें उच्चहन धनहा खेतों के मेड़ पार को समतल कर दलहन, तिलहन, मक्का फसल लगाने हेतु अपील की गई। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना के तहत सरकार द्वारा खरीफ 2026 में भी दलहन व तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इसकी जानकारी भी किसानो को दी गई। साथ ही समस्त मैदानी अमलों की जिला मुख्यालय में बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। तथा खरीफ 2026 हेतु किसानो की मांग अनुरूप गुणवत्ता युक्त खाद-बीज एवं अन्य कृषि आदानो की समय में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सहकारी समितियों मे पर्याप्त मात्रा में भंडारण एवं निर्धारित मूल्य पर त्वरित वितरण करने के निर्देश दिये गये।विभागीय योजना अंतर्गत उन्नत कृषि तकनीकी से संबंधित फसल प्रदर्शनो के आयोजन हेतु समय-सीमा में उपयुक्त किसानो और प्रदर्शन प्रक्षेत्र का चयन करने तथा गुणवत्तापूर्ण आदान सामग्री की व्यवस्था करने निर्देशित किया गया। योजना के प्रावधान अनुसार फसल प्रदर्शनो का आयोजन नहीं किये जाने संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधितो के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही के लिये तैयार रहने संचेत किया गया। श्रीमती गबेल द्वारा सभी जिले के उपसंचालक कृषि और प्रक्रिया प्रभारी (बीज निगम) को किसानों की मांग अनुसार दलहन, तिलहन के बीज उपलब्ध कराने निर्देशित किया गया है।इस वर्ष अलनीनो प्रभाव के कारण वर्षा में कमी को देखते हुए वैकल्पिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश सभी जिला उपसंचालक कृषि को दिए गए। अल्प वर्षा के दृष्टिगत शीघ्र और मध्यम अवधि के धान के किस्मो को बढ़ावा देने, धान के नमक घोल से बीज शोधन कर पुष्ट बीज का चयन करने, बीज को फफूंदनाशी और जैव उर्वरको से बीजोपचार करके बुआई करने, नैनो डी.ए.पी. से बीज उपचार या रोपा के जड़ का उपचार, धान फसलो की कतार विधि से सीधी बोनी, दलहन-तिलहन के रिज-फरो विधि से बोनी को बढ़ावा देने के निर्देश समस्त मैदानी अमलो को दिया गया। सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुये विभिन्न तकनीको के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण ओर भू-जल संवर्धन हेतु जागरूता लाने निर्देशित किया गया। खेत के मेंडो पर अरहर, तिल और कडुवे पत्तो वाले पेड़-पौधो को लगाकर वानस्पतिक अवरोध तैयार कराने की समझास दी गई ताकि एक खेत से दूसरे खेत में कीट व्याधि के प्रसार को कम किया जा सके।
- दुर्ग / आगामी मानसून 2026 को देखते हुए बाढ़ आदि नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने हेतु छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के परिपालन में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिला, अनुभाग व तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की हैं। साथ ही जिला कार्यालय दुर्ग के कक्ष क्रमांक 30 में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जिसका दूरभाष नं. 0788-2320601 है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला स्तर पर अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अनुविभाग स्तर पर दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री हरवंश मिरी, धमधा के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री सोनल डेविड, भिलाई-03 के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री महेश सिंह राजपूत और पाटन के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री लवकेश ध्रुव को जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में तहसील स्तर पर तहसीलदार दुर्ग श्री प्रफुल्ल कुमार गुप्ता, तहसीलदार धमधा श्रीमती मीना साहू, तहसीलदार पाटन श्री पवन ठाकुर, तहसीलदार अहिवारा श्री राधेश्याम वर्मा, तहसीलदार बोरी श्री टी.एस. खरे और तहसीलदार भिलाई-03 श्री रवि विश्वकर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- -सीएम हेल्पलाइन, सुशासन तिहार तथा समय-सीमा के प्रकरणों की हुई विभागवार समीक्षाबालोद। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि विभिन्न विभागों में आमजनों से प्राप्त हो रहे आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। जिससे कि जिलेवासियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं। बैठक में आमजनों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने हेतु शुरू किए गए सीएम हेल्पलाइन के जिले में बेहतर क्रियान्वयन हेतु सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ ही सीएम हेल्पलाइन के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक एवं श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर श्री आशीष पेंद्रो सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का निर्धारित समयावधि में लाभ उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का गुणवत्तायुक्त ढंग से निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन सेंटर सप्ताह के सातों दिन एवं 24 घण्टा संचालित रहेगा। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 एवं 18002333300 के अलावा वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप जैसे आधुनिक माध्यमों में से किसी भी एक माध्यम से किसी भी समय आसानी से अपना शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सीएम पोर्टल में शिकायत दर्ज होने के साथ ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी। जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता को उनके शिकायत से संबंधित विभाग, अधिकारी के पास लंबित होने की जानकारी तथा कार्यवाही की प्रक्रिया के अलावा समाधान में लगने वाले समय आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। समय-सीमा की बैठक में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की गई तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में समय-सीमा के लंबित प्रकरणों, सीएम जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन, पीजीएन अंतर्गत लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई।
- कलेक्टर ने आमजनों को सीड बाल प्रदान कर अभियान का किया शुभारंभबालोद ।बालोद को हरा-भरा बनाने जिला प्रशासन की अनूठी पहल मिशन अंकुर की शुरूआत सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के जनदर्शन कक्ष में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने की। उन्होंने जनदर्शन में पहुॅचे लोगों से मुलाकात कर उन्हें सीड बाल प्रदान कर खाली जगहों में सीड बाल फेंकने प्रोत्साहित भी किया। शुभारंभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, जिला पंचायत के सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।सीड बॉल मिट्टी, खाद और विभिन्न उपयोगी वृक्षों के बीजों को मिलाकर बनाई गई एक छोटी सी गेंद होती है। इसे रोपने के लिए गड्ढा खोदने की आवश्यकता नहीं होती। इसे हाई ट्रेंच, जंगल, खाली जमीनों, पहाड़ियों या बंजर इलाकों में फेंक दिया जाता है। मानसून की बारिश पड़ते ही यह अंकुरित होकर एक पौधे का रूप ले लेती है।मिशन अंकुर के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रजातियां (जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि) के बीजो का उपयोग कर सीड बाॅल का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत स्व-सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा 02 लाख 50 हजार नग एवं वन विभाग के द्वारा 01 लाख नग कुल 03 लाख 50 हजार नग सीड बाॅल बनाया गया है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने पानी के महत्व की जानकारी दी तथा पानी का सदुपयोग करने प्रेरित किया तथा पानी के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु सोखता गढ्ढा, रैन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष सभी के सहयोग से जिले में 03 लाख 50 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इस वर्ष भी जिले को हरभरा बनाने की सोंच को आगे बढ़ाते हुए 02 लाख 25 हजार से अधिक टेंªच का निर्माण किया गया है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि हमारे पास विभिन्न फलों जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि के बीज रहते हैं, उसे हमें सुखाना है और मिट्टी से लपेट कर एक सीड बाल का रूप देना है, तथा खाली स्थानों पर उसे फेंकना है। जिससे वह बाल बारिश के पानी को सोखकर अंकुरित हो सकेगा और पौधे का रूप ले पाएगा। उन्होंने स्वसहायता समूह की दीदीयों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से सीड बाल तैयार किया गया है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जनदर्शन में पहुंचे लोगों को सीड बाल प्रदान कर उन्हें जिले को हरभरा बनाने मंे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने प्रोत्साहित भी किया।शुभारंभ कार्यक्रम को पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल और दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल ने भी संबोधित कर लोगों को पेड़ का महत्व बताते हुए सीड बाल के माध्यम से जिले को हराभरा बनाने प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि हम दो तरह से पेड़ उगा सकते हैं। जिसमें एक तरीका है पौधे लगाना, तो वहीं दुसरा तरीका है फलों के बीज को सीड बाल बनाकर रोपना, जिससे वह बारिश के पानी में अंकुरित होकर पौधे और पेड़ का रूप ले लेता है। इस अवसर पर बिहान दीदी और जनदर्शन में पहुंचे लोग मौजूद थे।
- भिलाईनगर। शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर जोन-1 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 10 लक्ष्मी नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया।प्लास्टिक मुक्त अभियान के दौरान फल ठेलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अनुज्ञप्ति लाइसेंस की जांच की गई तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर चालानी कार्रवाई की गई। निरीक्षण में कुल 15 प्रतिष्ठान/ठेलों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिन पर जुर्माना लगाया गया। कई फल ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक पाए जाने पर 50 से 100 रुपए तक का जुर्माना लगाया गया। कुल 11 फल/सब्जी ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के लिए चालान किया गया। एक जूते वाले एवं एक रेडीमेड दुकान पर अनुज्ञप्ति लाइसेंस न होने/नियम उल्लंघन के कारण 500- 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। सोनू चौहान, किशन, राहुल सोनकर, विक्की, छोटू सोनकर, सुजीत, सुनील, जोगिंदर, उमेश साह, लगन देवी, अजय, गणेश सहित अन्य दुकानदारों पर कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 2120 रुपए की राशि चालानी कार्रवाई के रूप में वसूली गई। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिक निगम भिलाई की टीम ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
- एमसीबी/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) द्वारा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 19 जून 2026 (दिन- शुक्रवार) को रोजगार मेला/प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्रातः 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक जिला रोजगार कार्यालय, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित होगा। रोजगार मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा भर्ती की जाएगी। इसमें Parisharam Human Resources Pvt. Ltd. द्वारा मीटर इंस्टॉलेशन पद हेतु 100 रिक्तियां (वेतन 15,000 से 20,000 रुपये), LIC अंबिकापुर द्वारा इंश्योरेंस एडवाइजर पद हेतु 50 रिक्तियां (कमीशन आधारित), Little Millennium Pre School मनेन्द्रगढ़ द्वारा टीचर पद हेतु 3 रिक्तियां (वेतन 5,000 से 6,000 रुपये) तथाAlekh Public School सिरौली द्वारा सिक्योरिटी गार्ड पद हेतु 1 रिक्ति उपलब्ध है।प्लेसमेंट कैंप पूर्णतः निःशुल्क है। इच्छुक अभ्यर्थियों को https://erojgar.cg.gov.in अथवा CG Rojgar Panjiyan App के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपने साथ शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा पासपोर्ट साइज फोटो लेकर निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होना होगा।
- रायपुर। बदलते तकनीकी दौर में महिला उद्यमियों को आधुनिक साधनों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवा बिहान क्लस्टर में आयोजित डिजिटल साक्षरता कार्यशाला ने महिलाओं को ऑनलाइन विपणन, ब्रांड निर्माण और इंटरनेट आधारित व्यापार की नई संभावनाओं से परिचित कराया गया।कार्यशाला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और महिला संचालित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी देकर उनके उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उत्पाद पहचान निर्माण, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, ऑनलाइन विक्रय मंचों तथा बाजार से जुड़ने के विभिन्न तरीकों की व्यवहारिक जानकारी दी।वसुंधरा यादव ने कहा कि महिला उद्यमिता केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत आधारशिला है। उन्होंने महिलाओं को तकनीकी ज्ञान का अधिकाधिक उपयोग कर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में सफल महिला उद्यमियों के अनुभव साझा किए गए और प्रतिभागियों को ग्राहक नेटवर्क विकसित करने, ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग बढ़ाने तथा व्यवसाय विस्तार की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने सरकारी सहायता, अनुदान योजनाओं और विपणन सहयोग कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई, जिससे महिलाएं अपने उद्यमों को और मजबूत बना सकें।जिले के विभिन्न क्षेत्रों से शामिल करीब 30 महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे।
- -प्रति एकड़ 6.50 लाख रुपये तक शुद्ध लाभरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का असर अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम लोहारडीह निवासी प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत आय वृद्धि का उदाहरण है, बल्कि राज्य में कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरी है। एम.टेक. तक शिक्षित श्री चंद्राकर पूर्व में अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मुख्यतः धान की खेती करते थे। परंतु अधिक जल उपयोग, बढ़ती उत्पादन लागत तथा सीमित लाभ के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कृषि में नवाचार और उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने का निर्णय लिया।वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में सहभागिता की। इस योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की डीबीटी आधारित अनुदान सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्हें तकनीकी खेती अपनाने में प्रारंभिक सहयोग मिला। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुरूप उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती प्रारंभ की। आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग से न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी स्वीकार्यता भी बेहतर हुई।किसान चंद्राकर के अनुसार, पारंपरिक धान खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का सीमित लाभ प्राप्त होता था, जबकि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री के परिणामस्वरूप कुल आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। सभी कृषि लागतों,जिसमें श्रम, इनपुट सामग्री एवं अन्य व्यय शामिल है,को घटाने के पश्चात उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उनकी सफलता के बाद क्षेत्र के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों, विशेषकर ग्राफ्टेड सब्जियों, ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यह बदलाव जिले में कृषि विविधीकरण और जल संरक्षण आधारित खेती को नई दिशा प्रदान कर रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के प्रदर्शन कार्यक्रमों से किसानों में तकनीकी जागरूकता बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
- -अब तक जिले की 46 ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां पोर्टल पर दर्जरायपुर। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को पूर्ण हो गया है। इस दौरान सरगुजा जिले में प्राचीन ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियां प्रकाश में आई हैं, जिनका डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर में दो संरक्षकों के पास संरक्षित महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया। बिलासपुर चौक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के संग्रह में संवत् 1866 में लिखित वनदुर्गा महात्म्य की एक दुर्लभ पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इसके साथ ही तत्कालीन सरगुजा महाराज को संबोधित भूमि संबंधी एक आवेदन पत्र भी मिला, जो स्वतंत्रता पूर्व काल का बताया गया है। डॉ. पाठक ने जानकारी दी कि यह पत्र उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था और वर्षों से सुरक्षित रखा गया है।अम्बिकापुर नगर में वनदुर्गा पर आधारित कई महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां पूर्व में भी प्राप्त हो चुकी हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती हैं। पाण्डुलिपियों का अवलोकन करते हुए नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप ने कहा कि यह अभियान हमारी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इससे वर्तमान और भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक धरोहरों को समझने का अवसर मिलेगा। सर्वेक्षण के दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल एवं जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र उपस्थित रहे। श्रीमती अग्रवाल ने स्वयं पाण्डुलिपियों के डिजिटल अपलोड की प्रक्रिया में सहभागिता निभाई। इसी क्रम में बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री वेणुधर सिंह के पास महामाया विजयोत्सव वंदना नामक एक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इस पाण्डुलिपि में महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव तथा महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर की विरुदावली का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके लेखक और लेखन काल का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत देशभर में अब तक एक करोड़ आठ लाख से अधिक पाण्डुलिपियों का जियो-टैगिंग और दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। वहीं सरगुजा जिले में 13 संरक्षकों के पास सुरक्षित 46 पाण्डुलिपियों को ज्ञानभारतम पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड किया गया है। सर्वेयर श्री गौरव पाठक द्वारा नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल की उपस्थिति में पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग का कार्य संपन्न कराया गया। यह अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है।
- -नवीन तहसील एवं अनुविभागीय कार्यालय भवनों से नागरिकों को मिल रही बेहतर राजस्व सेवाएंरायपुर। कोरबा जिले में राजस्व प्रशासन को अधिक सक्षम एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नवीन तहसील एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, कोरबा द्वारा निर्मित इन आधुनिक भवनों में अधिकांश स्थानों पर नियमित कार्यालयीन कार्य प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण एवं अधोसंरचना मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में कोरबा जिले के लिए 5 नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा 1 अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन के निर्माण हेतु कुल 4 करोड़ 3 लाख 63 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस स्वीकृति के अंतर्गत भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान एवं अजगरबहार में नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा पाली में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया है।वर्तमान में भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान तथा पाली स्थित नवीन भवनों में नियमित रूप से कार्यालयीन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन भवनों के उपयोग में आने से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त हुआ है, वहीं आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक व्यवस्थित, सुगम और सुविधाजनक रूप से उपलब्ध हो रही हैं। अजगरबहार तहसील कार्यालय भवन का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में विद्युत कनेक्शन से संबंधित औपचारिकताएं प्रक्रियाधीन हैं। विद्युत लाइन जोड़ने एवं भवन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होते ही वहां भी कार्यालयीन कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे, जिससे क्षेत्रवासियों को स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य संपादित कर प्रशासनिक अधोसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। नवीन कार्यालय भवनों के संचालन से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा शासकीय सेवाओं की दक्षता एवं प्रभावशीलता में वृद्धि हुई है। साथ ही नागरिकों को उनके निकटतम क्षेत्र में राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है।
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-समय पर पहचान और बेहतर रेफरल व्यवस्था से रोगियों को मिलेंगी अधिक समग्र स्वास्थ्य सेवाएं
रायपुर । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा PATH एवं The Bristol Myers Squibb Foundation के सहयोग से टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण विषय पर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक का उद्देश्य टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध जांच एवं निदान तंत्र का प्रभावी उपयोग करते हुए फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान एवं देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।बैठक में राज्य क्षय अधिकारी एवं उप संचालक (एनसीडी) डॉ. संजीव मेश्राम तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर डॉ. मिथलेश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं बिलासपुर के प्रतिनिधियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों तथा टीबी एवं गैर-संचारी रोग ( NCD ) के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक के दौरान PATH के उप निदेशक डॉ. अजय पाटले ने टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के आकलन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध स्क्रीनिंग एवं डायग्नोस्टिक व्यवस्थाओं का उपयोग फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।अपने संबोधन में डॉ. संजीव मेश्राम ने समय पर जांच, शीघ्र पहचान एवं प्रभावी रेफरल व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं का एकीकरण किया जा सकता है, जिससे रोगियों को अधिक समग्र, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएं साझा कीं। इन सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के एकीकृत मॉडल को विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से दोनों रोगों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रबंधन तथा रोगियों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा। - -मक्का उत्पादन, जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों का समन्वय बन रहा सफलता की नई पहचानरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए किसान अब फसल विविधीकरण, जैविक पोषण प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं। राज्य शासन और कृषि विभाग द्वारा प्रोत्साहित वैज्ञानिक खेती की पद्धतियां किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इसके सकारात्मक परिणाम प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम सरगांवा के प्रगतिशील किसान श्री बिराज विश्वास ने फसल विविधीकरण और नैनो उर्वरकों के उपयोग के माध्यम से खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने पारंपरिक खेती की पद्धति में बदलाव करते हुए पिछले चार वर्षों से धान के स्थान पर मक्का उत्पादन को अपनाया है। आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से वे अपनी कृषि भूमि में वर्षभर उत्पादन लेकर बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।श्री बिराज विश्वास का मानना है कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। मक्का उत्पादन के साथ-साथ वे सब्जी खेती भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी आई है तथा उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए वे जैविक खादों का अधिक उपयोग करते हैं। गोबर खाद एवं अन्य जैविक स्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों का प्रयोग फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो रहा है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उनकी उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों को बेहतर वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक खेती की लागत कम करने, पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग को बढ़ाने तथा पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं फसल विविधीकरण किसानों को बाजार आधारित उत्पादन और जोखिम प्रबंधन के बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, जैविक खेती तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। श्री बिराज विश्वास जैसे प्रगतिशील किसानों की सफलता यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक खेती, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाया जा सकता है। उनकी पहल आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के लिए शुरू किया गया ‘सुशासन तिहार’ कइयों की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण लेकर आ रहा है। ऐसा ही एक मानवीय और प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से सामने आया है, जहाँ जिला प्रशासन की तत्परता से बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत लिमपाली निवासी संतराम चौहान के जीवन की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। संतराम चौहान पिछले कई वर्षों से पैरालिसिस (लकवा) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित होने के कारण उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं था। विडंबना यह थी कि आधार कार्ड अपडेट न होने की वजह से वे पिछले चार सालों से विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे। शारीरिक अक्षमता के कारण उनका आधार केंद्र तक पहुँच पाना पूरी तरह असंभव था।संतराम के परिवार के लिए ग्राम झाल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् एक वरदान साबित हुआ। परिवार ने शिविर में अपनी इस लाचारी को साझा करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर ने तत्काल कड़े निर्देश जारी किए। कलेक्टर के निर्देश पर ई-गवर्नेंस की टीम बिना किसी देरी के आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों और पूरे सेटअप के साथ सीधे संतराम चौहान के घर पहुँच गई।संतराम के घर पहुँचे ई-गवर्नेंस टीम के सदस्य अगस्ती भोई ने बताया कि यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। पैरालिसिस के गंभीर असर के कारण संतराम के फिंगरप्रिंट और आँखों के स्कैन (डेमोग्राफिक व बायोमेट्रिक अपडेट) लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई प्रयासों के बाद अंततः टीम को सफलता मिली। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क की कमी ने भी परीक्षा ली, लेकिन टीम की प्रतिबद्धता के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।जिला प्रशासन ने इस मौके पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार के मंशानुरूप बुजुर्गों, दिव्यांगों और शारीरिक रूप से अक्षम नागरिकों के लिए श्घर पहुँच सेवाश् सुनिश्चित की जा रही है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी उसका हक मिल सके। अब आधार अपडेट होने से संतराम चौहान के लिए शासकीय योजनाओं के द्वार खुल गए हैं। इस संवेदनशील पहल के लिए संतराम के परिवार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -बस्तर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 17 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में-टाऊन हाल में आयोजित कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने नव विवाहितों को दिया आशीर्वादरायपुर ।मुख्यमंत्री कन्या विवाह' राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित, और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना मुख्य रूप से सामूहिक विवाह के माध्यम से सम्पन्न होती है, जिससे गरीब परिवारों पर विवाह का भारी आर्थिक बोझ कम हो सके और फिजूलखर्ची पर रोक लगे।जगदलपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार (टाउन हॉल) में सोमवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक भव्य और गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मंत्रोच्चार और शहनाई की गूंज के बीच कुल 17 जोड़े सदा-सदा के लिए एक-दूसरे के साथ दाम्पत्य सूत्र में बंध गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने नवविवाहित जोड़ों के ऊपर अक्षत और पुष्प वर्षा कर उन्हें सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।इस विवाह समारोह की सबसे अनूठी और गौरवशाली विशेषता यह रही कि इसमें पुनर्वासित 2 विशेष जोड़े भी शामिल हुए। नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व नक्सली दंपत्तियों में पिलसाय सलाम संग सिरबत्ती और पतिराम संग मनाय कश्यप शामिल हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। विधायक श्री किरण सिंह देव ने इन जोड़ों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे कदमों से बस्तर में शांति और खुशहाली के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।विवाह समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि बेटियो का विवाह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारी संवेदनशील सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत विवाह हो रहा है। इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह कराना समाज का सबसे पुनीत कार्य है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।विधायक श्री देव ने कहा कि आज विवाह के बंधन में बंधे सभी 17 जोड़े एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपनी सहभागिता देंगे। इसके साथ ही यह योजना गरीब बेटियों के विवाह में होने वाले आर्थिक बोझ को कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों प्रदेश के विधायक बेमेतरा ने मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में विवाह कर सभी को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरणा दी।इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जनपद अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, नवविवाहित जोड़ों के परिजन तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
- - बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घररायपुर ।कभी मलेरिया के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाने वाले बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जिन गांवों में एक समय बरसात का मौसम आते ही मलेरिया का खतरा बढ़ जाता था, वहां अब लगातार चल रहे स्वास्थ्य अभियानों के कारण संक्रमण दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर व्यापक तैयारी के साथ ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 14वें चरण की शुरुआत 15 जून से की गई । इस अभियान के माध्यम से न केवल संभावित संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी, बल्कि मलेरिया उन्मूलन की दिशा में अब तक मिली सफलता को और आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया जाएगा।राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह अभियान इस बार बस्तर संभाग के सातों जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव के साथ-साथ गरियाबंद, कबीरधाम तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के संवेदनशील ग्रामों में संचालित किया जा रहा है । अभियान के तहत राज्य के 36 विकासखंडों के 697 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 2476 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा तथा लगभग 16.20 लाख लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।दरअसल, छत्तीसगढ़ ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2015 में बस्तर संभाग का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 27.40 था, जो वर्ष 2025 में घटकर 6.98 पर पहुंच गया है। इसी अवधि में राज्य का एपीआई 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 में मलेरिया के कुल प्रकरणों में 80.09 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि निरंतर चलाए गए चरणबद्ध अभियानों, घर-घर पहुंचकर जांच करने की रणनीति और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।जनवरी 2026 में संचालित अभियान के 13वें चरण के परिणाम भी उत्साहजनक रहे हैं। उस चरण में मलेरिया धनात्मकता दर 4.60 प्रतिशत से घटकर मात्र 0.48 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह कमी इस बात का संकेत है कि समुदाय आधारित निगरानी और सक्रिय रोगी खोज की रणनीति प्रभावी रूप से काम कर रही है।अभियान के 14वें चरण को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। कुल 2063 सर्वे दलों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जांच किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी और संक्रमित पाए जाने वाले व्यक्तियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को मलेरिया से बचाव, मच्छर नियंत्रण तथा समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।इस बार अभियान में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4420 स्कूलों, 346 छात्रावासों, 591 आश्रमों, 77 पोटाकेबिनों तथा 334 अर्धसैनिक बल शिविरों में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की जांच कर संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। मलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अभियान के दौरान सर्वे दलों को स्थानीय स्तर पर जनसहयोग प्राप्त हो, इसके लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि सर्वे दल उनके गांव या घर पहुंचे तो वे जांच में सहयोग करें तथा बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं।
- रायपुर। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए, हर साल की तरह इस वर्ष भी देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में जंगल सफारी 15 जून से 1 अक्टूबर तक साढ़े 3 महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है । पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया, हर साल मानसून के पहले टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों को बंद कर दिया जाता है।छत्तीसगढ़ में प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा तथा उनके प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) और वन्यजीव अभयारण्यों को आज (15 जून) से पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मानसून के आगमन के साथ ही जंगलों में पर्यटन गतिविधियों पर यह अस्थायी रोक आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 से जंगल सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी।वन विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार, इस रोक के पीछे दो मुख्य कारण हैं। वर्षा ऋतु के दौरान जंगलों के भीतर स्थित कच्चे मार्ग और सफारी ट्रैक बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। लगातार बारिश से नदी-नालों में उफान और रास्तों में जलभराव के कारण आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। मानसून का समय वन्यप्राणियों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। यह अवधि अधिकांश वन्य प्रजातियों के प्रजनन और उनके शावकों के पालन-पोषण का समय होती है। इस दौरान इंसानी दखल को रोककर वन्यजीवों को एक शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।अगले साढ़े तीन महीनों के लिए प्रदेश के इन प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जिनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, प्रदेश के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग शांत बैठेने के बजाय जंगलों के भीतर कई महत्वपूर्ण कार्य संपादित करेगा। अवैध शिकार को रोकने के लिए गश्त तेज की जाएगी और वन्यजीवों की क्लोज मॉनिटरिंग होगी। जंगलों के भीतर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सफारी मार्गों, ट्रैकों और रिसॉर्ट्स की मरम्मत व रखरखाव किया जाएगा, ताकि 2 अक्टूबर से पर्यटकों को बेहतर और सुरक्षित अनुभव मिल सके।वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक इस अनुभव को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भले ही यह कुछ महीनों का इंतजार है, लेकिन पारिस्थितिकी संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से मानसून का यह ग्रीन ब्रेक बेहद जरूरी और सराहनीय कदम माना जा रहा है। आगामी 2 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए रोमांच के साथ सैलानियों के स्वागत के लिए तैयार होंगे।
- -नया राशन कार्ड मिलने से उमरगांव के मांझी परिवार को मिली बड़ी राहत-मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभाररायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में चलाया जा रहा “सुशासन तिहार 2026” अभियान आम जनता के लिए संकटमोचक साबित हो रहा है। विकास की मुख्यधारा से दूर बैठे ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा कर यह अभियान उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है। ऐसी ही एक सुखद कहानी सामने आई है ग्राम उमरगांव से जहां के निवासी श्री रामचंद मांझी के लिए यह अभियान एक नई सुबह लेकर आया।नारायणपुर जिले के उमरगांव के रामचंद मांझी लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण परेशान थे। राशन कार्ड के अभाव में उनका परिवार शासन की जनकल्याणकारी खाद्यान्न योजनाओं के लाभ से वंचित था। उन्होंने कई बार प्रयास किए, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों के कारण उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा था। श्री रामचंद मांझी ने कहा कि लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण परिवार के भरण-पोषण में दिक्कत आ रही थी। शासकीय खाद्यान्न योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन सुशासन तिहार ने हमारी चिंता को हमेशा के लिए दूर कर दिया।गौरदंड में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर रामचंद के लिए उम्मीद की नई किरण बना। उन्होंने शिविर में मौजूद अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और शिविर की त्वरित कार्यप्रणाली के चलते, मौके पर ही उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया।नया राशन कार्ड हाथ में आते ही रामचंद के चेहरे की चिंता खुशी में बदल गई। अब उनके परिवार को हर महीने शासकीय उचित मूल्य की दुकान से नियमित और किफायती खाद्यान्न प्राप्त हो सकेगा। इससे न केवल उनके परिवार की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि उनके घर की आर्थिक स्थिति को भी एक बड़ा सहारा मिला है। रामचंद मांझी ने इस त्वरित और पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की यह जमीनी पहल हम जैसे गरीब ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही है।उमरगांव के रामचंद मांझी की यह कहानी महज एक उदाहरण है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में आयोजित हो रहे समाधान शिविरों में रोज ऐसी कई कहानियां आकार ले रही हैं। आवेदनों पर बिना किसी देरी के स्थल पर ही कार्रवाई की गई, ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति और अंतिम छोर के व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं की सीधी पहुंच सुशासन तिहार 2026 के माध्यम से साय सरकार का यह संकल्प अब हकीकत में बदल रहा है, जहां हर गांव खुशहाल हो रहा है और हर नागरिक का हक सुरक्षित हो रहा है।
- -हरी खाद के रूप में डेंचा और मूंग के बीजों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्धरायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए राज्य की सभी सहकारी समितियों में उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत किसानों को उत्तम क्वालिटी के बीज सही समय पर मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की सप्लाई की जा रही है।इस साल किसानों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले साल (खरीफ 2025) में इस समय तक जहां 4.01 लाख क्विंटल बीज का भंडारण हुआ था, वहीं इस साल (खरीफ 2026) में अब तक रिकॉर्ड 4.03 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा हो चुका है। सहकारी समितियों के अलावा, बीज प्रक्रिया केंद्रों में अलग से बफर स्टॉक भी रखा गया है, ताकि किसान वहां से सीधे भी बीज खरीद सकें। धान के उन्नत बीजों के साथ-साथ इस बार खेतों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए समितियों में 5,945 देंचा और 5,946 क्विंटलमूंग , हरी खाद के रूप में 'ढेंचा' और मूंग' के बीजों का भंडारण किया गया है, जिसका उठाव किसानों ने शुरू कर दिया है। हरी खाद कम खर्च में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। इससे यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का पूरा फायदा लेने के लिए सबसे पहले खेतों में ढेंचा या मूंग के बीजों की बुवाई करें। इसके बाद फसल को 45 से 60 दिनों तक (फूल आने से पहले) बढ़ने दें। फिर ट्रैक्टर या हल चलाकर इस खड़ी फसल को मिट्टी में अच्छी तरह पलटकर मिला दें और हल्की सिंचाई कर दें। इस प्रक्रिया के 2 से 3 सप्ताह बाद जब यह खाद मिट्टी में गल जाए, तब धान, मक्का, गेहूं या गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई करें।गौरतलब है कि कृषि विभाग द्वारा इस पूरी वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को खेती के समय कोई परेशानी न हो।
- -कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी में जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन आयोजित-प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, नवाचार एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सुरगी मॉडल बना प्रदेश में मिसाल-सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य शीघ्र होगा पूर्णरायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सोमवार को राजनांदगांव जिला के कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी में आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर उनका खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभिन्न कृषि एवं जैविक उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूरिया की बाजार कीमत लगभग 2,220 रुपए प्रति क्विंटल है, किंतु केंद्र सरकार की सब्सिडी नीति के कारण किसानों को यह मात्र 266 रुपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ते हुए गोबर खाद एवं जैविक खाद का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी आज प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहां छह राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरगी उनका गोद ग्राम है, जहां निरंतर विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं। सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वहीं शिवनाथ डायवर्सन से जुड़ी मुख्य नहर एवं लघु नहरों का कार्य लगभग 27 करोड़ रुपए की लागत से कराया जा रहा है, जिसका 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।उन्होंने बताया कि सुरगी सौर चलित सिंचाई परियोजना, कृषि महाविद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, हाई स्कूल, विद्युत उपकेन्द्र, शौचालय उन्नयन तथा विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्यों सहित ग्राम पंचायत सुरगी में करोड़ों रुपए के विकास कार्य संपादित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत खेती, नवाचार, उत्पादन क्षमता वृद्धि, कम लागत में बेहतर उत्पादन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण सुरगी मॉडल प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा ड्रोन एवं आधुनिक मशीनों के माध्यम से कृषि कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कृषकों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों को अपने खेतों में लागू करने का आह्वान किया।सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए गोबर, गौमूत्र से निर्मित जीवामृत एवं नीमास्त्र के उपयोग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है, जिसका प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है। उन्होंने ग्राम भर्रेगांव की महिला स्व-सहायता समूह द्वारा प्राकृतिक उत्पाद निर्माण एवं विपणन के कार्य की सराहना की।समाजसेवी श्री कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास, विश्वास एवं जनकल्याण की भावना के साथ कार्य किए जा रहे हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र सुरगी में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिल रहा है।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में धान विक्रय करने वाले 1 लाख 24 हजार 101 किसानों को कृषक उन्नयन योजना के तहत 1,484 करोड़ रुपए की राशि उनके खातों में अंतरित की गई। किसानों को 454.12 करोड़ रुपए की अंतर राशि का भुगतान भी किया गया। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, लघुधान्य एवं कपास की खेती करने वाले कृषकों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है, जो पूर्व में 11 हजार रुपए प्रति एकड़ थी। इसके अतिरिक्त सभी प्रकार की खरीफ फसलों पर 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।कलेक्टर ने बताया कि जिले के किसानों ने रबी वर्ष 2025-26 में लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में फसल चक्र परिवर्तन करते हुए मक्का, चना, मसूर एवं सरसों जैसी फसलों की खेती कर 19 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की उपज का विक्रय कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पीएम-आशा योजना के तहत जिले में पहली बार दलहन एवं तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई, जिसके अंतर्गत 16,224 क्विंटल चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन कर किसानों को 9.37 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध के माध्यम से किसानों से 5 करोड़ रुपए मूल्य का मक्का खरीदा गया है तथा भविष्य में सोयाबीन की खरीदी भी की जाएगी।उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक एवं बीज उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से 45,650 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 34,480 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण तथा 26,183 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। किसानों को समय पर कृषि ऋण, उन्नत बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में 43 नई सेवा सहकारी समितियों की स्थापना की गई है।कार्यक्रम में कृषक श्री एनेश्वर वर्मा एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती नीता साहू ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, उपाध्यक्ष श्री भरत वर्मा, श्री संतोष अग्रवाल, कृषक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित थे।
- -30 स्कूल बसों की जांच, चालक-परिचालकों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण-अनुपस्थित 45 स्कूल बस संचालकों को जारी किया गया नोटिसरायपुर / स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
- -महावीर चौक फ्लाईओवर के नीचे 17 जून तक प्रदर्शित होंगी केंद्र सरकार की उपलब्धियां-सांसद संतोष पाण्डेय एवं महापौर मधुसूदन यादव ने किया उद्घाटन, एलईडी के माध्यम से भी दी जा रही योजनाओं की जानकारीरायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा 15 से 17 जून 2026 तक राजनांदगांव के महावीर चौक स्थित फ्लाईओवर के नीचे केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर आधारित तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी का शुभारंभ सांसद श्री संतोष पाण्डेय एवं महापौर श्री मधुसूदन यादव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रदर्शित जानकारी का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।फोटो प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं जनहितकारी नेतृत्व में देश तथा छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के प्रभाव को आकर्षक चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में किसान कल्याण, गरीब कल्याण, अधोसंरचना विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास तथा सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण जैसे विभिन्न विषयों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों के खातों में 4.3 लाख करोड़ रुपए की राशि अंतरण, किसानों को लागत से कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी, कृषि निर्यात में वृद्धि तथा लगभग 2 करोड़ किसानों एवं 3 लाख व्यापारियों के ई-नाम पोर्टल से जुड़ने संबंधी जानकारी प्रदर्शित की गई है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ पक्के आवासों के निर्माण, सेमीकंडक्टर निर्माण, मुफ्त राशन योजना तथा 9 करोड़ लाभार्थियों के पोषण क्रय जैसे जनकल्याणकारी कार्यों को भी दर्शाया गया है।देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए किए गए प्रयासों को भी प्रदर्शनी में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देते हुए लगभग 38,400 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात की जानकारी दी गई है। अधोसंरचना विकास के अंतर्गत विश्व के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज, समुद्र पर निर्मित अटल सेतु, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक विस्तार तथा वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रदर्शित किया गया है।प्रदर्शनी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल अभियान, ‘3 करोड़ लखपति दीदी’ पहल, युवा शक्ति सशक्तिकरण तथा अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण सहित विभिन्न उपलब्धियों को भी दर्शाया गया है। साथ ही एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाई जा रही है।जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों को जनमन पत्रिका एवं सुशासन के नवीन आयाम पुस्तक का भी वितरण किया जा रहा है। इस अवसर पर श्री दिनेश गांधी, श्री राजेश श्यामकर, श्री रघु शर्मा, श्री बलवंत साहू, श्री प्रखर श्रीवास्तव, श्री आशुतोष सिंह, श्री ईशान शर्मा, श्री अरविंद बैद, श्री हेतल भोजानी, श्री सज्जन सिंह ठाकुर, श्री सतीश यादव, श्री अश्विनी, श्री परमेश्वर लहरे, श्री मनोज साहू सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- -मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ-हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का मिला लाभरायपुर / वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने जिले को 18 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ करते हुए 16 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 2 करोड़ 9 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।वन मंत्री श्री कश्यप ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मिरतुर और बेदरे में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण, उसूर में वरिष्ठ कृषि अधिकारी भवन, आवापल्ली एवं कुटरू में शासकीय महाविद्यालय भवन, भैरमगढ़ महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्ष निर्माण तथा दुगईगुड़ा से चिंताकोंटा तक सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से शिक्षा, कृषि सेवाओं और आवागमन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति प्राप्त होगी।लोकार्पित कार्यों में जिला अस्पताल परिसर में रैन बसेरा, दाल-भात केंद्र, अत्याधुनिक अटल आरोग्य लैब, कार्यालय सह गोदाम भवन, विद्यालय भवन, पंचायत भवन, पुलिया निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों में तार फेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। अटल आरोग्य लैब में अब 134 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।कार्यक्रम के दौरान मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ किया गया। अभियान के माध्यम से जिले में मलेरिया नियंत्रण, समय पर जांच और उपचार के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। स्वामित्व योजना के अंतर्गत वनाधिकार पट्टों का वितरण किया गया। वहीं निष्क्षय योजना के तहत पोषण आहार फूड बॉक्स, पुनर्वासित परिवारों को आयुष्मान कार्ड, गर्भवती महिलाओं को जच्चा-बच्चा कार्ड तथा दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बीजापुर में अब विकास की नई धारा बह रही है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुंचना कठिन था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनकल्याण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन योजना तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीजापुर आने वाले वर्षों में विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएगा।इस अवसर पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता सोम पुजारी, कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ डॉ. सागर यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चैबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
- रायपुर / वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री लखनलाल देवंागन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने आज नगर पालिक निगम कोरबा के पौने 37 करोड़ रूपये की लागत वाले जलप्रदाय योजना विस्तार कार्य का भूमिपूजन किया, इस कार्य के पूर्ण हो जाने के पश्चात निगम क्षेत्र की ऐसे बस्तियॉं जहॉं पानी की किल्लत थी, वह समस्या अब दूर होगी तथा समस्याजनित बस्तियों, पारों एवं मोहल्लों में पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से 36 करोड़ 73 लाख रूपये की लागत से जलप्रदाय योजना का विस्तार कार्य किया जाना हैं, इसके अंतर्गत 20 एमएलडी के जलउपचार संयंत्र के साथ-साथ इमलीडुग्गू में 12 लाख 60 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी, दादरखुर्द में 22 लाख 50 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी एवं रूमगरा में 10 लाख 80 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी यानी उच्च स्तरीय जलागार का निर्माण किया जाएगा, वहीं 15.3 किलोमीटर पाईप लाईन भी बिछाई जाएगी। योजना के पूर्ण होने पर इमलीडुग्गू मोतीसागरपारा, भिलाईखुर्द, बरबसपुर, कर्रानाला, मानिकपुर, रूमगरा, ढेलवाडीह, खरमोरा, दादरखुर्द, बेलगिरी बस्ती में निवासरत नागरिकों को पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के साथ-साथ निचले स्तर पर स्थित बस्तियों जहॉं पर लो प्रेशर के फलस्वरूप पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही थी, उन समस्त स्थानों में निर्वाध पेयजल की आपूर्ति हो सकेगी तथा नगर निगम कोरबा क्षेत्र की लगभग 60 हजार जनसंख्या इस कार्य से लाभान्वित होंगे। आज इमलीडुग्गू गौमाता चौक में आयोजित भूमिपूजन कायक्रम के दौरान इस महत्वपूर्ण विकास कार्य का भूमिपूजन उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवंागन व महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के हाथों सम्पन्न किया गया।इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हम सबको जिला खनिज न्यास मद के रूप में एक बड़ी सौगात दी है, जिसके परिणाम स्वरूप जिलों में अरबों रूपये के विकास कार्य इस मद के अंतर्गत हो रहे हैं, उन्होने कहा कि आज जिस महत्वपूर्ण पेयजल योजना विस्तार कार्य का शुभारंभ किया गया है, वह भी जिला खनिज न्यास मद से स्वीकृत हुआ है। उन्होने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि हर व्यक्ति के पास पक्का मकान हों, हर घर में बिजली की सुविधा व शौचालय हों, हर घर तक पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हों, और इन्ही सब का परिणाम है कि आज इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य हो रहे हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में दर्जनों जनकल्याणकारी व गरीब हितैषी योजनाएं संचालित हो रही हैं, जिसके परिणाम स्वरूप लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठ रहा है, उनकी समस्याएं दूर हो रही हैं।इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज इस महत्वपूर्ण कार्य का भूमिपूजन किया गया है, इस कार्य के पूर्ण हो जाने के पश्चात निगम क्षेत्र की ऐसी बस्तियों जहॉं पानी की किल्लत थी तथा पानी की कम आपूर्ति होती थी, वहांॅ पर पर्याप्त पानी की आपूर्ति हो सकेगी तथा पानी की किल्लत दूर होगी। महापौर श्रीमती राजपूत ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में देश व प्रदेश का चहुमुंखी विकास हो रहा है, वहीं कोरबा के विकास के लिये उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरूण साव एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गोपाल मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पेयजल योजना विस्तार का यह कार्य निगम की पेयजल व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा तथा आमनागरिकों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उन्होने कहा कि विगत 12 साल में केन्द्र सरकार के द्वारा देश व प्रदेश का तेजी से विकास किया गया है, 12 साल में लाखों किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आयें हैं तथा 50 करोड़ लोगों का आयुष्मान योजना में निःशुल्क इलाज हो रहा है।भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी केसाथ ही पार्षद अशोक चावलानी, नरेन्द्र देवांगन, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, फिरतराम साहू, उर्वशी राठौर, अजय गोंड़, सरोज शंाडिल्य, अजय कुमार चन्द्रा, पार्षद रूबीदेवी सागर, धनश्री साहू, युगल कैवर्त, सुनीता चौहान, सुलोचना यादव, राधा महंत, राकेश वर्मा, सीमा कंवर, उपेन्द्र पटेल, ईश्वर पटेल, प्रताप सिंह कंवर, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, महामंत्री अजय विश्वकर्मा, सुफलदास महंत, दिनेश शर्मा, सुकेश दलाल, विनय जायसवाल, प्रदीप मजूमदार, राकेश खरे, आत्माराम गंर्धव, रितू जायसवाल, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह राजपूत, अनिल यादव आदि के साथ काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।



























