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-जल जीवन मिशन से दूर हुआ पेयजल संकट, ग्रामीणों के जीवन में आई नई खुशहाली
रायपुर । खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ासागर के आश्रित ग्राम कोदवा में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। लगभग 315 की आबादी और 51 परिवारों वाले इस गांव में पहले पेयजल की उपलब्धता तो थी, लेकिन पर्याप्त दबाव और नियमित आपूर्ति की समस्या के कारण कई घरों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पानी नहीं पहुंच पाता था। गर्मी के दिनों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती थी। ग्राम कोदवा पहाड़ी क्षेत्र के समीप स्थित है, जहां कुछ स्थानों पर पानी में आयरन की मात्रा भी पाई जाती थी। ग्रामीण हैंडपंप, बोरवेल, तालाब और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर थे। महिलाओं और बुजुर्गों को पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता था, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या प्रभावित होती थी।ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में 73 घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए गए। योजना के क्रियान्वयन के साथ ही प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचना शुरू हुआ। आज गांव के सभी परिवारों को नियमित रूप से नल से जल उपलब्ध हो रहा है और पेयजल संकट पूरी तरह समाप्त हो गया है।योजना के सफल संचालन के लिए ग्राम सभा में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति तथा जल गुणवत्ता समिति का गठन किया गया। समिति के सदस्यों को जल संरक्षण, जल प्रबंधन और जल गुणवत्ता परीक्षण की जानकारी दी गई। जलवाहिनी दीदियों को फील्ड टेस्टिंग किट (थ्ज्ज्ञ) के माध्यम से जल परीक्षण तथा उसकी ऑनलाइन रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इसके साथ ही जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया।स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से गांव में जल जनित बीमारियों में कमी आई है और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। महिलाओं का समय और श्रम बच रहा है, जिससे वे परिवार और अन्य आजीविका संबंधी गतिविधियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी में भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो रहा है।आज ग्राम कोदवा जल जीवन मिशन की सफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। यह गांव दर्शाता है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किस प्रकार ग्रामीण जीवन को बेहतर बना सकता है। स्वच्छ जल, बेहतर स्वास्थ्य और बढ़ती खुशहाली के साथ कोदवा अब जिले के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। - * सेज पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित ईडीआईआई का जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (जेओई) प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंडेक्सिंग और सिटेशन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मजबूत वैश्विक उपस्थिति लगातार बनाए हुए है।रायपुर। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद की ओर से सेज पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित पीयर-रिव्यूड जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (जेओई) एक प्रतिष्ठित त्रैमासिक शोध पत्रिका है। जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है और उद्यमिता अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय शैक्षणिक प्रभाव कायम रखा है।ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला के संपादन में प्रकाशित यह शोध पत्रिका स्कोपस, वेब ऑफ साइंस के इमर्जिंग सोर्सेज सिटेशन इंडेक्स (ईएससीआई), एबीडीसी जर्नल क्वालिटी लिस्ट, इकॉनलिट (इकोनॉमिक्स लिटरेचर इंडेक्स), प्रोक्वेस्ट, एब्स्को (ईबीएससीओ – एल्टन बी. स्टीफेंस कंपनी) तथा एएनवीयूआर (इटैलियन नेशनल एजेंसी फॉर द इवैल्यूएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट्स) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंडेक्सिंग प्लेटफॉर्म्स में सूचीबद्ध है। इस शोध पत्रिका का एच-इंडेक्स 37 है तथा इसका जर्नल इम्पैक्ट फैक्टर 2.5 है।वर्ष 1992 में स्थापित जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (जेओई) उद्यमिता से जुड़े उभरते मुद्दों पर विचार-विमर्श और शोध को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और व्यावहारिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह शोध पत्रिका विशेष रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में उद्यमिता संबंधी अनुसंधान, सिद्धांतों और व्यवहार को आगे बढ़ाने के लिए एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करती है।यह शोध पत्रिका मौलिक शोध लेख, वैचारिक शोध-पत्र, दृष्टिकोण आधारित लेख, केस स्टडी तथा विश्लेषणात्मक टिप्पणियां प्रकाशित करती है। इनमें उद्यमिता सिद्धांत, उद्यमी व्यवहार, उद्यमिता रणनीति, उद्यम स्थापना एवं विकास, पारिवारिक व्यवसाय, सामाजिक उद्यमिता, अंतरराष्ट्रीय उद्यमिता, नेतृत्व, नवाचार तथा उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र जैसे विविध विषय शामिल हैं। यह पत्रिका अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, इतिहास और प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं से शोध योगदान आमंत्रित करती है। विभिन्न देशों और सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित अध्ययनों का भी स्वागत किया जाता है। यह बहुविषयक दृष्टिकोण शोधकर्ताओं को विभिन्न विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्यों से उद्यमिता का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे ऐसे निष्कर्ष सामने आते हैं जो अकादमिक जगत और व्यवहारिक क्षेत्र—दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी और प्रासंगिक होते हैं।जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की अब तक की यात्रा और उद्यमिता के क्षेत्र में उसके योगदान पर प्रकाश डालते हुए, जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के संपादक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा, "पिछले तीन दशकों से जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप उद्यमिता संबंधी ज्ञान को समृद्ध करने के लिए एक विश्वसनीय मंच उपलब्ध कराने का प्रयास करता रहा है। बीता एक वर्ष विशेष रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इस अवधि में शोध पत्रिका का एच-इंडेक्स 34 से बढ़कर 37 हो गया है और इसका इम्पैक्ट फैक्टर 1.9 से बढ़कर 2.5 हो गया है। ऐसे समय में, जब भारत का शोध वैश्विक स्तर पर लगातार अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बनता जा रहा है, जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की ये उपलब्धियां उद्यमिता अनुसंधान के बढ़ते महत्व और आर्थिक विकास तथा स्थिरता में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती हैं।"आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में उद्यमिता की भूमिका लगातार बढ़ रही है, तब यह शोध पत्रिका ऐसे महत्वपूर्ण दृष्टिकोण और शोध-आधारित जानकारियां उपलब्ध कराती है, जो नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों—दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होती हैं।
- -पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को खुली चेतावनी देना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का घोर उल्लंघन : केदार कश्यप-"फिर मिलेंगे" जैसी धमकियाँ कांग्रेस की अराजक राजनीतिक संस्कृति को उजागर करती हैं : केदार कश्यप-जनता ने सत्ता से बाहर किया तो अब संवैधानिक संस्थाओं और पुलिस पर उतार रहे हैं अपनी भड़ास : केदार कश्यपरायपुर। वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों एवं भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों को लेकर दिए गए कथनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह भाषा किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की नहीं, बल्कि राजनीतिक हताशा और मानसिक असंतुलन की स्थिति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन कानून के रक्षकों और संवैधानिक व्यवस्था को खुलेआम धमकाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री का यह कहना कि "पुलिस अधिकारी ध्यान रखें, भाजपा कुछ ही महीनों की मेहमान है… फिर मिलेंगे" न केवल पुलिस प्रशासन को डराने का प्रयास है, बल्कि यह कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की खुली कोशिश भी है। यह बयान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और कांग्रेस की उस मानसिकता को उजागर करता है, जिसमें सत्ता को ही कानून से ऊपर माना जाता रहा है।वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब भय, दबाव और राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति से बाहर निकल चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है, जहाँ पुलिस पूरी निष्पक्षता के साथ अपना दायित्व निभा रही है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को भविष्य की राजनीतिक धमकियाँ देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। अपराध, भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षण की घटनाओं ने जनता का विश्वास तोड़ा, जिसका परिणाम कांग्रेस को चुनाव में पराजय के रूप में मिला। जनता ने भ्रष्टाचार, अहंकार और कुशासन को नकारते हुए भाजपा को जनादेश दिया है। अब जनता के इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय पूर्व मुख्यमंत्री लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक निराशा व्यक्त कर रहे हैं।वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जब भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा कानून हाथ में लेने, प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाने अथवा शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जाता है और पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तब कांग्रेस के नेता पुलिस पर ही दबाव बनाने लगते हैं। यह प्रवृत्ति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस आज भी कानून के शासन में नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव की संस्कृति में विश्वास रखती है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन विपक्ष का दायित्व व्यवस्था को मजबूत करना है, न कि पुलिस प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं को धमकाना। पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी भाषा और आचरण की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन धमकी, भय और दबाव की राजनीति का कोई स्थान नहीं है।वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार स्पष्ट रूप से कानून के शासन में विश्वास रखती है। प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी दल या पद से जुड़ा हो, कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। पुलिस अपना कार्य पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप करती रहेगी और सरकार हर परिस्थिति में कानून के साथ खड़ी रहेगी।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जनता कांग्रेस की धमकी, डर और अराजकता की राजनीति को पहले ही नकार चुकी है। अब समय आत्ममंथन का है, न कि पुलिस प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को धमकाने का। छत्तीसगढ़ की जनता सुशासन, शांति और कानून के राज के साथ है तथा किसी भी प्रकार की राजनीतिक गुंडागर्दी को स्वीकार नहीं करेगी।
- -भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव का तीखा हमला : विपक्ष का मकसद समाधान नहीं, बल्कि देश में भ्रम और अराजकता फैलाना थारायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने नीट पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई ऐतिहासिक एवं कड़े कदमों की घोषणा तथा अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के बाद कांग्रेस सहित 'इण्डी गठबंधन' के घटक दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इन घटनाक्रमों ने विपक्ष के असली राजनीतिक चरित्र और उनके भारत विरोधी एजेंडे की पूरी तरह पोल खोल दी है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए त्वरित और अभूतपूर्व कदम उठाने की घोषणा की है। श्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा न केवल त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं, बल्कि दोषियों को 5 से 10 साल की कड़ी सजा, कठोर जमानत शर्तों और दोषी पाए जाने पर संबंधित कोचिंग संस्थानों को बंद करने जैसे कठोर प्रावधानों वाले कानून का मसौदा तैयार करवाया जा रहा है। सरकार की इस त्वरित संवेदनशीलता और पारदर्शी नीयत के बाद केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने भी सरकार के सकारात्मक रुख पर भरोसा जताते हुए अपना अनशन समाप्त कर दिया। श्री देव ने कहा कि यह पूरी घटना यह दर्शाती है कि मोदी-सरकार देश के छात्रों और युवाओं के हित में चट्टान की तरह खड़ी है। लेकिन दूसरी ओर, कांग्रेस और उनके सहयोगियों का एकमात्र एजेंडा छात्रों के कंधे पर बन्दूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकना और देश में असंतोष की आग भड़काना था।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि विपक्ष को कभी भी छात्रों के भविष्य या न्याय से कोई लेना-देना नहीं था। वे केवल देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहते थे। जब सरकार ने समस्या के जड़ से समाधान के लिए कड़ा कानून बनाने की दिशा में काम किया, तो इण्डी गठबंधन का चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया। श्री देव ने कहा कि देश के युवा समझदार हैं और वे देख सकते हैं कि कौन उनके भविष्य के लिए काम कर रहा है और कौन उनके नाम पर राजनीति कर रहा है? भाजपा सरकार देश के हर होनहार छात्र के हक की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
- -प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सांसद रूपकुमारी चौधरी ने जताया भरोसा : वर्षों से लंबित अंतरराज्यीय विवाद का आपसी सहमति से निकलेगा स्थायी समाधानरायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के मध्य वर्षों से चले आ रहे महानदी जल विवाद को केंद्र सरकार की मध्यस्थता से सुलझाने की दिशा में बनी सहमति का पुरजोर स्वागत किया है। श्रीमती चौधरी ने इस ऐतिहासिक पहल को दोनों राज्यों के विकास और किसानों के हित में एक बड़ा व दूरगामी कदम बताया है।भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व सांसद श्रीमती चौधरी ने कहा कि महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल में लम्बे समय से लम्बित इस गम्भीर मामले में केन्द्र सरकार की मध्यस्थता स्वीकार करने पर दोनों राज्यों, ओड़िशा एवं छत्तीसगढ़ ने जो सहमति जताई है, उससे आपसी सद्भाव और संवाद के जरिए स्थायी समाधान की उम्मीदें बेहद मजबूत हुई हैं। श्रीमती चौधरी ने केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि श्री साहू द्वारा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मिलकर की गई सार्थक चर्चा और केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करने के अनुरोध का ही परिणाम है कि आज यह ऐतिहासिक मोड़ सम्भव हो सका है।भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व सांसद श्रीमती चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच जल्द ही आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से जल बँटवारे से जुड़े विवादित मुद्दों पर आपसी सहमति कायम होगी। ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बेला एस. त्रिवेदी के समक्ष दोनों राज्यों द्वारा केंद्र की मध्यस्थता पर जताई गई रजामंदी यह दर्शाती है कि लम्बी प्रक्रियाओं की तुलना में आपसी बातचीत से मसले सुलझाना अधिक प्रभावी है। श्रीमती चौधरी ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारें और केंद्र सरकार का मार्गदर्शन महानदी विवाद का ऐसा सर्वमान्य व न्यायसंगत समाधान निकालेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओड़िशा के जन-जन का हित सुरक्षित होगा।
- -पद्मविभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई सहित आठ दिवंगत कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता, अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों एवं विद्यार्थियों को भी मिला प्रोत्साहनरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों के कल्याण के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मंत्रालय के सभाकक्ष में ‘कलाकार कल्याण कोष योजना’ तथा ’अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना’ के अंतर्गत सहायता एवं छात्रवृत्ति राशि के चेक वितरण का वृहद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ कलाकारों, साहित्यकारों तथा युवा प्रतिभाओं के सम्मान और प्रोत्साहन का भावपूर्ण वातावरण देखने को मिला।कार्यक्रम के दौरान पद्मविभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी कलाकार के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य सात वरिष्ठ दिवंगत कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजनों को भी एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि देकर उनके कला और साहित्य के क्षेत्र में दिए गए अविस्मरणीय योगदान का सम्मान किया गया। वहीं, अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी प्रतिभा को नई ऊर्जा और प्रोत्साहन दिया गया।कार्यक्रम में सहायता एवं छात्रवृत्ति राशि के चेक संस्कृति विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन, फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सुश्री मोना सेन तथा सिंधी अकादमी की अध्यक्षा श्रीमती सुषमा जैदानी के हाथों हितग्राहियों एवं दिवंगत कलाकारों के परिजनों को प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कला और साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए युवा पीढ़ी को उनकी परंपरा आगे बढ़ाने का संदेश दिया।संस्कृति विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ लोककला, लोक साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। कलाकारों और साहित्यकारों ने अपने जीवनभर समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने का कार्य किया है। ऐसे में उनके सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए संचालित योजनाएं न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।संस्कृति विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे ने कहा कि संस्कृति विभाग का उद्देश्य केवल कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, सृजनशीलता और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि ‘कलाकार कल्याण कोष योजना’ और ’अभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना’ वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान और युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन योजनाओं से प्रेरित होकर अधिक से अधिक युवा कला और साहित्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।इस अवसर पर डॉ. एस. भारतीदासन, सचिव संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन, डॉ. संजय कन्नौजे संचालक संस्कृति विभाग, सुश्री मोना सेन अध्यक्षा फिल्म विकास निगम, श्रीमती सुषमा जैदानी, अध्यक्षा सिंधी अकादमी तथा डॉ. अभिलाषा बेहार सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, कलाकार, साहित्यकार तथा दिवंगत कलाकारों एवं साहित्यकारों के परिजन उपस्थित रहे।संस्कृति विभाग की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान तथा युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करती है। कलाकार कल्याण कोष योजना और छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन कला और साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, कलाकारों को सम्मानजनक सहयोग उपलब्ध कराने तथा प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
- -भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ मंदिर वापसी-वन मंत्री केदार कश्यप सहित जनप्रतिनिधियों ने की पूजा-अर्चना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामनारायपुर । प्रसिद्ध गोंचा पर्व छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) अंचल में मनाया जाने वाला एक अनूठा और ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक उत्सव है। यह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़ा है और इसकी मुख्य विशेषता तुपकी, गोंचा फल तथा 600 साल पुरानी परंपरा है।बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक प्रसिद्ध गोंचा पर्व आज भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र जनकपुरी (गुंडिचा मंदिर) से रथ पर सवार होकर अपने मुख्य मंदिर लौटे।बाहुड़ा गोंचा के अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की। उन्होंने क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।रथयात्रा के दौरान बस्तर की अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा 'तुपकी' की सलामी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। बांस से बनाई गई विशेष नाल 'तुपकी' में पेंग (मलकांगनी) के बीज भरकर श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक सलामी दी।तुपकी से निकलने वाली मधुर आवाज और श्रद्धालुओं के उत्साह से पूरा जगदलपुर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और रथयात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। गोंचा पर्व बस्तर की प्राचीन लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और धार्मिक उत्सवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ ही बस्तर के इस अनूठे और ऐतिहासिक लोक पर्व गोंचा का विधिवत समापन हुआ।
- -जिला स्तरीय वन महोत्सव में 630 पौधों का रोपण, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ने सभी पौधों को लिया गोद-वन विभाग की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को 35.98 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि वितरितरायपुर । वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप आज जगदलपुर स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित जिला स्तरीय वन महोत्सव 2026 और ‘एक पेड़ माँ के नाम 3.0’ अभियान में शामिल हुए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य का संकल्प है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति हमारी भावनाओं को मजबूत करता है। उन्होंने नागरिकों से पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। समाज की सक्रिय भागीदारी से ही हरित छत्तीसगढ़ और समृद्ध बस्तर का सपना साकार होगा। वन महोत्सव के दौरान शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर जगदलपुर के लगभग 1.5 एकड़ क्षेत्र में 630 फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया। इसके बाद ‘ग्रीन कैनवास’ अभियान के तहत वनमंत्री सहित जनप्रतिनिधियों और अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए हस्ताक्षर किए।भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ बस्तर ने रोपे गए सभी 630 पौधों को गोद लेकर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली। वनमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पौधारोपण तभी सफल होगा जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बड़े वृक्ष बनें और आने वाली पीढ़ियों को छाया, शुद्ध हवा और जीवन प्रदान करें।कार्यक्रम में वन विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को 35.98 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि और डमी चेक वितरित किए गए। लाभार्थियों में तेंदूपत्ता संग्राहक कल्याण योजना, प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना, मालिक मकबूजा योजना, किसान वृक्ष मित्र योजना और मानव- वन्यप्राणी द्वंद्व राहत योजना के हितग्राही शामिल रहे।इस अवसर पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, महापौर श्री संजय पांडेय सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियरिंग कालेज परिवार के सदस्यों, वन विभाग के कर्मचारी और पर्यावरण संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- -फोर-लेन सड़क, गोवर्धनपुर पुल, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सहित कई परियोजनाओं की प्रगति का लिया जायजा-गुणवत्ता और समयबद्धता पर दिया विशेष जोर, अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देशरायपुर । वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार रायगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। शहर में बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में उन्होंने विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और समयबद्ध क्रियान्वयन की समीक्षा की।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने फोर-लेन सड़क, गोवर्धनपुर पुल, मरीन ड्राइव, दूध डेयरी एवं एफसीआई ऑक्सीजोन, चांदमारी, मोदीनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी तथा लोहरसिंह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सहित विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक स्थल पर अधिकारियों से तकनीकी प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित समय-सीमा तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली और सभी कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए कोतरारोड थाना चौक से ढिमरापुर, ढिमरापुर से सीएमएचओ कार्यालय तिराहा तथा सर्किट हाउस मार्ग सहित विभिन्न हिस्सों में फोर-लेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूरा होने से यातायात व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होगी तथा नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी।उन्होंने बताया कि गोवर्धनपुर पुल शहर की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल है। इसका कार्यादेश जारी हो चुका है और शीघ्र ही निर्माण कार्य गति पकड़ेगा। पुल के निर्माण से शहर के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा और वर्षों पुरानी आवागमन संबंधी समस्याओं का समाधान होगा।वित्त मंत्री ने कहा कि रायगढ़ की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं पिछले तीन-चार दशकों से विभिन्न कारणों से लंबित थीं। राज्य सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, ताकि नागरिकों को आधुनिक शहरी सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य रायगढ़ को आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिक सुविधाओं से समृद्ध शहर के रूप में विकसित करना है। इसके लिए मौसम की परवाह किए बिना विकास कार्यों को निरंतर गति दी जा रही है, जिससे जनता को जल्द से जल्द इन परियोजनाओं का लाभ मिल सके।श्री चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम आयुक्त श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- -अब एक कॉल पर घर पहुंचेगा निःशुल्क पौधा, वन विभाग की अभिनव पहल से बढ़ेगी हरियाली-‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिलेगा नया विस्तार, फलदार और छायादार पौधे होंगे उपलब्धरायपुर । वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ प्रवास के दौरान आज अपने निवास कार्यालय से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमंडल रायगढ़ द्वारा संचालित निःशुल्क पौधा वितरण वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभिनव पहल के माध्यम से रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र के नागरिक अब केवल एक फोन कॉल पर अपने घर तक निःशुल्क पौधे प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल प्रधानमंत्री के श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि वन विभाग की यह पहल नागरिकों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करने की दिशा में सराहनीय प्रयास है। अब यदि कोई व्यक्ति अपने घर, आंगन, बाड़ी, खेत, बगीचे, तालाब किनारे अथवा अन्य उपयुक्त स्थान पर पौधारोपण करना चाहता है, तो उसे केवल टोल-फ्री नंबर पर कॉल करना होगा। इसके बाद वन विभाग की टीम सीधे उसके घर पहुंचकर निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगी।उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से लोगों को पौधों के लिए नर्सरी या विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान से जुड़ सकेंगे।श्री चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान प्रकृति के प्रति सम्मान और मातृऋण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के नाम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो आने वाले समय में रायगढ़ हरियाली की नई पहचान बन सकता है।मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत वन विभाग द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाले स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। नागरिक अपनी आवश्यकता के अनुसार आम, अमरूद, नींबू सहित विभिन्न फलदार पौधों के साथ-साथ छायादार एवं अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधे भी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पौधों की सहज उपलब्धता से पौधारोपण अभियान को नई गति मिलेगी।वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि घर, बगीचे, खेत, तालाब किनारे, पार्क अथवा अन्य उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है। एक पेड़ केवल हरियाली ही नहीं देता, बल्कि स्वच्छ हवा, संतुलित पर्यावरण और आने वाली पीढि़यों के बेहतर भविष्य का आधार भी बनता है। उन्होंने नागरिकों से वन विभाग की इस जनहितैषी पहल का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।नगर निगम क्षेत्र के नागरिक टोल-फ्री नंबर 8305186853 एवं 18002332631 पर कॉल कर फलदार, छायादार और अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधे निःशुल्क मंगा सकेंगे। इस अवसर पर महापौर श्री जीवर्धन चौहान, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, डीएफओ श्री अरविंद पीएम, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना, अर्थात डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion), के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया है।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित करने, 50,000 हरित रोजगार सृजित करने तथा राज्य के पांच लाख परिवारों और 10,000 संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघो (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और जनजागरूकता का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' तैयार की जा रही हैं, जो अपने ही क्षेत्रों में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह वित्तीय मॉडल जहां स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है, वहीं महिला संचालित उद्यमों को टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच को भी प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर बल देते रहे हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को सतत ग्रामीण विकास का आधार मानते हैं। द्वीप्ति योजना इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ते हुए महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा में ला रही है।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से लाभार्थी तक सीमित रही है। ड्वीप्टि योजना इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ती है।द्वीप्ति योजना का प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में शामिल है। सीएसपीडीसीएल- आरएपीएम, रायपुर के सहयोग से जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया। टाटा के तकनीकी सहयोग से बिहान के स्व-सहायता समूहों की लगभग 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली 'सोलर दीदी' टीम तैयार की गई।योजना के तहत पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर गांव में स्थापित किया गया। प्रगति आजीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती अंजनी पटेल इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं।श्रीमती अंजनी पटेल ने कहा, "इस कार्य ने हमारे लिए आजीविका का नया रास्ता खोला है। हमें गर्व है कि अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर रही हैं। इससे यह विश्वास बढ़ा है कि यह अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।"कबीरधाम कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने कहा कि यह पहल आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का सफल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह मॉडल महिलाओं के लिए कौशल आधारित और टिकाऊ आजीविका विकसित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। कबीरधाम जिले में अब तक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लगभग 40 ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं तथा कई संयंत्र स्थापित भी किए जा चुके हैं।राज्य के अन्य जिलों में द्वीप्ति योजना के विस्तार के साथ महिला नेतृत्व वाले पंजीकृत महासंघों, प्रशिक्षित स्थानीय तकनीशियनों और आसान वित्तीय व्यवस्था पर आधारित यह मॉडल छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर लागू किए जाने योग्य एक प्रभावी उदाहरण के रूप में उभर रहा है।द्वीप्ति योजना एक नजर में• अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित किए जाएंगे।• 50,000 हरित रोजगार सृजित होंगे।• 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।• 10,000 संस्थानों को योजना से जोड़ा जाएगा।• 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघ अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत।• कबीरधाम में 35 महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया गया।• कबीरधाम जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए।
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*मरीजों के लिए अस्पताल में जल्द ही एसडीपी की सुविधा*
बिलासपुर/कुमार साहब स्व. श्री दिलीप सिंह जूदेव शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कोनी को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से अत्याधुनिक ब्लड सेंटर के संचालन के लिए आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हो गया है। यह महत्पपूर्ण उपलब्धि जिला प्रशासन, औषधि एवं खाद्य नियंत्रक विभाग के सतत सहयोग एवं मागदर्शन से प्राप्त हुई है।अस्पताल में स्थापित यह अत्याधुनिक ब्लड सेंटर एनटीपीसी सीपत द्वारा सीएसआर मद के अंतर्गत निर्मित किया गया है। आधुनिक उपकरणों और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार यह रक्त केंद्र प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सबसे उन्नत ब्लड सेंटर के रूप में स्थापित हुआ है। इसकी स्थापना एवं विकास में संचालक प्राध्यापक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह के मार्गदर्शन तथा ब्लड बैंक के क्षेत्र में उनके 25 वर्षों के अनुभव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यह छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में पहला ऐसा केंद्र बनेगा, जहां सिंगल डोनर प्लेटलेट तैयार करने और मरीजों को उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा डेंगू, कैंसर, बोन मैरो प्रत्यारोपण, थैलेसीमिया और गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों के उपचार में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इससे मरीजों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाली प्लेटलेट्स उपलब्ध हो सकेंगी और निजी संस्थानों पर उनकी निर्भरता कम होगी।अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि इस ब्लड सेंटर का उद्देश्य केवल सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त और रक्त अवयव उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय ट्रांसफ्यूजन सेवाएं प्रदान करना भी है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में एसडीपी सुविधा की शुरुआत शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। अस्पताल प्रशासन ने इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन बिलासपुर, औषधि एवं खाद्य नियंत्रक विभाग, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा एनटीपीसी सीपत का आभार व्यक्त किया है। अस्पताल का मानना है कि यह अत्याधुनिक ब्लड सेंटर न केवल बिलासपुर संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक सुविधा सिद्ध होगा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान करेगा। - -वन अधिकारियों और मैदानी अमले को ऑनलाइन पीओआर एवं वन अपराध जांच प्रक्रिया का प्रशिक्षणरायपुर ।वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और विभागीय कार्यों में तेजी लाने के लिए वन विभाग द्वारा ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में वनमंडल दंतेवाड़ा में वन अधिकारियों एवं मैदानी अमले के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।प्रशिक्षण में ऑनलाइन पीओआर यानी प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही जांच अधिकारी की नियुक्ति, जप्त वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में की जाने वाली कार्रवाई, न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने तथा आवश्यक प्रपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया।अधिकारियों ने प्रतिभागियों को वन अपराध प्रकरणों की जांच के दौरान उप वनमंडलाधिकारी, वनमंडलाधिकारी और मुख्य वन संरक्षक स्तर तक प्रकरण प्रस्तुत करने एवं अग्रेषित करने की प्रक्रिया समझाई। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान करते हुए वन अपराध प्रकरणों के त्वरित और विधिसम्मत निराकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।प्रशिक्षण में बताया गया कि ऑनलाइन प्रणाली के प्रभावी उपयोग से वन अपराध प्रकरणों की निगरानी और निराकरण में तेजी आएगी। इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने सभी मैदानी अमले से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी श्री रंगनाथ रामाकृष्णा वाय., उप वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा, उप वनमंडलाधिकारी गीदम सहित वनमंडल दंतेवाड़ा के सभी परिक्षेत्र अधिकारी और मैदानी अमले के अधिकारी- कर्मचारी उपस्थित रहे।
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दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता सर्वेक्षण और विभिन्न विकास कार्यों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा हेतु प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के स्वच्छता लक्ष्यों और पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे ने कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के दिशा-निर्देशों के पालन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के दौरान यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि जिले के समस्त 381 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया जा चुका है और इनका भौतिक सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ग्राम के सभी परिवारों द्वारा घर पर ही चार प्रकार का कचरा पृथक्करण किया जाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर उनका पंजीयन करने के निर्देश दिए गए हैं। कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सायकल रिक्शा में गीले एवं सूखे कचरे के अतिरिक्त दो अन्य खंड जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें लाल खंड सेनेट्री पैड एवं डायपर के लिए तथा काला खंड अन्य ई-कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ग्राम में निर्मित नाडेप और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग हेतु साफ-सफाई करने के भी निर्देश प्रदान किए गए हैं।व्यक्तिगत शौचालयों और प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद पंचायत धमधा से 219 एवं पाटन से 135 प्राप्त मांग पत्रों के अनुसार हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही, जनपद पंचायत दुर्ग से 278, धमधा से 02 एवं पाटन से 361 नवीन पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीण अंचल में घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली को प्रभावी बनाने और प्रत्येक घर से निर्धारित यूजर चार्ज की नियमित वसूली सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वच्छताग्राहियों के मानदेय भुगतान की समीक्षा करते हुए यह कड़े निर्देश दिए गए कि जिन ग्राम पंचायतों में मानदेय लंबित है, उन्हें 15 दिवस के भीतर भुगतान कर प्रतिवेदन प्रेषित किया जाए तथा 15वें वित्त आयोग की राशि से इसका नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।तरल एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के मोर्चे पर जानकारी दी गई कि जिले में वर्तमान में 5 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट पूरी तरह से क्रियाशील हैं। ग्रामीण अंचल में डी-स्लज वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और नवीन एफएसटीपी निर्माण तथा पूर्व में निर्मित प्लांट के एक्सटेंशन पर भी चर्चा की गई। महतारी सदन में निर्मित सामुदायिक शौचालयों में 15वें वित्त आयोग की राशि का भुगतान करने हेतु ग्राम पंचायतों को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, क्रेडा विभाग को गोवर्धन प्लांट को पुनः क्रियाशील करने के निर्देश दिए गए हैं तथा जिन हितग्राहियों एवं संस्थानों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए गए हैं, उनसे निर्धारित शुल्क प्राप्त करने और पुनः उपयोग सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था पुख्ता करने को कहा गया है। - -प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत, ओवायएमएस पंजीयन, वृक्षारोपण एवं आपदा प्रबंधन पर विशेष जोररायपुर। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंग खालसा की अध्यक्षता में जिला संगठन आयुक्तों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन की गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। राज्य मुख्य आयुक्त ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य रूप से कराया जाए तथा संगठन के अंशदान की राशि 31 अगस्त तक अनिवार्य रूप से जमा कराई जाए।भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में स्काउट-गाइड दलों के प्रभावी संचालन के लिए कम से कम एक प्रशिक्षित बेसिक स्काउट मास्टर एवं एक गाइड कैप्टन का होना आवश्यक है। साथ ही राज्य स्तर से प्रत्येक जिले का नियमित दौरा कर स्काउट-गाइड गतिविधियों की समीक्षा किए जाने की जानकारी भी दी।बैठक में ओवायएमएस (OYMS) पंजीयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक जिले में कार्यशालाओं के आयोजन तथा प्रत्येक विकासखंड में एक-एक समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) नियुक्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि पंजीयन की प्रक्रिया समयबद्ध एवं सुचारु रूप से पूर्ण की जा सके। इसके साथ ही प्रत्येक जिला एवं विकासखंड स्तर पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान आयोजित करने के निर्देश देते हुए इसमें समाज एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य मुख्य आयुक्त ने सभी जिला संगठन आयुक्तों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) एवं राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के साथ समन्वय बनाए रखने तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्काउट-गाइड स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन का सहयोग करने के लिए सदैव तैयार रहें। बैठक के दौरान राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंग खालसा को राष्ट्रीय वयस्क स्काउटिंग समिति का सदस्य मनोनीत किए जाने पर पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया गया। बैठक के अंत में उन्होंने सभी जिला संगठन आयुक्तों से संगठन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी, अनुशासित एवं सेवा-भावना के साथ संचालित करने का आह्वान किया। बैठक में राज्य प्रशिक्षण आयुक्त श्री पूनम सिंह साहू, राज्य संगठन आयुक्त श्री अमित कुमार, राज्य संगठन आयुक्त (गाइड) श्रीमती जलवती साहू, राज्य प्रशिक्षण आयुक्त (गाइड) श्रीमती सरिता पाण्डेय, राज्य संयुक्त सचिव श्रीमती बीना यादव सहित राज्य कार्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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-करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की दी सौगात
-छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा-ग्राम बोटेसुर से नवागांव तक सड़क निर्माण, ग्राम पीरचाटोला में सड़क निर्माण की घोषणारायपुर । उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र के सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम भेंड्रा नवागांव और पीरचाटोला में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रमों में शामिल होकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन में बैठकर उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं तथा कई मांगों पर मौके पर ही स्वीकृति और घोषणाएं करते हुए विकास कार्यों की सौगात दी। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम भेंड्रा नवागांव में आयोजित कार्यक्रम से ग्राम बोटेसुर से नवागांव तक एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सड़क निर्माण कराने की घोषणा की। वहीं ग्राम पीरचाटोला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सड़क निर्माण तथा वीबीजीरामजी योजना के तहत पुलिया निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृत कराने की घोषणा की।ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है और विकास कार्यों के लिए निरंतर स्वीकृति दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भेंड्रा नवागांव, बोटेसुर के गांवों में सामुदायिक भवन, सीसी रोड, बोर खनन, रंगमंच, आहता निर्माण तथा आंतरिक विद्युतीकरण जैसे अनेक कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि सूरजपुरा पंचायत में 51 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्टेडियम में नियमित खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हों तथा आसपास के 15 से 20 गांवों के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सके।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सूरजपुरा और धनौरा सहित क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण मानको के अनुरूप होना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पीरचाटोला में 40, सूरजपुरा में 57, पेण्ड्रातराई में 61, बैगापारा में 65 तथा बोटेसुर में 75 आवास स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी गई थी और बीते ढाई वर्षों में 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह डेयरी, दुग्ध उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। यदि समूह कार्ययोजना बनाकर आगे आते हैं तो शासन हर संभव सहयोग करेगा। उन्होंने क्षेत्र में जैविक खेती की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि केवल भवन और सड़क निर्माण ही विकास नहीं है, बल्कि गांव की आर्थिक गतिविधियों, कृषि, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के वनांचल क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां किसान बिना रासायनिक खाद के सफलतापूर्वक जैविक खेती कर रहे हैं और बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। विद्युत व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था के लिए गांव और खेतों के फीडर अलग करने का कार्य कराया गया है। साथ ही पुराने बकाया बिजली बिलों का भी शासन की योजनाओं के माध्यम से समाधान किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता संतोष मिश्रा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा पटेल, जनपद उपाध्यक्ष श्री अशोक पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। - -अमलीडीह से कामनबोड़ तक बनेगी 1.40 किमी लंबी सड़क, मार्ग में 5 पुलियों का भी होगा निर्माण-शीतला मंदिर में भवन के लिए 6.50 लाख रुपये की घोषणा कीरायपुर।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम अमलीडीह से कामनबोड़ तक 2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 1.40 किलोमीटर सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि इस सड़क का निर्माण क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है, जिसके पूरा होने से ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने शीतला माता मंदिर में भवन निर्माण के लिए 6.50 लाख रुपये की घोषणा कर ग्रामीणों को एक और सौगात दी।भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने निर्माण एजेंसी एवं ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क, पुल-पुलिया सहित सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे क्षेत्रवासियों को लंबे समय तक इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं आम जनता की सुविधा के लिए बनाई जा रही हैं, निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सड़क, आवास, बिजली, सिंचाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के कार्य को प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है। सरकार बनने के बाद प्रदेशभर में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है, जिससे हजारों गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अमलीडीह सहित कुरुवा पंचायत के अन्य आश्रित गांवों में पिछले दो वर्षों के दौरान 255 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है। इससे जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि आवास के साथ-साथ गांवों में आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।उन्होंने बिजली व्यवस्था में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फीडर सेपरेशन का व्यापक अभियान चलाया गया है। पहले एक फीडर से 8 से 9 गांव जुड़े रहते थे, जिसके कारण किसी एक गांव में तकनीकी खराबी आने पर कई गांवों की बिजली प्रभावित होती थी। अब इसे घटाकर 4 गांव प्रति फीडर कर दिया गया है, जिससे खराबी का त्वरित निराकरण और शीघ्र बिजली बहाली संभव हो सकेगी।उन्होंने बताया कि अमलीडीह में 52 लाख रुपए की लागत से फीडर सेपरेशन का कार्य कराया गया है। साथ ही कृषि पंपों के लिए अलग फीडर की व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए नियमित और बेहतर विद्युत आपूर्ति मिलेगी। अमलीडीह बस्ती क्षेत्र में 7 लाख रूपए की लागत से 1.20 किलोमीटर एलटी केबलिंग तथा 25 केवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलेगी।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अमलीडीह में सड़क और बिजली के अलावा सीसी रोड, चेक डैम सहित अनेक विकास कार्यों को भी स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों के पूरा होने से गांव में आधारभूत अधोसंरचना मजबूत होगी, कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक गांव बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित होकर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बने। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता संतोष मिश्रा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा पटेल, जनपद उपाध्यक्ष श्री अशोक पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- -स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई की तैयारियों का किया शुभारंभरायपुर। प्रदेश में मानसून की अच्छी वर्षा के साथ खेती-किसानी का कार्य गति पकड़ चुका है। इसी क्रम में दुर्ग शहर विधायक एवं प्रदेश के शिक्षा, ग्रामोद्योग तथा विधि-विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव शुक्रवार को अपने गृहग्राम अहिवारा के समीप स्थित माटरा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों के साथ खेत में उतरकर कृषि कार्यों में सहभागिता निभाई। मंत्री श्री यादव ने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई से पूर्व खेत की मताई की तथा लगभग दो एकड़ भूमि को रोपाई के लिए तैयार कराया। इस दौरान उन्होंने खेत का निरीक्षण कर खाद की उपलब्धता एवं खेती की तैयारियों की जानकारी ली तथा किसानों को समय पर निंदाई-गुड़ाई सहित आवश्यक कृषि कार्य करने की सलाह दी। इसके पश्चात उन्होंने धान रोपाई कार्य का शुभारंभ कराया।मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी माटी, संस्कृति और मूल कार्य से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं किसान परिवार से हूं। खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार है। समय मिलने पर आज भी खेत में जाकर खेती के कार्यों में भाग लेता हूं।" उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।मंत्री बनने के बाद भी श्री यादव अपनी खेती की स्वयं देखरेख करते हैं तथा प्रतिवर्ष कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनका मानना है कि किसानों की मेहनत, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझने के लिए खेत से निरंतर जुड़े रहना आवश्यक है। किसान परिवार से होने के कारण वे किसानों की समस्याओं एवं जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हैं। खेत में किसानों के साथ उनकी सक्रिय सहभागिता छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और ग्रामीण संस्कृति के प्रति उनके आत्मीय जुड़ाव का सशक्त उदाहरण है।
- -पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की-बैगाकापा से हरित अभियान की शुरुआत, ‘वृक्ष मित्र वाहन’ को दिखाई हरी झंडीरायपुर। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन बनाने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान 3.0 का शुभारंभ लोरमी विकासखण्ड के ग्राम बैगाकापा में किया गया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कल्पवृक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने ‘वृक्ष मित्र वाहन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन गॉवों-शहरों में जाकर नीबू, मुनगा, बिही, जामुन आदि के पौधे वितरित कर नागरिकों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित करेगी।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक चुनौती है और इससे निपटने के लिए वृक्षारोपण के साथ वर्षा जल का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। प्रकृति के संतुलन के लिए पेड़, पानी और पर्यावरण का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण तथा वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रेरित किया, ताकि ग्रीष्मकाल में जल संकट से बचा जा सके। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, ग्रामीणों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार, वनमंडलाधिकारी श्री अभिनव कुमार, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री श्रीकांत पाण्डेय और जिला पंचायत के सीईओ श्री गोकुल रावटे के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामीणजन और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
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*स्वच्छता नियमों के पालन से बनेगा हर गांव स्वच्छ और कचरा मुक्त*
बिलासपुर/स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की राज्य सलाहकार एवं बिलासपुर संभाग प्रभारी श्रीमती मोनिका सिंह ने आज विकासखंड तखतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चितावर का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम पंचायत में संचालित ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन का अवलोकन भी किया। स्वच्छग्राही समूह के सदस्यों को नियमित डोर-टू-डोर कलेक्शन, स्रोत पर कचरा पृथक्करण सुनिश्चित कराने तथा स्वच्छता शुल्क के नियमित संग्रह एवं उसके महत्व के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया।राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन तभी सफल होगा, जब प्रत्येक नागरिक स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएगा। घर से निकलने वाले कचरे का चार प्रकार से पृथक्करण, नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में सहयोग, स्वच्छता शुल्क का समय पर भुगतान तथा सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। ग्राम पंचायत, स्वच्छग्राही एवं ग्रामीण यदि सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, तो प्रत्येक गांव को स्वच्छ, स्वस्थ, सुंदर और कचरा मुक्त बनाया जा सकता है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।निरीक्षण के दौरान स्वच्छग्राहियों एवं ग्रामीणों को कचरे को चार प्रकार से जैसे कि सूखा कचरा, गीला कचरा, सेनेटरी कचरा एवं विशेष देखभाल या इलेक्ट्रॉनिक कचरा को एकत्रित करने की जानकारी दी गई। साथ ही स्वच्छ एवं कचरा मुक्त ग्राम के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा करते हुए स्रोत पर कचरा पृथक्करण एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर ग्राम के सरपंच एवं सचिव को निर्देशित किया गया कि वे ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति निरंतर जागरूक करें, निर्धारित स्थान पर ही कचरे का निस्तारण सुनिश्चित कराएं तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन नहीं करने वाले व्यक्तियों को पहले समझाइश दें एवं आवश्यक होने पर नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई करें। ग्रामीणों को चार प्रकार से कचरा अलग-अलग रखने, नियमित रूप से स्वच्छता शुल्क का भुगतान करने तथा ग्राम में निर्मित सामुदायिक शौचालय का नियमित उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया।निरीक्षण के दौरान जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत तखतपुर, जिला समन्वयक, जिला सलाहकार, ब्लॉक समन्वयक, बीपीएम (एनआरएलएम), प्रधानमंत्री आवास योजना के तकनीकी सहायक, जनपद पंचायत की टीम, सरपंच, पंचगण, सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बिहान समूह की महिलाएँ, स्वच्छग्राही तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह के निर्देशानुसार निगम क्षेत्र में नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। निगम द्वारा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क निर्माण, रोड सीमेंटीकरण एवं नाली निर्माण सहित आवश्यक विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
इसी क्रम में 15वें वित्त आयोग मद से एसबीआई कॉलोनी में विकास कार्य एवं नगरोत्थान मद से मार्ग चैड़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। वहीं विकास शुल्क मद से अनुष्ठा रेसिडेंसी में रोड एवं नाली निर्माण का कार्य प्रगति पर है। कैलाश नगर स्थित महावीर मार्ग के सीमेंटीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कुरूद स्थित सुंदर विहार कॉलोनी में सामुदायिक भवन निर्माण तथा जामुल ट्रेचिंग ग्राउंड स्थित निर्माणाधीन डॉग हाउस में जल निकासी की समुचित व्यवस्था के लिए नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। निगम प्रशासन द्वारा क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं नागरिकों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न विकास कार्यों को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन कार्यों के पूर्ण होने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को सुगम आवागमन के साथ-साथ बेहतर जल निकासी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। - - राजधानी की बिजली व्यवस्था होगी और मजबूतरायपुर । राजधानी रायपुर की बिजली व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने के लिए दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य हॉट-लाइन तकनीक से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि लगभग 60 मीटर ऊंचे दो टावरों के बीच मुंबई-हावड़ा का अत्यंत व्यस्त रेलवे ट्रैक है, जहां औसतन हर 10 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। वहीं टावर के पास लगभग 12 फीट गहरा नाला भी है। ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं ने हॉट-लाइन तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैफिक को बिना बाधित किए इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि पर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं पूरी टीम को बधाई दी।ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल था। रेलवे ट्रैक को बिना बाधित किए तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हॉट-लाइन तकनीक से इस कार्य को पूरा करना ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दलदल सिवनी में निर्माणाधीन 220/132 केवी सब स्टेशन एवं इस लाइन सहित दोनों कार्यों पर लगभग 89 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसके पूर्ण होने पर रायता स्थित 400 केवी सब स्टेशन से दलदल सिवनी 220/132 केवी सब स्टेशन तक सीधे बिजली पहुंच सकेगी तथा रायपुर में बिजली आपूर्ति के लिए पहले उपलब्ध 220 केवी की चार सर्किट लाइनें बढ़कर छह सर्किट लाइनें हो जाएंगी।लगभग 200 मीटर लंबे, मोटे एवं वजनी कंडक्टर को दूसरी ओर पहुंचाने के लिए पहले पायलट रोप तैयार किया गया। दोनों ओर पांच-पांच टन क्षमता की विंचिंग मशीनों का उपयोग किया गया। लगभग 90 डिग्री के कोण पर छह कंडक्टर (तार) खींचने में तीन दिन का समय लगा। 200 मीटर लंबे हिस्से को धीरे-धीरे खींचकर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।इस प्रकार रेलवे ट्रैफिक को बाधित किए बिना 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य पूर्ण किया गया। इस कार्य में डीआरएम कार्यालय के अधिकारी भी समन्वय बनाये रहे एवं ट्रैक पर सुरक्षा के इंतजाम के साथ निगरानी के लिये कर्मचारी तैनात किये गए थे। इस कार्य में कार्यपालक निदेशक श्री संजय पटेल, मुख्य अभियंता (परियोजना) श्री प्रसन्ना गोसावी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री ईश्वर कंवर, अधीक्षण अभियंता श्री वीए देशमुख, कार्यपालन अभियंता श्री यूके यादव, सहायक अभियंता श्री सुरेश वर्मा, श्री पीके तिवारी, श्री प्रबोल मिश्रा, श्री राम ठाकुर, श्री प्रतीक मित्रा तथा एजेंसी लक्ष्मी सिद्धार्थ ट्रांसमिशन के श्री वेणुगोपाल रेड्डी का विशेष योगदान रहा।
- -31 जुलाई तक करें आवेदन, विश्व दिव्यांग दिवस पर मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्काररायपुर। दिव्यांगजनों के अधिकारों, सशक्तिकरण और समावेशी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं, संगठनों, नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने का सुनहरा अवसर है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विश्व दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर 2026) के अवसर पर प्रदान किए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। समाज कल्याण विभाग ने राज्य के सभी पात्र व्यक्तियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों से 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करने की अपील की है। इच्छुक आवेदक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।इन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों का उद्देश्य दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले नवाचारों, उत्कृष्ट सेवाओं और प्रेरणादायी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना तथा समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देने वालों को सम्मानित करना है।पुरस्कारों के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण, पुनर्वास सेवाएं, कौशल एवं दक्षता विकास, रोजगार सृजन, सुगम्यता (Accessibility) को बढ़ावा, अनुसंधान एवं नवाचार, खेल, कला, साहित्य, शिक्षा, सामाजिक सेवा तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों और उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित किया जाएगा।समाज कल्याण विभाग ने कहा है कि यह पुरस्कार केवल सम्मान का माध्यम नहीं, बल्कि दिव्यांगजन अधिकारों, समान अवसरों और समावेशी विकास के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल भी है। इससे उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और उनके प्रेरणादायी प्रयासों को देशभर में प्रोत्साहन प्राप्त होगा। विभाग ने सभी पात्र आवेदकों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील करते हुए कहा है कि अधिक से अधिक योग्य व्यक्ति एवं संस्थाएं इस अवसर का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें।
- -डीएवी स्कूल में सीडबॉल निर्माण और वन महोत्सव में बच्चों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्परायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल ट्री एटीएम की अनूठी पहल शुरू की गई है। इसके मुख्य उद्देश्य है सुकमा, बस्तर और जशपुर जिलों में शुरुआत, घर-घर जाकर निःशुल्क फलदार व औषधीय पौधे वितरण, और श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान को जनआंदोलन बनाना है .वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग के प्रयासों के तहत बीजापुर जिले में अभिनव पहल की गई है। जिले में पहली बार ‘ट्री एटीएम’ शुरू किया गया है। इसके साथ ही डीएवी स्कूल में सीडबॉल निर्माण प्रशिक्षण और वन महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।वनमंडल बीजापुर के बीजापुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एनएच-63 मुख्य मार्ग पर जिला अस्पताल चौक, एसपी बंगले के पास जिले का पहला ‘ट्री एटीएम’ स्थापित किया गया है। इसका शुभारंभ जिला पंचायत के श्री मैथ्यूज कुजूर ने किया। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों और ग्रामीणों को एक ही स्थान पर आसानी से निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराना है।अब लोगों को पौधों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। ट्री एटीएम के माध्यम से बच्चों और ग्रामीणों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने की शुरुआत भी कर दी गई है।सीडबॉल से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी हरियालीवन महोत्सव के तहत डीएवी स्कूल में वन विभाग के कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को सीडबॉल बनाने का प्रशिक्षण दिया। सीडबॉल मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट, कोकोपीट और रेत के मिश्रण से तैयार की जाती है। इसके अंदर विभिन्न प्रजातियों के बीज रखे जाते हैं। बारिश के दौरान इन्हें दुर्गम, बंजर और पहाड़ी क्षेत्रों में डालकर प्राकृतिक रूप से पौधों का विकास किया जा सकता है प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने जामुन, नीम, साजा, इमली, आम और अमलतास के बीजों से बड़ी संख्या में सीडबॉल तैयार किए। इस पहल से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ी।डीएवी स्कूल परिसर में वन महोत्सव के अंतर्गत पौधरोपण भी किया गया। विद्यार्थियों और अतिथियों ने करोंदा, इमली, जामुन, सीताफल और मुनगा जैसे फलदार एवं छायादार पौधे रोपे।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, पौधों की देखभाल और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।ट्री एटीएम और सीडबॉल जैसी पहल से बीजापुर में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग की यह पहल जिले में हरियाली बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।इस अवसर पर जनप्रतिनिधि श्री जिलाराम राणा, जिला अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष श्री संदीप तेलम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।वन विभाग की ओर से उप वनमंडलाधिकारी बीजापुर श्री देवेंद्र गोंड, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधीक्षक श्री मनोज बघेल, बीजापुर एवं गंगालूर वन परिक्षेत्र के अधिकारी- कर्मचारी, डीएवी स्कूल के प्राचार्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- -जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन और रोजगार को मिला नया आधाररायपुर । बिलासपुर के कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामुदायिक डबरी का निर्माण किया गया है। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई सुविधा का विस्तार, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था। इस कार्य के लिए कुल 5.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। गांव के समीप स्थित मुक्तिधाम क्षेत्र में वर्षा जल के उचित संग्रहण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।बरसात का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट, भू-जल स्तर में गिरावट तथा सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सामुदायिक डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल का प्रभावी संचयन संभव हुआ। डबरी निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिली। साथ ही जल उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन की शुरुआत हुई, जिसने ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया स्रोत तैयार किया।इस कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबरी में संचित पानी के कारण आसपास के पेड़-पौधों एवं हरियाली के संरक्षण में सहायता मिली। वर्षा के पानी के अनियंत्रित बहाव में कमी आने से मिट्टी कटाव पर भी नियंत्रण हुआ तथा क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। डबरी का निर्माण मुक्तिधाम के समीप होने के कारण सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पहले यहां अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों के दौरान जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जबकि अब इस डबरी से आवश्यक जल उपलब्ध होने लगा है। इसके साथ ही यह सामुदायिक परिसंपत्ति गांव के अन्य सामाजिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो रही है।आज यह सामुदायिक डबरी ग्राम नवागांव कर्रा के लिए जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस पहल से जहां एक ओर कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।














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