- Home
- छत्तीसगढ़
- रायपुर, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए राहत और भरोसे का आधार बनकर सामने आई है। मनेन्द्रगढ़ भरतपुर चिरमिरी जिले के ग्राम सलका निवासी किसान रामशरण ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में 46.40 क्विंटल धान का विक्रय कर सरकार की व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हुआ है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली के तहत निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचे किसान को सुव्यवस्थित व्यवस्था, डिजिटल तौल और त्वरित प्रक्रिया का लाभ मिला।उपार्जन केंद्र में किसानों के लिए बैठने एवं पेयजल की समुचित सुविधा उपलब्ध रही। डिजिटल तौल कांटे से सटीक माप-तौल और सत्यापन के बाद धान विक्रय की राशि सीधे बैंक खाते में जमा की गई, जिससे भुगतान को लेकर किसी प्रकार की अनिश्चितता नहीं रही। किसान रामशरण ने बताया कि पूर्व में धान बेचने के दौरान तौल और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं होती थीं, लेकिन इस बार की पारदर्शी व्यवस्था ने उनका भरोसा पूरी तरह बढ़ाया है।समय पर भुगतान मिलने से वे अब रबी फसल की तैयारी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की योजना निश्चिंत होकर बना पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था से प्रदेश के हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। रामशरण की यह कहानी बदली व्यवस्था की जमीनी सफलता का स्पष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की धान खरीदी की व्यवस्था और पारदर्शी नीति का लाभ अब सीधे किसानों तक पहुँच रहा है। इसी कड़ी में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कुकुरदी के प्रगतिशील किसान मोहन लाल ध्रुव ने शासन की नीतियों की सराहना करते हुए इसे किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण का नया अध्याय बताया है।3100 रुपए की दर और 21 क्विंटल खरीदी से बढ़ा उत्साह- किसान मोहन लाल ध्रुव ने बताया कि उनके पास 5 एकड़ कृषि भूमि है, जिस पर उन्होंने इस वर्ष बंपर पैदावार प्राप्त की है। उन्होंने उपार्जन केंद्र में अपना 70 क्विंटल धान सुगमता पूर्वक बेचा। श्री ध्रुव ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि विष्णु सरकार द्वारा 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की मान से धान की खरीदी की जा रही है, जो प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है।व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए किसान- धान खरीदी केंद्रों पर की गई व्यवस्थाओं को लेकर किसान मोहन लाल ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खरीदी केंद्रों में किसानों के लिए छाया, पेयजल और सुव्यवस्थित तौल की व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।मुख्यमंत्री का जताया आभार- अपनी खुशी साझा करते हुए मोहन लाल ध्रुव ने कहा, "आज किसानों को उनका हक और सम्मान दोनों मिल रहा है। विष्णु सरकार किसानों की वास्तविक चिंता करने वाली सरकार है। इस बेहतर व्यवस्था और लाभकारी मूल्य के लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।"राज्य सरकार की इस नीति से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
- रायपुर ।राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के उद्देश्य से औषधीय एवं सुगंधित पौधों का कृषिकरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत लेमनग्रास की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ कमाने का एक उत्कृष्ट विकल्प बनकर उभर रही है।लेमनग्रास (नींबू घास) किसानों के लिए एक बेहतरीन, कम लागत, अधिक मुनाफे वाली फसल है, जिसे बंजर या पथरीली ज़मीनों पर भी उगाया जा सकता है और यह कम पानी व कम देखभाल में साल में 4-5 बार कटाई देती है, जिससे 1 लाख/एकड़ तक की कमाई संभव है, क्योंकि इसके तेल की मांग परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स में बहुत है, साथ ही चाय और दवाइयों में भी इसका उपयोग होता है, जिससे किसानों को अच्छी आय मिलती है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टर और कृषि विभाग को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वन मंत्री श्री केदार कश्यप तथा छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम लगातार किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।औषधि पादप बोर्ड द्वारा लेमनग्रास की खेती करने वाले किसानों को निःशुल्क स्लिप्स (पौधे) प्रदान किए जा रहे हैं। खेती को बेहतर ढंग से विकसित करने के लिए 40-50 किसानों का 1-2 किलोमीटर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर खेती कराई जाती है। बोर्ड गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, मार्केटिंग सहयोग और खरीदी के लिए एमओयू की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।किसानों को लेमनग्रास की खेती से संबंधित संपूर्ण जानकारी देने के लिए बोर्ड द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। इसमें खेत तैयार करने, पौध रोपण, देखभाल से लेकर आसवन प्रक्रिया के जरिए तेल निकालने तक की पूरी तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।लेमनग्रास (Cymbopogon flexuosus) एक बहुवर्षीय सुगंधित घास है। इसके लिए मिट्टी का पीएच 6.6 से 8.0 उपयुक्त माना जाता है। भरपूर धूप वाली जगह पर फसल अच्छी बढ़ती है। जून माह पौध रोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। एक एकड़ में लगभग 25,000 पौधों की जरूरत होती है।गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद से उत्पादन बेहतर मिलता है। 7-10 दिन में एक बार सिंचाई आवश्यक है। लेमनग्रास में सामान्यतः कीटों का प्रकोप नहीं होता, इसलिए कीटनाशक की आवश्यकता नहीं पड़ती। पहली कटाई 6 माह बाद की जाती है। इसके बाद हर 3 माह में कटाई होती है और एक बार लगाई गई फसल से लगभग 5 वर्ष तक उत्पादन मिलता है।लेमनग्रास की घास को आसवन प्रक्रिया से तेल में बदला जाता है। इसका उपयोग साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और अरोमा उद्योगों में काफी अधिक है। प्रथम वर्ष प्रति एकड़ 60-80 किग्रा तेल,दूसरे वर्ष से लगभग 100 किग्रा तेल का बाजार मूल्य 1200 से 1600 रुपए प्रति किग्रा है जिसकी कुल लागत लगभग 20 हजार रुपए प्रति एकड़ वार्षिक लाभ 80 हजार से एक लाख रुपए तक है।उल्लेखनीय है कि कम लागत, सुरक्षित खेती और लगातार कई वर्षों तक उत्पादन के कारण लेमनग्रास को किसानों के लिए लाभ कमाने का उत्कृष्ट विकल्प बनाते हैं। राज्य सरकार की यह पहल किसानों को औषधीय पौधों की खेती अपनाने और अपनी आय को लगातार बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
- *- अब तक 3,59,944.16 मे. टन धान खरीदी गई**- धान खरीदी की व्यवस्था से किसान हुए संतुष्ट*दुर्ग/राज्य सरकार की सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी नीति के कारण जिले में धान खरीदी और उपार्जन केन्द्रों से धान के उठाव में तेजी आई है। धान खरीदी को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार की निर्णायक कदम से धान विक्रय की प्रक्रिया सरल हुई है। जिसके तहत अब दिन-रात कभी भी मोबाईल एप तुंहर टोकन के माध्यम से किसानों को धान बेचने के लिए टोकन मिलने लगा है। किसानों के लिए यह बड़ी सहुलियत है कि उनके लिए तुंहर टोकन एप अब 24 घंटे उपलब्ध है। अब मोबाईल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नही है। धान बेचने के बाद त्वरित भुगतान का किसानों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सरकार की व्यवस्था से प्रभावित होकर किसान अपनी उपज बेचने टोकन प्राप्त निर्धारित तिथि अनुसार उपार्जन केन्द्र पहुंच रहे हैं। जिले में अब तक 85,3286.02 लाख रूपए की लागत से 3,59,944.16 मे. टन धान की खरीदी हो चुकी है। समय पर भुगतान राशि मिलने पर 66264 किसान लाभान्वित हुए हैं। उपार्जन केन्द्रों से धान की उठाव भी तेजी से होने लगी है। जिससे अब दूसरे किसानों को धान बेचने का अवसर मिला है। उठाव हेतु 1,78,338.00 मे. टन धान का डीओ जारी हुआ है। अब तक उपार्जन केन्द्रों से 1,20,111.55 मे. टन धान का उठाव किया जा चुका है। सरकार की इस पारदर्शी व्यवस्था में किसान भी सहभागी बनते हुए धान बेचने के पश्चात् रकबा समर्पण करने आगे आ रहे हैं। जिससे बिचौलियों को अपनी धान खपाने का अवसर नहीं मिला है। जिले में अब तक धान बेच चुके 36786 कृषकों ने 862.88 हेक्टेयर रकबा समर्पण कर चुके हैं। उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने के लिए पहुंचने वाले किसानों हेतु जिला प्रशासन द्वारा समुचित प्रबंध किया गया है। वर्तमान में उपार्जन केन्द्रों में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके तहत केन्द्रों में 28,77,554 बारदाने उपलब्ध है।
- रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड नवागढ़ के अंर्तगत ग्राम पंचायत मिसदा निवासी श्रीमती सुशीला बाई पूर्व में एक जर्जर कच्चे घर में अपने परिवार सहित कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन यापन कर रही थीं। बरसात के दिनों में घर में पानी भर जाना, बच्चों को खुले में रात गुजारने की मजबूरी तथा सुरक्षा और सम्मान का अभाव उनके लिए एक बड़ी चुनौती रहा। किंतु वर्ष 2024-25 में जब उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत आवास सूची में दर्ज हुआ तो उनके जीवन में आशा की किरण साबित हुई। योजना के अंतर्गत 1.20 लाख की स्वीकृत वित्तीय राशि, साथ ही मनरेगा मजदूरी 21,870 रु तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12,000 रु. शौचालय निर्माण के लिए प्रदान किए गए।सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक एवं तकनीकी अमले के मार्गदर्शन में निर्माण समय सीमा के भीतर पूर्ण हुआ और सुशीला बाई का सपना एक सुंदर, सुरक्षित और पक्के आवास के रूप में साकार हो गया। सुशीला बाई गर्व से कहती हैं अब हमारे बच्चों को बारिश में भीगना नहीं पड़ता, यह घर हमें सुरक्षा के साथ सम्मान भी देता है। यह परिवर्तन केवल एक हितग्राही तक सीमित नहीं रहा, वल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने ग्राम पंचायत मिसदा में रोजगार, स्वच्छता और विकास की नई मंजिलें भी स्थापित कीं। आवास निर्माण से स्थानीय मिस्त्रियों, मजदूरों और सामग्री विक्रेताओं को काम मिला, शौचालय निर्माण से खुले में शौच की समस्या कम हुई तथा स्वामित्व महिला के नाम पर होने से. महिलाओं का सामाजिक सम्मान बढ़ा। डिजिटल भुगतान व ऑनलाइन एप्लिकेशन प्रक्रिया से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और पंचायत का प्रशासनिक स्तर भी सुदृढ़ हुआ।यह सफलता कहानी स्पष्ट प्रमाण है कि एक पक्का मकान केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का आधार है। सुशीला बाई का नया घर इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हों, तो एक परिवार नहीं- पूरा गांव विकास की ओर अग्रसर होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) आज ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, उज्वल और समृद्ध भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए पाटन विधानसभा क्षेत्र के लिए कुल 23.50 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा अनुशंसित इन कार्यों के संपादन के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पाटन को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाटन विधानसभा के अंतर्गत ग्राम एवं ग्राम पंचायत छाटा के निषाद पारा में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य हेतु 6.50 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत डिडाभाठा (रानीतराई) के निषाद पारा में सामुदायिक भवन के पास किचन शेड एवं नाली निर्माण कार्य के लिए, ग्राम बीजाभाठा के मुक्तिधाम में शेड निर्माण कार्य के लिए और ग्राम महकाखुर्द के पंचायत भवन में बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य हेतु 5-5 लाख रूपए तथा ग्राम पंदर में लीला चौरा के पास बाउंड्रीवाल निर्माण हेतु 2.00 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई है।
- रायपुर,। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज राजधानी रायपुर के आयुर्वेदिक हॉस्पिटल कैंपस स्थित 50 बिस्तर वाले शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता की जांच करना और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को आमजन के लिए अधिक प्रभावी बनाना था।निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का बारीकी से अवलोकन किया और वहां उपलब्ध संसाधनों तथा मरीजों को दी जा रही उपचार सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली। उसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने वहां तैनात चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य स्टाफ के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि बेहतर उपचार और स्वास्थ्य संसाधनों का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि इसका सीधा लाभ मरीजों को मिले।
- पहले टपकती छत से बच्चों को पढ़ाई में होती थी परेशानी, अब सुरक्षित परिवेश में संवर रहा है बच्चों का भविष्य*दुर्ग/ कहते हैं कि एक सुरक्षित छत केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं होती, बल्कि वह एक परिवार के आत्मविश्वास और बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव होती है। ग्राम कोड़िया के रहने वाले दुलार यादव के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना कुछ ऐसा ही बड़ा बदलाव लेकर आई है, जिसने उनके जीवन से अनिश्चितता के बादलों को हटाकर खुशहाली की रोशनी भर दी है। श्री दुलार यादव बताते है कुछ समय पहले तक उनका परिवार एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। सबसे बड़ी चुनौती मानसून के दौरान आती थी। टपकती छत न केवल रात की नींद छीन लेती थी, बल्कि घर के भीतर रखा सामान बचाना भी मुश्किल हो जाता था। इस अव्यवस्था का सबसे बुरा प्रभाव उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ता था। बारिश के दिनों में किताबों को भीगने से बचाना और सीलन भरे कमरों में एकाग्रता के साथ पढ़ाई करना बच्चों के लिए एक बड़ी बाधा बन गया था। दुलार यादव की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे स्वयं के खर्च पर पक्का मकान बनवा सकें। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए एक वरदान साबित हुई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन के सहयोग से दुलार यादव का ’पक्के घर’ का सपना साकार हुआ। आज उनके पास एक मजबूत छत है, जिसने न केवल उन्हें मौसम की मार से बचाया है, बल्कि उन्हें समाज में एक गरिमामयी जीवन भी प्रदान किया है। श्री यादव ने बताया घर बदलते ही परिवार की दिनचर्या और बच्चों के मनोबल में पारदर्शी बदलाव आया है। बच्चों को पढ़ाई के लिए एक शांत, सूखा और सुरक्षित स्थान मिला है। टपकती छत की चिंता अब उनके सपनों के आड़े नहीं आती। उनका कहना है "यह पक्का घर सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सरकार का एक अनमोल उपहार है।"
- रायपुर। राज्य वन क्षेत्र अंतर्गत आ रहे शिकार के मामलों पर अंकुश लगाने व ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए जिससे वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, इसके लिए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण व संवर्धन के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है, जिसके फलस्वरूप वनमंत्री श्री कश्यप के नेतृत्व व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के कुशल दिशा निर्देश का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग द्वारा लगातार एंटी स्नेयर वाक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वन विभाग को लगातार सफलता मिल रही है।वन क्षेत्र में शिकार पर अंकुश लगाने के लिए कठोर गश्तए वनकर्मियों की तैनाती, आधुनिक तकनीक,ड्रोन, ट्रैप कैमरे, का उपयोग, स्थानीय समुदायों को जोड़ना, कड़े कानून और जुर्माने, और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाने चाहिए, खासकर पिकनिक या अन्य गतिविधियों की आड़ में होने वाले अवैध शिकार को रोकने के लिए चौकसी बढ़ाया गयी है।गरियाबंद जिले के परिक्षेत्र कुल्हाड़ीघाट के अंतर्गत ओड़ सर्कल में वन्यजीव अपराध के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। वन विभाग द्वारा अवैध शिकार को रोकने के लिए निरंतर निगरानी बरती जा रही है और नियमित एन्टी स्नेयर वाक अभियान चलाए जा रहे हैं। वन विभाग की मुस्तैदी के चलते ग्राम सुनाबेड़ा (ओडिशा) के 02 और ग्राम ओड़ के 04 अभियुक्तों को धर-दबोचा गया है। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से खरगोश पकड़ने के फंदे, तीर-कमान और मछली पकड़ने के जाल जैसे शिकार की सामग्री बरामद किए गए हैं। इन अभियुक्तों के विरुद्ध दो अलग-अलग प्रकरणों में पी.ओ.आर. (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है। गिरफ्तार किए गए सभी 06 अभियुक्तों को दिनांक 07 जनवरी को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया। वन विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकारियों के हौसले पस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वन विभाग द्वारा वनों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए गश्त अभियान को और अधिक सशक्त किया गया है ताकि भविष्य में शिकार की ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की भी हो रही सराहनाकोरबा । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक जनवरी 2026 से समस्त शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के सभी कार्यालयों में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। कलेक्ट्रेट कोरबा में स्वयं कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। कलेक्टर के समयपालन का प्रत्यक्ष प्रभाव अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी दिखाई दे रहा है और अब अधिकांश कर्मचारी समय से पूर्व कार्यालय पहुंचने लगे हैं।ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम के लागू होने के बाद विभागीय कार्यों में निर्धारित समय पर गति आने लगी है। अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालय आने एवं जानेकृदोनों समय अपनी उपस्थिति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज करानी अनिवार्य कर दी गई है। कार्यालयों के निर्धारित लोकेशन को आधार बेस सिस्टम में फीड किया गया है, जिससे उपस्थिति केवल कार्यालय परिसर के आसपास रहते हुए ही लगाई जा सकती है। इससे अनाधिकृत अनुपस्थिति, देरी से आने तथा समय पूर्व कार्यालय छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है।शासन की इस पारदर्शी व्यवस्था की सर्वत्र सराहना हो रही है। आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों की यह प्रमुख शिकायत रहती थी कि कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते और कई अधिकारी दौरे के नाम पर कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाते हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस के चलते अब ऐसी शिकायतों में भी स्पष्ट कमी आई है और कार्य संस्कृति में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है।शहर के आमनागरिक परमेश्वर यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहतरीन पहल की है। यह व्यवस्था बहुत पहले लागू हो जानी चाहिए थी। अस्पताल, तहसील और स्कूल सभी जगह स्थिति खराब होने की शिकायत रहती है। सरकारी अस्पताल में समय पर डॉक्टर नहीं आते हैं, नर्स भी नहीं रहती। तहसील में बाबू नहीं आया होता है और अन्य कार्यालयों में भी किसी काम से जाने पर मालूम होता है कि वे नहीं हैं। अब ऑनलाइन अटेंडेंस से व्यवस्था में सुधार होगा। उनकी मांग है कि सभी ऑफिस में सीसीटीवी भी लगानी चाहिए।इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री कमलज्योति ने बताया कि आधार बेस ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था न केवल समयपालन को बढ़ावा देती है, बल्कि विभागीय कार्यों की निरंतरता एवं पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों का दायित्व है कि वे निर्धारित समयानुसार कार्यालय पहुंचे और आमजन से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करें।पीआरओ कमलज्योति ने यह भी कहा कि शासन की यह पहल अत्यंत सराहनीय है और इसे और अधिक कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है। जो अधिकारी-कर्मचारी बिना ठोस कारण के समय पर उपस्थित नहीं होते, उनके प्रति विभागीय कार्रवाई तथा आवश्यक होने पर वेतन कटौती जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इससे समयपालन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और लापरवाह कर्मचारियों में भी जवाबदेही की भावना विकसित होगी। उन्होंने विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों, तहसीलों तथा आमनागरिकों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित सेवाओं वाले कार्यालयों में इस व्यवस्था को और अधिक कठोरता से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
- -एक घर, नया भरोसा: पीएम आवास से लक्ष्मीन बाई के जीवन में आई स्थिरता-जहाँ टपकती थी बारिश की बूंदे, अब बसता है सुकूनरायपुर। हर व्यक्ति के मन में यह सपना होता है कि उसका अपना एक सुरक्षित आशियाना हो, जहाँ वह और उसका परिवार निश्चिंत होकर जीवन-यापन कर सकें। प्रधानमंत्री आवास योजना इसी सपने को साकार करने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को पक्का, सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम अवरीद की हितग्राही श्रीमती लक्ष्मीन बाई की कहानी प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनका पक्का आवास अब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था। लक्ष्मीन बाई ने बताया कि पहले उनका घर कच्चा था। बरसात के दिनों में छप्पर से पानी टपकता था, घर के भीतर नमी और गंदगी बनी रहती थी। इसके अलावा बंदर, साँप और बिच्छू जैसे जीव-जंतुओं का हमेशा डर लगा रहता था, जिससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। हर बारिश उनके लिए एक नई चुनौती बनकर आती थी।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब बरसात हो या तेज धूप, किसी भी मौसम में चिंता नहीं रहती। मजबूत छत, सुरक्षित दीवारें और व्यवस्थित घर ने उनके परिवार को सुकून, सुरक्षा और आत्मसम्मान दिया है। लक्ष्मीन बाई बताती हैं कि अब वे अपने परिवार के साथ स्वच्छ, सुरक्षित और सुखद वातावरण में रह रही हैं। परिवार की आजीविका खेती मजदूरी पर निर्भर है, इसके बावजूद पक्का आवास मिलने से उनका जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और सुरक्षित हो गया है। घर की चिंता से मुक्त होकर अब वे अपने परिवार के बेहतर भविष्य और परिवार की खुशहाली पर ध्यान दे पा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार को सरकार की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है तथा परिवार को नियमित रूप से मुफ्त राशन भी प्राप्त हो रहा है, जिससे दैनिक जीवन की आवश्यकताएँ सहज रूप से पूरी हो रही हैं और आर्थिक दबाव में कमी आई है।
- -संस्थागत स्वच्छता को सुदृढ़ करने राज्य सरकार की अभिनव पहलरायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार संस्थागत स्वच्छता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अभिनव पहल की शुरूआत हुई है। आदिम जाति विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मनेन्द्रगढ़ भरतपुर चिरमिरी जिले के विकासखंड खड़गवां से प्रदेश में जर्नी आफ सेनिटेशन हाइजिन (जोश) का हरी झंडी दिखाकर औपचारिक शुभारंभ किया है।गौरतलब है कि ‘जोश’ पहल के माध्यम से स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य संस्थागत व सामुदायिक शौचालयों की नियमित, वैज्ञानिक और सुरक्षित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को ‘स्वच्छता प्रहरी’ के रूप में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि स्वच्छता केवल स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम है। ‘जोश’ पहल से युवा स्वच्छता प्रहरी बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में तैयार इस योजना के तहत प्रारंभिक चरण में प्रत्येक जनपद में एक स्वच्छता प्रहरी नियुक्त किया गया है। योजना की सफलता के आधार पर इसे पूरे जिले में विस्तारित किया जाएगा।स्वच्छता प्रहरी निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार ग्राम पंचायतों का भ्रमण करेंगे और आधुनिक उपकरणों की सहायता से शौचालयों की पाक्षिक व मासिक सफाई सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान चयनित स्वच्छता प्रहरियों को आधुनिक सफाई उपकरणों से युक्त स्वच्छता किट एवं सुरक्षा सामग्री भी प्रदान की गई। संस्था प्रभारी के अनुरोध पर सफाई उपरांत प्रति यूनिट 200 रूपए स्वच्छता शुल्क का भुगतान किया जाएगा, जिससे युवाओं को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा।
- संवेदनशील शासन की मिसालरायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘जनदर्शन’ के माध्यम से अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा सुनते हुए न केवल उसकी समस्या को समझ रहे हैं, बल्कि मौके पर ही समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। लोगों की जरूरतों, मांगों और तकलीफों के प्रति यह संवेदनशील और त्वरित दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि संवेदनशीलता ही सुशासन के केंद्र में है। जब जन आकांक्षाओं को मुख्यमंत्री की सहृदयता से दिशा मिलती है, तब अंत्योदय की संकल्पना साकार होती है।राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री के शासकीय निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन आज सेवा, संवेदना और समाधान का सजीव उदाहरण बन गया। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 1950 आवेदन प्राप्त हुए।मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के दूर-दराज़ अंचलों से आए नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही स्पष्ट निर्देश दिए। कई जरूरतमंदों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि जन सरोकारों से जुड़ी समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की राह: जीवन में लौटी गतिशीलताआज के जनदर्शन ने कई दिव्यांगजनों के जीवन में नई उम्मीद जगाई। रायपुर के खमतराई निवासी श्री जीवन दास मानिकपुरी और आरंग के श्री भारत साहू को मुख्यमंत्री द्वारा बैटरीचलित ट्राइसिकल प्रदान की गई। ट्राइसिकल पाकर उनके चेहरे पर आत्मनिर्भरता की मुस्कान स्पष्ट झलक रही थी। अब उन्हें आवागमन के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसी तरह रायपुर के चंदू यादव और सुमन साहू को ट्राइसिकल एवं व्हीलचेयर प्रदान की गई। वहीं, सुनने की क्षमता खो चुके सागर नायक और उमेश पटेल को तत्काल श्रवण यंत्र उपलब्ध कराए गए, जिससे वे फिर से दुनिया की आवाज़ें सुन सकेंगे।लकवा पीड़ित बसंती को इलाज के लिए मिली 5 लाख रुपए की सहायताजनदर्शन में महासमुंद जिले के ग्राम बड़ेटेमरी की श्रीमती बसंती साव की बड़ी उम्मीद आज पूरी हुई। पैरों से लकवाग्रस्त बसंती ने अपने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता और पारिवारिक स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री श्री साय ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अधिकारियों को तत्काल निर्देशित कर मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए की राशि स्वीकृत कराई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बसंती को शासन से 75 हजार रुपए की सहायता मिल चुकी है। इस त्वरित निर्णय से बसंती और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली।60 वर्षीय हनुमंत राव को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभजनदर्शन में रायपुर के तात्यापारा निवासी 60 वर्षीय अविवाहित श्रमिक श्री हनुमंत राव की समस्या का भी मौके पर ही समाधान हुआ। माता-पिता के निधन के बाद राशन कार्ड की पात्रता को लेकर परेशान श्री राव ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा बताई। मुख्यमंत्री ने उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनी और उपस्थित अधिकारियों को तत्काल राशन कार्ड बनाने के निर्देश दिए, जिससे वे अब शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।तीन दिव्यांगों को 20-20 हजार रुपए की तात्कालिक सहायतामुख्यमंत्री श्री साय ने सूरज नगर लाभांडी, रायपुर निवासी 17 वर्षीय दिव्यांग राज शर्मा को दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण 20 हजार रुपए की तात्कालिक आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इसके साथ ही श्री फूल गिरी गोस्वामी को पुत्री के विवाह हेतु 20 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई। रायगढ़ निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग ओमप्रकाश निषाद को उच्च शिक्षा के लिए भी मुख्यमंत्री द्वारा 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता तत्काल स्वीकृत की गई।जनदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह केवल आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आम जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद नागरिक को अनावश्यक भटकना न पड़े।
- आज के जनदर्शन में कुल 1950 आवेदन प्राप्तरायपुर/ लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच का सीधा संवाद ही सुशासन की असली कसौटी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ‘जनदर्शन’ के माध्यम से अंतिम छोर के व्यक्ति की पीड़ा सुन रहे हैं और मौके पर ही उनका समाधान भी कर रहे हैं। इससे न केवल लोगों की उम्मीदें तत्परता से पूरी हो रही हैं, बल्कि यह नागरिकों में व्यवस्था के प्रति विश्वास भी बढ़ा रहा है। लोगों की जरूरतों, मांगों और तकलीफों के प्रति संवेदनशीलता के साथ तत्परता साबित करती है कि संवेदनशीलता ही सुशासन के केंद्र में है। जब लोगों की उम्मीदों और जन आकांक्षाओं को मुख्यमंत्री की सहृदयता से पंख मिलते हैं, तो सही मायनों में अंत्योदय का सपना साकार होता है। आज के जनदर्शन में कुल 1950 आवेदन प्राप्त हुए।आज के जनदर्शन में कुल 1950 आवेदन प्राप्तमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के राजधानी रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में आज आयोजित जनदर्शन सेवा, संवेदना और समाधान का त्रिवेणी संगम बन गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने एक बार फिर साबित किया कि जन सरोकारों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण उनकी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घंटों तक प्रदेश के कोने-कोने से आए फरियादियों की अर्जी सुनी। लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए उन्होंने तत्काल ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। कई जररूतमंदों के लिए तुरंत आर्थिक सहायता मंजूर की।दिव्यांगों के जीवन से छटेगा अंधेरा, अब खुद तय करेंगे अपनी राहमुख्यमंत्री श्री साय ने आज के जनदर्शन ने कई दिव्यांगजनों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी। रायपुर के खामतराई के श्री जीवन दास मानिकपुरी और आरंग के श्री भारत साहू को मुख्यमंत्री ने जब बैटरीचलित ट्राइसिकल सौंपी, तो उनकी आंखों में आत्मनिर्भरता की चमक साफ दिखाई दी। अब उन्हें कहीं आने-जाने के लिए किसी और का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। इसी तरह रायपुर के चंदू यादव और सुमन साहू को भी ट्राइसिकल व व्हीलचेयर प्रदान की गई। वहीं, सुनने की क्षमता खो चुके सागर नायक और उमेश पटेल को तत्काल श्रवण यंत्र उपलब्ध कराए गए, जिससे वे अब दुनिया की आवाजें सुन सकेंगे।लकवा के इलाज के लिए बसंती को मिले 5 लाख रुपएजनदर्शन में महासमुंद जिले के ग्राम बड़ेटेमरी की श्रीमती बसंती साव की बड़ी उम्मीद आज पूरी हुई। पैरों से लकवाग्रस्त बसंती ने जब इलाज के लिए बड़ी रकम की जरूरत और अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति की जानकारी मुख्यमंत्री को दी, तो श्री साय ने तनिक भी देरी नहीं की। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल निर्देशित कर मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता योजना से पांच लाख रुपए की राशि स्वीकृत कराई। बसंती को इससे पहले भी शासन से 75 हजार रुपए की मदद मिल चुकी है। मुख्यमंत्री की इस त्वरित कार्रवाई ने बसंती के परिवार को बड़ी चिंता से मुक्त कर दिया। श्री साय ने इलाज के साथ ही शिक्षा व अन्य जरूरतों के लिए भी कई लोगों के लिए आर्थिक सहायता की तत्काल मंजूरी दी।60 साल के हनुमंत राव को अब मिलेगा सरकारी राशनजनदर्शन में रायपुर के तात्यापारा निवासी 60 वर्षीय अविवाहित श्रमिक श्री हनुमंत राव की समस्या का भी त्वरित निराकरण हुआ। माता-पिता के निधन के बाद राशन कार्ड की पात्रता को लेकर जूझ रहे श्री राव ने अपनी व्यथा मुख्यमंत्री को सुनाई। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड न होने से वे सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने आत्मीयता से उनकी बात सुनी और मौके पर उपस्थित अधिकारियों को तत्काल उनका राशन कार्ड बनाने के निर्देश दिए।तीन दिव्यांगों को 20-20 हजार रुपए की आर्थिक सहायतामुख्यमंत्री ने सूरज नगर लाभांडी, रायपुर निवासी दिव्यांग 17 वर्षीय राज शर्मा की भी समस्या का त्वरित निदान किया। उन्होंने दोनों पैरों से दिव्यांग राज को 20 हजार रुपए का चेक देकर तात्कालिक सहायता प्रदान की। श्री साय ने श्री फूल गिरी गोस्वामी को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपए की सहायता राशि का चेक प्रदान किया। रायगढ़ निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग ओमप्रकाश निषाद को भी उच्च शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने तत्काल 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की।संवेदनशीलता ही सुशासन का आधार- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जनदर्शन में कहा कि यह केवल आवेदन लेने का माध्यम नहीं, बल्कि आम जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनदर्शन में आने वाले हर आवेदन पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ताकि जररूतमंदों को भटकना न पड़े।
- मुख्यमंत्री जनदर्शन, दिव्यांग सहायता, आर्थिक सहायता, त्वरित समाधान, सामाजिक कल्याणरायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित महत्वकांक्षी जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान सूरज नगर लभांडी रायपुर निवासी दिव्यांग 17 वर्षीय राज शर्मा के समस्या का त्वरित निदान किया।उन्होंने दोनों पैर से दिव्यांग राज शर्मा को 20 हजार रूपए का चेक देकर तत्कालीक सहायता प्रदान की। दिव्यांग श्री राज शर्मा के माता श्रीमती विभा शर्मा ने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री साय का हृदय से आभार व्यक्त किया।गौरतलब है कि दोनों पैर से दिव्यांग श्री राज शर्मा की माता श्रीमती विभा शर्मा ने जीवन यापन हेतु डेली निड्स की दुकान खोलने हेतु जनदर्शन में आज मुख्यमंत्री से मिलकर आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की थी। जिसपर मुख्यमंत्री श्री साय ने तत्कालिक 20 हजार रूपए का आर्थिक सहायता प्रदान की।इसी प्रकार रायगढ़ निवासी दोनांे पैर से दिव्यांग ओमप्रकाश निषाद ने उच्च शिक्षा हेतु मुख्यमंत्री से मिलकर आर्थिक सहायता के लिए निवेदन किया था, जिस पर मुख्यमंत्री त्वरित निर्णय लेते हुए 20 हजार रूपए का आर्थिक सहायता प्रदान की। दिव्यांग ओमप्रकाश निषाद ने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
- रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान किया। इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांगजनों को बैटरी ट्राइसिकल प्रदान किए गए।जनदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जनदर्शन में पैरों से चलने में असमर्थ रायपुर शंकर नगर से श्रीमती बिन्दु बीरे उम्र 45 वर्ष बेट्री चालित ट्रायसायकल प्रदान किया l कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे ट्रायसायकल नहीं खरीद पा रही थी l उनकी समस्या सुनते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल बेट्री चालित ट्रायसायकल उपलब्ध कराया।बेट्री चालित ट्रायसायकल मिलने पर श्रीमती बिन्दु बीरे ने मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब कहीं भी आने-जाने में कठिनाई नहीं होगी, उन्होंने मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की प्रशंसा की।
- मुख्यमंत्री ने कहा- सरकार दे रही खेलों को बढ़ावा, छत्तीसगढ़ का नाम करें रोशनरायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज यहां जनदर्शन कार्यक्रम में आर्चरी के दिव्यांग खिलाड़ी श्री होरीलाल यादव और लक्की सोनी ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री को श्री यादव और श्री सोनी ने बताया कि वे दिव्यांग तीरंदाजी के नेशनल खिलाड़ी हैं और आगामी फरवरी महीने में पटियाला में पुनः तीरंदाजी नेशनल में शामिल होंगे।मुख्यमंत्री श्री साय को दोनों खिलाड़ियों ने बताया कि वे आर्चरी की इंटरनेशनल स्पर्धाओं में भी अपने टैलेंट का प्रदर्शन करना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें उच्च स्तरीय खेल उपकरण की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने तीरंदाजों को खेल की सभी सुविधाएं प्रदान करने आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी खेलों को बढ़ावा दे रही है। अपने खेल हुनर को तराशें और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें।
- -9 से 13 जनवरी तक ग्राम दुधली में जुटेंगे देश-विदेश के 15 हजार रोवर-रेंजररायपुर। बालोद जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, नई दिल्ली के तत्वावधान में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में 09 से 13 जनवरी 2026 तक ‘प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी’ का वृहद एवं भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन देश में पहली बार आयोजित हो रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के 4,252 सहित देश-विदेश से कुल 15,000 रोवर, रेंजर एवं सीनियर स्काउट-गाइड भाग लेंगे। प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का शुभारंभ शुक्रवार 09 जनवरी 2026 को दोपहर 2 :00 बजे राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल जैन करेंगे।उद्घाटन समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति उद्घाटन समारोह में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कांकेर लोकसभा सांसद श्री भोजराज नाग, मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के.के. खंडेलवाल उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा विधायकगण, राज्य व जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय व राज्य पदाधिकारी, तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे।जंबूरी के समापन अवसर पर 12 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही आयोजन के विभिन्न दिवसों में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अतिथि शामिल होंगे।पांच दिवसीय इस आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं अन्य देशों से आए प्रतिभागियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।इस जंबूरी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी एवं भारतीय संस्कृति के साथ-साथ वैश्विक संस्कृति की भी आकर्षक झलक देखने को मिलेगी।जंबूरी के दौरान मार्च पास्ट, क्लोजिंग सेरेमनी, एथनिक फैशन शो, एडवेंचर एरिया, वॉटर स्पोर्ट्स, कैप फायर, रोड कैम्प फायर, राज्य प्रदर्शनी, आदिवासी कार्निवल, राष्ट्रीय युवा दिवस, मास ट्री प्लांटेशन, आपदा प्रबंधन, बैंड प्रतियोगिता, युवा सांसद, क्विज प्रतियोगिता, लोक नृत्य सहित अनेक शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जंबूरी काउंसिल एवं जिला प्रशासन द्वारा आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। जंबूरी मार्केट में खाद्य सामग्री, दवाइयाँ एवं आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध रहेंगी। शुद्ध पेयजल, शौचालय, स्नानघर एवं स्वच्छता व्यवस्था, 30 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल, 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा, अग्निशमन, पुलिस, यातायात एवं सुरक्षा बलों की तैनाती एनडीआरएफ टीम की विशेष तैनातीरहेगी।प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आयोजन बालोद जिला एवं सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस आयोजन से न केवल जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं में नेतृत्व, सेवा एवं राष्ट्र निर्माण की भावना भी प्रबल होगी।
- -एक चिकित्सा अधिकारी समेत प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में होंगे 12 मेडिकल स्टाफ-स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभाररायपुर । स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य में 12 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की स्वीकृति दी गई है।वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुख्य बजट के प्रावधान अनुसार नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई थी।घोषणा के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी करते हुए नगर निगम चिरमिरी के कोरिया कालरी, खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत जरौंधा, कोंडागांव विकासखंड के ग्राम गोलावंड, बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम मुरमा, कोरिया जिले के ग्राम सकरिया, राजपुर विकाखंड के ग्राम सेवारी, विकासखंड दरभा के ग्राम पोड़ागुड़ा तथा ग्राम चिंतापुर, दुलदुला विकासखंड के ग्राम करडेगा , विकासखंड फरसाबहार के ग्राम पेटामारा(अकीरा) तथा ग्राम गंझियाडीह और विकासखंड कुनकुरी के ग्राम केराडीह में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए नवीन पदों की स्वीकृति दी गई है।आदेश के अनुसार प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में एक चिकित्सा अधिकारी, एक ग्रामीण चिकित्सा सहायक, एक फार्मासिस्ट ग्रेड 2, एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, 3 स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्निशियन, एक सहायक ग्रेड 3, 1 वार्ड बॉय और 2 आया का पद शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना से राज्य के लोगों को ग्रामीण स्तर पर भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और जरूरतमंद लोगों का सही समय पर शीघ्र उपचार संभव हो सकेगा।
- मुख्यमंत्री ने जनदर्शन में तत्काल राशन कार्ड बनाने के दिए निर्देश, मिलेगा शासकीय योजनाओं का लाभरायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से जनदर्शन में अपनी समस्या लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री सभी से बड़ी ही आत्मीयता से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उसी क्रम में रायपुर के 60 वर्षीय अविवाहित श्रमिक श्री हनुमंत राव ने मुख्यमंत्री से मिलकर कर उन्हें बताया कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है, जिसकी वजह से वे शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तत्काल श्री राव का राशन कार्ड बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए ।मुख्यमंत्री को श्री राव ने बताया कि वे राजधानी रायपुर के तात्यापारा वार्ड में लगभग 60 वर्ष से निवासरत हैं। पूर्व में उनके माता-पिता के राशन कार्ड में उनका भी नाम जुड़ा था, जिससे उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलता था। उनके माता-पिता की अब मृत्यु हो चुकी है। वे अविवाहित हैं और अकेले जीवन यापन करते हैं। राशन कार्ड नहीं होने की वजह से उन्हें खाद्य विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय की व्यथा को बहुत आत्मीयता से सुना और अधिकारियों को तत्काल श्री राव को राशनकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
- मुख्यमंत्री ने प्रदान किया बैटरी ट्राइसिकल, व्हीलचेयर और श्रवण यंत्ररायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान किया। इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांगजनों को बैटरी ट्राइसिकल, व्हीलचेयर एवं श्रवण यंत्र प्रदान किए गए।मुख्यमंत्री श्री साय ने जनदर्शन में आरंग से आए श्री भारत साहू को बैटरी चालित ट्राइसिकल प्रदान किया, श्री साहू ने बताया कि अब उन्हें कहीं आने-जाने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पहले किसी के समय मिलने पर ही वे बाहर जा पाते थे, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। बैटरी ट्राइसिकल मिलने से उनका जीवन अब कहीं अधिक सहज हो जाएगा।इसी तरह खमतराई रायपुर निवासी श्री जीवन दास मानिकपुरी ने बताया कि उनका पैर बचपन से पोलियोग्रस्त है, आज उन्हें बैटरी ट्राइसिकल प्रदान की गई। श्री दास ने बताया कि जनदर्शन में उनकी समस्या का तत्काल समाधान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से उनकी दैनिक दिनचर्या आसान हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने रायपुर के मोवा निवासी श्री चंदू यादव को ट्राइसिकल और सुश्री सुमन साहू को व्हीलचेयर प्रदान किया। जिसे पाकर दोनों के चेहरे खिल गए।जनदर्शन के दौरान रायपुर निवासी श्री सागर नायक एवं श्री उमेश पटेल को श्रवण यंत्र भी प्रदान किए गए। श्री सागर नायक ने बताया कि बीते कुछ समय से उनकी श्रवण क्षमता पूरी तरह समाप्त हो गई थी, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे श्रवण यंत्र नहीं खरीद पा रहे थे। उनकी समस्या सुनते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल श्रवण यंत्र उपलब्ध कराया।श्रवण यंत्र मिलने पर श्री उमेश पटेल ने मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें फिर से सुनने की क्षमता मिल पाई है, उन्होंने मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की प्रशंसा की।
- रायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार और नगर निगम जोन 10 जोन कमिश्नर श्री विवेकानंद दुबे के निर्देशानुसार जोन 10 स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जोन 10 क्षेत्र अंतर्गत होटल गुरुकृपा राजधानी की स्वच्छता का औचक निरीक्षण जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री अमित बेहरा, वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक श्री यशवंत बेरिहा एवं अन्य सम्बंधित कर्मचारियों की उपस्थिति में प्राप्त जनशिकायत की वस्तुस्थिति की जानकारी लेने किया गया. औचक निरीक्षण के दौरान होटल में गन्दगी पायी गयी और प्राप्त जनशिकायत स्थल पर सही पायी गयी. जोन कमिश्नर के निर्देश पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी ने होटल गुरुकृपा राजधानी के संचालक पर तत्काल 2500 रूपये का ई जुर्माना किया और प्राप्त जनशिकायत का जोन के स्तर पर त्वरित निदान किया.
- रायपुर/छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा की अध्यक्षता में आज खाद्य आयोग के राज्य कार्यालय स्थित सभा कक्ष में NFSA (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013) एवं CGFSA (छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सदस्य सचिव श्री राजीव जायसवाल, सदस्यगण तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक में सदस्य सचिव श्री जायसवाल द्वारा आयोग की शक्तियों, दायित्वों एवं कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि आयोग का प्रमुख दायित्व हितग्राहियों की पात्रताओं के क्रियान्वयन की सतत निगरानी, शिकायतों की जांच, जिला शिकायत निवारण अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई तथा राज्य सरकार को आवश्यक अनुशंसाएं देना है।बैठक में AAY, PHH, APL, निराश्रित एवं निशक्त श्रेणी के अंतर्गत निर्धारित राशन पात्रताओं की समीक्षा की गई। आयोग ने उचित मूल्य दुकानों में समय पर राशन वितरण, स्टॉक की सही प्रविष्टि, APL एवं फोर्टिफाइड चावल का पृथक भंडारण, FIFO प्रणाली के पालन, रैंडम बोरा तौल एवं विभागीय कॉल सेंटर नंबर के प्रदर्शन के निर्देश दिए।पूरक पोषण आहार योजना एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की समीक्षा करते हुए 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को पात्रता अनुसार पोषण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़ों के भौतिक सत्यापन, आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित निरीक्षण, फोर्टिफाइड चावल के उपयोग संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने तथा भवन एवं आधारभूत सुविधाओं में सुधार के निर्देश दिए गए।प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित मात्रा अनुसार भोजन सामग्री उपयोग, दैनिक मेन्यू का प्रदर्शन, माप-तौल उपकरण की उपलब्धता, किचन व भोजन क्षेत्र में स्वच्छता तथा कॉल सेंटर नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए।आश्रम एवं छात्रावासों में प्रति छात्र निर्धारित खाद्यान्न वितरण, भोजन की गुणवत्ता, अधीक्षक के छात्रावास में अनिवार्य निवास, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता एवं स्टॉक रजिस्टर अद्यतन रखने पर विशेष जोर दिया गया।सितंबर से दिसंबर 2025 की अवधि में आयोग द्वारा 15 जिलों में निरीक्षण किया गया, जिसमें 33 उचित मूल्य दुकानें, 17 आंगनबाड़ी केंद्र, 13 स्कूल एवं 16 आश्रम/छात्रावास शामिल थे। निरीक्षण में पाई गई कमियों के आधार पर सभी विभागों को समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा ने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण भोजन एवं पोषण पहुंचाना है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा आगे भी नियमित निरीक्षण एवं कड़ी निगरानी जारी रहेगी।
- रायपुर/ राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम “सुप्रजा” के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, प्रसवोत्तर माताओं एवं नवजात शिशुओं की समग्र देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष पद्धतियों के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ शिशु तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की नियमित एएनसी जांच की जाती है, जिसमें यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट, रक्तचाप, ब्लड शुगर, पेशाब की जांच, हीमोग्लोबिन प्रतिशत, ऊंचाई एवं वजन तथा गर्भस्थ शिशु की स्थिति की जांच शामिल है। ये सेवाएं प्रतिमाह शिविरों एवं ओपीडी के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। आवश्यकता अनुसार सोनोग्राफी कराने की सलाह भी दी जाती है। इसके साथ ही गर्भवती महिला, टारगेट कपल एवं परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग भी की जाती है।योग चिकित्सकों एवं योग प्रशिक्षकों द्वारा गर्भावस्था के अनुसार सुरक्षित योग, प्राणायाम एवं मानसिक विश्रांति के अभ्यास कराए जाते हैं। साथ ही माहवार आहार-विहार की जानकारी दी जाती है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए तथा किन चीजों से परहेज करना चाहिए, इस पर विशेष मार्गदर्शन दिया जाता है।आयुष विभाग द्वारा गर्भ संस्कार के अंतर्गत सकारात्मक विचार, अच्छी पुस्तकें पढ़ना, पेंटिंग, संगीत एवं ध्यान जैसी रचनात्मक गतिविधियां कराई जाती हैं, जिससे गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास में सहायता मिल सके।प्रसव के बाद माताओं के वजन, रक्तचाप, ब्लड शुगर एवं हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है। नवजात शिशुओं के वजन, पीलिया एवं छाती की जांच की जाती है।“सुप्रजा” कार्यक्रम का संचालन वर्तमान में रायपुर की तीन आयुष संस्थाओं में किया जा रहा है। अक्टूबर 2023 से वर्तमान तक इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 500 गर्भवती महिलाएं (ANC) एवं 250 प्रसवोत्तर महिलाएं (PNC) लाभान्वित हो चुकी हैं।आयुष विभाग का यह प्रयास मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ते हुए एक समग्र एवं प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।“सुप्रजा” कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. पूर्णिमा राजपूत, डॉ. नमीरा आलम, डॉ. प्रतिमा धृतलहरे सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
- रायपुर। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्राचार्य मेजर नरेंद्र उपाध्याय के कुशल नेतृत्व में वेल्डर ट्रेड के प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षार्थियों द्वारा “बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट” की भावना को साकार करते हुए अनुपयोगी सामग्री से “छत्तीसगढ़ महतारी” की सुंदर एवं प्रेरणादायी प्रतिमा का निर्माण किया गया।यह प्रतिमा प्रशिक्षार्थियों की तकनीकी दक्षता, रचनात्मक सोच एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है। अनुपयोगी एवं स्क्रैप सामग्री के रचनात्मक उपयोग से निर्मित यह कलाकृति स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश देती है।संस्थान प्रबंधन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों में कौशल विकास के साथ-साथ सृजनात्मकता, सामाजिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। वेल्डर ट्रेड के प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षार्थियों ने इस प्रतिमा को पूरी एवं तकनीकी कौशल के साथ तैयार किया।संस्थान में किए गए इस अभिनव प्रयास की विभिन्न स्तरों पर सराहना की जा रही है। यह पहल न केवल कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को दर्शाती है, बल्कि युवाओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी प्रदान करती है।



























