प्रधानमंत्री आवास योजना से ग्राम कोड़िया के दुलार यादव के सपनों को मिली पक्की छत
पहले टपकती छत से बच्चों को पढ़ाई में होती थी परेशानी, अब सुरक्षित परिवेश में संवर रहा है बच्चों का भविष्य*
दुर्ग/ कहते हैं कि एक सुरक्षित छत केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं होती, बल्कि वह एक परिवार के आत्मविश्वास और बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव होती है। ग्राम कोड़िया के रहने वाले दुलार यादव के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना कुछ ऐसा ही बड़ा बदलाव लेकर आई है, जिसने उनके जीवन से अनिश्चितता के बादलों को हटाकर खुशहाली की रोशनी भर दी है। श्री दुलार यादव बताते है कुछ समय पहले तक उनका परिवार एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। सबसे बड़ी चुनौती मानसून के दौरान आती थी। टपकती छत न केवल रात की नींद छीन लेती थी, बल्कि घर के भीतर रखा सामान बचाना भी मुश्किल हो जाता था। इस अव्यवस्था का सबसे बुरा प्रभाव उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ता था। बारिश के दिनों में किताबों को भीगने से बचाना और सीलन भरे कमरों में एकाग्रता के साथ पढ़ाई करना बच्चों के लिए एक बड़ी बाधा बन गया था। दुलार यादव की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे स्वयं के खर्च पर पक्का मकान बनवा सकें। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए एक वरदान साबित हुई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन के सहयोग से दुलार यादव का ’पक्के घर’ का सपना साकार हुआ। आज उनके पास एक मजबूत छत है, जिसने न केवल उन्हें मौसम की मार से बचाया है, बल्कि उन्हें समाज में एक गरिमामयी जीवन भी प्रदान किया है। श्री यादव ने बताया घर बदलते ही परिवार की दिनचर्या और बच्चों के मनोबल में पारदर्शी बदलाव आया है। बच्चों को पढ़ाई के लिए एक शांत, सूखा और सुरक्षित स्थान मिला है। टपकती छत की चिंता अब उनके सपनों के आड़े नहीं आती। उनका कहना है "यह पक्का घर सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सरकार का एक अनमोल उपहार है।"












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