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- बैंकॉक । ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण ‘रामकियेन’ को देखा। ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।पीएम मोदी ने थाई रामायण की आकर्षक तस्वीरों को सोशल मीडिया पर किया पोस्टपीएम मोदी ने एक पोस्ट में लिखा, ‘एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।’ उन्होंने लिखा, “रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।”इससे पहले आज दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत ‘मोदी मोदी’ और ‘वंदे मातरम’ के जोशीले नारों से किया। थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सूर्या जुंगरुंगरेंगकिट ने कई शीर्ष अधिकारियों के साथ हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।होटल पहुंचने पर उनका स्वागत गुजरात के पारंपरिक गरबा नृत्य के साथ किया गया। पारंपरिक परिधान पहने हुए भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में उनके स्वागत के लिए एकत्र हुए। सिख, गढ़वाली और गुजराती समुदाय के लोग प्रमुख रूप से मौजूद थे।छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं पीएम मोदीप्रधानमंत्री मोदी छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं। वह 4 अप्रैल को क्षेत्रीय नेताओं के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे पीएम मोदीपीएम मोदी भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। बैंकॉक में आगमन के बाद, प्रधानमंत्री का भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है, जिसमें वह भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को रेखांकित करेंगे।इससे पहले, अपने प्रस्थान वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा के निमंत्रण पर, मैं आज थाईलैंड की आधिकारिक यात्रा और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो रहा हूं।”उन्होंने कहा, “पिछले दशक में, बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास, संपर्क, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के केंद्र में है।”प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह किया व्यक्तप्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बिम्सटेक देशों के नेताओं से मिलने और हमारे सहयोग को और मजबूत करने के लिए रचनात्मक रूप से बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं।”बिम्सटेक एक क्षेत्रीय समूह है जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात सदस्य देश शामिल हैं। दक्षिण एशिया से पांच (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका) और दक्षिण पूर्व एशिया से दो (म्यांमार और थाईलैंड)। यह समूह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में कार्य करता है। भारत इसका सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सदस्य है, जो इसके एजेंडे को आकार देता है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
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मुजफ्फरनगर . मुजफ्फरनगर जिले में बरला-बसेड़ा मार्ग पर एक तेज रफ्तार कार के ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी जिससे एक परिवार के दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि घटना मंगलवार रात की है जिसमें मेरठ जिले की निवासी खुशनुमा (35), सानिया (15), तैयबा (3) और मिरहा (2) की मौत हो गई। ये सभी कार में सवार थे। उसने बताया कि तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब जुनेद के परिवार के सदस्य ईद के मौके पर रिश्तेदारों से मिलने के लिए कमालपुर (मेरठ) से सहारनपुर के गोपाली गांव जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
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बुलढाणा (महाराष्ट्र) .महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में बुधवार सुबह एक बस और स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की टक्कर में पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि खामगाव-शेगाव राजमार्ग पर महाराष्ट्र राजकीय परिवहन निगम की एक बस, एक एसयूवी से टकरा गई। उन्होंने बताया कि इसके तुरंत बाद एक निजी बस ने दोनों वाहनों को टक्कर मार दी। अधिकारी ने बताया कि निजी बस का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है और उसमें फंसे चालक को निकालने के प्रयास जारी हैं।
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बैंकॉक. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को दो दिवसीय यात्रा पर थाईलैंड पहुंचेंगे। इस दौरान वह थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ वार्ता करेंगे और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मोदी का थाईलैंड में भारतीय समुदाय द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। वह ‘गवर्नमेंट हाउस' में शिनावात्रा से मिलेंगे, जहां उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। बृहस्पतिवार की शाम को प्रधानमंत्री मोदी समुद्री सहयोग पर समझौते के लिए बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) नेताओं के साथ शामिल होंगे। इस सम्मेलन में थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमा और भूटान के नेता शिरकत करेंगे। बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी की भेंट नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस सहित अन्य नेताओं से होगी। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि म्यांमा के सैन्य जुंटा नेता मिन आंग ह्लाइंग शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे या नहीं। म्यांमा में पिछले सप्ताह आए भीषण भूकंप से देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और अन्य हिस्सों में भीषण तबाही हुई। यह 2018 में नेपाल के काठमांडू में चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के बाद बिम्सटेक नेताओं की प्रत्यक्ष रूप से पहली बैठक होगी। पिछला शिखर सम्मेलन मार्च 2022 में कोलंबो में वीडियो कॉन्फ्रेंस प्रारूप में आयोजित किया गया था। मोदी शुक्रवार को थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न (जिन्हें रामा दसवें के नाम से भी जाना जाता है) और रानी सुथिदा से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और थाईलैंड की प्रधानमंत्री शिनावात्रा वाट फो का दौरा करेंगे जो थाईलैंड के शीर्ष छह मंदिरों में से एक है। यह जगह लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के अलावा, यह मंदिर अपने चारों ओर मौजूद बुद्ध की असंख्य प्रतिमाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यह थाईलैंड में सार्वजनिक शिक्षा के लिए पहला केंद्र था, जहां विज्ञान, धर्म और साहित्य के पाठ्यक्रम उपलब्ध थे। प्रधानमंत्री शुक्रवार सुबह बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां समूह द्वारा ‘बैंकॉक विजन 2030' को स्वीकार किए जाने की संभावना है।
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नई दिल्ली। सरकार ने पूनम गुप्ता को भारतीय रिजर्व बैंक का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। वह माइकल देवव्रत पात्रा की जगह लेंगी, जिन्होंने इस साल जनवरी में पद छोड़ा था। ये फैसला इस महीने की 7 से 9 तारीख तक होने वाली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले लिया गया है।
एक आधिकारिक नोट के अनुसार, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने सुश्री गुप्ता की नियुक्ति को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि या अगले आदेश तक के लिए मंजूरी दे दी है।वर्तमान में, सुश्री गुप्ता नई दिल्ली स्थित नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। सुश्री गुप्ता ने अमरीका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी की है। -
नई दिल्ली। म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। इस संकट की घड़ी में भारतीय राहत दल की त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वहीं भारतीय नौसेना और वायुसेना भी राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मदद के लिए म्यांमार के स्थानीय लोगों ने भारत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है, और भारतीय नेतृत्व के लिए आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं।
एनडीआरएफ टीम की सदस्य कविता सिंह ने बताया कि गर्मी और समय बीतने के कारण जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना कम हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं और जोखिमों के बावजूद एनडीआरएफ टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ राहत अभियान चला रही है।एक अन्य एनडीआरएफ सदस्य ने बताया कि 57 कर्मियों की टीम म्यांमार में बचाव कार्य में लगी हुई है और उन्हें 13 स्थानों पर काम सौंपा गया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार को 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। एनडीआरएफ की 80 सदस्यीय शहरी खोज और बचाव (USAR) टीम को भारतीय वायुसेना (IAF) के C-130 हर्क्यूलिस विमान से दो दौर में भेजा गया।इसके अलावा भारत ने चिकित्सा सहायता भी प्रदान की है। भारतीय सर्जनों ने म्यांमार में दो जीवनरक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। राहत कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मांडले डिवीजन के लेफ्टिनेंट जनरल म्यो मो आंग ने भारत के प्रयासों की सराहना की।भारतीय नौसेना के आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सवित्री ने 40 टन राहत सामग्री लेकर 29 मार्च को यांगून के लिए प्रस्थान किया, जिसे 1 अप्रैल को सौंपा गया। इसके बाद आईएनएस करमुक और एलसीयू 52 ने 30 टन अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई गई।वहीं विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत जरूरत के अनुसार और सहायता भेजने के लिए तैयार है। ऑपरेशन ब्रह्मा भारत की “पहला मददगार” की भूमिका को दर्शाता है, जिससे यह साबित होता है कि भारत अपने पड़ोस में प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। -
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025 में एनएचएआई ने कुल 5,614 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया, जो तय लक्ष्य 5,150 किलोमीटर से भी अधिक है।
इसके अलावा, एनएचएआई ने एक वित्त वर्ष में अब तक का सबसे अधिक पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) किया। वित्त वर्ष 2024-25 में सड़क निर्माण और विकास पर कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो पिछले साल के 2.07 लाख करोड़ रुपये से 21% ज्यादा है। यह व्यय सरकार की बजटीय सहायता और एनएचएआई के अपने संसाधनों से किया गया।एनएचएआई ने धन जुटाने के लिए तीन मुख्य तरीकों – टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) और टोल सिक्योरिटाइजेशन का इस्तेमाल किया। इन माध्यमों से प्राधिकरण ने 2024-25 में कुल 28,724 करोड़ रुपये जुटाए। खास बात यह रही कि आईएनवीआईटी के एक राउंड में अब तक की सबसे बड़ी 17,738 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई।सड़क नेटवर्क की मजबूती से आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावाएनएचएआई के अनुसार, इन राजमार्ग परियोजनाओं से देश के सड़क नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स न केवल यात्रा को आसान बनाएंगे, बल्कि लॉजिस्टिक्स और व्यापार को भी गति देंगे।इसके अलावा, एनएचएआई की सहयोगी संस्था नेशनल हाईवे इंफ्रा ट्रस्ट (एनएचआईटी) ने भी बड़ी सफलता हासिल की है। मार्च 2025 में एनएचआईटी ने 18,380 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी मोनेटाइजेशन डील पूरी की, जिससे अब तक चार चरणों में जुटाई गई कुल राशि 46,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, ऑनलाइन, ज्ञापन, अनुरोध और सुझाव के रूप में कुल 97,27,772 याचिकाएं प्राप्त हुई हैं। 284 डेलिगेशन ने कमेटी के सामने अपनी बात रखी और सुझाव दिए। सरकार ने उन सभी पर ध्यानपूर्वक विचार किया है, चाहे वे जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) के माध्यम से हों या सीधे दिए गए ज्ञापन।
इतिहास में पहले कभी किसी विधेयक को इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं मिलीउन्होंने आगे कहा, इतिहास में पहले कभी किसी विधेयक को इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं मिली हैं। कई लीगल एक्सपर्ट, कम्युनिटी लीडर्स, धार्मिक लीडर्स और अन्य लोगों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे। पिछली बार जब हमने बिल पेश किया था, तब भी कई बातें बताई थी। मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो इसका विरोध कर रहे थे, उनके हृदय में बदलाव होगा और वे बिल का समर्थन करेंगे। मैं मन की बात कहना चाहता हूं, किसी की बात को कोई बदगुमां न समझे कि जमीं का दर्द कभी आसमां न समझे।किरेन रिजिजू ने कहा, “साल 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड को ऐसा अधिकार दिया कि वक्फ बोर्ड के आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती तो संसद इमारत, एयरपोर्ट समेत पता नहीं कितनी इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता। साल 2013 में मुझे इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि इसे कैसे जबरन पारित किया गया।2013 में वक्फ अधिनियम में प्रावधान जोड़े जाने के बाद, दिल्ली में 1977 से एक मामला चल रहा था, जिसमें सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन सहित कई संपत्तियां शामिल थीं। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने सारी जमीन को डीनोटिफाई करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया। अगर हमने आज यह संशोधन पेश नहीं किया होता, तो हम जिस संसद भवन में बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था।1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया थाउन्होंने कहा, “किसी ने कहा कि ये प्रावधान गैर संवैधानिक हैं। किसी ने कहा कि गैर-कानूनी हैं। यह नया विषय नहीं है। आजादी से पहले पहली बार बिल पास किया गया था। इससे पहले वक्फ को इनवैलिडेट (अवैध करार) किया गया था। 1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया था। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी का आधार देते हुए एक्ट पारित किया गया था।”1995 में पहली बार वक्फ ट्रिब्यूनल का प्रावधान किया गया थाउन्होंने कहा, “1995 में पहली बार वक्फ ट्रिब्यूनल का प्रावधान किया गया था। इससे वक्फ बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी फैसले से असंतुष्ट व्यक्ति वक्फ ट्रिब्यूनल में उसे चुनौती दे सकता था। यह पहली बार था जब ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई थी। उस समय यह भी तय किया गया था कि अगर किसी वक्फ संपत्ति से 5 लाख रुपए से ज्यादा की आय होती है, तो सरकार उसकी निगरानी के लिए एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करेगी। यह व्यवस्था भी 1995 में ही शुरू की गई थी। आज यह मुद्दा इतना तूल क्यों पकड़ रहा है?”विधेयक सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दियाविधेयक को सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस ने विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें विधेयक की प्रति देर से प्राप्त हुई, जिसके कारण उन्हें समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।सदन में हंगामे की स्थितिकांग्रेस के नेताओं ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पेश किया है और विपक्ष को इस पर चर्चा के लिए उचित अवसर नहीं दिया गया। विधेयक पेश होने के बाद सदन में हंगामे की स्थिति देखी गई, क्योंकि विपक्षी सांसदों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कांग्रेस पार्टी की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि जेपीसी ने आवश्यक विचार-विमर्श नहीं किया। शुरू से ही सरकार का इरादा एक ऐसा कानून पेश करने का रहा है जो असंवैधानिक, अल्पसंख्यक विरोधी और राष्ट्रीय सद्भाव को बाधित करने वाला है। - नयी दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के विचार-विमर्श करने की पृष्ठभूमि में गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय संसद की समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं, लेकिन आज वे लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा करके परिवर्तन करती हैं।लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया गया तो आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि विधेयक में संसद की संयुक्त समिति के प्रावधान शामिल किए गए हैं जो नियम एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।उन्होंने दावा किया कि समिति ने अधिकार से परे जाकर प्रावधान जोड़े हैं और यह बहुत गंभीर तकनीकी मामला है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने सबसे पहले इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी जिसे पूर्व में सदन के सामने रखा गया था।उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, जिसके लिए विपक्ष ने भी आग्रह किया था। समिति ने इस पर सुविचारित रूप से अपना मत प्रकट किया। उसके सुझाव के अनुसार विधेयक को फिर से मंत्रिमंडल के सामने भेजा गया।’’शाह ने कहा कि संसदीय समिति के सुझावों को मंत्रिमंडल ने स्वीकार किया और उसे ही संशोधनों के रूप में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू आज सदन में लेकर आए हैं।गृह मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आपका ही आग्रह था कि जेपीसी बने। समिति को यदि कोई बदलाव ही नहीं करना था तो क्या फायदा। यह कांग्रेस की सरकार के समय जैसी समिति नहीं थी, यह लोकतांत्रिक समिति है जिसने मंथन किया।’’उन्होंने कहा कि समिति ने चर्चा करके संशोधन सुझाए। शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस के समय समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं। जब परिवर्तन स्वीकार ही नहीं तो समिति का क्या उद्देश्य।’’
- -वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हुई, नक्सलमुक्त भारत बनाने की दिशा में मील का पत्थर-मोदी सरकार नक्सलवाद के प्रति ruthless approach और सम विकास के लिए अथक प्रयासों के साथ सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण कर रही है-मोदी सरकार 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कटिबद्ध हैनई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद-मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत ने वामपंथी उग्रवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटाकर मात्र 6 कर एक नया मील का पत्थर हासिल किया है।X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार नक्सलवाद के प्रति ruthless approach और सर्वांगीण विकास के लिए अथक प्रयासों के साथ सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत, 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के प्रति कटिबद्ध है।देश में नक्सलवाद से प्रभावित कुल ज़िलों की संख्या 38 थी, इसमें अति प्रभावित ज़िलों की संख्या 12 थी, जो घटकर 6 हो गयी, District of Concern की संख्या 9 थी, जो घटकर 6 हो गयी और Other LWE-affected Districts की संख्या 17 थी, यह भी घटकर 6 हो गयी है।नक्सलवाद से कुल प्रभावित जिलों में से अति प्रभावित 12 जिले घटकर अब 6 रह गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 4 ज़िले (बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा), झारखंड का 1 (पश्चिमी सिंहभूम) और महाराष्ट्र का भी 1 ज़िला (गढ़चिरौली) शामिल है।इसी प्रकार, कुल 38 प्रभावित ज़िलों में से District of Concern, जहां अतिप्रभावित जिलों के अतिरिक्त संसाधनों को सघन रूप से मुहैया कराने की आवश्यकता है, की संख्या 9 से घटकर 6 रह गई है। ये 6 ज़िले हैं- आंध्र प्रदेश (अल्लूरी सीताराम राजू), मध्य प्रदेश (बालाघाट), ओडिशा (कालाहांडी, कंधमाल और मलकानगिरी) और तेलंगाना (भद्राद्रि-कोठागुडेम)।नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण Other LWE-affected Districts की संख्या भी 17 से घटकर 6 रह गई है, जिनमें, छत्तीसगढ़ (दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), झारखंड (लातेहार), ओडिशा(नुआपाड़ा) और तेलंगाना (मुलुगु), शामिल हैं।अतिप्रभावित जिलों एवं डिस्ट्रिक्ट ऑफ कन्सर्न जिलों को भारत सरकार द्वारा एक विशेष योजना , विशेष केन्द्रीय सहायता (SCA) के तहत सार्वजनिक बुनियादी ढाँचों में व्याप्त अंतराल को भरने के लिए क्रमशः 30 करोड़ एवं 10 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है और इसके अलावा इन जिलों के लिए आवश्यकतानुसार विशेष प्रोजेक्ट का भी प्रावधान है।पिछले एक साल में वामपंथ उग्रवाद परिदृश्य में तीव्र गति से हुए उल्लेखनीय सुधार का प्रमुख कारण है उग्रवाद प्रभावित कोर क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना एवं विकासोन्मुखी कार्यों जैसे सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली एवं शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की ग्रामीणों तक पहुँच बढ़ना।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूजा करने से मन को अपार शांति मिलती है। उन्होंने दिवंगत महान शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी का एक भजन भी पोस्ट किया, जिसमें कहा गया, “देवी को समर्पित यह भावपूर्ण भजन मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।” यह गीत देवी के आशीर्वाद का आह्वान करता है।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “नवरात्रि पर देवी मां की पूजा करने से मन को अपार शांति मिलती है।”नवरात्रि के तीसरे दिन, देवी दुर्गा की पूजा माता चंद्रघंटा के रूप में की जाती है, जिन्हें दस भुजाओं के साथ दर्शाया गया है, जिनमें से प्रत्येक में एक हथियार, एक कमल का फूल या आशीर्वाद की मुद्रा (अभय मुद्रा) है। वह अपने शांत लेकिन मजबूत स्वरूप के लिए जानी जाती हैं और माना जाता है कि वह अपने भक्तों को शांति, बहादुरी और सफलता दिलाती हैं। देवी के माथे पर अर्धचंद्र है, यही वजह है कि उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। वह कठिनाइयों को दूर करने और आंतरिक शक्ति देने के लिए जानी जाती हैं।नवरात्रि, जिसका संस्कृत में अर्थ है ‘नौ रातें’, देवी दुर्गा और उनके नौ अवतारों का उत्सव मनाने वाला त्योहार है, जिन्हें सामूहिक रूप से नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है। यह त्यौहार पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें देवी के विभिन्न रूपों का सम्मान करने के लिए अनुष्ठान और प्रार्थनाएं की जाती हैं।भारत के सबसे महान शास्त्रीय संगीतकारों में से एक पंडित भीमसेन जोशी की भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां, जैसे “भज मन राम चरण सुखदायी” और “जो भजे हरि को सदा”, आज भी श्रोताओं के दिलों को छूती हैं। पंडित भीमसेन जोशी को कई सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न, पद्म श्री, पद्म भूषण, और पद्म विभूषण शामिल हैं। उनका निधन 24 जनवरी 2011 को पुणे में हुआ, लेकिन उनकी संगीतमय विरासत आज भी जीवित है।वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भक्तों को शुभकामनाएं देते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ जगत जननी मां जगदम्बा की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि के पावन तृतीय दिवस पर माँ चन्द्रघण्टा प्रदेश वासियों एवं भक्तजनों का कल्याण करें, ऐसी प्रार्थना है। जय मां चन्द्रघण्टा!”देशभर के मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। लोग सुबह-सुबह ही मंदिरों के बाहर लाइन में लग गए। -
नई दिल्ली। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अन्तर्गत एक स्वायत्त संगठन- राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (नेस्टस) 1 अप्रैल, 2025 को नई दिल्ली में अपना 7वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इसमें आदिवासी शिक्षा में परिवर्तनकारी प्रभाव प्रदर्शित किया जाएगा।
नेस्टस एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की स्थापना और प्रबंधन करता है। ये विद्यालय आदिवासी छात्रों को कक्षा 6 से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं।जनजातीय कार्य मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट ईएमआरएस छात्रों को भी सम्मानित किया जाएगा जिसमें सुबह के सत्र में बारह छात्रों को सम्मानित किया जाएगा जबकि खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को शाम के कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा। एक विशेष स्क्रीनिंग में पिछले वर्ष में ईएमआरएस की उल्लेखनीय उपलब्धियों को दर्शाया किया जाएगा। इसमें शिक्षा, कौशल विकास और समग्र विकास पर इसके प्रभाव के बारे में बताया जाएगा।अपनी स्थापना के बाद से नेस्टस आदिवासी शिक्षा में एक परिवर्तनकारी शक्ति रही है, जिसने देश भर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के विस्तार का नेतृत्व किया है। ये विद्यालय आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल विकास और उनकी सांस्कृतिक विरासत से एक मजबूत संबंध प्रदान करके सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।आपको बता दें, जनजातीय कार्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में नेस्टस के आयुक्त अजीत कुमार श्रीवास्तव और उनकी टीम के निरंतर प्रयासों से नेस्टस ने बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती और आदिवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय प्रगति की है।मंत्रालय नेस्टस के माध्यम से आदिवासी समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सशक्त बनाने, उन्हें अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करने, अपनी मातृभूमि में उन्नति करने तथा आधुनिक विश्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। -
नई दिल्ली। आज सोमवार को ईद का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी हैं। रमजान के पाक महीने के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह मुसलमानों के लिए एक खास दिन होता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ईद-उल-फितर की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर मैं भारत और विदेशों में रहने वाले सभी भारतीयों, विशेषकर मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।राष्ट्रपति ने कहा कि ईद-उल-फितर रमजान के पवित्र महीने के दौरान रोजे रखने और इबादत करने के बाद मनाया जाता है। यह पर्व भाईचारे, सहयोग और करुणा की भावना को मजबूत करता है। यह त्योहार सामाजिक बंधन को भी प्रोत्साहन देता है और हमें एक सामंजस्यपूर्ण, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है। ईद सहानुभूति, करुणा और दान की भावना को प्रोत्साहन देने का एक अवसर है। मेरी कामना है कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति, प्रगति और खुशियां लाए तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करे।वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी ईद-उल-फितर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर, मैं हमारे राष्ट्र के सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ईद का यह पर्व हमें स्मरण दिलाता है कि सांस्कृतिक विविधता और एकजुटता हमारी शक्ति का केंद्र है। यह त्योहार मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि एकता, करुणा और पारस्परिक सम्मान जैसे हमारे वैविध्यपूर्ण लोकतंत्र के संवैधानिक आदर्शों का एक प्रतीक है।उन्होंने कहा कि आइए इस ईद के पर्व पर, हम सद्भाव और एकता की भावना को संजोकर उन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त करें जो हमारे जीवन को दिशा देते हैं और एक मज़बूत, समृद्ध राष्ट्र के रूप में हमें एकजुट बनाए रखते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी। उन्होंने कामना की कि ईद सबके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियां लेकर आए।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “ईद-उल-फितर की बधाई। यह त्योहार हमारे समाज में आशा, सद्भाव और दयालुता की भावना को बढ़ाए। आपके सभी प्रयासों में खुशी और सफलता मिले। ईद मुबारक!”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। आशा है कि यह दिन पूरे समाज में सद्भाव और भाईचारे के बंधन को और मजबूत करेगा। ईद मुबारक!”वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद-उल-फितर के इस खुशी भरे अवसर पर मैं अपने साथी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ईद हम सभी के बीच भाईचारे, करुणा और साझा करने की भावना को गहराई से जगाती है और हमारे लोगों को एकजुट करने वाले बहुलवादी बंधन को मजबूत करती है। आइए हम इन उत्सवों से सभी के लिए समृद्धि और सौहार्द का युग शुरू करें।”कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद मुबारक! यह खुशी का अवसर आपके और आपके प्रियजनों के लिए शांति, खुशी, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को कटरा से जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन सेवा का उद्घाटन करेंगे, जो 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना के पूरा होने का प्रतीक होगा। कल रविवार को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 19 अप्रैल को उधमपुर पहुंचेंगे। वह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का दौरा करेंगे और उसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह कटरा से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।”
यह ट्रेन कटरा से परिचालन शुरू करेगीआपको बता दें, जम्मू-कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस कटरा से परिचालन शुरू करेगी, क्योंकि जम्मू रेलवे स्टेशन पर अभी नवीनीकरण का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, रेल संपर्क परियोजना पिछले महीने पूरी हो गई थी। वहीं, कटरा-बारामूला मार्ग पर ट्रेन का ट्रायल रन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने जनवरी में कटरा और कश्मीर के बीच ट्रेन सेवा को मंजूरी दी थी।अधिकारियों ने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र के लिए आधुनिक और कुशल रेल सेवा उपलब्ध होगी।लंबे समय से चल थी मांगदरअसल, ट्रेन के शुरू होने से कश्मीर के लिए सीधी रेल कनेक्टिविटी की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। आपको बता दें, वर्तमान में, घाटी के भीतर संगलदान-बारामूला मार्ग और कटरा से देश भर के विभिन्न गंतव्यों तक ट्रेन सेवाएं सीमित हैं।कश्मीर को रेल से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना 1997 में शुरू हुई थीअधिकारियों ने कहा कि कश्मीर को रेल से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना 1997 में शुरू हुई थी, लेकिन चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक, स्थलाकृतिक और मौसम संबंधी स्थितियों के कारण इसमें कई देरी हुई। इस परियोजना में कुल 119 किलोमीटर तक फैली 38 सुरंगें शामिल हैं, जिनमें 12.75 किलोमीटर लंबी सुरंग टी-49 भी शामिल है, जो भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है।इसके अलावा, इसमें कुल 13 किलोमीटर तक फैले 927 पुल हैं, जिनमें प्रतिष्ठित चिनाब पुल सबसे अलग है। 467 मीटर के आर्च स्पैन के साथ 1,315 मीटर लंबा यह पुल नदी के तल से 359 मीटर ऊपर है – जो इसे एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा और दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च रेलवे पुल बनाता है।जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन एंटी फ्रीजिंग सुविधाओं के साथ डिजाइन हैरेल मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को विशेष रूप से एंटी फ्रीजिंग सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है। यात्री और मालगाड़ियों से आगे चलने वाली बर्फ हटाने वाली ट्रेन यह सुनिश्चित करेगी कि इस रणनीतिक मार्ग पर ट्रेनें पूरे साल दिन-रात चलेंगी।इससे दोनों क्षेत्रों के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित होगा। यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देने के लिए, रेलवे ने इस परियोजना में कंपन रोधी भूकंपीय उपकरणों का उपयोग किया है क्योंकि यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से जोन-V में आता है। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। नवरात्रि का दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी को समर्पित है।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “नवरात्रि पर देवी मां का आशीर्वाद भक्तों में सुख-शांति और नई ऊर्जा का संचार करता है।”पीएम मोदी ने एक्स पर राजलक्ष्मी संजय द्वारा गाया गया गीत साझा किया है, उन्होंने लोगों से इस गीत सुनने का आग्रह किया है। यह प्रार्थना गीत शक्ति की पूजा को समर्पित है।आपको बता दें, ‘ऐगिरी नंदिनी नंदिता मेधिनी’ एक बहुत लोकप्रिय दुर्गा स्तोत्र है। इसमें मां के महिषासुर मर्दिनी अवतार का आवाहन किया गया है। ‘ऐगिरी नंदिनी’ देवी महिषासुर मर्दिनी को संबोधित है। देवी दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी रूप उग्र है, जहां उन्हें 10 भुजाओं, शेर पर सवार और हथियार लिए हुए दिखाया गया है।इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों को नवरात्र की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा। चैत्र नवरात्रि के पावन द्वितीय दिवस के अवसर पर मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से हर घर में खुशियों का वास हो, सभी का जीवन सुख, समृद्धि और आरोग्यता से अभिसिंचित हो, यही प्रार्थना है। आदिशक्ति मां भगवती की द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद सभी भक्तों पर सदैव बना रहे। जय मां ब्रह्मचारिणी!” चैत्र नवरात्रि का आगाज 30 मार्च को हो चुका है और यह 7 अप्रैल तक रहेगा। नवरात्र का प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित है। नौ दिवसीय उत्सव में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूरे त्योहार के दौरान भक्त विशेष प्रार्थना, अनुष्ठान और उपवास करते हैं। आज दूसरे दिन देवी दुर्गा की पूजा ब्रह्मचारिणी के रूप में की जाती है, जो देवी पार्वती का अविवाहित रूप है।पूरे देश में देवी पर्व की धूम है। लोग मंदिरों में देवी दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी भी पंचकूला स्थित मनसा देवी मंदिर में पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी धर्मपत्नी संग विधिवत पूजन-हवन किया। -
ठाणे. महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 18 वर्षीय एक युवक ने प्रेमिका से झगड़े के बाद अपने घर में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। घटना शुक्रवार को मुम्ब्रा क्षेत्र के अमृत नगर में हुई।
मुम्ब्रा थाने के एक अधिकारी ने बताया कि युवक अपनी प्रेमिका से मोबाइल फोन पर बात कर रहा था और इस दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद युवक ने अपने घर में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया और इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 90 वर्ष पूरा होने पर आयोजित समारोह में शामिल होंगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति 31 मार्च से एक अप्रैल तक मुंबई का दौरा करेंगी। इस दौरान वह आरबीआई के 90 साल पूरा होने पर आयोजित समारोह में शिरकत करेंगी। भारत के केंद्रीय बैंक के तौर पर आरबीआई की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुरूप एक अप्रैल, 1935 को हुई थी। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को ‘गरीबी उन्मूलन' कार्यक्रम ‘पी4-मार्गदर्शी बंगारू कुटुम्बम' की शुरुआत की। पी4 या ‘सार्वजनिक निजी जन भागीदारी' कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के संपन्न व्यक्तियों के सहयोग से वंचित परिवारों का उत्थान करना है। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दो वंचित परिवारों को अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री ने बच्चों को शिक्षित करने की एक परिवार की आकांक्षा को सुनने के बाद तीन सफल उद्यमियों से पूछा कि वे परिवार के उत्थान में कैसे मदद कर सकते हैं। इन तीन उद्यमियों में ‘ग्रीनको' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार चालमालासेट्टी और ‘मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (एमईआईएल) के प्रबंध निदेशक पीवी कृष्ण रेड्डी शामिल थे। चालमालासेट्टी ने सुझाव दिया, “अगर बच्चों को पास के निजी स्कूल में दाखिला दिलाया जा सके और परिवहन की सुविधा दी जा सके, तो उनके सपने पूरे हो सकते हैं।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पी4 वंचित परिवारों की सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। नायडू ने पी4 जैसी पहल गरीबी उन्मूलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पी4 कार्यक्रम के माध्यम से लाखों वंचित लोगों का उत्थान करना है।
- भदोही. उत्तर प्रदेश के भदोही में 22 वर्षीय युवती को उसके मंगेतर के छोटे भाई ने कथित तौर पर अगवा कर लिया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शादी मई में होनी थी।पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को युवती की मां गीता देवी की शिकायत के आधार पर कोइरौना थाने में अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया। भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया, “गीता देवी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी 24 मार्च को आभूषण और नकदी के साथ लापता पाई गई।” उन्होंने बताया कि युवती का कथित तौर पर अपहरण योगेश के छोटे भाई आरोपी राजा ने किया। युवती की योगेश से सगाई हुई थी। मांगलिक ने बताया, “युवती को ढूंढने और आरोपी को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चैत्र रामनवमी के उपलक्ष्य में सभी जिलों के मंदिरों में 24 घंटे का श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ कराने के निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि पांच अप्रैल दोपहर से प्रारंभ अखण्ड मानस पाठ की पूर्णाहुति छह अप्रैल को श्रीरामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला के सूर्य तिलक के साथ होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सभी जिलों के मंदिरों में आवश्यक व्यवस्थाएं प्रारम्भ कर दी गई हैं।एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रीरामनवमी से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी मंदिर (सहारनपुर), विंध्यवासिनी देवी धाम (मिर्जापुर) आदि प्रमुख देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होगा। उन्होंने कहा कि सूर्य तिलक का दर्शन करने के लिए अयोध्या में पूरे देश से लोगों के आगमन की संभावना है। आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबन्ध किये जाने चाहिए और कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो, इसके लिए ‘जूट मैटिंग' कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी मंदिरों में पेयजल के पुख्ता प्रबंध होने चाहिए और छाजन की व्यवस्था कराई जाए।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चैत्र नवरात्र के दिनों में पूरे प्रदेश में समान रूप से निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों के आसपास अंडा-मांस आदि की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, रविवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी गोलवलकर की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सुरेश उर्फ भैयाजी जोशी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार संघ के स्मृति मंदिर का किया है दौराप्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार संघ के स्मृति मंदिर का दौरा किया है। संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती वर्ष प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) को मनाई जाती है। इसी अवसर पर संघ के स्वयंसेवक हर वर्ष नागपुर के शुक्रवारी इलाके में स्थित डॉ. हेडगेवार के निवास पर जाकर उन्हें नमन करते हैं। जिसके बाद पथ संचलन करते हुए रेशीमबाग स्थित स्मृति मंदिर में उनकी समाधि का दर्शन करते हैं।यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने रेशीमबाग परिसर का अवलोकन किया और संघ पदाधिकारियों के साथ औपचारिक चर्चा कीस्वयंसेवकों और संघ प्रचारकों के रूप में पहचाने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस वर्ष प्रतिपदा के मुहूर्त पर नागपुर जाकर ‘आद्य सरसंघचालक’ को प्रणाम किया, जिसे स्वयंसेवकों ने विशेष रूप से सराहा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने रेशीमबाग परिसर का अवलोकन किया और संघ पदाधिकारियों के साथ औपचारिक चर्चा की। उन्होंने संघ कार्यालय की पुस्तिका में एक संदेश भी लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि “रेशीमबाग स्मृति मंदिर राष्ट्र सेवा को समर्पित स्वयंसेवकों के लिए एक ऊर्जा स्रोत है। हमारे प्रयासों से भारत माता की गौरव गाथा निरंतर बढ़ती रहे।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर (महाराष्ट्र) में एक मराठी देशस्थ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आरएसएस की स्थापना का उद्देश्य हिंदू समुदाय को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के लिए एकजुट करना थाहेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की स्थापना करने से पहले स्वतंत्रता-पूर्व भारत के अशांत काल के दौरान चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उनका दृष्टिकोण हिंदू समुदाय को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के लिए एकजुट करना था, जो अंततः राष्ट्र की पूर्ण स्वतंत्रता और एकता की दिशा में काम करना था।डॉ. हेडगेवार ने युवाओं में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम की भावनाओं को किया जागृतअमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हेडगेवार के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से युवाओं में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम की भावना का प्रसार करने वाले परम पूज्य डॉ. हेडगेवार ने मां भारती के स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए डॉ. हेडगेवार ने जिस आरएसएस रूपी बीज को बोया था, वह आज वट वृक्ष बनकर सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक स्वर्गीय डॉ. हेडगेवार की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने डॉ. हेडगेवार को जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कीकेंद्रीय मंत्री और नागपुर के सांसद नितिन गडकरी ने भी हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती (तिथि अनुसार) पर उन्हें कोटि-कोटि अभिवादन।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. हेडगेवार और आरएसएस के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर को समर्पित स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित कीवहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर नागपुर स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने हेडगेवार और आरएसएस के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर को समर्पित स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इस मौके पर पीएम मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित दीक्षाभूमि का दौरा किया और डॉ. बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां उन्होंने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी थे। पीएम मोदी का स्वागत दीक्षाभूमि के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन शुरेई ससाई ने किया। पीएम मोदी ने महात्मा बुद्ध की पूजा-अर्चना भी की।
दीक्षाभूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करता हैपीएम नरेंद्र मोदी ने दीक्षाभूमि की रिकॉर्ड बुक में खास संदेश लिखा। उन्होंने बुक में लिखा, “बाबा साहेब के पंच तीर्थों में से एक नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में आने का सौभाग्य पाकर अभिभूत हूं। इस पवित्र स्थल के वातावरण में बाबा साहेब के सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के सिद्धांतों का सहज अनुभव होता है। दीक्षाभूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करता है।”एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगीपीएम मोदी ने यह भी लिखा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अमृत कालखंड में हम बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं और मूल्यों पर चलते हुए देश को प्रगति के नए शिखर पर लेकर जाएंगे। एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” पीएम मोदी डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि देने के बाद दीक्षाभूमि पहुंचे थे।दीक्षाभूमि मूल रूप से बौद्ध वास्तुकला की तर्ज पर बनाई गई है, जो मध्य प्रदेश के सांची में महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध स्तूप की प्रतिकृति हैदीक्षाभूमि पिछले कई सालों से विश्व स्तर पर प्रसिद्ध स्थान रही है। यह लाखों लोगों के लिए विचारों और कार्यों के परिवर्तन का स्थान है। दीक्षाभूमि मूल बौद्ध वास्तुकला की तर्ज पर बनाई गई है, जो मध्य प्रदेश के सांची में महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध स्तूप की प्रतिकृति है। यह एशियाई महाद्वीप का अब तक का सबसे बड़ा स्तूप है। इसका उद्घाटन 18 दिसंबर, 2001 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने किया था। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से फूलों की खास यात्रा की बात की। उन्होंने बताया कि फूल सिर्फ मंदिरों की शोभा या घर की सजावट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब इनसे नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। पीएम ने महुआ के फूलों से बनी कुकीज और गुजरात के कृष्ण कमल की कहानी साझा की, जो लोगों को प्रेरित कर रही है।
महुआ के फूल गांवों और आदिवासी समुदायों के लिए हैं खासपीएम ने कहा कि महुआ के फूल गांवों और आदिवासी समुदायों के लिए खास हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के राजाखोह गांव में चार बहनों ने महुआ से कुकीज बनाना शुरू किया। उनकी मेहनत से ये कुकीज इतनी पसंद की जा रही हैं कि मांग बढ़ती जा रही है। एक बड़ी कंपनी ने इन बहनों को फैक्ट्री में काम करने की ट्रेनिंग दी। इससे प्रेरित होकर गांव की कई महिलाएं भी इस काम में जुट गईं। तेलंगाना के आदिलाबाद जिले की दो बहनों की कहानी भी कम रोचक नहीं है। उन्होंने महुआ के फूलों से तरह-तरह के पकवान बनाए, जिनमें आदिवासी संस्कृति की झलक है। लोग इन पकवानों को खूब पसंद कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि ये महिलाएं अपने जज्बे से फूलों की यात्रा को नई दिशा दे रही हैं।पीएम ने कहा, “आप भी अपने आसपास फूलों की ऐसी खास कहानियां देखें और मुझे लिखें ।”इसके बाद पीएम ने गुजरात के एकता नगर में खिलने वाले ‘कृष्ण कमल’ का जिक्र किया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास यह फूल पर्यटकों को खूब भा रहा है। एकता नगर के आरोग्य वन, एकता नर्सरी, विश्व वन और मियावाकी जंगल में लाखों कृष्ण कमल के पौधे लगाए गए हैं। ये फूल वहां की सुंदरता बढ़ा रहे हैं और लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। पीएम ने कहा, “आप भी अपने आसपास फूलों की ऐसी खास कहानियां देखें और मुझे लिखें।” उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने अनुभव और विचार साझा करें। पीएम ने कहा, “हो सकता है, आपके आसपास कुछ ऐसा हो जो आपको आम लगे, लेकिन दूसरों के लिए नया और रोचक हो।”‘मन की बात’ में फूलों की अनोखी यात्रा ने इस बार सबका ध्यान अपनी ओर खींचाउन्होंने अगले महीने फिर ‘मन की बात’ में मिलने का वादा किया और कहा कि ऐसी कहानियां हमें प्रेरणा देती हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सबका धन्यवाद किया और नमस्कार कहा। इस बार ‘मन की बात’ में फूलों की अनोखी यात्रा ने सबका ध्यान खींचा। महुआ से कुकीज और कृष्ण कमल की कहानी न सिर्फ नए प्रयोगों को दिखाती है, बल्कि मेहनत और स्थानीय संस्कृति की ताकत को भी सामने लाती है।









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