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चमोली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ के पास एक बर्फीले तूफान में 47 मजदूर फंस गए हैं, जिनमें से अब तक 10 मजदूरों को बचा लिया गया है। भारी बर्फबारी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना और अन्य़ एजेंसियां बचाव कार्य में जुटी हुई है।
उत्तराखंड के चमोली जिले के बद्रीनाथ में शुक्रवार को एक बड़ा बर्फीला तूफान आया, जिसमें बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के लिए बर्फ हटाने का काम कर रहे 57 मजदूर फंस गए। बचाव दल अब तक कम से कम 16 मजदूरों को सुरक्षित निकाल चुका है, जबकि 41 मजदूर अब भी फंसे हुए हैं। यह बर्फीला तूफान माणा गांव के पास BRO के एक कैंप पर गिरा।ये मजदूर एक निजी एजेंसी के कर्मचारी हैं, जिसे BRO ने ठेके पर लिया था। चमोली के जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने स्थिति की पुष्टि करते हुए कहा कि अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है। समाचार एजेंसी ANI ने तिवारी के हवाले से कहा, “वहां कोई सैटेलाइट फोन उपलब्ध नहीं है, जिससे साफ तौर पर संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है।”भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने बचाव कार्य की तस्वीरें जारी की हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा गया, “गढ़वाल सेक्टर में माणा गांव के पास GREF कैंप पर एक बर्फीला तूफान आया। कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। भारतीय सेना की IBEX ब्रिगेड ने भारी बर्फबारी और छोटे-छोटे बर्फीले तूफानों के बावजूद तेजी से बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 10 लोगों को बचा लिया गया है और सेना द्वारा उन्हें मेडिकल सहायता दी जा रही है। अतिरिक्त सैनिकों और उपकरणों को मौके पर भेजा जा रहा है।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने X पर एक पोस्ट में कहा, “चमोली जिले के माणा गांव के पास BRO द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान कई मजदूरों के बर्फीले तूफान में दबे होने की दुखद खबर मिली। राहत और बचाव कार्य ITBP, BRO और अन्य बचाव दलों द्वारा किया जा रहा है। मैं भगवान बद्री विशाल से सभी श्रमिक भाइयों की सुरक्षा की प्रार्थना करता हूं।” -
प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ-2025 ने उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। इस महाआयोजन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच प्रमुख आध्यात्मिक कॉरिडोर विकसित किए हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी गुरुवार को प्रयागराज दौरे पर पुलिस जवानों, स्वच्छता कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों, नाविकों, मीडियाकर्मियों और परिवहन चालकों एवं परिचालकों को धन्यवाद देते हुए प्रमुखता से इसका उल्लेख किया।
इन कॉरिडोर के माध्यम से श्रद्धालु प्रदेशभर में आसानी से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।पांच प्रमुख आध्यात्मिक कॉरिडोर :1. प्रयाग-विन्ध्याचल-काशी कॉरिडोरइस कॉरिडोर के माध्यम से श्रद्धालु प्रयागराज से विंध्याचल देवीधाम और फिर काशी (वाराणसी) तक की यात्रा कर सकेंगे, जो शक्ति और शिव उपासना का प्रमुख मार्ग होगा।2. प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोरयह कॉरिडोर भगवान राम और गोरखनाथ परंपरा से जुड़ा है। प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने, लेटे हनुमान, अक्षयवट, सरस्वती कूप के दर्शन कर अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए जा सकेंगे। अयोध्या के बाद श्रद्धालु गोरखपुर जाकर गोरखनाथ मंदिर में मत्था टेक सकेंगे।3. प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य कॉरिडोरयह मार्ग श्रद्धालुओं को लखनऊ होते हुए नैमिषारण्य धाम तक ले जाएगा, जो हिंदू धर्म के 88 महातीर्थों में से एक है और 88 हजार ऋषियों की तपस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। इसे भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, देवी सती और भगवान शिव से जोड़ा जाता है।4. प्रयागराज-राजापुर (बांदा)-चित्रकूट कॉरिडोरभगवान राम के वनवास से जुड़ा यह मार्ग श्रद्धालुओं को चित्रकूट धाम तक ले जाएगा, जहां कामदगिरि पर्वत, रामघाट और हनुमान धारा जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। वहीं, राजापुर गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली है, जिन्होंने श्रीरामचरितमानस, विनय पत्रिका आदि बहुत सी धार्मिक ग्रंथों की रचना की थी।5. प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुकतीर्थ (बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के माध्यम से)इस कॉरिडोर के तहत श्रद्धालु बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए मथुरा-वृंदावन और फिर शुकतीर्थ तक जा सकेंगे, जो भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि शुक्राचार्य की तपस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। इसके आगे श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और बाल्यकाल से जुड़े मथुरा-वृंदावन की भी सैर कर सकेंगे। - महाकुंभ नगर . उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में नाविकों के योगदान की सराहना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार नाव चालकों को विशेष सुविधाएं देगी जिसके तहत पहले नाविकों का पंजीकरण किया जाएगा और इसके बाद नाव के लिए पैसा और पांच लाख रुपए तक बीमा कवर की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। त्रिवेणी संकुल में नाविकों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने नाविकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा, ‘‘ जिस तरह से निषादराज ने त्रेता युग में भगवान श्रीराम को गंगा पार कराई थी, उसी परंपरा को आज भी हमारे नाविक निभा रहे हैं। करोड़ों लोगों ने संगम में पहली बार स्नान किया जिसमें नाव चालकों की विशेष भूमिका रही है।'' योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में मत्स्य पालन से जुड़े हुए सभी लोगों के कल्याण के लिए डबल इंजन की सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कोष से एक योजना के तहत नाव उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए हर नाविक का पंजीकरण होगा और उसे सुरक्षा बीमा भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनका स्वास्थ्य बीमा कवर नहीं है, उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर पांच लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाएगा। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर संगम में इतना जलस्तर वर्षों बाद देखा गया। यह महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाविकों के बाद राज्य रोडवेज के चालकों से भी संवाद किया और महाकुंभ के दौरान उनकी सेवाओं की प्रशंसा की। उन्होंने महाकुंभ में रोडवेज की बसों के संचालन से जुड़े चालकों के लिए 10,000 रुपए अतिरिक्त बोनस की घोषणा की। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘ उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की बसों के माध्यम से महाकुंभ में 3.75 करोड़ यात्रियों को उनके गंतव्यों तक पहुंचाया गया। अनेक ऐसे यात्रियों के लिए रोडवेज बड़ा सहारा बना, जहां रेलवे की सुविधा नहीं है। रोडवेज चालकों ने बिना थके लोगों को महाकुंभ की यात्रा कराई, उसके लिए उनका अभिनंदन करता हूं।''
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को आयुष क्षेत्र की व्यापक समीक्षा की और योग, प्राकृतिक चिकित्सा तथा फार्मेसी क्षेत्र में समग्र स्वास्थ्य तथा मानक प्रोटोकॉल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। मोदी ने आयुष क्षेत्र की समीक्षा के लिए 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें समग्र कल्याण और स्वास्थ्य सेवा, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और देश के कल्याण पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि 2014 में आयुष मंत्रालय के गठन के बाद से मोदी ने इसकी विशाल क्षमता को पहचानते हुए इसके विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप की कल्पना की है। बैठक में क्षेत्र की प्रगति की समग्र समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने इसकी पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया। समीक्षा में पहल को सुव्यवस्थित करने, संसाधनों का अनुकूलन करने और आयुष की वैश्विक मौजूदगी को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी मार्ग तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, प्रधानमंत्री के सलाहकार अमित खरे और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी इकाइयों के मोबाइल ऐप में आधार-सक्षम चेहरा प्रमाणन को एकीकृत करने की मंजूरी दे दी गई है जिससे ग्राहकों के लिए सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से शुरू किए गए 'आधार गुड गवर्नेंस' पोर्टल के जरिये आधार प्रमाणीकरण के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। ‘आधार गुड गवर्नेंस' पोर्टल का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव एस कृष्णन ने यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार और एनआईसी के महानिदेशक इंद्र पाल सिंह सेठी की मौजूदगी में किया। कृष्णन ने कहा कि इस मंच की शुरुआत से सुशासन और जीवन की सुगमता के क्षेत्र में और अधिक उपयोग के मामलों को जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने की उम्मीद है। बयान के मुताबिक, यह पोर्टल एक संसाधन-समृद्ध मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा और प्रमाणीकरण चाहने वाली संस्थाओं को आवेदन के तरीके और आधार प्रमाणन के लिए विस्तृत एसओपी मुहैया कराएगा। चेहरे के जरिये पहचान सुनिश्चित करने की सुविधा भी निजी इकाइयों के ग्राहक ऐप में एकीकृत की जा सकती है जिससे कभी भी कहीं भी प्रमाणीकरण किया जा सकेगा। मंत्रालय ने आधार प्रमाणीकरण अनुरोधों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए यह पोर्टल पेश किया है। इसमें निजी संस्थाओं के लिए विशिष्ट पहचान सत्यापन तंत्र तक पहुंच बहाल करने वाले संशोधन का पालन किया जाएगा। आधिकारिक बयान के मुताबिक, आधार प्रमाणीकरण का दायरा बढ़ने से जीवन को अधिक आसान बनाने और अपनी पसंद की नई सेवाओं तक परेशानी-मुक्त पहुंच की सुविधा प्रदान करने की उम्मीद है। बयान में कहा गया है, ‘‘आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 के तहत सुशासन (सामाजिक कल्याण, नवाचार, ज्ञान) संशोधन नियम, 2025 के लिए आधार प्रमाणीकरण के बाद ऑनलाइन मंच प्रभावी हो गया है।'' सरकार ने 31 जनवरी को आधार अधिनियम में एक संशोधन को अधिसूचित किया, ताकि निजी इकाइयों को भी अपनी सेवाएं देने के लिए आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करने की अनुमति मिल सके। मंत्रालय ने कहा कि नया संशोधन आधार संख्या धारकों को आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा, क्रेडिट रेटिंग ब्यूरो, ई-कॉमर्स खिलाड़ियों, शैक्षणिक संस्थानों और एग्रीगेटर सेवा प्रदाताओं सहित कई क्षेत्रों से परेशानी-मुक्त सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है। इसके अलावा सेवा प्रदाता भी इसे कर्मचारियों की उपस्थिति, ग्राहकों को जोड़ने, ई-केवाईसी सत्यापन, परीक्षा पंजीकरण आदि सहित कई चीजों के लिए मददगार पाएंगे।
- महाकुंभ नगर.महाकुंभ मेले ने जहां एक ओर आध्यात्मिक अनुभूति के लिए लोगों को आकर्षित किया, वहीं इसने कई छोटे दुकानदारों को कमाई का बड़ा अवसर प्रदान किया जो 45 दिनों के इस महासमागम में आवश्यक वस्तुएं बेचकर और सेवाओं की पेशकश कर अपनी आजीविका अर्जित कर सके। पूरे मेले में घाटों, रास्तों और छोटे मार्गों पर रेहड़ी पटरी वाले दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगा रखी थीं जहां पूजा सामग्री से लेकर मूर्तियां, धागे, सिंदूर, चूड़ियां और साहित्य तक उपलब्ध थे। इनके अलावा, छोटे दुकानदारों ने सब्जियों, गोबर के कंडे, लकड़ी, बर्तन, कपड़े, कंबल, आदि की बिक्री की। ये दुकानें 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित थी। सहसों से आकर खिलौने की दुकान लगाने वाले वीरेंद्र बिंद ने कहा कि उसकी बिक्री शानदार रही क्योंकि मेले में काफी बच्चे भी आए। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं 60 रुपये में एक सॉफ्ट टाय बेचता हूं। शुरुआत में मैं इसका दाम 70 रुपये मांगता हूं और यदि ग्राहक राजी हो जाता है तो मुझे हर बिक्री पर अतिरिक्त 10 रुपये का लाभ होता है।'' बुलंदशहर से आए रामपाल केवट ने कहा कि वह नाविक परिवार से हैं और उसके पिता नाव चलाते हैं, लेकिन महाकुंभ से पहले उन्होंने फोटोग्राफी सीखनी शुरू की और एक कैमरा खरीदा। उन्होंने कहा,‘‘मैं तुरंत प्रिंट निकालने वाला प्रिंटर साथ लेकर चलता हूं। मेले के दौरान मैंने फोटोग्राफी कर प्रतिदिन औसतन 5,000-6,000 रुपये की कमाई की। मैं प्रति तस्वीर 50 रुपये लेता हूं।'' यह पूछे जाने पर कि उसने इतने पैसे का क्या किया, केवट ने बताया कि वह रोज दिन ढलने के बाद सारे पैसे अपने परिवार को भेज देता था। प्रतापगढ़ जिले से आए अभिषेक ने मेले में रंगबिरंगे धागों की दुकान लगाई थी। इससे पहले वह एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए ड्राइवर का काम करता था। अभिषेक ने बताया, ‘‘मैं एक धागा 10 रुपये में बेच रहा हूं चाहे वह किसी भी रंगा का क्यों ना हो। मैंने थोक के भाव में इसे बनारस से खरीदा जहां इसकी लागत 3 रुपये प्रति धागा थी।'' प्रयागराज में रहने वाले मनशू ने अपने परिवार के साथ सेक्टर 19 के पास ‘फास्ट फूड' की दुकान लगाई थी जहां उन्होंने 10 रुपये प्रति कप चाय और 50 रुपये प्रति प्लेट मैगी नूडल्स बेचा। दुकान पर लगे एक छोटे पोस्टर में लिखा था ‘बाइक टैक्सी' के लिए संपर्क करें, इसके बारे में पूछने पर मनशू ने बताया, “मैंने कुंभ मेला क्षेत्र में बाइक टैक्सी भी चलाई जिससे मुझे अतिरिक्त आय हुई।” महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी को समाप्त हुआ जिसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
- प्रयागराज . प्रयागराज महाकुंभ के समापन के अगले दिन रेल कर्मियों का अभिनंदन करने यहां पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि महाकुंभ के दौरान 13,000 ट्रेनें चलाने की योजना थी, लेकिन 16,000 से अधिक ट्रेनें चलाई गईं। वैष्णव ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर), पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) और उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्टेशनों का दौरा किया और जमीनी स्तर पर परिचालन का आकलन किया। रेल मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रयागराज दौरा में रेल मंत्री ने इस वृहद आयोजन (महाकुंभ) में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाले प्रत्येक रेलकर्मी से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, “भीड़ प्रबंधन में आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल), जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) और पुलिसकर्मियों की मदद करने वाले रेल कर्मी से लेकर निर्बाध ढंग से रेल परिचालन सुनिश्चित करने वाले इंजीनियर और सफाईकर्मी से लेकर डॉक्टर तक ने इस आयोजन में बड़ी भूमिका निभाई है।” रेल मंत्री ने टीटीई, लोको पायलट (चालक), सहायक स्टेशन मास्टर, कंट्रोल अधिकारियों, ट्रैकमेन और रेलवे प्रशासकों का आभार प्रकट किया जिनके समन्वित प्रयासों से श्रद्धालुओं को उनके गंतव्यों तक पहुंचाने में मदद मिली। यहां संवाददाताओं से बातचीत में रेल मंत्री ने कहा, “16,000 से अधिक ट्रेनों के जरिए 4.5 से 5 करोड़ यात्रियों को महाकुंभ लाया गया और उन्हें उनके गंतव्यों तक पहुंचाया गया। मैंने सभी रेलकर्मियों को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने एक होकर काम किया।” उन्होंने कहा, “इस महाकुंभ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य और केंद्र के सभी विभागों और रेलवे के कर्मचारियों ने एक होकर काम किया। इसी तरह हम सभी एक हो जाएं तो कोई हमें हरा नहीं सकता।” रेल मंत्री ने कहा, “पिछले कुंभ (2019) में हमने करीब 4,000 ट्रेनें चलाई थीं और इस बार उससे तीन गुना से अधिक ट्रेनें चलाने की योजना थी, जबकि चार गुना ट्रेनें चलाई गईं। इसके लिए ढाई साल पहले से काम किया जा रहा था।” उन्होंने कहा, “इन ट्रेनों में 7,667 स्पेशल ट्रेनें और 9,485 नियमित ट्रेनें शामिल रहीं जिससे श्रद्धालु सकुशल अपने गंतव्यों तक पहुंच सके। महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए जिसमें से 4.24 करोड़ श्रद्धालुओं ने प्रयागराज के नौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों से यात्रा की।” वैष्णव ने कहा, “इस महाकुंभ के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और 21 से अधिक फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए जिसमें गंगा नदी पर नये पुल का निर्माण शामिल है। साथ ही हर स्टेशन पर होल्डिंग एरिया बनाए गए और यात्रियों के लिए उचित व्यवस्था की गई।” उन्होंने कहा, “इस दौरान नए तरीके के फुटओवर ब्रिज बनाए गए। रेलवे ने यात्रियों को ध्यान में रखकर हर तरह की व्यवस्थाएं की। (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी ने हमें सिखाया है कि हमें श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं कहनी चाहिए, बल्कि श्रद्धालु और भक्त कहना चाहिए और उनकी श्रद्धा और भक्ति में सहयोग देने की बात करनी चाहिए।” रेल मंत्री ने महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया।
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महाकुंभ नगर . प्रयागराज में 45 दिनों तक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक समागम-महाकुंभ बुधवार को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हो गया। तेरह जनवरी से प्रारंभ हुए इस मेले में देश विदेश से 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम आठ बजे तक 1.53 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से बुधवार शाम आठ बजे तक स्नान करने वालों की संख्या 66.30 करोड़ पहुंच गई। श्रद्धालुओं की यह संख्या चीन और भारत को छोड़कर अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों समेत सभी देशों की आबादी से अधिक है। साथ ही यह मक्का और वेटिकन सिटी जाने वाले श्रद्धालुओं से भी अधिक है। महाकुंभ अपनी स्वच्छता को लेकर भी चर्चा में रहा जिसमें स्वच्छता कर्मियों की अहम भूमिका रही। महाकुंभ मेले में स्वच्छता प्रभारी डाक्टर आनंद सिंह ने बताया कि पूरे मेले में 15,000 स्वच्छताकर्मी चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात रहे। कई पालियों में उन्होंने साफ सफाई की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और मेले में शौचालयों और घाटों को पूरी तरह से साफ रखा। सभी ने उनके कार्यों की सराहना की। महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ की घटना से इसकी छवि थोड़ी धूमिल हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इस घटना का कोई खास असर नहीं पड़ा और लोगों का आगमन अनवरत जारी रहा। भगदड़ में 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी। महाकुंभ मेले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, फिल्मी सितारों और खेल जगत, उद्योग जगत की हस्तियों तक ने संगम में डुबकी लगाई और प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। इस महाकुंभ में नदियों के संगम के साथ ही प्राचीनता और आधुनिकता का भी संगम देखने को मिला जिसमें एआई से युक्त कैमरों, एंटी ड्रोन जैसी कई अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया और मेला पुलिस को इन प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि, यह मेला कई विवादों को लेकर भी चर्चा में रहा। जैसे, फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनना और उनको लेकर विवाद खड़ा होना। इसके अलावा, गंगा जल की शुद्धता को लेकर राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एनपीसीबी) की रिपोर्ट और फिर उस पर सरकार के हवाले से कई वैज्ञानिकों द्वारा गंगा जल की शुद्धता की पुष्टि करना भी चर्चा में रहा। हिंदुओं की मान्यता है कि ग्रह नक्षत्रों के विशेष संयोग से कुंभ और महाकुंभ में गंगा और संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।” इस मेले के लिए एक नया जिला-महाकुंभ नगर अधिसूचित किया गया और मेला संचालन के लिए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस और प्रशासन की नियुक्ति की गई। यह प्रदेश का 76वां अस्थायी जिला है। महाकुंभ मेले में सभी 13 अखाड़ों ने तीन प्रमुख पर्वों- मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर अमृत स्नान किया। हालांकि, मौनी अमावस्या पर भगदड़ की घटना के बाद अखाड़ों का अमृत स्नान अधर में लटक गया था, लेकिन अंततः अखाड़ों के साधु संतों ने अमृत स्नान किया और बसंत पंचमी स्नान के साथ वे मेला से विदा हो गए। सपा समेत विपक्षी दलों ने श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल खड़ा किया, लेकिन सरकार ने 1,800 एआई कैमरों समेत 3,000 से अधिक कैमरों, ड्रोन और 60,000 कर्मचारियों के हवाले से श्रद्धालुओं की सही संख्या बताने की बात कही। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘श्रद्धालुओं की संख्या का मिलान करने के लिए एआई कैमरों के साथ ही हम रोडवेज, रेलवे और हवाईअड्डे के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहे।'' महाकुंभ मेले में अग्निशमन विभाग ने आग की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाई और आग लगने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई किए जाने से जनहानि की एक भी सूचना नहीं आई। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड के जवान तैनात रहे। इसके अलावा, तीन जल पुलिस थाने, 18 जल पुलिस कंट्रोल रूम और 50 ‘वाच टावर' स्थापित किए गए थे। महाकुंभ में आने वाले अति विशिष्ट लोगों में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल, ब्रिटेन के रॉक बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन प्रमुख रूप से शामिल थे। इनके अलावा, सोशल मीडिया के चर्चित चेहरों में हर्षा रिछारिया, माला बेचने वाली युवती मोनालिसा भोसले और ‘आईआईटी बाबा' के नाम से प्रसिद्ध अभय सिंह ने भी इस मेले में सुर्खियां बटोरी। महाकुंभ के आयोजन को लेकर प्रदेश सरकार शुरू से ही गंभीर रही और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 45 दिनों में 10 बार महाकुंभ नगर आकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके अलावा, उन्होंने लखनऊ और गोरखपुर में नियंत्रण कक्ष से मेले पर पैनी नजर रखी। मुख्यमंत्री महाकुंभ के औपचारिक समापन की घोषणा करने बृहस्पतिवार को यहां आने वाले हैं।
- नयी दिल्ली. भारतीय रेलवे ने 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में समर्थ ट्रेन को विकसित करने के प्रयास शुरू किए हैं और वह एक बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम कर रही है जो (बुलेट ट्रेन) मुंबई और अहमदाबाद के बीच 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। हालांकि, आधिकारिक रिकॉर्ड में उच्च रफ्तार (हाई स्पीड) ट्रेने वे हैं जिनकी गति 130 किमी प्रति घंटे से अधिक हो सकती है। लोको पायलट (रेल चालक) की आवधिक चिकित्सा जांच के प्रश्न पर रेलवे बोर्ड और दक्षिण मध्य जोन के बीच एक पत्राचार में, बोर्ड ने 19 फरवरी, 2025 को कहा, ‘‘... केवल 130 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की अधिकतम स्वीकार्य गति वाली ट्रेन को ही ‘उच्च रफ्तार' ट्रेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है।'' सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि तीन जुलाई 1989 तक 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन को चालकों की ‘मेडिकल फिटनेस' के लिए ‘उच्च रफ्तार' माना जाता था। उसके बाद, इसमें संशोधन किया गया और 110 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति वाली ट्रेन को ‘ उच्च रफ्तार' की श्रेणी में रखा गया। रेलवे बोर्ड ने 24 नवंबर 2020 को सहायक ‘लोको पायलट (चालक)' के स्थान पर सह-पायलट को तैनात करने के सवाल पर परिपत्र में और संशोधन किया तथा कहा, ‘‘130 किमी प्रति घंटे तक की अधिकतम अनुमेय गति वाली ट्रेन को ‘उच्च रफ्तार' नहीं माना जाएगा। केवल 130 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की अधिकतम अनुमेय गति वाली ट्रेन को ही ‘उच्च रफ्तार' ट्रेन माना जाएगा।
- पटना. पटना में बुधवार को गंगा नदी में स्नान करने के दौरान एक नाबालिग समेत चार लोगों की डूबने से मौत हो गई जबकि एक अन्य लापता है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ), (पटना नगर 2) श्री प्रकाश ने पत्रकारों को बताया कि मृतकों की पहचान रजनीश कुमार (23), अभिषेक कुमार (22), विशाल (22) और गोविंद (16) के रूप में हुई है। लापता लड़के की पहचान मोहम्मद रेहान (13) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि यह घटना दोपहर में उस समय हुई जब दो नाबालिग लड़कों सहित पांच लोग गांधी मैदान थाना अंतर्गत कलेक्टरेट घाट पर गंगा नदी में स्नान कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वे अचानक गहरे पानी में फिसल गए। घटना की सूचना पाकर पुलिस एसडीआरएफ जवानों के साथ मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया।राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों ने नाबालिग लड़के सहित चार लोगों के शव बरामद किए। एक नाबालिग लड़का लापता है। एसडीपीओ ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
- नयी दिल्ली. अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने तीसरी बार महाकुंभ मेले का दौरा किया और कहा कि उनका अनुभव हृदयस्पर्शी रहा। जिंटा ने बुधवार को ‘एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने मेले में शामिल होने का जिक्र किया। उन्होंने संगम में डुबकी लगाने की भी जानकारी दी। साथ ही, अभिनेत्री ने महाकुंभ मेले का अपना अनुभव भी साझा किया।उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘यह कुंभ मेले में मेरा तीसरा दौरा था और यह जादुई, दिल को छूने वाला और थोड़ा दुखद था। जादुई इसलिए कि मैं चाहे जितनी भी कोशिश कर लूं, मैं यह नहीं बता सकती कि मुझे कैसा महसूस हुआ। दिल को छूने वाला इसलिए कि मैं अपनी मां के साथ गई थी और यह उनके लिए बहुत मायने रखता है। दुःखद, क्योंकि जीवन और आसक्ति के द्वंद्व का एहसास करने के लिए मैं जीवन और मृत्यु के चक्र से छुटकारा पाना चाहती हूं। क्या मैं अपने परिवार, अपने बच्चों और अपने प्रियजनों को छोड़ने के लिए तैयार हूं? नहीं! मैं तैयार नहीं हूं।" महाकुंभ मेला 13 जनवरी को शुरू हुआ और बुधवार को संपन्न हो गया।
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तिरुचिरापल्ली .तमिलनाडु के करूर जिले में कुलिथलाई के पास बुधवार को तड़के एक कार और राज्य परिवहन निगम की बस की टक्कर में दो महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि दोनों वाहनों के बीच टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार पांचों लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बस के आगे के हिस्से को भी नुकसान पहुंचा है। दमकल और बचाव दल के कर्मियों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कार के हिस्सों को काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा। पुलिस के अनुसार, यह हादसा करूर-तिरुचिरापल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुलिथलाई के पास हुआ। करूर जा रही कार और अरंथांगी से तिरुप्पुर की ओर जा रही सरकारी बस की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतक कोयंबटूर के कुनियामुथुर इलाके के रहने वाले थे।
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ताड़ीपुड़ी .आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में बुधवार की सुबह नहाने गए 12 लोगों के एक समूह में से पांच लोग गोदावरी नदी में डूब गए। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह हादसा सुबह करीब साढ़े आठ बजे ताड़ीपुड़ी गांव के तल्लापुडी मंडल में हुआ। अधिकारी ने बताया, "गोदावरी नदी में नहाने गए 12 लोगों में से पांच डूब गए जबकि सात किसी तरह बचने में सफल रहे।" समूह के लोग स्नान के बाद महाशिवरात्रि पर्व पर पास के एक मंदिर जाने वाले थे। मृतकों और जीवित बचे लोगों में अधिकतर की उम्र 20 वर्ष से कम बताई जा रही है। पुलिस, दमकल सेवा और स्थानीय लोग डूबे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं।
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गोरखपुर .मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार की सुबह जनता दर्शन में आए लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनके जल्द से जल्द निस्तारण के आदेश दिये। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को आमजन को सताने, धमकाने और उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वाले बदमाशों को कानूनी सबक सिखाने के भी आदेश दिये और ताकीद की कि इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, "हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। जनता की हर पीड़ा का निवारण सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।" राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 200 लोगों से मुलाकात की और सभी को आश्वस्त किया कि सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण का निर्देश देने के साथ मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं तथा उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। आदित्यनाथ ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी।
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मथुरा/ महाशिवरात्रि पर्व पर कान्हा की नगरी मथुरा-वृन्दावन पूरी तरह से शिवमय हो गई। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के शिवभक्त कांवड़िए जल चढ़ाने के लिए सुबह से ही शिवालयों पर पहुंचने लगे थे। राजस्थान के भरतपुर और आसपास के जिलों के भी कांवड़िए बड़ी तादाद में मथुरा होकर ही गंगाजल लेकर गए। पुलिस उप महानिरीक्षक शैलेष कुमार पाण्डेय ने बताया कि जिले से होकर गुजरने वाले कांवड़ियों की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुगम बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि जिले के अलावा निकटवर्ती राजस्थान के भरतपुर एवं डीग के भी कांवड़िए बुलंदशहर के नरौरा एवं कासगंज के सोरौं स्थित गंगा घाटों से गंगाजल लेकर यहां से गुजरे, जिनके लिए विशेष इंतजाम किए थे। जिन मार्गों पर यातायात संबंधी दिक्कतें पेश आ रही थीं, उन पर यातायात को दूसरी तरफ मोड़ा गया। मथुरा के चार प्रसिद्ध शिवालयों भूतेश्वर महादेव, रंगेश्वर महादेव, गल्तेश्वर महादेव एवं गोकर्णेश्वर महादेव; वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव एवं महावन के चिंताहरण महादेव के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
- महाकुंभनगर ।.प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लाखों लोगों की भीड़ के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आसानी से बिछड़ सकने की आशंका के बीच, संगम तक जाते समय और वापस आते समय अपने परिचितों के साथ-साथ चलने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रहे हैं। जहां कुछ लोग लंबी रस्सी लाए हैं और उन्होंने उससे एक ‘सुरक्षा घेरा' बनाया है जिसमें वे चल सकें, वहीं कई अन्य लोग एक-दूसरे के कपड़ों से गांठ बांधकर चल रहे हैं ताकि वे बिछड़ न जाएं। बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शुभ स्नान के साथ 45 दिवसीय महाकुंभ का समापन होगा। हर 12 साल बाद आयोजित होने वाले महाकुंभ का अंतिम स्नान पर्व बुधवार को ‘हर हर महादेव' के घोष के साथ प्रारंभ हो गया। बुधवार तड़के से ही श्रद्धालुओं का गंगा और संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है। इस बीच, सरकार ने श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की। अधिकारियों ने बताया कि सुबह आठ बजे तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इस तरह से 13 जनवरी से आरंभ हुए महाकुंभ में अब तक 65.37 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा और संगम में डुबकी लगा चुके हैं और शाम तक यह आंकड़ा 66 करोड़ को पार करने की संभावना है। सोमवार रात से लेकर कई लोग अपने प्रियजन और मित्रों से नदी किनारों या मेला क्षेत्र के अन्य हिस्सों में बिछड़ चुके हैं। इनमें से कई लोगों को मानवीय सहायता और डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने परिजन से मिलाया जा चुका है। सेक्टर तीन, अक्षय वट रोड स्थित ‘खोया-पाया' केंद्र पर सोमवार देर रात तीन बजे भी चहल-पहल थी।मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से आए 34 तीर्थयात्रियों ने अपने समूह के चारों तरफ रस्सी का घेरा बनाया जिसे विभिन्न ओर से समूह के कुछ सदस्यों ने थाम रखा था। समूह में शामिल सोमदत्त शर्मा (34) ने कहा, ‘‘हमने यह सुरक्षा घेरा इसलिए बनाया है ताकि हम एक-दूसरे से बिछड़ न जाएं। हम पहली बार किसी कुंभ में आए हैं और हम एक-दूसरे से अलग होने के खतरों से वाकिफ हैं इसलिए हमने यह व्यवस्था की है।'' कई अन्य लोग एक दूसरे के कपड़ों में गांठ बांधकर चल रहे हैं।पीली कोठी क्षेत्र के स्थानीय निवासी अजय कुमार कुंभ मेला शुरू होने के बाद से रोजाना अपने घर से तीर्थयात्रियों की भीड़ को गुजरते देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘गांवों के लोग गांठ बांधकर चलते हैं। पुरुष तीर्थयात्री अपनी धोती के साथ अपने साथ आई महिला की साड़ी के पल्लू को बांधते हैं या दो महिलाएं एक-दूसरे के शॉल का उपयोग करके गांठ बांध लेती हैं।'' उन्होंने कहा कि दरअसल कई लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते और उन्हें संपर्क नंबर भी मुश्किल से याद रहता है इसलिए एक बार बिछड़ जाने पर उनका फिर से मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर वे गांठ बांधकर चलते हैं। एक अन्य श्रद्धालु अक्षत लाल ने कहा, ‘‘कुछ लोग तो एक पैर में घुंघरू बांधकर चल रहे हैं, ताकि भीड़ में खो जाने पर उनकी आवाज से एक-दूसरे को खोज सकें।''
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नई दिल्ली। सीबीएसई 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहा है। बोर्ड ने इस संबंध में एक मसौदा नीति को तैयार कर अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। बोर्ड ने शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों सहित तमाम हितधारकों से इस पर प्रतिक्रिया मांगी है।सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 में विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर देने की सिफारिश की है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में शिक्षा मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें 10वीं कक्षा में 2025-26 से दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर चर्चा की गई। इसके लिए एक मसौदा नीति विकसित करने और सभी हितधारकों जैसे स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम जनता से प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए सीबीएसई वेबसाइट पर होस्ट की जाए। भारद्वाज ने कहा कि व्यापक चर्चा के बाद मसौदा नीति विकसित की गई है और उसे सीबीएसई की बेवसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। हितधारक 9 मार्च तक मसौदा नीति पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। प्रतिक्रियाओं की जांच की जाएगी और नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। -
भोपाल। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दूसरे दिन केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 2025 तक उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगी। उन्होंने इस बड़ी उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को बधाई दी।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण केंद्र एक भोपाल में और दूसरा जबलपुर में विकसित किए जा रहे हैं।तकनीकी क्षेत्र में युवाओं को अवसर देने के लिए केंद्र सरकार ने फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम के तहत मध्यप्रदेश में 20,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि पिछले 10 वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में जबरदस्त उछाल आया है और इसकी कीमत ₹10 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। भारत अब ₹5 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जिसमें मोबाइल फोन (₹4 लाख करोड़), लैपटॉप, सर्वर और टेलीकॉम उपकरण (₹75,000 करोड़) शामिल हैं।भारत अब सेमीकंडक्टर निर्माण में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में, देश में पांच सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां बन रही हैं और 2025 तक भारत की पहली स्वदेशी चिप बाजार में आ जाएगी। इस क्षेत्र में प्रतिभा को और विकसित करने के लिए सरकार 85,000 इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में प्रशिक्षित कर रही है।वहीं भोपाल में एक नया आईटी कैंपस खोला गया है जो 1 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसमें सर्वर, डेस्कटॉप, मदरबोर्ड, लैपटॉप, टैबलेट, मॉनिटर, ड्रोन और रोबोट जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाए जाएंगे। अगले छह वर्षों में इस कैंपस में ₹150 करोड़ का निवेश होगा और लगभग 1,200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने एचएलबीएस (HLBS) नामक टेक्नोलॉजी कंपनी की भी सराहना की। यह कंपनी भोपाल में एक अत्याधुनिक निर्माण और अनुसंधान केंद्र स्थापित कर रही है। एचएलबीएस का लक्ष्य घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाना है जिससे आम लोगों को सस्ते दामों में अच्छी तकनीक मिल सके।ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन, भारतीय रेलवे और मध्य प्रदेश सरकार ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजनाओं पर समझौते किए जिससे राज्य में विकास को और गति मिलेगी। -
नई दिल्ली। महाशिवरात्रि के अवसर पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने घोषणा की कि केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को सुबह 7 बजे भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। साथ ही घोषणा हुई कि बाबा केदार की पंचमुखी डोली 28 अप्रैल को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी।
बता दें कि केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का निर्णय ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में धार्मिक परंपराओं और पंचांग गणना के आधार पर लिया गया। इस अवसर पर केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ विजय प्रसाद थपलियाल, पंचगई समिति के पदाधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।इस बीच, प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का अंतिम शाही स्नान महाशिवरात्रि के दिन 26 फरवरी को जारी है। महाकुंभ के दौरान विभिन्न पावन स्नानों में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पर्व माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की बारात में देवता, ऋषि-मुनि, पशु-पक्षी और दानव सभी शामिल हुए थे। यह पर्व अंधकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। - प्रयागराज। प्रयागराज में महाशिवरात्रि के दिन महाकुंभ 2025 का अंतिम स्नान पर्व जारी है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और नदी में नावों से गश्त कर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने का प्रयास किया। प्रयागराज के अतिरिक्त एसपी श्वेताभ पांडे ने बताया कि आज महाकुंभ में अंतिम अमृत स्नान हो रहा है और पुलिस लगातार गंगा नदी में नावों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर कोई नाव बिना लाइफ जैकेट के चल रही है तो उसे रोका जा रहा है और अवैध रूप से संचालित नावों को पकड़ा जा रहा है।”उन्होंने आगे बताया कि आज मोटरबोट और इंजन वाली नावों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। सिर्फ सामान्य नावें ही चलाई जा रही हैं। सुरक्षा के मद्देनजर नौ गश्ती टीमें तैनात की गई हैं जो रात से ही लगातार निगरानी कर रही हैं। गश्त तब तक जारी रहेगी जब तक कुंभ में आए श्रद्धालुओं की भीड़ पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाती।उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पुलिस ने इस बार भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने बताया, “हमने कुंभ के दौरान सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जिससे भीड़ प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सका।”DGP प्रशांत कुमार ने बताया कि इस बार महा कुंभ में 65 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने कहा, “आज सुबह से ही अंतिम अमृत स्नान शुरू हो गया था। पूरे राज्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।”उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या, वाराणसी और विंध्यवासिनी देवी जैसे धार्मिक स्थलों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। प्रयागराज से लौटने के बाद कई भक्त इन तीर्थ स्थलों पर दर्शन के लिए गए। महा कुंभ 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की सराहना की जा रही है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बेहतरीन तालमेल के चलते यह भव्य आयोजन शांति और सफलता के साथ पूरा हुआ।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र उनके अमूल्य योगदान को कभी नहीं भूल सकता जो त्याग, साहस और संघर्ष से भरा हुआ था।
वीर सावरकर, जिनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के भागुर में हुआ था। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि लेखक, वकील और राजनेता भी थे। वे भारत की स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे और हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं में से एक थे। सावरकर ने अपनी छात्रावस्था के दौरान ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेना शुरू कर दिया था। बाद में, जब वे ब्रिटेन में कानून की पढ़ाई कर रहे थे तब इंडिया हाउस और फ्री इंडिया सोसाइटी जैसे क्रांतिकारी संगठनों से जुड़ गए। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं जिनमें भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की वकालत की गई थी। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक हिंदुत्व : हू इज अ हिंदू? मानी जाती है।1911 में, ब्रिटिश सरकार के मॉर्ले-मिंटो सुधार (Indian Councils Act 1909) का विरोध करने के कारण उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप स्थित कुख्यात सेलुलर जेल (काला पानी) में 50 साल की सजा सुनाई गई। उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया लेकिन उनकी विचारधारा और लेखन भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन को प्रभावित करते रहे। - नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026 से 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने से जुड़े मसौदा नियमों को मंगलवार को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने बताया कि मसौदा नियमों को सार्वजनिक मंच पर डाला जाएगा और हितधारक नौ मार्च तक अपनी राय दे सकते हैं, जिसके बाद नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। मसौदा नियमों के मुताबिक, 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का पहला चरण 17 फरवरी से छह मार्च 2026 तक, जबकि दूसरा चरण पांच मई से 20 मई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “दोनों परीक्षाओं में पूरा पाठ्यक्रम शामिल होगा। छात्रों को दोनों चरणों के लिए एक ही परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। परीक्षा शुल्क में वृद्धि की जाएगी और आवेदन दाखिल करते समय छात्रों से दोनों परीक्षाओं का शुल्क लिया जाएगा।” अधिकारी के अनुसार, “बोर्ड परीक्षा का पहला और दूसरा चरण पूरक परीक्षा के रूप में भी काम करेगा और किसी भी परिस्थिति में कोई विशेष परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।
- महाकुंभ नगर . प्रयागराज महाकुंभ में देश के कोने कोने से श्रद्धालुओं का आगमन मंगलवार को भी जारी रहा और 1.24 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के गंगा और संगम में स्नान के साथ डुबकी लगाने वालों की संख्या 64 करोड़ को पार कर गई। मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को शाम आठ बजे तक 1.24 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई और 13 जनवरी से प्रारंभ हुए महाकुंभ में अभी तक 64.60 करोड़ लोगों ने स्नान कर लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज महाकुंभ के प्रमुख स्नान पर्व महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों और महाकुंभ में स्नान के लिए आए संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि का पावन पर्व लोक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होने की प्रेरणा देता है। सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 26 फरवरी को शिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व तक गंगा और संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 65 करोड़ से भी ऊपर पहुंच सकती है। महाकुंभ में 73 देशों के राजनयिक और भूटान नरेश नामग्याल वांगचुक समेत तमाम देशों के अतिथि यहां डुबकी लगाने पहुंचे। नेपाल से भी 50 लाख से अधिक लोग अब तक त्रिवेणी में स्नान कर चुके हैं। अब तक डुबकी लगाने वालों की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक करीब 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान किया। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में स्नान किया। वहीं माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया।
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ एक सेल्फी पोस्ट की तथा कहा कि लंबे समय से रुकी हुई भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता की फिर से बहाली स्वागत योग्य है। उन्होंने सोमवार को एक कार्यक्रम में हुई इस मुलाकात को लेकर ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ बातचीत करना अच्छा लगा।'' थरूर ने कहा, ‘‘लंबे समय से रुकी हुई एफटीए वार्ता फिर से शुरू हो गई है, जो स्वागत योग्य है।''
लोकसभा सदस्य ने यह पोस्ट उस वक्त किया है जब एक अखबार में उनके एक हालिया लेख पर विवाद पैदा हो गया है। इस लेख में उन्होंने केरल में निवेश माहौल को बढ़ावा देने के लिए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की प्रशंसा की है। इसको लेकर वह केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कुछ नेताओं के निशाने पर हैं। भाजपा ने सोमवार को दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में गांधी परिवार के ‘‘उम्मीदवार'' रहे मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद थरूर का ‘‘हाशिए पर जाना'' अपरिहार्य था। - प्रयागराज। प्रयागराज की पावन धरती पर चल रहे महाकुंभ 2025 का समापन अब बेहद करीब है। भक्ति, आस्था और श्रद्धा के इस महासंगम को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए मेला पुलिस प्रबंधन ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व में भीड़ प्रबंधन को लेकर आज मंगलवार से मेला क्षेत्र और प्रयागराज में नो-व्हीकल जोन लागू कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान और दर्शन का अवसर निर्बाध रूप से मिल सके।मेला पुलिस के अनुसार 25 फरवरी 2025 को मेला क्षेत्र को अपराह्न 4:00 बजे से नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है, जबकि प्रयागराज कमिश्नरेट को सायंकाल 6:00 बजे से नो-व्हीकल जोन बनाया जाएगा। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस व्यवस्था का सम्मान करते हुए पूरा सहयोग करें। भीड़ प्रबंधन को सुचारू रखने के लिए सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया गया है कि वे अपने प्रवेश के सबसे निकटस्थ घाट पर ही स्नान करें, ताकि सभी को सुगमता और सुरक्षा मिल सके।दक्षिणी झूसी : यहां से आने वाले श्रद्धालु संगम द्वार ऐरावत घाट पर स्नान कर सकेंगे।उत्तरी झूसी : यहां से आने वाले श्रद्धालु संगम हरिश्चंद्र घाट और संगम ओल्ड जीटी घाट पर स्नान करेंगे।परेड से आने वाले श्रद्धालु संगम द्वार भारद्वाज घाट, संगम द्वार नागवासुकि घाट, संगम द्वार मोरी घाट, संगम द्वार कालीघाट, संगम द्वार रामघाट, संगम द्वार हनुमान घाट पर स्नान करेंगे।अरैल से आने वाले श्रद्धालु संगम द्वार अरैल घाट पर स्नान करेंगे।दूध, सब्जी, दवाइयां, पेट्रोल/डीजल, एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सामग्रियों की गाड़ियों और सरकारी कर्मचारियों (डॉक्टर, पुलिस, प्रशासन) के वाहनों पर कोई रोक-टोक नहीं होगी। ये सभी अपने कार्य निर्बाध रूप से कर सकेंगे।गौरतलब हो, 26 फरवरी 2025 को महाकुंभ पर्व का समापन महाशिवरात्रि के साथ होगा। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे शीघ्रता से निकटस्थ घाट पर स्नान और शिवालय में दर्शन कर अपने गंतव्य को प्रस्थान करें।दिशा निर्देशों में ये भी बताया गया है कि सभी पांटून पुलों का संचालन भीड़ के दबाव के अनुसार किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि सभी घाटों को संगम के समान मान्यता प्राप्त है, इसलिए श्रद्धालु निकटस्थ घाट पर स्नान कर यातायात और भीड़ प्रबंधन में सहयोग करें।

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