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नई दिल्ली। भारत आने वाले दो वित्तीय वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। विश्व बैंक की जनवरी 2025 की ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स (GEP) रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था अगले दो वित्तीय वर्षों 2025-26 और 2026-27 में 6.7% की स्थिर दर से बढ़ने की संभावना है। यह वृद्धि दर वैश्विक औसत 2.7% की तुलना में कहीं अधिक है जो भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती भूमिका को दिखाती है।
रिपोर्ट में भारत की इस मजबूत वृद्धि का श्रेय सेवा क्षेत्र की मजबूती और विनिर्माण क्षेत्र में आए सुधार को दिया गया है। सरकार की नीतियां, जैसे बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, टैक्स प्रणाली का सरलीकरण, और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, घरेलू विकास को तेज कर रही हैं। इसके अलावा, भारत की आर्थिक वृद्धि ऐसे समय में हो रही है जब चीन जैसे बड़े प्रतिस्पर्धी की वृद्धि दर 2025 में 4% तक धीमी पड़ने का अनुमान है।हाल ही में जारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट भी भारत की स्थिर और मजबूत आर्थिक स्थिति की पुष्टि करती है। आईएमएफ ने 2025 और 2026 के लिए भारत की विकास दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है। दोनों रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करतीं हैं कि भारत न केवल वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है बल्कि इनसे उभरकर आर्थिक विकास में अग्रणी बना हुआ है।केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, स्टार्टअप इंडिया, और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, भारत को वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की ओर ले जा रही हैं। ये पहल न केवल बुनियादी ढांचे और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नए अवसर भी पैदा कर रही हैं। विश्व बैंक के ग्लोबल इकोनाॅमिक प्राॅस्पेक्ट्स (GEP) रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में निजी उपभोग में तेजी आने की संभावना है जो मजबूत श्रम बाजार, आसान ऋण उपलब्धता और कम मुद्रास्फीति से प्रेरित होगी। साथ ही, निवेश वृद्धि भी जारी रहेगी जिसे निजी क्षेत्र के निवेश, बेहतर कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और अनुकूल वित्तीय स्थितियों का समर्थन मिलेगा।वहीं, वैश्विक परिदृश्य में उभरती अर्थव्यवस्थाओं का योगदान तेजी से बढ़ा है। 2000 में वैश्विक जीडीपी में इनका हिस्सा 25% था, जो अब 45% तक पहुंच गया है। भारत की यह उपलब्धि सरकार की दूरदर्शी नीतियों, डिजिटल परिवर्तन, और समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का परिणाम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव 20 जनवरी से स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह आयोजन भारत के समावेशी विकास और डिजिटल परिवर्तन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दावोस रवाना होने से पहले अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से वंचित समुदायों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने समावेशी विकास पर जोर दिया है जो समाज के सबसे निचले तबके के लोगों तक भी पहुंचे। बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन, शौचालय, गैस कनेक्शन, नल का पानी और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार जैसी योजनाएं दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।”अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में समावेशी विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, “दुनिया भारत की आर्थिक नीतियों, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और टेक्नोलॉजी के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने की हमारी पहल को समझने के लिए उत्सुक है।”डिजिटल इंडिया अभियान के तहत भारत ने जिस तरह से डिजिटल परिवर्तन किया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। इसके जरिए सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाया गया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2025 में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 वैश्विक नेता हिस्सा लेंगे। इस बार भारत की ओर से पांच केंद्रीय मंत्री, तीन मुख्यमंत्री और अन्य राज्यों के कई मंत्री इसमें शामिल होंगे।यह पांच दिवसीय बैठक आर्थिक विकास को तेज करने, नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने और सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित होगी। भारत की भागीदारी का उद्देश्य वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना, अधिक निवेश आकर्षित करना और भारत को टिकाऊ विकास और तकनीकी नवाचार में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ के 118वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 25 जनवरी को मनाए जाने वाले नेशनल वोटर्स डे पर चुनाव आयोग की सफलता की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को सुनिश्चित किया है जिससे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और मजबूत हुई है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से लोकतंत्र के प्रति जनता की प्रतिबद्धता को सराहा और देशवासियों से अपील की कि वे हर चुनाव में बढ़-चढ़कर वोट करें क्योंकि यह लोकतंत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश में पहली बार 1951-52 में चुनाव हुए थे जब कुछ लोगों को संदेह था कि क्या भारत का लोकतंत्र जीवित रहेगा। लेकिन जनता ने इसे साबित कर दिया कि भारत वास्तव में “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि इस बार ‘मन की बात’ के एपिसोड को गणतंत्र दिवस के एक सप्ताह पहले, यानी तीसरे रविवार को प्रसारित किया जा रहा है, क्योंकि अगले रविवार को गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ की भी बधाई दी और संविधान के निर्माताओं को नमन किया।प्रधानमंत्री मोदी ने प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है जहां गरीब और अमीर सभी एक साथ आते हैं। यह मेला भारत के विभिन्न हिस्सों से जुड़े लोगों को एक साथ जोड़ता है और हमारी नदियों तथा धार्मिक मान्यताओं को सम्मानित करता है। उन्होंने कहा कि इस बार कुंभ मेला में युवाओं की भागीदारी अधिक देखने को मिल रही है, जो कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।प्रधानमंत्री मोदी ने 11 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर भी बात की और कहा कि यह दिन भारतीय संस्कृति और विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने विकास के साथ-साथ इन परंपराओं को सहेजने और उनसे प्रेरणा लेने की बात की ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे जुड़ी रह सकें। -
बस्ती (उप्र) .बस्ती जिले में एक कार और डंपर की टक्कर हो गई जिससे कार में सवार एक पुलिस उप निरीक्षक की मौत हो गई तथा हेड कांस्टेबल घायल हो गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि उप निरीक्षक हरि नारायण मिश्रा (57) गोरखपुर से कार से पैकोलिया थाने आ रहे थे तभी रास्ते में हर्रैया क्षेत्र में हर्रैया-बभनान मार्ग पर उनकी कार एक डंपर से टकरा गई। उसने बताया कि इस घटना में मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गयी।
पुलिस ने बताया कि कार चला रहे हेड कांस्टेबल राम कुमार दुबे घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसने बताया कि मिश्रा पैकोलिया थाने में तैनात थे। उसने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। -
महाकुम्भ नगर. महाकुम्भ मेले में पहली बार देश के दिग्गज कॉरपोरेट घराने अदाणी समूह का साथ पाकर इस्कॉन उत्साहित है और अब वह पहले की तुलना में कहीं अधिक क्षमता से श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद उपलब्ध करा रहा है। यहां सेक्टर 19 में हर्षवर्धन मार्ग पर स्थित इस्कॉन के शिविर में धार्मिक संगठन के निदेशक (सीएसआर) मधुकांत दास ने बताया कि एक रसोई में एक सत्र में 30 से 35 हजार लोगों का खाना तैयार होता है। एक दिन में तीन सत्रों में कुल मिलाकर एक लाख से अधिक लोगों के लिए खाना तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन का भोजन प्रसाद पूरी तरह से संतुलित है जिसमें दाल, छोले या राजमा, सब्जी और रोटी-चावल के साथ ही मीठे में हलवा या बूंदी के लड्डू शामिल हैं। ये भोजन मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी और गोबर के कंडों की आग पर तैयार किए जाते हैं जिससे इनका स्वाद लाजवाब है। दास ने बताया कि पूरे प्रयागराज में 40 केंद्रों पर भोजन प्रसाद वितरण किया जा रहा है जिनमें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कई होल्डिंग एरिया शामिल हैं जहां मुख्य स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को रोका जाता है। उन्होंने बताया कि भोजन प्रसाद के वितरण के लिए 100 गाड़ियां लगाई गई हैं जिन्हें अदाणी समूह की तरफ से उपलब्ध कराया गया है। अदाणी समूह और इस्कॉन की ओर से तीन से साढ़े तीन हजार स्वयंसेवक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरी परियोजना पर्यावरण-अनुकूल है और 45 दिनों तक चलने वाले इस मेले में कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस्कॉन के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अदाणी समूह का साथ मिलने से संगठन की भोजन प्रसाद वितरण की क्षमता आठ से 10 गुना बढ़ गई है। अडाणी समूह के एक अधिकारी ने कहा कि महाकुम्भ मेले में सेवा देने को लेकर कंपनी के लोगों में भारी उत्साह है। सेवा देने के लिए कंपनी ने पोर्टल खोला और एक ही दिन में 4,000 लोगों ने आवेदन कर दिया। पोर्टल बंद करने पर कर्मचारियों ने हंगामा भी कर दिया। इसकी वजह यह है कि उनमें महाकुम्भ का हिस्सा बनने की तीव्र इच्छा है। उन्होंने बताया कि अदाणी समूह की तरफ से कंपनी उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी भी कुंभ मेले में सेवा देने के लिए आ रहे हैं। कंपनी से 100-150 के बैच में कर्मचारी और अधिकारी सेवा देने आ रहे हैं। दास ने बताया कि मेला और आसपास के क्षेत्रों में सफाई में लगे 15,000 कर्मचारियों को भी भोजन प्रसाद इस्कॉन द्वारा वितरित किया जा रहा है। इस्कॉन ने पूरे प्रयागराज में तीन रसोई घर स्थापित किए हैं जो रेलवे जंक्शन के पास खुशरोबाग, सेक्टर छह में नेत्रकुंभ और सेक्टर 19 में इस्कॉन मंदिर परिसर में स्थित हैं और यहीं से भोजन प्रसाद तैयार कर वितरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में इस्कॉन के 750 केंद्र हैं जहां कई गौशालाएं है। इन्हीं गौशालाओं से गोबर के कंडे यहां लाए गए हैं। हर कुंभ में इस्कॉन की भागीदारी को देखते हुए मेला से छह महीने पहले से गोबर के कंडे बनाने शुरू कर दिए जाते हैं।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ में 22 जनवरी को मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सभी मंत्री बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े अहम मामलों पर फैसला हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्री संगम में स्नान भी कर सकते हैं।
इससे पहले वर्ष 2019 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली पहली सरकार में 29 जनवरी को कुम्भ के दौरान प्रयागराज में मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई थी। महाकुम्भ 13 जनवरी से शुरू हुआ है और 26 फरवरी तक जारी रहेगा -
नयी दिल्ली. भले ही अभिभावक अपनी बेटियो और बात मानने वाले बच्चों का पक्ष अधिक लेते हो पर आम तौर पर छोटी संतान ही माँ-बाप की अधिक चहेती होती हैं। पारिवारिक गतिशीलता का विश्लेषण करने वाले अध्ययनों की समीक्षा में यह दावा किया गया है। हालांकि, बड़े बच्चों को अक्सर अधिक स्वायत्तता दी जाती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता कम नियंत्रण वाले हो जाते हैं। लगभग 19,500 प्रतिभागियों पर आधारित 30 अध्ययनों और 14 डेटाबेस की समीक्षा में यह पाया गया। समीक्षा के प्रमुख लेखक और अमेरिका स्थित ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर अलेक्जेंडर जेन्सेन ने कहा, ‘‘दशकों से शोधकर्ता जानते हैं कि माता-पिता के पक्षपातपूर्ण व्यवहार का बच्चों पर स्थायी परिणाम हो सकता है।'' यह समीक्षा ‘साइकोलॉजिकल बुलेटिन' पत्रिका में प्रकाशित हुई है।
जेन्सेन ने कहा, ‘‘यह अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि किन बच्चों को पक्षपात का शिकार होने की अधिक संभावना है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है।'' शोधकर्ताओं के अनुसार, माता-पिता का पक्षपात, जिसमें माता-पिता एक बच्चे को दूसरे से अधिक पसंद करते हैं, कई तरीकों से व्यक्त हो सकता है जैसे कि वे बच्चों के साथ कैसे बातचीत करते हैं, उन पर कितना पैसा खर्च करते हैं या उन पर कितना नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग व्यवहार से विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है खासकर कम पसंदीदा बच्चे पर। इसके अलावा इससे तनावपूर्ण पारिवारिक रिश्ते भी पैदा हो सकते हैं। माता और पिता, दोनों के ही बेटियों का पक्ष लेने की अधिक संभावना रहती है। लेखकों ने लिखा, ‘‘माता-पिता ने बेटियों का पक्ष लेने की सूचना दी।'' टीम ने कहा कि इसके अलावा जो बच्चे अधिक कर्तव्यनिष्ठ (जिम्मेदार) और आज्ञकारी थे उन्हें भी तरजीह दी गई, जिससे पता चला कि माता-पिता के लिए इन बच्चों को संभालना आसान हो सकता है और इसलिए वे उनके प्रति अधिक सकारात्मक रुख अपना सकते हैं। लेखकों ने लिखा, ‘‘कर्तव्यनिष्ठ और आज्ञाकारी बच्चों को भी अधिक पसंदीदा व्यवहार मिला।''
उन्होंने कहा कि जब जन्म क्रम आधारित औसत की बात आती है, तो छोटे भाई-बहनों को कुछ हद तक तरजीह मिलती है। जेन्सेन के अनुसार, माता-पिता के बड़े भाई-बहनों को अधिक स्वायत्तता देने की संभावना रहती है, संभवतः इसलिए क्योंकि वे अधिक परिपक्व थे। उन्होंने कहा, ‘‘इन बारीकियों को समझने से माता-पिता और चिकित्सकों को संभावित रूप से हानिकारक पारिवारिक पैटर्न को पहचानने में मदद मिल सकती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी बच्चे प्यार और समर्थन महसूस करें।'' जेन्सेन ने कहा कि अध्ययन परस्पर संबद्धता पर आधारित है इसलिए यह नहीं बताता कि माता-पिता कुछ बच्चों का पक्ष क्यों ले सकते हैं। हालांकि, यह उन संभावित क्षेत्रों पर प्रकाश डालता है जहां माता-पिता को अपने बच्चों के साथ बातचीत के प्रति अधिक सचेत रहने की आवश्यकता हो सकती है। -
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने महेंद्रगिरि के ‘प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स' में एक परीक्षण केन्द्र में अपने विकास तरल इंजन को फिर से चालू करने संबंधी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इसरो ने शनिवार को यह जानकारी दी। विकास इंजन का उपयोग प्रक्षेपण यानों के तरल चरणों (लिक्विड स्टेज) को शक्ति प्रदान करने में किया जाता है। इसरो की ओर से जारी एक बयान के अनुसार यह परीक्षण 17 जनवरी को किया गया। यह चरणों की पुनर्प्राप्ति के वास्ते प्रौद्योगिकियों के विकास में मील का पत्थर है। विभिन्न परिस्थितियों में इंजन को पुनः चालू करने के लिए कई परीक्षण किए जा रहे हैं।
इसरो ने कहा,‘‘ इस परीक्षण में इंजन को 60 सेकंड के लिए चालू किया गया फिर इसे 120 सेकंड के लिए बंद किया गया, फिर पुनः चालू किया गया। परीक्षण के दौरान इंजन के सभी मानक सामान्य और अपेक्षा के अनुरूप थे। इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में भी यह परीक्षण किया गया था। इसके अलावा, इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने शुक्रवार को इसरो के एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के ‘कोर लिक्विड स्टेज' (एल110) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को स्वामित्व योजना के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्डों का वितरण किया। इस कार्यक्रम में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांव शामिल हुए। पीएम मोदी ने बताया कि बीते पांच सालों में करीब डेढ़ करोड़ लोगों को संपत्ति कार्ड सौंपें जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन ग्रामीण भारत और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। स्वामित्व योजना जो अप्रैल 2020 में शुरू हुई थी का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का कानूनी अधिकार देना है।
पीएम मोदी ने बताया कि संपत्ति कार्ड के जरिए लोगों को उनकी जमीन और घर का कानूनी प्रमाण मिलता है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलता है बल्कि प्रॉपर्टी के अधिकार मिलने से गरीबी कम करने में भी मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में संपत्ति अधिकार की कमी एक बड़ी समस्या है, और इसे हल करना आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और स्वास्थ्य संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी राइट्स (संपत्ति के अधिकार) इन समस्याओं को हल करने और गरीबी को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। स्वामित्व योजना के तहत गांवों की जमीनों का आधुनिक तकनीक से सर्वेक्षण और मैपिंग की जाती है, जिससे लोगों को उनकी संपत्तियों का कानूनी प्रमाण मिलता है। इस योजना के जरिए ग्रामीण भारत में पारदर्शिता और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज शनिवार को प्रयागराज महाकुम्भ पहुंचकर संगम में डुबकी लगाई। संगम स्नान के बाद पत्रकारों के बातचीत करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि परमात्मा ने मुझे यह अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज प्रयागराज, संगम में स्नान करने के बाद मैं स्वयं को बहुत ही कृतार्थ महसूस कर रहा हूं। महाकुंभ भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म की आध्यात्मिक अनुभूति का पर्व है।
रक्षामंत्री ने कहा कि यह गंगा, यमुना व सरस्वती के साथ सनातन धर्म की आध्यात्मिक, वैज्ञानिकता और साथ ही साथ सामाजिक समरसता का भी संगम है। विश्व के सबसे बड़े जन समागम का कुशल संचालन जिस तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि मैं यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसके लिए हार्दिक बधाई देता हूं। राजनाथ सिंह ने संगम स्नान की फोटो अपने सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर भी साझा की है। राजनाथ सिंह के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी व अनिल राजभर के अलावा राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने संगम स्नान के बाद आरती में भी शामिल हुए। - केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागरिक-केंद्रित दूरसंचार पहलों का किया शुभारंभनई दिल्ली। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पूरे देश में दूरसंचार पहुंच, सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में आज कई नागरिक-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में संचार साथी मोबाइल ऐप, राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 का शुभारंभ और डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंग सुविधा का उद्घाटन शामिल था।संचार साथी मोबाइल ऐप एक उपयोगकर्ता-अनुकूल प्लेटफ़ॉर्म है जिसे दूरसंचार सुरक्षा को मज़बूत करने और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है। मोबाइल अनुप्रयोग जारी करते हुए, श्री सिंधिया ने इस बात पर प्रकाश डाला, "यह पहल न केवल अवसरों तक पहुंच प्रदान करती है बल्कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करती है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संचार साथी ऐप सभी के लिए दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा, सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।संचार साथी मोबाइल ऐप, एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जो उपयोगकर्ताओं को अपने दूरसंचार संसाधनों को सुरक्षित रखने और दूरसंचार धोखाधड़ी से निपटने के लिए महत्वपूर्ण उपाय प्रदान करता है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में सम्मिलित हैं:· चक्षु - संदिग्ध धोखाधड़ी संचार की रिपोर्टिंग (एसएफसी): उपयोगकर्ता ऐप का उपयोग करके और सीधे मोबाइल फोन लॉग से संदिग्ध कॉल और एसएमएस की रिपोर्ट कर सकते हैं।· अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों को जानें : नागरिक अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की पहचान और प्रबंधन कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इनका अनधिकृत उपयोग न हो।· खोए/चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट को बंद करना : खोए या चोरी हुए मोबाइल उपकरण को तुरंत बंद, खोजना और प्राप्त किया जा सकता है।· मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता जानें : यह ऐप मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता सत्यापित करने का एक आसान तरीका प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उपयोगकर्ता असली उपकरण खरीदें।देश में 90 करोड़ से अधिक स्मार्ट फोन उपयोगकर्ताओं के साथ, संचार साथी मोबाइल ऐप का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्मार्टफोन पर बस कुछ क्लिक से इन महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो।राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 का दृष्टिकोण दस्तावेज़ जारी करके इसका शुभारंभ किया। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एनबीएम 2.0 एनबीएम 1.0 की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत लगभग 8 लाख टावर स्थापित किए गए थे। उन्होंने कहा, "ब्रॉडबैंड उपभोक्ता 66 करोड़ से बढ़कर 94 करोड़ हो गए हैं। यह वृद्धि एनबीएम 2.0 की शुरूआत के लिए प्रमुख बिंदु और आधार के रूप में कार्य करती है।"केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे बताया, "आज भारत दूरसंचार और डिजिटल दोनों क्षेत्रों में वैश्विक अग्रणी भूमिका में है। 531 मिलियन से अधिक भारतीय अब इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग से जुड़े हैं। हमारे मजबूत दूरसंचार नेटवर्क द्वारा संचालित यूपीआई के माध्यम से, हमने पिछले साल 172 बिलियन लेनदेन की सुविधा प्रदान की, जिसकी राशि लगभग 247 लाख करोड़ थी। देश की वृद्धि आंतरिक रूप से हमारे दूरसंचार नेटवर्क की मजबूती से जुड़ी हुई है। इसी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन शुरू किया गया था।"उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनबीएम 2.0 का प्राथमिक उद्देश्य देश भर के शेष 1.7 लाख गांवों को जोड़ना और महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर 100 ग्रामीण परिवारों में से कम से कम 60 को ब्रॉडबैंड संपर्कता की सुविधा मिले। इसके अलावा, हमारा लक्ष्य 100 एमबीपीएस की न्यूनतम फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड हासिल करना है, जिससे ग्रामीण भारत के लिए एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार हो सके।"ई-गवर्नेंस से लेकर आपदा प्रबंधन तक, एनबीएम 2.0 हर क्षेत्र को बदलने का वादा करता है और इसमें देश भर में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। यह पहल केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे में नहीं है - यह एक डिजिटल रूप से समावेशी भविष्य के लिए आधार बनाने के संबंध में है, जहां संपर्कता हर नागरिक को सशक्त बनाती है। जैसे-जैसे भारत इस डिजिटल यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, मिशन स्पष्ट है: एक जुड़ा हुआ, लचीला और दीर्घकालीन भारत बनाना जहां प्रौद्योगिकी और नवाचार सभी की समृद्धि के लिए सफल हो।एनबीएम 2.0 का लक्ष्य भारत को डिजिटल परिवर्तन के एक नए युग में ले जाना है। प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप , यह सभी के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और सार्थक संपर्कता प्रदान करके भारत की एक वैश्विक ज्ञान समाज के रूप में परिकल्पना करता है। एनबीएम 1.0 (2019-2024) की सफलता के आधार पर, एनबीएम 2.0 के मुख्य लाभ निम्नलिखित होंगे:2030 तक 2.70 लाख गांवों तक परिचालन ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) संपर्कता का विस्तार करना, वर्तमान ~50,000 से 95 प्रतिशत अपटाइम के साथ।2030 तक स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और पंचायत कार्यालयों जैसे 90 प्रतिशत प्रमुख संस्थानों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड गति में सुधार करना - राष्ट्रीय औसत को नवंबर 2024 में 63.55 एमबीपीएस से बढ़ाकर 2030 तक न्यूनतम 100 एमबीपीएस करना।2026 तक पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टरप्लान प्लेटफॉर्म (पीएमजीएस) पर सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के स्वामित्व वाले फाइबर नेटवर्क की 100 प्रतिशत मैपिंग प्राप्त करना और अतिरिक्त भारतनेट परियोजना की योजना के लिए पीएमजीएस का उपयोग करना।व्यापार में सुगमता के लिए - राइट ऑफ वे आवेदन के औसत निपटान समय को 60 दिनों (अभी) से घटाकर 2030 तक 30 दिन करना। 2019 में यह 449 दिन था।प्रति 100 जनसंख्या पर ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या को वर्तमान 45 से बढ़ाकर 2030 तक 60 करना।2030 तक 30 प्रतिशत मोबाइल टावरों को सतत ऊर्जा से संचालित करने का लक्ष्य प्राप्त करना।भूमिगत दूरसंचार अवसंरचना और अन्य उपयोगिताओं की सुरक्षा के लिए 'कॉल बिफोर यू डिग' (सीबीयूडी) मोबाइल ऐप के उपयोग को बढ़ाने पर काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने मार्च 2023 में इसका शुभारंभ किया था।दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत जारी नए आरओडब्ल्यू नियम, 2024 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों अर्थात केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नगर पालिकाओं के साथ सहयोग करें।देश के कोने-कोने में 5जी नेटवर्क की सुविधा प्रदान करने तथा 6जी के भविष्योन्मुखी नेटवर्क के लिए, देश भर में मजबूत, उपयोग के लिए तैयार स्ट्रीट फर्नीचर अवसंरचना के निर्माण के लिए कार्य करना।दूरसंचार नेटवर्क और अन्य उपयोगिताओं के रखरखाव और लागत दक्षता में सुधार करने के लिए सभी रैखिक परियोजनाओं में सामान्य/साझा करने योग्य दूरसंचार वाहिनी और उपयोगिता गलियारों के लिए सभी हितधारकों के साथ काम करना।देश के दूर-दराज, सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक बुनियादी ढांचे को तैनात करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, आपदाओं, युद्धों और अन्य आपात स्थितियों के दौरान ब्रॉडबैंड संपर्कता बढ़ाने और ब्रॉडबैंड नेटवर्क की विश्वसनीयता, उत्तरजीविता और लचीलेपन में सुधार के लिए ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (ओपीजीडब्ल्यू) जैसी विद्युत क्षेत्र की परिसंपत्तियों का लाभ उठाना।डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंगडिजिटल भारत निधि (डीबीएन), जिसे पहले यूएसओएफ के नाम से जाना जाता था, ने अपने व्यापक मोबाइल टावर परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दूरसंचार अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे कठिन क्षेत्रों में डीबीएन द्वारा वित्तपोषित दूरसंचार टावर विशिष्ट टीएसपी के ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं जिन्होंने डीबीएन के वित्तपोषण से मोबाइल टावर स्थापित किया है। अभी तक, अन्य टीएसपी के ग्राहकों को डीबीएन द्वारा वित्तपोषित टावर का लाभ नहीं मिल पाया है।कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4G मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंग (आईसीआर) का भी उद्घाटन किया। उन्होंने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "यह एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें हमारे तीन टीएसपी - बीएसएनएल, एयरटेल और रिलायंस - सभी डीबीएन-वित्तपोषित साइटों पर एक-दूसरे के बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने के लिए एकजुट हैं। लगभग 27,836 ऐसी साइटों के साथ, हम न केवल संपर्कता सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि देश भर के ग्राहकों को पसंद की स्वतंत्रता भी प्रदान कर रहे हैं।"डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर टीएसपी के बीच आईसीआर से कई टीएसपी के ग्राहक एक ही डीबीएन द्वारा वित्तपोषित टावर से 4जी सेवाओं का आनंद ले सकेंगे, बजाय इसके कि विभिन्न टीएसपी के लिए कई टावर हों। इसलिए, ऑपरेटरों और सरकार के कम पूंजीगत व्यय निवेश के माध्यम से अधिक ग्राहकों को लाभ मिलता है। यह पहल लगभग 27,000 टावरों द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले 35,400 से अधिक ग्रामीण और दूरदराज के गांवों के लिए निर्बाध 4जी संपर्कता का वादा करती है।दूरसंचार विभाग की नागरिक-केंद्रित पहलों पर प्रकाश डालते हुए दूरसंचार सचिव, डॉ.नीरज मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि संचार साथी मोबाइल एप्लीकेशन व्यक्तियों को सशक्त बनाएगा और घोटालों की समस्या को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि डीबीएन द्वारा वित्तपोषित साइटों पर इंट्रा ऑपरेटर रोमिंग विशेष रूप से देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए उपयोगी होगी।इस कार्यक्रम में सचिव (दूरसंचार) और डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) के अध्यक्ष डॉ. नीरज मित्तल, डीसीसी के सदस्य (सेवाएं) श्री रोहित शर्मा, और डीसीसी के सदस्य (प्रौद्योगिकी) श्री संजीव के. बिदवई, अपर सचिव (टी) श्री गुलजार नटराजन और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।संचार साथी के बारे मेंदूरसंचार विभाग की कई नागरिक केंद्रित पहलों में से संचार साथी पहल ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मई 2023 में जारी किए गए संचार साथी पोर्टल ( www.sancharsaathi.gov.in ) ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और 9 करोड़ से अधिक परिदर्शन, 2.75 करोड़ धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शनों को काटने और 25 लाख से अधिक खोए या चोरी हुए उपकरणों को सुरक्षित पाने करने जैसे उल्लेखनीय मील के पत्थर हासिल किए हैं। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराधों से जुड़े 12.38 लाख व्हाट्सएप खातों को बंद कर दिया गया है और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए 11.6 लाख अवैध बैंक खातों को बंद किया गया है। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय आने वाली धोखाधड़ी कॉल रोकथाम प्रणाली की शुरुआत की, जो धोखाधड़ी वाली कॉल्स से जुड़े साइबर अपराधों से निपटने में अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है। इन सक्रिय उपायों से फर्जी डिजिटल गिरफ्तारियां, कर धोखाधड़ी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का छद्मवेश धारण करने जैसी धोखाधड़ी को रोकने में काफी मदद मिली है, जिससे नागरिकों को साइबर खतरों से सुरक्षा मिली है।दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, राज्य पुलिस, I4सी, जीएसटीएन, बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, सेबी, सीबीडीटी, डीजीजीआई, आईबी, सीबीआई, वाट्सअप आदि सहित 520 से अधिक संगठनों को सहायता प्रदान करते हुए साइबर अपराध से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ इसके सहयोग ने राष्ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा को मजबूत किया है।ये पहल डिजिटल दूरी को कम करने और भारत की वैश्विक डिजिटल स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए दूरसंचार विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।एनबीएम 1.0 के बारे मेंयह मिशन राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 का भाग है। मिशन का उद्देश्य डिजिटल संचार अवसंरचना के विकास को तेज़ करना, डिजिटल दूरी को मिटाना, डिजिटल सशक्तिकरण और समावेशन को सुविधाजनक बनाना और सभी के लिए ब्रॉडबैंड की सस्ती और सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करना है। यह मिशन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुँच में सुधार, आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने और डिजिटल संपर्कता के माध्यम से सामाजिक समावेशन को बढ़ाने के सरकार के व्यापक दृष्टिकोण के साथ भी जुड़ा हुआ है।एनबीएम 1.0 की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:सितंबर 2024 तक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क का विस्तार 41.91 लाख किलोमीटर तक किया गया।दूरसंचार टावरों की संख्या बढ़कर 8.17 लाख तथा ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 941 मिलियन हो गई।"गतिशक्ति संचार" पोर्टल के माध्यम से प्रमुख राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) मुद्दों का समाधान करना और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।भूमिगत दूरसंचार अवसंरचना की सुरक्षा के लिए “कॉल बिफोर यू डिग” (सीबीयूडी) मोबाइल ऐप की शुरूआत।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के लिए कुल 11,440 करोड़ रुपये की पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दे दी है। इसमें आरआईएनएल में हिस्सेदारी अंश पूंजी के रूप में 10,300 करोड़ रुपये और आरआईएनएल को चालू रखने के लिए 1140 करोड़ रुपये के कार्यशील पूंजी ऋण को 7 प्रतिशत गैर-संचयी प्राथमिकता शेयर पूंजी के रूप में बदलना शामिल है, जिसे 10 वर्षों के बाद भुनाया जा सकता है।आरआईएनएल, भारत सरकार के 100 प्रतिशत स्वामित्व के साथ इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक अनुसूची-ए सीपीएसई है। आरआईएनएल विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (वीएसपी) का संचालन करता है, जो आंध्र प्रदेश राज्य में सरकारी क्षेत्र के तहत एकमात्र अपतटीय स्टील प्लांट है। इसकी स्थापित क्षमता 7.3 एमटीपीए तरल स्टील की है।आरआईएनएल की वित्तीय स्थिति गंभीर है (31.03.2024 तक, आरआईएनएल की कुल संपत्ति (-)4538.00 करोड़ रुपये थी, वर्तमान परिसंपत्तियां 7,686.24 रुपये और वर्तमान देनदारियां 26,114.92 करोड़ रुपये थीं)। आरआईएनएल ने कार्यशील पूंजी के लिए बैंकों से स्वीकृत उधार सीमा समाप्त कर दी है और वह बैंकों से आगे ऋण प्राप्त करने की स्थिति में नहीं है। आरआईएनएल ने जून 2024 में पूंजीगत ऋण चुकौती और ब्याज का भुगतान करने में भी चूक की।आरआईएनएल में 10,300 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अंश राशि डालने से उसे कार्यशील पूंजी जुटाने से जुड़ी परिचालन समस्याओं को दूर करने और सबसे अधिक उत्पादक तरीके से ब्लास्ट फर्नेस संचालन शुरू करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनी धीरे-धीरे अपनी पूरी उत्पादन क्षमता क्षमता प्राप्त कर सकेगी जो कि महत्वपूर्ण है और इस्पात उत्पादन को बढ़ाकर भारतीय इस्पात बाजार में स्थिरता लाएगी जो राष्ट्रीय हित में है साथ ही कर्मचारियों (नियमित और संविदात्मक) और इस्पात संयंत्र के संचालन पर निर्भर लोगों की आजीविका को भी बरकार रखा जा सकेगा। पुनरुद्धार योजना से उम्मीद की जा रही है कि आरआईएनएल में जनवरी 2025 में दो ब्लास्ट फर्नेस और अगस्त 2025 में तीन ब्लास्ट फर्नेस के साथ पूर्ण उत्पादन शुरू हो जाएगा।इस्पात उत्पादन अर्थव्यवस्था का एक मुख्य क्षेत्र है और यह किसी भी देश के आर्थिक विकास के संकेतकों में से एक है। वीएसपी का पुनरुद्धार और इसकी पूरी क्षमता पर निरंतर संचालन सार्वजनिक संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करेगा और राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। यह रणनीतिक निर्णय सरकार की आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी उद्योगों को समर्थन देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
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नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 18 से 20 जनवरी तक ब्रसेल्स, बेल्जियम का दौरा करेंगे। पीयूष गोयल इस दौरे के दौरान यूरोपीय आयोग के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त, मारोस सेफकोविक के साथ उच्च स्तरीय बातचीत करेंगे। इस बातचीत में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के ढांचे और द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
तीन दिवसीय यह दौरा यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार 180 अरब डॉलर से अधिक का अनुमानित है। ईयू भारत के लिए न केवल एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है बल्कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है जो लगभग 117.34 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।बातचीत में वैश्विक आर्थिक स्थिति, व्यापार में आ रही रुकावटें और एफटीए वार्ताओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दिशा पर चर्चा होने की उम्मीद है। अपने दौरे के दौरान, गोयल विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक डॉ. नगोजी ओकोंजो-इवेला, बेल्जियम के विदेश व्यापार मंत्री बर्नार्ड क्विंटिन और बेल्जियम की प्रमुख औद्योगिक कंपनियों व भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।गौरतलब है कि हाल ही गोयल ने कहा था कि भारत ईयू के साथ संतुलित, व्यापक और दोनों के लिए लाभकारी एफटीए हासिल करने का प्रयास कर रहा है। एफटीए वार्ताओं के नौ दौर पूरे होने के बाद राजनीतिक दिशा-निर्देशों की जरूरत है ताकि एक संतुलित और व्यावसायिक रूप से लाभदायक समझौते पर सहमति बनाई जा सके। इस समझौते से भारत को अपने वस्त्र और सेवाओं के निर्यात को बढ़ाने और विविधता लाने में मदद मिलेगी साथ ही आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने का भी मौका मिलेगा। -
नई दिल्ली। आज शनिवार तड़के सुबह ही घने कोहरे ने दिल्ली को अपने चपेट में ले लिया जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) कम हो गई और यातायात प्रभावित हुआ। उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी घने कोहरे की स्थिति देखने को मिली। कोहरे के चलते इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई उड़ानें और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कई ट्रेनें देरी से चलीं। मौसम विभाग के मुताबिक सुबह 5:30 बजे दिल्ली का तापमान 11.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
इस बीच, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक सुबह 7 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 248 रिकॉर्ड किया गया। AQI को 0-50 तक ‘अच्छा,’ 51-100 ‘संतोषजनक,’ 101-200 ‘मध्यम,’ 201-300 ‘खराब,’ 301-400 ‘बहुत खराब,’ और 401-500 ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है।दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-III के तहत लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए हैं। यह फैसला 17 जनवरी को लिया गया। तेज हवाओं और अनुकूल मौसम ने इस सुधार में मदद की है।हालांकि, GRAP के स्टेज-I और स्टेज-II के उपाय अभी जारी हैं ताकि वायु गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके और इसे खराब होने से रोका जा सके। वहीं, दिल्ली में ठंड से बचने के लिए बेघर लोग रात के आश्रयों का सहारा ले रहे हैं। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) ने बेघरों के लिए 235 पगोडा टेंट लगाए हैं। कई इलाकों में रैनबसेरे भी स्थापित किए गए हैं। - नयी दिल्ली। भारत में निचली से लेकर सर्वोच्च अदालत तक में लोगों को न्याय पाने के लिए बरसों इंतजार करना पड़ता है. लेकिन असम की एक अदालत ने बीते साल 31 दिसंबर तक तमाम लंबित मामलों को निपटा कर एक मिसाल कायम की है.भारत की विभिन्न अदालतों में फिलहाल पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं. असम की ये मिसाल साफ दिखाती है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के सहयोग से तमाम अदालतों में लंबित मामलों को समय पर निपटाना असंभव नहीं है. अगर देश की बाकी अदालतों ने भी इस दिशा में पहल की तो 'जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड' वाली कहावत भी अतीत बन जाएगी. लेकिन सवाल है कि क्या ऐसा संभव है?कैसे हुआ ये काम पूराअसम के चिरांग जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में 31 दिसंबर, 2024 को एक भी मामला लंबित नहीं था. यानी अदालत ने अपने समक्ष आने वाले तमाम मामलों को निपटा दिया था. वह ऐसा करने वाली देश की संभवतः पहली अदालत है.चिरांग जिला अदालत में सरकारी वकील नंदिता बसुमतारी डीडब्ल्यू से कहती हैं, "बीते साल की शुरुआत में सीजेएम अदालत में 143 मामले थे. पूरे साल के दौरान 687 नए मामले भी आए. लेकिन साल के आखिर तक इन तमाम 830 मामलों पर फैसला हो गया था. इस मामले में अदालत का रिकॉर्ड सौ फीसदी है. यही नहीं चिरांग जिले की अदालतों में कन्विक्शन रेट यानी अभियुक्त को दोषी साबित करने की दर भी राज्य के औसत से ज्यादा रही."संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को किया और मजबूतबसुमतारी के मुताबिक, असम में वर्ष 2024 के नवंबर तक कनविक्शन रेट यानी दोषी साबित करने की दर 22.68 फीसदी रही, जबकि चिरांग में यह 23.29 फीसदी थी. दिसंबर में तो चिरांग में यह दर 26.89 फीसदी के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गई.चिरांग जिला निचले असम में बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट (बीएटीडी) में शामिल चार जिलों में से एक है. इसकी स्थापना चार जून, 2004 को कोकराझार, बोंगाईगांव और बरपेटा जिलों के कुछ हिस्सों को लेकर हुई थी. इसका जिला मुख्यालय काजलगांव है, जो भूटान की सीमा से सटा है. 'चिरांग' गारो शब्द है जो 'चि' और 'रांग' से मिल कर बना है. गारो भाषा में 'चि' का मतलब पानी है और 'रांग' का मतलब धन. एक सींग वाले गैंडों के लिए मशहूर मानस नेशनल पार्क इसी जिले में है.छोटे अपराधों में एक-तिहाई सजा काटने वाले कैदियों को मिलेगी जमानतअसम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बीते दिसंबर में कहा था कि असम में दोषी साबित करने की दर को बढ़ाकर 50 प्रतिशत से ज्यादा के राष्ट्रीय दर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. पहले यह पांच प्रतिशत था, जो अब बढ़ कर 23 फीसदी तक पहुंच गया है. उनका कहना था कि जल्दी ही यह आंकड़ा 30 फीसदी तक पहुंच जाएगा.अदालतों में लंबित मामलेनिचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में लंबित मामलों की सूची लगातार बढ़ रही है. नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 83 हजार के पार हो गई है. ई-कोर्ट सर्विसेज के आंकड़ों में बताया गया है कि देश की तमाम अदालतों में लंबित मामलों की तादाद पांच करोड़ के पार है. इनमें से करीब 62 हजार मामले तो तीस साल से भी ज्यादा पुराने हैं. कुल मामलों में से करीब 85 प्रतिशत निचली अदालतों के समक्ष हैं. कुल लंबित मामलों में से करीब आधे सरकार बनाम अन्य हैं.कलकत्ता हाईकोर्ट के एडवोकेट सुनील राय डीडब्ल्यू से कहते हैं, "सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जितने मामले लंबित हैं उनको निपटाने में कम से कम 20 महीने का समय लगेगा और वह भी उस स्थिति में जब इस दौरान एक भी नया मामला दायर नहीं हो. लेकिन यह स्थिति संभव नहीं है. इसी तरह उच्च न्यायालयों में लंबित तमाम मामलों को निपटाने में तीन साल और निचली अदालतों में लंबित मामलों को निपटाने में दो साल का समय लगेगा." बीते साल अगस्त में एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने आंकड़ों के हवाले कहा था कि देश की छह फीसदी आबादी मुकदमेबाजी से प्रभावित है. यह चिंताजनक स्थिति है.एडवोकेट राय बताते हैं कि देश की अदालतों में लंबित मामलों के कारण जीडीपी को करीब डेढ़ प्रतिशत का नुकसान होता है.भारत: 'बुलडोजर न्याय' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसलालेकिन आखिर लंबित मामलों की सूची लगातार लंबी क्यों हो रही है? कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने बीते साल लोकसभा में बताया था कि इसकी कई वजहें हैं. इनमें आधारभूत ढांचे और कर्मचारियों की उपलब्धता, मामलों की जटिलता, सबूतों की प्रकृति और संबंधित पक्षों का सहयोग शामिल है. इसके अलावा नियमों और प्रक्रियाओं को लागू करने की भी भूमिका महत्वपूर्ण है. उनका कहना था कि विभिन्न मामलों को निपटाने के लिए कोई समय सीमा नहीं होने और विभिन्न एजेंसियों में तालमेल की कमी की वजह से भी इसमें देरी होती है.
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने आज शुक्रवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के तीसरे चरण की पाबंदियां हटा दीं हैं। गौरतलब है कि ग्रैप-3 लागू होने पर निर्माण कार्य, तोड़फोड़ और गैर-जरूरी खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी जाती है। सीएक्यूएम ने बताया कि एक्यूआई में सुधार जारी है और गुरुवार को भी ग्रैप-4 की पाबंदियां पहले ही हटा दी गई थी।
शुक्रवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया जो ग्रैप-3 लागू होने के मानक 350 से नीचे है। आयोग ने बताया कि हवा की गति अगले कुछ दिनों तक तेज बनी रहेगी जिससे प्रदूषण और कम होने की संभावना है। हालांकि, ग्रैप-1 और ग्रैप-2 के तहत लागू पाबंदियां अभी जारी रहेंगी।ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) एक आपातकालीन योजना है, जिसे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किया जाता है। यह एक्यूआई के आधार पर अलग-अलग चरणों में प्रभावी होती है। प्रदूषण के स्तर के अनुसार, इसमें कई सख्त कदम उठाए जाते हैं, जैसे डीजल जनरेटर पर रोक, पार्किंग शुल्क बढ़ाना, सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना, निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील, धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर रोक और खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध जैसे कदम शामिल हैं।गौरतलब है कि ग्रैप पद्धति को 2016 में सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृति मिली थी और 2017 में इसे अधिसूचित किया गया। इसे लागू करने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की 13 एजेंसियां मिलकर काम करती हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है। -
नई दिल्ली। इस बार गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना अपनी स्वदेशी और आधुनिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन करेगी। परेड में नाग मिसाइल सिस्टम, टी-90 भीष्म टैंक, सारथ टैंक, ब्रह्मोस मोबाइल लॉन्चर, चेतक ऑल टेरेन व्हीकल, बजरंग लाइट स्पेशलिस्ट वाहन, अग्निबाण मल्टीबैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार और वाहन देखने को मिलेंगे।
इसके अलावा, सेना कपिध्वज स्पेशलिस्ट मोबिलिटी वाहन, नंदीघोष क्विक रिएक्शन फोर्स वाहन, शॉर्ट ब्रिज सिस्टम, संजय बैटल फील्ड सर्विलांस सिस्टम और आकाश आर्मी लॉन्चर का भी प्रदर्शन करेगी। परेड की तैयारियों के लिए सेना के जवान लंबे समय से अभ्यास कर रहे हैं।इस बार सिग्नल रेजिमेंट की महिला अधिकारी रितिका परेड का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि परेड के लिए उनका मार्चिंग दल सुबह 4 बजे से अभ्यास शुरू करता है। रितिका ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होना उनके लिए गर्व की बात है और यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।जम्मू और कश्मीर राइफल्स के मार्चिंग दल का नेतृत्व कर रहे मेजर विक्रमजीत सिंह इसे अपने और अपनी रेजिमेंट के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि परेड में हिस्सा लेना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरी रेजिमेंट और देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परेड देखकर युवा देश सेवा के लिए प्रेरित होंगे।‘ब्रिगेड ऑफ द गॉड्स’ के अधिकारी रवींद्र भारद्वाज ने बताया कि उनका दल बेस्ट मार्चिंग दस्ते का खिताब जीतने के लिए पूरी मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनके पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर है और उनकी टीम पिछले चार-पांच महीनों से परेड की तैयारी कर रही है। गणतंत्र दिवस परेड भारतीय सेना की ताकत और आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है, जो देशवासियों में गर्व और प्रेरणा का संचार करेगा। -
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को प्रधानमंत्री पुरस्कार (पीएम अवॉर्ड) से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान जल जीवन मिशन में सौर ऊर्जा के उत्कृष्ट उपयोग और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दिया जा रहा है। बता दें कि यह पुरस्कार अप्रैल में दिल्ली में प्रदान किया जाएगा।
जल जीवन मिशन के तहत, योगी सरकार ने ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को सुलझाने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया। इस परियोजना में सोलर पैनलों की स्थापना की गई जिससे न केवल ऊर्जा की बचत हुई बल्कि पानी की आपूर्ति भी निर्बाध रूप से सुनिश्चित हुई। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत 33,229 योजनाएं सौर ऊर्जा पर आधारित हैं। इनसे राज्य सरकार को लगभग एक लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही, हर साल 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। अगले 30 वर्षों में 390 लाख कार्बन क्रेडिट अर्जित किए जा सकेंगे। केंद्र सरकार ने इस पहल को बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में मान्यता दी है।इसके अलावा, बहराइच की जिलाधिकारी (डीएम) मोनिका रानी को भी प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने जिले में विकास और जनकल्याण योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया। जनभागीदारी और नवाचार के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्हें यह पुरस्कार जिले के समग्र विकास की श्रेणी में दिया जाएगा। -
नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा। वहीं सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने से होगी जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट सत्र दो चरणों में होगा। पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा जिसके बाद 14 फरवरी से 9 मार्च तक अंतराल रहेगा। दूसरा चरण 10 मार्च से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा।
बजट सत्र के दौरान संयुक्त संसदीय समिति वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पेश करेगी अपनी रिपोर्टसत्र के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे। इसके अलावा, वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यह समिति पहले ही शीतकालीन सत्र के दौरान अपनी अवधि बढ़ा चुकी थी।सत्र में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के क्रियान्वयन पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। यह रिपोर्ट सत्र के अंतिम सप्ताह में लोकसभा में पेश की जानी थी लेकिन समिति की अवधि बढ़ाने की मांग की जा रही है। समिति ने इस महीने अपनी पहली बैठक आयोजित की थी। शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा और विपक्ष के सदस्यों के बीच हुए विवाद और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन को लेकर दायर पुलिस शिकायतों के बाद बजट सत्र पर सबकी नजरें हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल शनिवार को स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति मालिकों को 65 लाख से ज्यादा संपत्ति कार्ड सौंपेगे। यह कार्ड 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांवों और 230 से ज्यादा जिलों में रहने वाले संपत्ति मालिकों को दिए जाएंगे। ये संपत्ति कार्ड आपसी झगड़ों को निपटाने में सहायक होंगे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आज शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पीएम मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, “स्वामित्व योजना के तहत देशभर के ग्रामीण इलाकों के मेरे भाई-बहनों को उनकी जमीन का मालिकाना हक मिले, इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में शनिवार को दोपहर करीब 12.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपत्ति मालिकों को लाखों संपत्ति कार्ड सौंपने का सौभाग्य मिलेगा।”उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में तैयार किया जाता है, जिससे लोगों को अपनी जमीन पर मालिकाना हक का अधिकार मिलता है। इस पहल का उद्देश्य भूमि विवादों को कम करना और भूमि के मालिकाना हक को स्पष्ट करना है, ताकि किसानों को आसानी से बैंक से लोन मिल सके। इस योजना में ड्रोन सर्वे, जीआईएस और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि जमीन के स्वामित्व को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जा सके और लोगों के आपसी झगड़ों को आसानी से खत्म किया जा सके।स्वामित्व योजना के जरिए भूमि के स्वामित्व का एक प्रमाण मिलता है जिससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी। भूमि का स्वामित्व स्पष्ट होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आती है और किसानों को लोन लेने में भी सुविधा होती है। यह योजना ग्रामीण भारत के लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद कर रही है। अब तक 3.17 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जो लक्षित गांवों का 92% है। 1.53 लाख गांवों के लिए 2.25 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। यह योजना पुदुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में पूरी तरह से लागू है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कई अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। -
वडनगर (गुजरात). केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि वडनगर में एक गरीब परिवार में जन्मे बच्चे से लेकर वैश्विक नेता बनने तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा दुनियाभर के छात्रों के लिए एक अध्ययन का विषय होगी। गुजरात के मेहसाणा जिले में मोदी के गृहनगर वडनगर में एक सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि एक भाषण में मोदी के पूरे जीवन का वर्णन करना असंभव है। उन्होंने कहा कि वडनगर में एक गरीब परिवार में जन्मे बच्चे से लेकर पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने वाले वैश्विक नेता बनने तक की मोदी की यात्रा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। राज्य के दौरे पर आए शाह मेहसाणा जिले के वडनगर में तीन प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इन परियोजनाओं में एक पुनर्विकसित स्कूल भी शामिल है, जहां मोदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी का पूरा जीवन, वडनगर में बिताये उनके बचपन से लेकर देश के प्रधानमंत्री और वैश्विक नेता बनने तक, आने वाले दिनों में भारत और दुनियाभर के कई विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का विषय बन जाएगा।'' उन्होंने कहा कि अपना बचपन अत्यंत गरीबी में बिताने वाले, एक चाय बेचने वाले पिता और एक गरीब मां के बेटे नरेन्द्र मोदी जी जब बड़े हुए तो उन्होंने कहीं पर भी कोई कटुता नहीं रखी। शाह ने कहा, ‘‘ मोदी जी ने इस प्रकार शासन किया है कि उनके जैसी गरीबी राज्य और देश के किसी और बच्चे को न सहन करनी पड़े।'' उन्होंने कहा कि गरीब परिवार में जन्म लेने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने कभी कोई नकारात्मकता नहीं रखी और अपनी गरीबी को जरूरतमंदों के प्रति करुणा में बदल दिया तथा लोगों के कल्याण के लिए अथक कार्य किए हैं। शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने करोड़ों गरीब लोगों को आवास, शौचालय, पानी, गैस और बिजली कनेक्शन, सस्ती कीमतों पर दवाइयां और मुफ्त राशन जैसी विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर उनके जीवन को बदल दिया। गृह मंत्री ने कहा कि बचपन में मोदी जी की स्वयं की शिक्षा में कई कठिनाइयां आईं और तब से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को खासा महत्व दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में ‘कन्या केलवणी यात्रा' नाम से बच्चों और बच्चियों को पढ़ाने का एक अभियान मोदी ने शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘‘उनके प्रयासों की बदौलत स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर, जो उनके मुख्यमंत्री बनने के समय 37 प्रतिशत थी, 2014 में घटकर सिर्फ एक प्रतिशत रह गई।''
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मुंबई. अमेरिका द्वारा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) सहित तीन भारतीय परमाणु संस्थाओं से शीतयुद्ध काल के प्रतिबंध हटाए जाने का स्वागत करते हुए विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इससे महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और देश को नयी प्रौद्योगिकियों तक पहुंच मिलेगी। हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के पूर्व सचिव अनिल काकोदकर ने कहा कि किसी को भी घटनाक्रम से बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि यह केवल समय ही बताएगा कि प्रतिबंध हटने से भारतीय परमाणु ऊर्जा क्षेत्र और अनुसंधान को कितना लाभ होगा। परमाणु क्षेत्र में अपने दशकों लंबे करियर के दौरान बार्क निदेशक, परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष और डीएई सचिव के रूप में कार्य कर चुके काकोदकर ने कहा कि प्रतिबंधों को हटाने का काम बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। जब 2008 में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, तब 81 वर्षीय वैज्ञानिक एईसी के अध्यक्ष और डीएई सचिव थे। काकोदकर ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘इससे (प्रतिबंध हटाने से) सहयोग (परमाणु क्षेत्र में) में मदद मिलेगा। अब सहयोगात्मक पहल शुरू होने और फिर इनके कायम रहने की बेहतर संभावनाएं हैं।'' बाइडन प्रशासन ने बुधवार को तीन भारतीय संस्थाओं- बार्क, इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल) और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) से प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। यह निर्णय 20 जनवरी को होने वाले अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथग्रहण से कुछ दिन पहले आया है। बार्क और आईजीसएआर परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख अनुसंधान संस्थान हैं, जबकि आईआरईएल इसके अंतर्गत एक सार्वजनिक उपक्रम है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (बीआईएस) ने कहा कि इन भारतीय संस्थाओं पर शीतयुद्ध के दौरान लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने से साझा ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं और लक्ष्यों की दिशा में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग सहित उन्नत ऊर्जा सहयोग में बाधाओं को कम करके अमेरिकी विदेश नीति के उद्देश्यों को समर्थन मिलेगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब चीन दुर्लभ पृथ्वी तत्व के क्षेत्र में अपना विस्तार कर रहा है। यह ऐसे समय भी आया है जब भारत छोटे परमाणु रिएक्टर विकसित करने पर विचार कर रहा है। परमाणु ईंधन परिसर (एनएफसी) के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी एन साईबाबा ने अमेरिका के फैसले का स्वागत किया और कहा कि प्रतिबंध हटने से भारत को महत्वपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी। साईबाबा ने कहा, ‘‘प्रतिबंध हटने से भारत को नयी प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी। अब जब दो बहुत महत्वपूर्ण संस्थाओं-बार्क और आईजीसीएआर को प्रतिबंध सूची से हटा दिया गया है, तो यह लगभग पूरे डीएई के लिए अच्छा है।'' उन्होंने कहा कि आईआरईएल पर प्रतिबंध हटाए जाने से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा, जिनकी न केवल रक्षा, परमाणु और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में, बल्कि दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उपकरणों के निर्माण में भी आवश्यकता होती है। कैनबरा स्थित ‘ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टिट्यूट' की रेजिडेंट सीनियर फेलो राजेश्वरी पिल्लै राजगोपालन ने कहा कि अमेरिका का निर्णय सकारात्मक है और भारत तथा अमेरिका के बीच बदले हुए एवं अधिक रणनीतिक रूप से उन्मुख संबंधों को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुक्रवार को अपने संकल्प पत्र का पहला भाग जारी किया। इसमें महिलाओं को प्रति माह ढाई हजार रुपए देने का वादा किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी का प्रदेशों में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक ट्रैक रिकॉर्ड रहा हैभारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पार्टी प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को संकल्प पत्र से जुड़ी घोषणाएं करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी का प्रदेशों में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। इसी रिकॉर्ड को जारी रखते हुए हम दिल्ली की महिलाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये देने का संकल्प करते हैं।गरीब परिवारों को प्रत्येक सिलेंडर पर 500 रुपये की छूटइसके अलावा दिल्ली में गरीब परिवारों को प्रत्येक सिलेंडर पर 500 रुपये की छूट देगी। होली और दिवाली त्योहारों पर प्रत्येक परिवार को एक रसोई सिलेंडर फ्री दिया जाएगा। राजधानी की झोंपड़बस्तियों में अटल कैंटीन खुलेगी, जिसमें पांच रुपये में भरपेट भोजन मिलेगा।आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख का बीमा और राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये और दिए जायेंगेउन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में इसे मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख का बीमा और राज्य सरकार की ओर से इसमें 5 लाख रुपये और दिए जाएंगे। -
अहमदाबाद. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन और अहमदाबाद हवाई अड्डों पर ‘फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन-ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम' (एफटीआई-टीटीपी) का उद्घाटन किया। आधिकारिक बयान में कहा गया कि एफटीआई-टीटीपी यात्रियों को विश्वस्तरीय आव्रजन सुविधाएं प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बयान के अनुसार, “शाह ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसका शुभारंभ किया। पिछले साल जून में इसे शुरू करने के बाद से यह पहल वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चल रही है। अब इसे अहमदाबाद सहित सात अन्य हवाई अड्डों पर शुरू किया जा रहा है। कुल मिलाकर, सरकार पहले चरण में 21 प्रमुख हवाई अड्डों पर इस कार्यक्रम को शुरू करने की योजना बना रही है।” बयान में कहा गया, “शुरुआत में यह सुविधा भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के विदेशों में रहने वाले लोगों यानी ओसीआई कार्डधारकों के लिए निःशुल्क शुरू की गई है। एफटीआई-टीटीपी को एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वित किया गया है।” इसमें कहा गया है कि पंजीकृत आवेदकों का बायोमेट्रिक डेटा या तो विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) में या हवाई अड्डे से गुजरते समय लिया जाएगा।
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प्रयागराज। प्रयागराज अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने शुक्रवार को 28 फरवरी तक पूरे जिले में निषेधाज्ञा आदेश पारित किया गया है। घोषणा में कहा गया है कि आने वाले दिनों में विभिन्न धर्मों/संप्रदायों के त्योहार जैसे महाकुंभ 2025/अमृत स्नान, जननायक कर्पूरी ठाकुर जन्म दिवस, गणतंत्र दिवस, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, संत रविदास जयंती, माघी पूर्णिमा, वेलेंटाइन डे, शब- ई-बारात, महाशिवरात्रि, अन्य त्योहार और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। एसीपी ने कहा कि जिले में उक्त त्यौहारों के दृष्टिगत शांति व्यवस्था बनाये रखने की नितांत आवश्यकता है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है, “विभिन्न धर्मों/संप्रदायों के त्यौहारों तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए जनहित में असामाजिक तत्वों के सभी प्रयासों को रोकना आवश्यक है।” अतः स्थिति की नजाकत को देखते हुए दूसरे पक्ष/पक्षों को सुने अथवा नोटिस दिए बिना पारित एकतरफा आदेश के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत किया गया है।एसीपी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, मुझे विश्वास है कि असामाजिक तत्वों द्वारा कानून में व्यवधान पैदा करने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जिले की सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए एवं जिले में उक्त त्यौहारों के दृष्टिगत शांति व्यवस्था बनाये रखने की नितांत आवश्यकता है।गौरतलब हो, सम्पूर्ण कमिश्नरेट प्रयागराज में निषेधाज्ञा 16 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रभावी रहेगी।आदेश की विशिष्टताएं इस प्रकार हैं-1. कोई भी व्यक्ति सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का आयोजन, जुलूस, शोभायात्रा, अनशन, धरना, प्रदर्शन आदि आयोजित नहीं करेगा, न ही सड़क अवरुद्ध करेगा और न ही किसी को ऐसा करने के लिए उकसाएगा, न ही बिना पूर्व अनुमति के किसी आयोजन में एकत्रित होने के लिए कोई प्रचार-प्रसार करेगा और न ही ऐसे किसी कार्यक्रम में भाग लेगा।2. कोई भी व्यक्ति/संगठन/व्यक्तियों का समूह जिले में पुलिस चौकी धरना स्थल, सिविल लाइन्स थाना स्थित निर्धारित धरना स्थल (पत्थर चर्च के पास) के अलावा कहीं भी धरना-प्रदर्शन नहीं करेगा।3. कोई भी व्यक्ति इस आदेश की अवधि में पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज के सम्पूर्ण क्षेत्रान्तर्गत परम्परागत धार्मिक आयोजनों के अवसर पर सक्षम अधिकारी की पूर्वानुमति के बिना कहीं भी ड्रोन का प्रयोग नहीं करेगा। केवल पुलिस एवं प्रशासनिक कार्यों में प्रयुक्त ड्रोन ही इस प्रतिबन्ध से मुक्त रहेंगे।4. प्रयागराज कमिश्नरेट सीमान्तर्गत कोई भी व्यक्ति लाठी, डंडा (विकलांग/बुजुर्ग तथा सिख समुदाय के कृपाण धारण करने वालों को छोड़कर), कुल्हाड़ी, डंडा एवं किसी भी प्रकार का घातक हथियार या आग्नेयास्त्र लेकर नहीं चलेगा। केवल पुलिस एवं प्रशासनिक कर्मचारी एवं अधिकारी ही इस प्रतिबन्ध से मुक्त रहेंगे। जनपद के समस्त सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों/परिसरों में कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का हथियार या लाइसेंसी आग्नेयास्त्र लेकर प्रवेश नहीं करेगा।5. कोई भी व्यक्ति किसी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कोई भड़काऊ भाषण नहीं देगा और न ही कोई विज्ञापन/पर्चा प्रकाशित करेगा जिससे किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे।6. कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से ऐसी अफवाह नहीं फैलाएगा जिससे शांति भंग हो या किसी अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे तथा न ही वह स्वयं कोई भ्रामक, भड़काऊ या संवेदनशील पोस्ट, लेख, फोटो आदि पोस्ट करेगा, न ही उसे फॉरवर्ड करेगा और न ही किसी के द्वारा ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाएगा।7. कोई भी व्यक्ति ऐसे ऑडियो/वीडियो कैसेट और सीडी नहीं बेचेगा, चलाएगा या प्रदर्शित नहीं करेगा जिससे आम जनता में भ्रम या तनाव पैदा हो। 8. कोई भी व्यक्ति किसी भी निजी या सरकारी संपत्ति को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाएगा।9. कोई भी व्यक्ति औद्योगिक/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों आदि को जबरन बंद नहीं कराएगा। वह सरकारी कार्यालयों, कारखानों और मिलों आदि के सामान्य कामकाज में कोई व्यवधान नहीं डालेगा और न ही आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही या वितरण में कोई बाधा उत्पन्न करेगा और न ही किसी को ऐसा करने के लिए उकसाएगा।10. कोई भी व्यक्ति यू.पी.आर.एस.पी.एन. की बसों व अन्य वाहनों को सार्वजनिक मार्ग पर चलने से नहीं रोकेगा और न ही किसी प्रकार के वाहनों को नुकसान पहुंचाएगा।11. कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक मार्ग में बाधा नहीं डालेगा और न ही यातायात में कोई बाधा उत्पन्न करेगा। ऐसा करने के लिए वह किसी को उकसाएगा भी नहीं।आपको बता दें कि 13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ 26 फरवरी तक चलेगा। अगले प्रमुख स्नान तिथियों में 29 जनवरी (मौनी अमावस्या- दूसरा अमृत स्नान), 3 फरवरी (बसंत पंचमी- तीसरा अमृत स्नान), 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा) और 26 फरवरी (मंगलवार) शामिल हैं।















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