- Home
- देश
-
नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 राज्यसभा में पारित हो गया है। इससे पहले ही गुरुवार को इस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल गई थी। ऊपरी सदन में गुरुवार को पेश होने के बाद 11 घंटे चली चर्चा के उपरांत शुक्रवार तड़के विधेयक पारित हुआ। इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े।
विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना हैइस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है। विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा की बैठक (शुक्रवार) रात 2:30 बजे के बाद तक चली। विपक्ष के सभी संशोधन गिर गए। तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुचि शिवा के एक संशोधन पर मत विभाजन हुआ, हालांकि यह संशोधन भी गिर गया।मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा हैअल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि सरकार अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा।प्रधानमंत्री मोदी ने जो फैसला लिया है, वह अल्पसंख्यक समाज के हित मेंविपक्षी सांसदों से मुसलमानों को गुमराह न करने की अपील करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है, वह बहुत सोच-समझकर किया है। वे (विपक्षी सदस्य) बार-बार कह रहे हैं कि हम मुसलमानों को डरा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम नहीं, बल्कि आप मुसलमानों को डराने का काम कर रहे हैं। जिन लोगों ने कहा था कि सीएए पारित होने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आप इस बिल को लेकर मुसलमानों को गुमराह नहीं कीजिए।”वक्फ बिल के मूल ड्राफ्ट और मौजूदा ड्राफ्ट में कई बदलाव नहींमंत्री ने कहा कि जब यह बिल ड्राफ्ट हुआ तो उसमें सभी के सुझाव को ध्यान में रखा गया। वक्फ बिल के मूल ड्राफ्ट और मौजूदा ड्राफ्ट को देखें तो उसमें हमने कई बदलाव किए हैं। ये बदलाव सबके सुझाव से ही हुए हैं। जेपीसी में ज्यादातर लोगों के सुझाव स्वीकार हुए हैं। सारे सुझाव स्वीकार नहीं हो सकते। जेपीसी में शामिल दलों के सांसदों ने आरोप लगाया कि उनके सुझाव को नहीं सुना गया। लेकिन ऐसी स्थिति में हमने बहुमत से फैसला किया। लोकतंत्र में ऐसा ही होता है।वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में तीन से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगेमंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में तीन से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगे, इसका प्रावधान किया गया है, ताकि मुसलमानों के हितों के साथ समझौता न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीसी में विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया गया है।उन्होंने कहा कि हर जिले में जो भी जमीनी विवाद होता है, उसे कलेक्टर देखता है। आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, इसलिए हमने उससे ऊपर के अफसर को रखा है। वे बार-बार बोलते हैं कि मुसलमानों के बारे में भाजपा क्यों चिंता करती है। लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, तो क्या उन्हें मुसलमानों की चिंता नहीं करनी चाहिए?वक्फ संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा हैउन्होंने कहा, “हमने बार-बार कहा कि वक्फ संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। विपक्ष ने बहुत से मंदिरों की बात की है। वहां की काउंसिल में गैर-धार्मिक व्यक्ति सदस्य नहीं होता है। वक्फ बोर्ड का कोई विवाद हिंदू-मुस्लिम के बीच होगा, तो उसे कैसे निपटाया जाएगा?”विपक्ष के नेताओं ने बिल को संविधान के खिलाफ बतायारिजिजू ने कहा, “आप कहते हैं कि मुसलमानों में बहुत गरीबी है और गरीबों के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। आजादी के बाद कांग्रेस दशकों तक सरकार में थी। तो ऐसे में कांग्रेस ने इसके लिए काम क्यों नहीं किया? अब हमें गरीबों के बारे में सोचना पड़ रहा है। हमने बार-बार कहा है कि वक्फ की संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। अगर हिंदू और मुसलमान के बीच वक्फ की जमीन को लेकर विवाद होता है, तो उसका निर्णय कैसे होगा?” इससे पहले, चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसके फायदे गिनाए और विपक्ष पर देश के मुसलमानों को गुमराह करने के आरोप लगाए। दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताया।आज 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैंकिरेन रिजिजू ने बिल पेश करते हुए बताया था कि वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में छोटे-बड़े एक करोड़ सुझाव मिले हैं। संयुक्त संसदीय समिति ने 10 शहरों में जाकर विधेयक को लेकर लोगों की राय जानी और 284 संगठनों से बातचीत की गई। आज 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं।वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना हैकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है। वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है।मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ विधेयक को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा हैनेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है। इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है। यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। लोकसभा में देर रात यह विधेयक पारित हुआ तो इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि विभिन्न दलों के विरोध के बाद भी मनमानी से यह विधेयक लाया गया।अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन में कमीभाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण की काफी बात कर रही है। सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं। लेकिन सच्चाई सरकार के पांच साल के अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन से साफ है। वित्त वर्ष 2019-20 में इस विभाग का बजट आवंटन 4,700 करोड़ रुपये था जो घटकर 2023-24 में 2,608 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 2022-23 में बजट आवंटन 2,612 करोड़ रुपये था, जिसमें से 1,775 करोड़ रुपये का खर्च मंत्रालय नहीं कर पाया। कुल मिलाकर पांच साल में बजट मिला 18,274 करोड़ रुपये, जिसमें से 3,574 करोड़ खर्च नहीं हो पाए। -
नई दिल्ली। नई दिल्ली में गुरुवार को तीन दिवसीय ‘स्टार्टअप महाकुंभ 2025’ का भव्य आगाज हुआ। यह आयोजन भारत मंडपम में हो रहा है और इसे देश के सबसे बड़े स्टार्टअप इवेंट के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के 3,000 से ज्यादा स्टार्टअप अपनी नई तकनीक, उत्पाद और सेवाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा, 1,000 से अधिक निवेशक और इनक्यूबेटर भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं, जिससे स्टार्टअप्स को फंडिंग और नेटवर्किंग का बड़ा मौका मिल रहा है।
इस महाकुंभ में एआई, डीप टेक, साइबर सिक्योरिटी, हेल्थ टेक, बायोटेक, एग्री टेक, एनर्जी और क्लाइमेट टेक, डी2सी, फिनटेक, गेमिंग, डिफेंस, स्पेस टेक और मोबिलिटी जैसे 10 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को निवेश, वैश्विक कनेक्शन और नए अवसरों तक पहुंच दिलाना है।कार्यक्रम के उद्घाटन में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, “भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे पास टैलेंट, स्किल और एक मजबूत सरकार है, जो स्टार्टअप्स के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है।”वहीं उत्तर प्रदेश के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा, “प्रयागराज का महाकुंभ दुनिया के लिए ऐतिहासिक रहा है, और अब स्टार्टअप महाकुंभ भारत के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। यह इवेंट देश की नई प्रतिभाओं को आगे लाने में मदद करेगा और भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्टार्टअप हब बनाएगा।” - -मणिपुर हिंसा में जिनकी मृत्यु हुई है, इस सदन का उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द है-मणिपुर उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों के बीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण शुरू हुई जातीय हिंसा-विगत 4 महीनों से मणिपुर में शांति है, हिंसा नहीं हुई-सरकार राहत शिविरों में खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि सभी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है-टेक्निकल एजुकेशन, मेडिकल एजुकेशन की वहाँ पर ऑनलाइन व्यवस्था की जा चुकी है-प्राइमरी एजुकेशन के लिए कैंपों के अंदर ही छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है-गृह मंत्री ने कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए-मणिपुर में हिंसा का पुराना इतिहास मगर विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे मणिपुर में ये पहली हिंसा हो-पिछली सरकार के शासन में मणिपुर में 1993 के बाद हुईं तीन बड़ी जातीय हिंसाएं 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं, इन हिंसाओं के बाद तत्कालीन सरकार से गृह मंत्री समेत वहां कोई नहीं गया-पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा-उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, हमारे शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई-जिस दिन हाई कोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायु सेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं-गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित करने का हर हरसंभव प्रयास कर रही है-मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं,-गृह मंत्रालय द्वारा जल्द ही एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी-सरकार मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल करने, पुनर्वास और जख्मों पर मरहम लगाने का काम कर रही हैनई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोक सभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव रखा। बाद में सदन ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों के बीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण जातीय हिंसा शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि न तो यह दंगे हैं और न ही आतंकवाद है, बल्कि हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या के कारण दो समुदायों के बीच जातीय हिंसा है। श्री शाह ने कहा कि दिसंबर 2024 से लेकर अबतक पिछले 4 महीनों से मणिपुर में हिंसा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिविरों में पहले से ही खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि को सुनिश्चित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और मेडिकल शिक्षा की ऑनलाइन व्यवस्था हो चुकी है और प्राइमरी एजुकेशन के लिए कैंपों के अंदर ही छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है।श्री अमित शाह ने कहा कि कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा इस प्रकार की तस्वीर पेश करने का प्रयास किया गया कि हमारे शासन में ही जातीय हिंसा हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि मणिपुर में 1993 में जातीय हिंसा हुई, 1993 से 1998 तक नागा-कुकी संघर्ष हुआ, जिसमें 750 मौतें हुईं और छिटपुट घटनाएं एक दशक तक चलती रहीं। श्री शाह ने कहा कि हम मानते हे कि हमारे समय में ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला आया, जिसके कारण हिंसा हुई और उसे तत्काल नियंत्रण में लाया गया। उन्होंने कहा कि हिंसा में जो 260 मौतें हुई हैं उनमें से 80 प्रतिशत पहले एक महीने के अंदर हुईं जबकि बाकी मौतें बाद के महीनों में हुईं। उन्होंने कहा कि 1997-98 में कुकी-पाइते संघर्ष हुआ, जिसमें 50 से अधिक गांव नष्ट हुए, 40 हज़ार लोग विस्थापित हुए, 352 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 5 हज़ार घर जलाए गए। उन्होंने कहा कि 1993 में 6 माह तक चले मैतेई-पंगल संघर्ष में 100 से अधिक मृत्यु हुईं थीं।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे मणिपुर में ये पहली हिंसा हो और हमारा शासन विफल हो गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के शासन में 1993 के बाद मणिपुर में हुईं तीन बड़ी जातीय हिंसाएं हुई जो 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं और इनमें सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि इन हिंसाओं के बाद तत्कालीन सरकार से गृह मंत्री समेत वहां कोई नहीं गया।श्री अमित शाह ने कहा कि 2017 में हमारी सरकार आई और उससे पहले पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 1 हज़ार से अधिक एनकाउंटर हुए, जिनका संज्ञान सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, हमारे 6 साल के शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई। श्री शाह ने कहा कि एक विशिष्ट परिस्थिति में जब हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या को दोनों समुदायों ने अपने खिलाफ समझा तो दो ही दिन में हिंसा भड़क गई।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह भी आरोप लगाया कि मणिपुर की हिंसा को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने सदन को बताया कि जिस दिन हाई कोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायु सेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं। श्री शाह ने कहा कि इस विषय पर हम सबकी संवेदनाएं बराबर हैं। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित के लिए हरसंभव उच्चतम प्रयास कर रही है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा में जिनकी भी मृत्यु हुई है, इस सदन को उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द रखना चाहिए।श्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन आने के बाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं और जल्द ही गृह मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हिंसा का रास्ता ढूंढने का प्रयास कर रही है लेकिन पहली प्राथमिकता शांति स्थापित करने की है। श्री शाह ने कहा कि 4 माह से मणिपुर में एक भी मौत नहीं हुई है, सिर्फ 2 लोग घायल हुए हैं और कुल मिलकर परिस्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि स्थिति संतोषजनक तब तक नहीं होगी जब तक विस्थापित लोग शिविरों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के लिए एक पुनर्वास पैकेज पर भी चर्चा चल रही है ।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और फिर राज्यपाल ने भाजपा के 37, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, जद (यू) के 1 और कांग्रेस के 5 सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब अधिकतर सदस्यों ने कहा कि हम सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं, तब कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की, जिसे राष्ट्रपति महोदया ने स्वीकार किया। श्री शाह ने कहा कि सरकार चाहती है कि मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल हो, पुनर्वास हो और जख्मों पर मरहम भी लगाया जाए। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन करने का अनुरोध किया।
-
नई दिल्ली। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका की शुल्क बढ़ोतरी और देश पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने यहां पीएफआरडीए द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि (अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप के लिए यह अमेरिका को पहले रखने जैसा है.. लेकिन (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी भारत को पहले रखते हैं…‘‘हम अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं।’’
भारत पर इसके प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका आकलन जारी है। अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। इस कदम से अमेरिका को भारत के निर्यात पर असर पड़ने के आसार हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, जिन्हें हमसे अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। -
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु माता के कात्यायनी स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना भी कर रहे हैं। इस दौरान मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से नारियल चढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, जो हर साल नवरात्रि के दौरान लागू किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि के चलते मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर के मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा नारियल एकत्र कर लिया जाता है और किसी को भी मंदिर के अंदर नारियल ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती। माता के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को निकासी द्वार के बाहर नारियल प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह व्यवस्था न केवल सुरक्षा को सुनिश्चित करती है, बल्कि मंदिर में दर्शन की प्रक्रिया को भी सुचारू बनाए रखती है।मंदिर के पुजारी तरुणेश शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के दौरान हर साल नारियल और कड़ा प्रसाद चढ़ाने पर रोक लगाई जाती है। उन्होंने कहा, “यह निर्णय कानून-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को निर्बाध रूप से दर्शन का लाभ प्रदान करने के लिए लिया जाता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसका कड़ाई से पालन किया जाता है।”वहीं, एक श्रद्धालु ने बताया, “हर बार की तरह इस बार भी नवरात्रि के दौरान नारियल गेट पर ही जमा कर लिए गए। मंदिर प्रशासन इस नियम का सख्ती से पालन करता है, और हमें दर्शन के बाद प्रसाद मिल जाता है। यह व्यवस्था हमारे लिए भी सुविधाजनक है और इससे मंदिर में भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलती है।”श्री नैना देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। -
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को आज गुरुवार को राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया। विधेयक पेश करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक को हितधारकों के साथ-साथ संयुक्त संसदीय समिति के साथ विस्तृत परामर्श के बाद लाया गया है।
विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने का किया आग्रहउन्होंने विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया। किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वक्फ का लाभ सिर्फ मुस्लिमों को ही मिल सकता है और यह सही नहीं है कि कोई गैर-मुस्लिम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करे।लोकसभा ने कल रात वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दियाउन्होंने इस बात पर बल दिया कि विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है, न कि मुसलमानों के धार्मिक व्यवहार में हस्तक्षेप करना। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वक्फ बोर्ड में मुस्लिमों के सभी विभिन्न संप्रदायों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा ताकि इसे समावेशी बनाया जा सके। लोकसभा ने कल रात वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दिया है।क्या है इस विधेयक का उद्देश्य ?इस विधेयक का उद्देश्य विरासत स्थलों की सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रावधानों के साथ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है।इस कानून का उद्देश्य संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाकर, वक्फ बोर्डों और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करना और हितधारकों के अधिकारों की रक्षा कर शासन में सुधार करना है। यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं, विशेष रूप से विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करेगा। विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड को अधिक समावेशी बनाना है, जिसमें बेहतर वक्फ शासन और निर्णय लेने के लिए विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों का प्रतिनिधित्व हो। - बैंकॉक । ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण ‘रामकियेन’ को देखा। ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।पीएम मोदी ने थाई रामायण की आकर्षक तस्वीरों को सोशल मीडिया पर किया पोस्टपीएम मोदी ने एक पोस्ट में लिखा, ‘एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।’ उन्होंने लिखा, “रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।”इससे पहले आज दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत ‘मोदी मोदी’ और ‘वंदे मातरम’ के जोशीले नारों से किया। थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सूर्या जुंगरुंगरेंगकिट ने कई शीर्ष अधिकारियों के साथ हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।होटल पहुंचने पर उनका स्वागत गुजरात के पारंपरिक गरबा नृत्य के साथ किया गया। पारंपरिक परिधान पहने हुए भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में उनके स्वागत के लिए एकत्र हुए। सिख, गढ़वाली और गुजराती समुदाय के लोग प्रमुख रूप से मौजूद थे।छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं पीएम मोदीप्रधानमंत्री मोदी छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं। वह 4 अप्रैल को क्षेत्रीय नेताओं के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे पीएम मोदीपीएम मोदी भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। बैंकॉक में आगमन के बाद, प्रधानमंत्री का भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है, जिसमें वह भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को रेखांकित करेंगे।इससे पहले, अपने प्रस्थान वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा के निमंत्रण पर, मैं आज थाईलैंड की आधिकारिक यात्रा और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो रहा हूं।”उन्होंने कहा, “पिछले दशक में, बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास, संपर्क, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के केंद्र में है।”प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह किया व्यक्तप्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बिम्सटेक देशों के नेताओं से मिलने और हमारे सहयोग को और मजबूत करने के लिए रचनात्मक रूप से बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं।”बिम्सटेक एक क्षेत्रीय समूह है जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात सदस्य देश शामिल हैं। दक्षिण एशिया से पांच (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका) और दक्षिण पूर्व एशिया से दो (म्यांमार और थाईलैंड)। यह समूह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में कार्य करता है। भारत इसका सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सदस्य है, जो इसके एजेंडे को आकार देता है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
-
मुजफ्फरनगर . मुजफ्फरनगर जिले में बरला-बसेड़ा मार्ग पर एक तेज रफ्तार कार के ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी जिससे एक परिवार के दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि घटना मंगलवार रात की है जिसमें मेरठ जिले की निवासी खुशनुमा (35), सानिया (15), तैयबा (3) और मिरहा (2) की मौत हो गई। ये सभी कार में सवार थे। उसने बताया कि तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब जुनेद के परिवार के सदस्य ईद के मौके पर रिश्तेदारों से मिलने के लिए कमालपुर (मेरठ) से सहारनपुर के गोपाली गांव जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
-
बुलढाणा (महाराष्ट्र) .महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में बुधवार सुबह एक बस और स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की टक्कर में पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि खामगाव-शेगाव राजमार्ग पर महाराष्ट्र राजकीय परिवहन निगम की एक बस, एक एसयूवी से टकरा गई। उन्होंने बताया कि इसके तुरंत बाद एक निजी बस ने दोनों वाहनों को टक्कर मार दी। अधिकारी ने बताया कि निजी बस का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है और उसमें फंसे चालक को निकालने के प्रयास जारी हैं।
-
बैंकॉक. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को दो दिवसीय यात्रा पर थाईलैंड पहुंचेंगे। इस दौरान वह थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ वार्ता करेंगे और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मोदी का थाईलैंड में भारतीय समुदाय द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। वह ‘गवर्नमेंट हाउस' में शिनावात्रा से मिलेंगे, जहां उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। बृहस्पतिवार की शाम को प्रधानमंत्री मोदी समुद्री सहयोग पर समझौते के लिए बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) नेताओं के साथ शामिल होंगे। इस सम्मेलन में थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमा और भूटान के नेता शिरकत करेंगे। बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी की भेंट नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस सहित अन्य नेताओं से होगी। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि म्यांमा के सैन्य जुंटा नेता मिन आंग ह्लाइंग शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे या नहीं। म्यांमा में पिछले सप्ताह आए भीषण भूकंप से देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और अन्य हिस्सों में भीषण तबाही हुई। यह 2018 में नेपाल के काठमांडू में चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के बाद बिम्सटेक नेताओं की प्रत्यक्ष रूप से पहली बैठक होगी। पिछला शिखर सम्मेलन मार्च 2022 में कोलंबो में वीडियो कॉन्फ्रेंस प्रारूप में आयोजित किया गया था। मोदी शुक्रवार को थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न (जिन्हें रामा दसवें के नाम से भी जाना जाता है) और रानी सुथिदा से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और थाईलैंड की प्रधानमंत्री शिनावात्रा वाट फो का दौरा करेंगे जो थाईलैंड के शीर्ष छह मंदिरों में से एक है। यह जगह लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के अलावा, यह मंदिर अपने चारों ओर मौजूद बुद्ध की असंख्य प्रतिमाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यह थाईलैंड में सार्वजनिक शिक्षा के लिए पहला केंद्र था, जहां विज्ञान, धर्म और साहित्य के पाठ्यक्रम उपलब्ध थे। प्रधानमंत्री शुक्रवार सुबह बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां समूह द्वारा ‘बैंकॉक विजन 2030' को स्वीकार किए जाने की संभावना है।
-
नई दिल्ली। सरकार ने पूनम गुप्ता को भारतीय रिजर्व बैंक का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। वह माइकल देवव्रत पात्रा की जगह लेंगी, जिन्होंने इस साल जनवरी में पद छोड़ा था। ये फैसला इस महीने की 7 से 9 तारीख तक होने वाली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले लिया गया है।
एक आधिकारिक नोट के अनुसार, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने सुश्री गुप्ता की नियुक्ति को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि या अगले आदेश तक के लिए मंजूरी दे दी है।वर्तमान में, सुश्री गुप्ता नई दिल्ली स्थित नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। सुश्री गुप्ता ने अमरीका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी की है। -
नई दिल्ली। म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। इस संकट की घड़ी में भारतीय राहत दल की त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वहीं भारतीय नौसेना और वायुसेना भी राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मदद के लिए म्यांमार के स्थानीय लोगों ने भारत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है, और भारतीय नेतृत्व के लिए आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं।
एनडीआरएफ टीम की सदस्य कविता सिंह ने बताया कि गर्मी और समय बीतने के कारण जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना कम हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं और जोखिमों के बावजूद एनडीआरएफ टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ राहत अभियान चला रही है।एक अन्य एनडीआरएफ सदस्य ने बताया कि 57 कर्मियों की टीम म्यांमार में बचाव कार्य में लगी हुई है और उन्हें 13 स्थानों पर काम सौंपा गया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार को 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। एनडीआरएफ की 80 सदस्यीय शहरी खोज और बचाव (USAR) टीम को भारतीय वायुसेना (IAF) के C-130 हर्क्यूलिस विमान से दो दौर में भेजा गया।इसके अलावा भारत ने चिकित्सा सहायता भी प्रदान की है। भारतीय सर्जनों ने म्यांमार में दो जीवनरक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। राहत कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मांडले डिवीजन के लेफ्टिनेंट जनरल म्यो मो आंग ने भारत के प्रयासों की सराहना की।भारतीय नौसेना के आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सवित्री ने 40 टन राहत सामग्री लेकर 29 मार्च को यांगून के लिए प्रस्थान किया, जिसे 1 अप्रैल को सौंपा गया। इसके बाद आईएनएस करमुक और एलसीयू 52 ने 30 टन अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई गई।वहीं विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत जरूरत के अनुसार और सहायता भेजने के लिए तैयार है। ऑपरेशन ब्रह्मा भारत की “पहला मददगार” की भूमिका को दर्शाता है, जिससे यह साबित होता है कि भारत अपने पड़ोस में प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। -
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025 में एनएचएआई ने कुल 5,614 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया, जो तय लक्ष्य 5,150 किलोमीटर से भी अधिक है।
इसके अलावा, एनएचएआई ने एक वित्त वर्ष में अब तक का सबसे अधिक पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) किया। वित्त वर्ष 2024-25 में सड़क निर्माण और विकास पर कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो पिछले साल के 2.07 लाख करोड़ रुपये से 21% ज्यादा है। यह व्यय सरकार की बजटीय सहायता और एनएचएआई के अपने संसाधनों से किया गया।एनएचएआई ने धन जुटाने के लिए तीन मुख्य तरीकों – टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) और टोल सिक्योरिटाइजेशन का इस्तेमाल किया। इन माध्यमों से प्राधिकरण ने 2024-25 में कुल 28,724 करोड़ रुपये जुटाए। खास बात यह रही कि आईएनवीआईटी के एक राउंड में अब तक की सबसे बड़ी 17,738 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई।सड़क नेटवर्क की मजबूती से आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावाएनएचएआई के अनुसार, इन राजमार्ग परियोजनाओं से देश के सड़क नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स न केवल यात्रा को आसान बनाएंगे, बल्कि लॉजिस्टिक्स और व्यापार को भी गति देंगे।इसके अलावा, एनएचएआई की सहयोगी संस्था नेशनल हाईवे इंफ्रा ट्रस्ट (एनएचआईटी) ने भी बड़ी सफलता हासिल की है। मार्च 2025 में एनएचआईटी ने 18,380 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी मोनेटाइजेशन डील पूरी की, जिससे अब तक चार चरणों में जुटाई गई कुल राशि 46,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, ऑनलाइन, ज्ञापन, अनुरोध और सुझाव के रूप में कुल 97,27,772 याचिकाएं प्राप्त हुई हैं। 284 डेलिगेशन ने कमेटी के सामने अपनी बात रखी और सुझाव दिए। सरकार ने उन सभी पर ध्यानपूर्वक विचार किया है, चाहे वे जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) के माध्यम से हों या सीधे दिए गए ज्ञापन।
इतिहास में पहले कभी किसी विधेयक को इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं मिलीउन्होंने आगे कहा, इतिहास में पहले कभी किसी विधेयक को इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं नहीं मिली हैं। कई लीगल एक्सपर्ट, कम्युनिटी लीडर्स, धार्मिक लीडर्स और अन्य लोगों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे। पिछली बार जब हमने बिल पेश किया था, तब भी कई बातें बताई थी। मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो इसका विरोध कर रहे थे, उनके हृदय में बदलाव होगा और वे बिल का समर्थन करेंगे। मैं मन की बात कहना चाहता हूं, किसी की बात को कोई बदगुमां न समझे कि जमीं का दर्द कभी आसमां न समझे।किरेन रिजिजू ने कहा, “साल 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड को ऐसा अधिकार दिया कि वक्फ बोर्ड के आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती तो संसद इमारत, एयरपोर्ट समेत पता नहीं कितनी इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता। साल 2013 में मुझे इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि इसे कैसे जबरन पारित किया गया।2013 में वक्फ अधिनियम में प्रावधान जोड़े जाने के बाद, दिल्ली में 1977 से एक मामला चल रहा था, जिसमें सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन सहित कई संपत्तियां शामिल थीं। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने सारी जमीन को डीनोटिफाई करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया। अगर हमने आज यह संशोधन पेश नहीं किया होता, तो हम जिस संसद भवन में बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था।1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया थाउन्होंने कहा, “किसी ने कहा कि ये प्रावधान गैर संवैधानिक हैं। किसी ने कहा कि गैर-कानूनी हैं। यह नया विषय नहीं है। आजादी से पहले पहली बार बिल पास किया गया था। इससे पहले वक्फ को इनवैलिडेट (अवैध करार) किया गया था। 1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया था। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी का आधार देते हुए एक्ट पारित किया गया था।”1995 में पहली बार वक्फ ट्रिब्यूनल का प्रावधान किया गया थाउन्होंने कहा, “1995 में पहली बार वक्फ ट्रिब्यूनल का प्रावधान किया गया था। इससे वक्फ बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी फैसले से असंतुष्ट व्यक्ति वक्फ ट्रिब्यूनल में उसे चुनौती दे सकता था। यह पहली बार था जब ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई थी। उस समय यह भी तय किया गया था कि अगर किसी वक्फ संपत्ति से 5 लाख रुपए से ज्यादा की आय होती है, तो सरकार उसकी निगरानी के लिए एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करेगी। यह व्यवस्था भी 1995 में ही शुरू की गई थी। आज यह मुद्दा इतना तूल क्यों पकड़ रहा है?”विधेयक सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दियाविधेयक को सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस ने विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें विधेयक की प्रति देर से प्राप्त हुई, जिसके कारण उन्हें समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।सदन में हंगामे की स्थितिकांग्रेस के नेताओं ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पेश किया है और विपक्ष को इस पर चर्चा के लिए उचित अवसर नहीं दिया गया। विधेयक पेश होने के बाद सदन में हंगामे की स्थिति देखी गई, क्योंकि विपक्षी सांसदों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कांग्रेस पार्टी की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि जेपीसी ने आवश्यक विचार-विमर्श नहीं किया। शुरू से ही सरकार का इरादा एक ऐसा कानून पेश करने का रहा है जो असंवैधानिक, अल्पसंख्यक विरोधी और राष्ट्रीय सद्भाव को बाधित करने वाला है। - नयी दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के विचार-विमर्श करने की पृष्ठभूमि में गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय संसद की समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं, लेकिन आज वे लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा करके परिवर्तन करती हैं।लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया गया तो आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि विधेयक में संसद की संयुक्त समिति के प्रावधान शामिल किए गए हैं जो नियम एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।उन्होंने दावा किया कि समिति ने अधिकार से परे जाकर प्रावधान जोड़े हैं और यह बहुत गंभीर तकनीकी मामला है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने सबसे पहले इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी जिसे पूर्व में सदन के सामने रखा गया था।उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, जिसके लिए विपक्ष ने भी आग्रह किया था। समिति ने इस पर सुविचारित रूप से अपना मत प्रकट किया। उसके सुझाव के अनुसार विधेयक को फिर से मंत्रिमंडल के सामने भेजा गया।’’शाह ने कहा कि संसदीय समिति के सुझावों को मंत्रिमंडल ने स्वीकार किया और उसे ही संशोधनों के रूप में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू आज सदन में लेकर आए हैं।गृह मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आपका ही आग्रह था कि जेपीसी बने। समिति को यदि कोई बदलाव ही नहीं करना था तो क्या फायदा। यह कांग्रेस की सरकार के समय जैसी समिति नहीं थी, यह लोकतांत्रिक समिति है जिसने मंथन किया।’’उन्होंने कहा कि समिति ने चर्चा करके संशोधन सुझाए। शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस के समय समितियां केवल ठप्पा लगाती थीं। जब परिवर्तन स्वीकार ही नहीं तो समिति का क्या उद्देश्य।’’
- -वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हुई, नक्सलमुक्त भारत बनाने की दिशा में मील का पत्थर-मोदी सरकार नक्सलवाद के प्रति ruthless approach और सम विकास के लिए अथक प्रयासों के साथ सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण कर रही है-मोदी सरकार 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कटिबद्ध हैनई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद-मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत ने वामपंथी उग्रवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटाकर मात्र 6 कर एक नया मील का पत्थर हासिल किया है।X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार नक्सलवाद के प्रति ruthless approach और सर्वांगीण विकास के लिए अथक प्रयासों के साथ सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत, 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के प्रति कटिबद्ध है।देश में नक्सलवाद से प्रभावित कुल ज़िलों की संख्या 38 थी, इसमें अति प्रभावित ज़िलों की संख्या 12 थी, जो घटकर 6 हो गयी, District of Concern की संख्या 9 थी, जो घटकर 6 हो गयी और Other LWE-affected Districts की संख्या 17 थी, यह भी घटकर 6 हो गयी है।नक्सलवाद से कुल प्रभावित जिलों में से अति प्रभावित 12 जिले घटकर अब 6 रह गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 4 ज़िले (बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा), झारखंड का 1 (पश्चिमी सिंहभूम) और महाराष्ट्र का भी 1 ज़िला (गढ़चिरौली) शामिल है।इसी प्रकार, कुल 38 प्रभावित ज़िलों में से District of Concern, जहां अतिप्रभावित जिलों के अतिरिक्त संसाधनों को सघन रूप से मुहैया कराने की आवश्यकता है, की संख्या 9 से घटकर 6 रह गई है। ये 6 ज़िले हैं- आंध्र प्रदेश (अल्लूरी सीताराम राजू), मध्य प्रदेश (बालाघाट), ओडिशा (कालाहांडी, कंधमाल और मलकानगिरी) और तेलंगाना (भद्राद्रि-कोठागुडेम)।नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण Other LWE-affected Districts की संख्या भी 17 से घटकर 6 रह गई है, जिनमें, छत्तीसगढ़ (दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), झारखंड (लातेहार), ओडिशा(नुआपाड़ा) और तेलंगाना (मुलुगु), शामिल हैं।अतिप्रभावित जिलों एवं डिस्ट्रिक्ट ऑफ कन्सर्न जिलों को भारत सरकार द्वारा एक विशेष योजना , विशेष केन्द्रीय सहायता (SCA) के तहत सार्वजनिक बुनियादी ढाँचों में व्याप्त अंतराल को भरने के लिए क्रमशः 30 करोड़ एवं 10 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है और इसके अलावा इन जिलों के लिए आवश्यकतानुसार विशेष प्रोजेक्ट का भी प्रावधान है।पिछले एक साल में वामपंथ उग्रवाद परिदृश्य में तीव्र गति से हुए उल्लेखनीय सुधार का प्रमुख कारण है उग्रवाद प्रभावित कोर क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना एवं विकासोन्मुखी कार्यों जैसे सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली एवं शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की ग्रामीणों तक पहुँच बढ़ना।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूजा करने से मन को अपार शांति मिलती है। उन्होंने दिवंगत महान शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी का एक भजन भी पोस्ट किया, जिसमें कहा गया, “देवी को समर्पित यह भावपूर्ण भजन मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।” यह गीत देवी के आशीर्वाद का आह्वान करता है।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “नवरात्रि पर देवी मां की पूजा करने से मन को अपार शांति मिलती है।”नवरात्रि के तीसरे दिन, देवी दुर्गा की पूजा माता चंद्रघंटा के रूप में की जाती है, जिन्हें दस भुजाओं के साथ दर्शाया गया है, जिनमें से प्रत्येक में एक हथियार, एक कमल का फूल या आशीर्वाद की मुद्रा (अभय मुद्रा) है। वह अपने शांत लेकिन मजबूत स्वरूप के लिए जानी जाती हैं और माना जाता है कि वह अपने भक्तों को शांति, बहादुरी और सफलता दिलाती हैं। देवी के माथे पर अर्धचंद्र है, यही वजह है कि उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। वह कठिनाइयों को दूर करने और आंतरिक शक्ति देने के लिए जानी जाती हैं।नवरात्रि, जिसका संस्कृत में अर्थ है ‘नौ रातें’, देवी दुर्गा और उनके नौ अवतारों का उत्सव मनाने वाला त्योहार है, जिन्हें सामूहिक रूप से नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है। यह त्यौहार पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें देवी के विभिन्न रूपों का सम्मान करने के लिए अनुष्ठान और प्रार्थनाएं की जाती हैं।भारत के सबसे महान शास्त्रीय संगीतकारों में से एक पंडित भीमसेन जोशी की भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां, जैसे “भज मन राम चरण सुखदायी” और “जो भजे हरि को सदा”, आज भी श्रोताओं के दिलों को छूती हैं। पंडित भीमसेन जोशी को कई सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न, पद्म श्री, पद्म भूषण, और पद्म विभूषण शामिल हैं। उनका निधन 24 जनवरी 2011 को पुणे में हुआ, लेकिन उनकी संगीतमय विरासत आज भी जीवित है।वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भक्तों को शुभकामनाएं देते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ जगत जननी मां जगदम्बा की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि के पावन तृतीय दिवस पर माँ चन्द्रघण्टा प्रदेश वासियों एवं भक्तजनों का कल्याण करें, ऐसी प्रार्थना है। जय मां चन्द्रघण्टा!”देशभर के मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। लोग सुबह-सुबह ही मंदिरों के बाहर लाइन में लग गए। -
नई दिल्ली। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अन्तर्गत एक स्वायत्त संगठन- राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (नेस्टस) 1 अप्रैल, 2025 को नई दिल्ली में अपना 7वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इसमें आदिवासी शिक्षा में परिवर्तनकारी प्रभाव प्रदर्शित किया जाएगा।
नेस्टस एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की स्थापना और प्रबंधन करता है। ये विद्यालय आदिवासी छात्रों को कक्षा 6 से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं।जनजातीय कार्य मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट ईएमआरएस छात्रों को भी सम्मानित किया जाएगा जिसमें सुबह के सत्र में बारह छात्रों को सम्मानित किया जाएगा जबकि खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को शाम के कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा। एक विशेष स्क्रीनिंग में पिछले वर्ष में ईएमआरएस की उल्लेखनीय उपलब्धियों को दर्शाया किया जाएगा। इसमें शिक्षा, कौशल विकास और समग्र विकास पर इसके प्रभाव के बारे में बताया जाएगा।अपनी स्थापना के बाद से नेस्टस आदिवासी शिक्षा में एक परिवर्तनकारी शक्ति रही है, जिसने देश भर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के विस्तार का नेतृत्व किया है। ये विद्यालय आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल विकास और उनकी सांस्कृतिक विरासत से एक मजबूत संबंध प्रदान करके सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।आपको बता दें, जनजातीय कार्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में नेस्टस के आयुक्त अजीत कुमार श्रीवास्तव और उनकी टीम के निरंतर प्रयासों से नेस्टस ने बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती और आदिवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय प्रगति की है।मंत्रालय नेस्टस के माध्यम से आदिवासी समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सशक्त बनाने, उन्हें अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करने, अपनी मातृभूमि में उन्नति करने तथा आधुनिक विश्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। -
नई दिल्ली। आज सोमवार को ईद का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी हैं। रमजान के पाक महीने के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह मुसलमानों के लिए एक खास दिन होता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ईद-उल-फितर की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर मैं भारत और विदेशों में रहने वाले सभी भारतीयों, विशेषकर मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।राष्ट्रपति ने कहा कि ईद-उल-फितर रमजान के पवित्र महीने के दौरान रोजे रखने और इबादत करने के बाद मनाया जाता है। यह पर्व भाईचारे, सहयोग और करुणा की भावना को मजबूत करता है। यह त्योहार सामाजिक बंधन को भी प्रोत्साहन देता है और हमें एक सामंजस्यपूर्ण, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है। ईद सहानुभूति, करुणा और दान की भावना को प्रोत्साहन देने का एक अवसर है। मेरी कामना है कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति, प्रगति और खुशियां लाए तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करे।वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी ईद-उल-फितर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर, मैं हमारे राष्ट्र के सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ईद का यह पर्व हमें स्मरण दिलाता है कि सांस्कृतिक विविधता और एकजुटता हमारी शक्ति का केंद्र है। यह त्योहार मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि एकता, करुणा और पारस्परिक सम्मान जैसे हमारे वैविध्यपूर्ण लोकतंत्र के संवैधानिक आदर्शों का एक प्रतीक है।उन्होंने कहा कि आइए इस ईद के पर्व पर, हम सद्भाव और एकता की भावना को संजोकर उन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त करें जो हमारे जीवन को दिशा देते हैं और एक मज़बूत, समृद्ध राष्ट्र के रूप में हमें एकजुट बनाए रखते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी। उन्होंने कामना की कि ईद सबके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियां लेकर आए।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “ईद-उल-फितर की बधाई। यह त्योहार हमारे समाज में आशा, सद्भाव और दयालुता की भावना को बढ़ाए। आपके सभी प्रयासों में खुशी और सफलता मिले। ईद मुबारक!”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। आशा है कि यह दिन पूरे समाज में सद्भाव और भाईचारे के बंधन को और मजबूत करेगा। ईद मुबारक!”वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद-उल-फितर के इस खुशी भरे अवसर पर मैं अपने साथी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ईद हम सभी के बीच भाईचारे, करुणा और साझा करने की भावना को गहराई से जगाती है और हमारे लोगों को एकजुट करने वाले बहुलवादी बंधन को मजबूत करती है। आइए हम इन उत्सवों से सभी के लिए समृद्धि और सौहार्द का युग शुरू करें।”कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “ईद मुबारक! यह खुशी का अवसर आपके और आपके प्रियजनों के लिए शांति, खुशी, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को कटरा से जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन सेवा का उद्घाटन करेंगे, जो 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना के पूरा होने का प्रतीक होगा। कल रविवार को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 19 अप्रैल को उधमपुर पहुंचेंगे। वह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का दौरा करेंगे और उसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह कटरा से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।”
यह ट्रेन कटरा से परिचालन शुरू करेगीआपको बता दें, जम्मू-कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस कटरा से परिचालन शुरू करेगी, क्योंकि जम्मू रेलवे स्टेशन पर अभी नवीनीकरण का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, रेल संपर्क परियोजना पिछले महीने पूरी हो गई थी। वहीं, कटरा-बारामूला मार्ग पर ट्रेन का ट्रायल रन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने जनवरी में कटरा और कश्मीर के बीच ट्रेन सेवा को मंजूरी दी थी।अधिकारियों ने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र के लिए आधुनिक और कुशल रेल सेवा उपलब्ध होगी।लंबे समय से चल थी मांगदरअसल, ट्रेन के शुरू होने से कश्मीर के लिए सीधी रेल कनेक्टिविटी की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। आपको बता दें, वर्तमान में, घाटी के भीतर संगलदान-बारामूला मार्ग और कटरा से देश भर के विभिन्न गंतव्यों तक ट्रेन सेवाएं सीमित हैं।कश्मीर को रेल से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना 1997 में शुरू हुई थीअधिकारियों ने कहा कि कश्मीर को रेल से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना 1997 में शुरू हुई थी, लेकिन चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक, स्थलाकृतिक और मौसम संबंधी स्थितियों के कारण इसमें कई देरी हुई। इस परियोजना में कुल 119 किलोमीटर तक फैली 38 सुरंगें शामिल हैं, जिनमें 12.75 किलोमीटर लंबी सुरंग टी-49 भी शामिल है, जो भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है।इसके अलावा, इसमें कुल 13 किलोमीटर तक फैले 927 पुल हैं, जिनमें प्रतिष्ठित चिनाब पुल सबसे अलग है। 467 मीटर के आर्च स्पैन के साथ 1,315 मीटर लंबा यह पुल नदी के तल से 359 मीटर ऊपर है – जो इसे एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा और दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च रेलवे पुल बनाता है।जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन एंटी फ्रीजिंग सुविधाओं के साथ डिजाइन हैरेल मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को विशेष रूप से एंटी फ्रीजिंग सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है। यात्री और मालगाड़ियों से आगे चलने वाली बर्फ हटाने वाली ट्रेन यह सुनिश्चित करेगी कि इस रणनीतिक मार्ग पर ट्रेनें पूरे साल दिन-रात चलेंगी।इससे दोनों क्षेत्रों के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित होगा। यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देने के लिए, रेलवे ने इस परियोजना में कंपन रोधी भूकंपीय उपकरणों का उपयोग किया है क्योंकि यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से जोन-V में आता है। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। नवरात्रि का दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी को समर्पित है।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “नवरात्रि पर देवी मां का आशीर्वाद भक्तों में सुख-शांति और नई ऊर्जा का संचार करता है।”पीएम मोदी ने एक्स पर राजलक्ष्मी संजय द्वारा गाया गया गीत साझा किया है, उन्होंने लोगों से इस गीत सुनने का आग्रह किया है। यह प्रार्थना गीत शक्ति की पूजा को समर्पित है।आपको बता दें, ‘ऐगिरी नंदिनी नंदिता मेधिनी’ एक बहुत लोकप्रिय दुर्गा स्तोत्र है। इसमें मां के महिषासुर मर्दिनी अवतार का आवाहन किया गया है। ‘ऐगिरी नंदिनी’ देवी महिषासुर मर्दिनी को संबोधित है। देवी दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी रूप उग्र है, जहां उन्हें 10 भुजाओं, शेर पर सवार और हथियार लिए हुए दिखाया गया है।इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों को नवरात्र की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा। चैत्र नवरात्रि के पावन द्वितीय दिवस के अवसर पर मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से हर घर में खुशियों का वास हो, सभी का जीवन सुख, समृद्धि और आरोग्यता से अभिसिंचित हो, यही प्रार्थना है। आदिशक्ति मां भगवती की द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद सभी भक्तों पर सदैव बना रहे। जय मां ब्रह्मचारिणी!” चैत्र नवरात्रि का आगाज 30 मार्च को हो चुका है और यह 7 अप्रैल तक रहेगा। नवरात्र का प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित है। नौ दिवसीय उत्सव में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूरे त्योहार के दौरान भक्त विशेष प्रार्थना, अनुष्ठान और उपवास करते हैं। आज दूसरे दिन देवी दुर्गा की पूजा ब्रह्मचारिणी के रूप में की जाती है, जो देवी पार्वती का अविवाहित रूप है।पूरे देश में देवी पर्व की धूम है। लोग मंदिरों में देवी दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी भी पंचकूला स्थित मनसा देवी मंदिर में पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी धर्मपत्नी संग विधिवत पूजन-हवन किया। -
ठाणे. महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 18 वर्षीय एक युवक ने प्रेमिका से झगड़े के बाद अपने घर में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। घटना शुक्रवार को मुम्ब्रा क्षेत्र के अमृत नगर में हुई।
मुम्ब्रा थाने के एक अधिकारी ने बताया कि युवक अपनी प्रेमिका से मोबाइल फोन पर बात कर रहा था और इस दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद युवक ने अपने घर में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया और इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 90 वर्ष पूरा होने पर आयोजित समारोह में शामिल होंगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति 31 मार्च से एक अप्रैल तक मुंबई का दौरा करेंगी। इस दौरान वह आरबीआई के 90 साल पूरा होने पर आयोजित समारोह में शिरकत करेंगी। भारत के केंद्रीय बैंक के तौर पर आरबीआई की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुरूप एक अप्रैल, 1935 को हुई थी। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को ‘गरीबी उन्मूलन' कार्यक्रम ‘पी4-मार्गदर्शी बंगारू कुटुम्बम' की शुरुआत की। पी4 या ‘सार्वजनिक निजी जन भागीदारी' कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के संपन्न व्यक्तियों के सहयोग से वंचित परिवारों का उत्थान करना है। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दो वंचित परिवारों को अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री ने बच्चों को शिक्षित करने की एक परिवार की आकांक्षा को सुनने के बाद तीन सफल उद्यमियों से पूछा कि वे परिवार के उत्थान में कैसे मदद कर सकते हैं। इन तीन उद्यमियों में ‘ग्रीनको' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार चालमालासेट्टी और ‘मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (एमईआईएल) के प्रबंध निदेशक पीवी कृष्ण रेड्डी शामिल थे। चालमालासेट्टी ने सुझाव दिया, “अगर बच्चों को पास के निजी स्कूल में दाखिला दिलाया जा सके और परिवहन की सुविधा दी जा सके, तो उनके सपने पूरे हो सकते हैं।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पी4 वंचित परिवारों की सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। नायडू ने पी4 जैसी पहल गरीबी उन्मूलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पी4 कार्यक्रम के माध्यम से लाखों वंचित लोगों का उत्थान करना है।



.jpg)
.jpg)
.jpg)









.jpg)
.jpg)




.jpg)






