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बेंगलुरु/छत्तीसगढ़ में हरित ईंधन के क्षेत्र में निवेश को लेकर उद्योग जगत की दिलचस्पी बढ़ रही है। बेंगलुरु में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से GPRS Arya Pvt. Ltd. के दीपक अग्रवाल ने मुलाकात कर बताया कि उनकी कंपनी राज्य में पराली से Compressed Bio-Gas (CBG) बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में CBG प्लांट लगाने की योजना है, जिससे किसानों को फसल अवशेषों से अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
कंपनी ने हाल ही में बेमेतरा जिले में इंडियन ऑयल के साथ मिलकर एक CBG प्लांट स्थापित किया है, जो अब पूरी तरह से कार्य करने की दिशा में है। दीपक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस परियोजना के सफल होने के बाद वे छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को अपनाना चाहते हैं। इस पहल से जैविक ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत जैविक ईंधन और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस बैठक में उद्योग जगत के अन्य प्रतिनिधियों ने भी छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर उत्सुकता जताई। -
छत्तीसगढ़ सरकार ने नैसकॉम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा
नई दिल्ली/ छत्तीसगढ़ जल्द ही आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार और नैसकॉम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है, जिससे छत्तीसगढ़ में कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में नैसकॉम के उपाध्यक्ष श्रीकांत श्रीनिवासन व अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की और राज्य की कौशल विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रायपुर देश का ऐसा प्रमुख शहर है, जहां आईआईटी, एनआईटी, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, जो उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल युवा तैयार कर रहे हैं।
नया रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कई आईटी कंपनियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। सरकार बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर नया रायपुर को एक प्रमुख टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत आईटी और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्किलिंग प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि अभी तक 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाता है। इस बैठक के दौरान दिल्ली, मुंबई और रायपुर में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में मिले सकारात्मक प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई। - नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए अधिक वित्तीय आवंटन और धरोहर स्थलों पर नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के लिए त्वरित अदालतें गठित करने की सिफारिश की है। समिति ने पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये की धनराशि के साथ विशेष धरोहर संरक्षण कोष बनाने की भी सिफारिश की है, जिसमें पर्यटन राजस्व, सीएसआर (कंपनी सामाजिक दायित्व) पहल और राष्ट्रीय संस्कृति कोष ढांचे के जरिए सरकारी अनुदान के माध्यम से योगदान दिया जाएगा। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘यह निधि विशेष रूप से संरक्षित स्मारकों पर आपातकालीन संरक्षण आवश्यकताओं और जलवायु के प्रभाव के शमन से जुड़े उपायों के लिए होगी।'' संस्कृति मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम, 1958 के अंतर्गत 3,698 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की देखरेख करता है, जिनमें मंदिर, किले, मकबरे और प्रागैतिहासिक स्थल शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के प्रयासों के बावजूद, जिसमें 2023-24 में बजट में 70 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे 443.53 करोड़ रुपये करना और दिल्ली के बाराखम्बा कब्रिस्तान और हरियाणा के कोस मीनार नंबर 13 जैसे 18 अज्ञात स्मारकों को सूची से हटाना शामिल है, ‘‘अतिक्रमण, जलवायु खतरे और संसाधन में कमी जैसी चुनौतियां बरकरार हैं।'' इन मुद्दों का हल करने के लिए, संसदीय समिति ने ‘‘बहुआयामी रणनीति'' की सिफारिश की है।समिति ने संरक्षित स्मारकों, विशेषकर विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण, पुनरुद्धार और रखरखाव के लिए ‘‘अधिक वित्तीय आवंटन'' की सिफारिश की है।
- नयी दिल्ली. देश में इस साल अधिक गर्मी पड़ने के मौसमी अनुमानों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि भारत को इस गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग में नौ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पिछले साल अखिल भारतीय स्तर पर बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 250 गीगावाट को पार कर गई थी जो अनुमान से 6.3 प्रतिशत अधिक थी। जलवायु परिवर्तन से प्रेरित गर्मी का तनाव बिजली की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। वर्तमान में उद्योग, घरेलू उपभोग और कृषि क्षेत्र की कुल बिजली खपत में क्रमशः 33 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 19 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दिल्ली स्थित शोध संस्थान ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर' में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रमुख दिशा अग्रवाल के मुताबिक, पिछले एक दशक में घरेलू बिजली की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। घरेलू बिजली की खपत का हिस्सा 2012-13 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 25 प्रतिशत हो गया। यह तेजी आर्थिक वृद्धि और बढ़ते तापमान के कारण घरों एवं दफ्तरों को ठंडा रखने की बढ़ती जरूरतों के कारण है। अग्रवाल ने कहा कि 2024 की गर्मियों में रिकॉर्डतोड़ तापमान के बीच कमरे के एयर कंडीशनर की बिक्री में सालाना आधार पर 40-50 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को अब लंबी गर्मी और 9-10 प्रतिशत की बिजली की मांग में वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि यह चरम मांग केवल थोड़े समय तक ही रहेगी।'' अग्रवाल ने कहा कि भारत की बिजली की खपत 2020-21 से सालाना लगभग नौ प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जबकि इससे पहले के दशक में यह पांच प्रतिशत प्रति वर्ष थी। पिछले सप्ताह नैचुरल रिसोर्स डिफेंस काउंसिल की तरफ से आयोजित एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण एयर कंडीशनिंग की मांग बढ़ने को लेकर चिंता जताई। विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के लिए ढांचागत नीति एवं वित्त के प्रबंधक आभास झा ने कहा कि मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य के तहत, भारत में लू चलने के मामले तिगुना होने के आसार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत वैश्विक स्तर पर एयर कंडीशनर (एसी) का सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है। हर 15 सेकंड में भारत में एक एसी बेचा जाता है। देश में एसी की पहुंच वर्तमान में लगभग आठ प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में यह 90 प्रतिशत है। ऐसे में भारत में एसी की पहुंच बढ़ने जा रही है।'' ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की शोध निदेशक ऋषिका खोसला ने कहा, ‘‘संख्या बढ़ने के बावजूद 2050 में दो से पांच अरब लोगों की एयर कंडीशनर तक पहुंच नहीं होगी।'' मौसम विज्ञान विभाग ने मार्च से मई तक चलने वाले गर्मी के मौसम के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अनुमान लगाया है।
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नयी दिल्ली. आपदा प्रबंधन में आर्थिक सहायता देने में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन के मामले में राष्ट्रीय ही नहीं क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा है तथा इसे दुनिया भी यह स्वीकार कर रही है। उच्च सदन में शाह ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसमें सत्ता के केंद्रीयकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में इस विधेयक में न केवल प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने बल्कि पहले से तैयारी करने, अभिनव प्रयासों वाले और सभी की भागीदारी वाले रवैये को अपनाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्री के जवाब के उच्च सदन ने सरकारी संशोधनों के साथ इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इसके साथ ही सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश संशोधनों को खारिज कर दिया। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा के जोखिमों को घटाने के लिए विश्व के समक्ष जो 10 सूत्री एजेंडा रखा है, उसे 40 देशों ने अपना लिया है और उसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधयक में न केवल राज्य सरकारों बल्कि आम लोगों की भागीदारी का प्रावधान किया गया है। शाह ने कहा, ‘‘पिछले दस सालों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, हम राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरे हैं, यह पूरी दुनिया स्वीकार करती है। भारत की सफलता गाथा को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सफलता गाथा सरकार की नहीं पूरे देश की है।
शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन की लड़ाई संस्थाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ-साथ जवाबदेह बनाये बिना नहीं लड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है। उन्होंने कहा कि आपदा रोकने के लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जाए और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए। उन्होंने वेदों का जिक्र किया और कहा कि इसमें न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष तक को बचाने की बात कही गयी है। गृह मंत्री ने सृष्टि को बचाने के लिए भारत द्वारा प्राचीन समय से किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए हड़प्पा सभ्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने सत्ता के केंद्रीयकरण को लेकर चिंता व्यक्त की है किंतु यदि विधेयक को ध्यान से देखा जाए तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है जो राज्य सरकार के तहत आता है। शाह ने कहा कि विधेयक में कहीं भी संघीय ढांचे को नुकसान करने की संभावना ही नहीं है। चर्चा में कई विपक्षी सदस्यों ने आपदा सहायता के मामले में केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। इसी का जवाब देते हुए शाह ने कहा, ‘‘वित्त आयोग ने आपदा सहायता के लिए एक वैज्ञानिक व्यवस्था की है। इससे एक भी कानी पाई कम किसी भी राज्य को नरेन्द्र मोदी सरकार ने नहीं दी है, बल्कि हमने ज्यादा दिया है।'' विधेयक पर संशोधन लाये जाने की जरूरत को स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यदि किसी इमारत की समय-समय पर मरम्मत न हो तो वह खराब हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम समय की जरूरत के अनुसार कानून में बदलाव करें तो क्या आपत्ति है।'' उन्होंने कहा, ‘‘शायद उनको (विपक्षी सदस्यों को) लगता है कि हम (सत्ता में) आयेंगे तो बदलेंगे तो बहुत देर है...पंद्रह-बीस साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला। जो कुछ करना है, हमें करना है, लंबे समय तक।'' शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं का आकार और स्तर, दोनों बदला है, तो इससे निबटने के तरीके और व्यवस्था भी बदलनी पड़ेगी और संस्थाओं की जवाबदेही तय करनी पड़ेगी एवं शक्तियां देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि केवल इसी उद्देश्य से ही यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर विभिन्न पक्षों से बातचीत की गयी और उनके 89 प्रतिशत सुझावों को मानकर इसे तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में दक्षता, सटीकता, क्षमता, तीव्रता को समाहित करने के लिए यह विधेयक बनाया गया है। शाह ने आपदा प्रबंधन के लिए गुजरात सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में ‘‘शून्य हताहत'' के लक्ष्य को लेकर काम किए गए और इसमें सफलता भी मिली। गृह मंत्री ने कहा कि आज किसानों, मछुआरों सहित समाज के सभी वर्गों को प्राकृतिक आपदाओं के बारे में ऐप के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पर्यावरण संरक्षण के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं और इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ' की उपाधि देकर सम्मानित किया है। शाह ने विपक्ष के कई नेताओं पर कोविड आपदा के समय लोगों को टीकाकरण के मामले में गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोविड आपदा में केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ही नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता मिलकर लड़ रही थी और यही हमारी विजय का कारण है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने घटिया वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से ‘कब्जे' के लिए अनिवार्य गुणवत्ता मानदंड जारी किए हैं। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। कब्जे का इस्तेमाल दरवाजे, खिड़की के पल्ले सहित दो चीजों के इस तरह जोड़ने के लिए किया जाता है, ताकि वे आसानी से घूम भी सकें। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इस साल 21 मार्च को इस संबंध में कब्जा (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2025 जारी किया गया था। इसके तहत अगर इन वस्तुओं पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का निशान न हो, तो उनका उत्पादन, बिक्री, व्यापार, आयात और भंडारण नहीं किया जा सकता है। अधिसूचना में कहा गया कि यह आदेश निर्यात के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित वस्तुओं पर लागू नहीं होगा।
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नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस साल 28 फरवरी तक डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े 7.81 लाख से ज्यादा सिम कार्ड ब्लॉक किए हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने सदन को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा चिह्नित कुल 2,08,469 आईएमईआई को भारत सरकार ने ब्लॉक कर दिया है। इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) हर फोन को दिया जाने वाला एक विशिष्ट नंबर होता है। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने डिजिटल अरेस्ट के लिए इस्तेमाल किए गए 3,962 से ज्यादा स्काइप आईडी और 83,668 व्हॉट्सऐप अकाउंट की पहचान करके उन्हें ब्लॉक कर दिया है। कुमार ने जवाब में कहा, ‘‘वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए आई4सी के तहत नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली 2021 में शुरू की गई है। अब तक 13.36 लाख से अधिक शिकायतों में लगभग 4,386 करोड़ रुपये बचाए गए हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस' से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। शाह ने कहा कि यह कदम भारत की एकता को मजबूत करेगा। उन्होंने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को बाहर कर दिया है। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में अहम इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं तथा अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें।'' उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ी जीत है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का एक अलगाववादी संगठन है। इसके अधिकतर घटकों पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय संदर्भ के लिए प्रासंगिक सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में नर्सरी कविताओं का एक संग्रह तैयार करने के लिए “बालपन की कविता पहल : छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनर्स्थापित करना” शुरू किया है। यह प्रतियोगिता 22 मार्च से शुरू होकर 22 अप्रैल तक चलेगी। इसमें 3 से 8 आयु वर्ग के बच्चे भाग ले सकते हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में आसानी से समझ में आने वाली और आनंददायक कविताओं के माध्यम से अपने आसपास की दुनिया से परिचित होकर फाउंडेशनल स्टेज पर बेहतर सीख सकें। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल), एमवाईजीऑवी के सहयोग से “बालपन की कविता पहल: छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनःस्थापित करना” में योगदान आमंत्रित कर रहा है। प्रतियोगिता के प्रतिभागी प्री-प्राइमरी (आयु 3-6), ग्रेड 1 (आयु 6-7) और ग्रेड 2 (आयु 7-8) सहित प्रतिभागी तीन श्रेणियों के अंतर्गत लोकसाहित्य में प्रचलित मौजूदा कविताएं (लेखक का नाम बताते हुए) या नई रचित मजेदार कविताएं भी भेज सकते हैं।प्रविष्टियां सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में भी आमंत्रित की जाती हैं। इसमें क्षेत्रीय कविताएं शामिल हो सकती हैं जिनका भारतीय संदर्भ में सांस्कृतिक महत्व हो। प्रतियोगिता 26 मार्च से 22 अप्रैल तक एमवाईजीओवी वेबसाइट पर शुरू हो रही है। इसमें भाग लेने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। प्रतियोगिता के अन्य विवरण एमवाईजीओवी वेबसाइट (https://www.mygov.in/) पर देखे जा सकते हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) का नाम वर्ष 2024-25 के दौरान बदलकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) कर दिया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्लू) देश में दालों, पोषक अनाजों, चावल, गेहूं और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए एनएफएसएनएम को लागू कर रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि एनएफएसएनएम के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन एवं सुरक्षा प्रौद्योगिकियों, फसल प्रणाली आधारित प्रदर्शनों, नई जारी किस्मों/संकरों के प्रमाणित बीजों के उत्पादन एवं वितरण, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन तकनीकों, फसल मौसम के दौरान प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण आदि पर प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।इसके अलावा, भारत सरकार प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत राज्य की विशिष्ट जरूरतों/प्राथमिकताओं के लिए राज्यों को लचीलापन भी प्रदान करती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय मंजूरी समिति (एसएलएससी) की मंजूरी से राज्य पीएम-आरकेवीवाई के तहत मोटे अनाज और बाजरा (श्री अन्न) को बढ़ावा दे सकते हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों के लिए 24 कोचिंग संस्थानों पर 77 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में 600 से अधिक उम्मीदवारों और छात्रों के लिए 1.56 करोड़ रुपये की राशि का रिफंड सफलतापूर्वक सुरक्षित किया है।
छात्रों के लिए 1.56 करोड़ रुपये की राशि का रिफंड सफलतापूर्वक किया सुरक्षितयह जानकारी केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। इसमें बताया गया कि सिविल सेवा, इंजीनियरिंग कोर्स और अन्य कार्यक्रमों के लिए कोचिंग सेंटरों में नामांकित इन छात्रों को पहले कोचिंग संस्थानों द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने के बावजूद सही रिफंड से वंचित किया गया था। विभाग की इस कार्रवाई से छात्रों को अधूरी सेवाओं, देर से आने वाली कक्षाओं या रद्द किए गए पाठ्यक्रमों के लिए मुआवजा प्राप्त करने में मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि वे अनुचित व्यावसायिक प्रथाओं का वित्तीय बोझ नहीं उठा रहे हैं।ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ भी की कार्रवाईसीसीपीए द्वारा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, झूठे और भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत परिभाषित अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य बीआईएस मानकों को पूरा नहीं करने वाले घरेलू प्रेशर कुकर की बिक्री के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।सीसीपीए ने वेबसाइटों पर रिफंड दावों पर स्पष्ट निर्देशों और स्थिति अपडेट करने को कहाइसके अतिरिक्त, सीसीपीए के निर्देशों के अनुसार ट्रैवल कंपनियों ने कोविड-19 लॉकडाउन के कारण रद्द की गई उड़ानों के लिए उपभोक्ताओं को 20 मार्च 2024 तक 1,454 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। सीसीपीए ने यह भी अनिवार्य किया है कि ये कंपनियां रद्द टिकटों से संबंधित रिफंड दावों पर स्पष्ट निर्देशों और स्थिति अपडेट के साथ अपनी वेबसाइटों को अपडेट करें।इसके अलावा सीसीपीए द्वारा पारित आदेशों के आधार पर प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कार सीट बेल्ट अलार्म स्टॉपर क्लिप की 13,118 लिस्टिंग हटा दी गई हैं, ताकि ऐसे सभी उत्पादों को सूची से हटाया जा सके, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार हैं, क्योंकि उक्त उत्पाद की बिक्री या विपणन सीट बेल्ट न पहनने पर अलार्म बीप बंद करके उपभोक्ता के जीवन और सुरक्षा के साथ समझौता करता है। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि कश्मीर में अब अलगाववाद इतिहास बनकर रह गया है। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, एकीकरण की मोदी सरकार की नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी रिश्ते तोड़ने की घोषणा की है। श्री अमित शाह ने कहा कि वह भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करते हैं और ऐसे सभी समूहों से अनुरोध करते हैं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म करें। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत बनाने के विजन की बड़ी जीत है।
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नई दिल्ली। नया इनकम टैक्स बिल संसद के अगले सत्र यानी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दी। नया इनकम टैक्स बिल-2025 छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट-1961 का स्थान लेगा। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों को सरल बनाएगा, अस्पष्टताएं दूर करेगा और कर विवादों को कम करेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें स्पष्टता के लिए पाठ्य और संरचनात्मक सरलीकरण, निश्चितता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कर नीति में कोई भी बदलाव नहीं और करदाताओं के लिए पूर्वानुमान को बनाए रखने के लिए कर दरों में कोई संशोधन नहीं शामिल हैं।ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित, इस बिल का उद्देश्य कर नियमों में स्पष्टता प्रदान करके व्यापार में आसानी लाना है। नए इनकम टैक्स बिल में शब्दों की संख्या को घटाकर 2,59,676 कर दिया गया है। यह आंकड़ा पुराने इनकम टैक्स बिल में 5,12,535 पर था।आधिकारिक सरकारी बयान में कहा गया कि नए इनकम टैक्स बिल में चैप्टर्स की संख्या को घटाकर 23 कर दिया गया है, जबकि पुराने इनकम टैक्स बिल में यह संख्या 47 थी। इसके अलावा सेक्शंस की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है।इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए इनकम टैक्स बिल-2025 से देश में टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा और इसके साथ ही इससे करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा।सरकार ने आयकर विधेयक 2025 को 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जो मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। इस विधयेक का उद्देश्य 1961 के अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों को बड़े पैमाने पर संरक्षित करते हुए भाषा को सुव्यवस्थित करना और दक्षता बढ़ाने के लिए पुराने प्रावधानों को हटाना है। -
नई दिल्ली। भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह मेक इन इंडिया पहल से प्रेरित होकर 2014-15 से 174% की वृद्धि दर्शाता है। रक्षा बजट में 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपए से 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए तक की वृद्धि, सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देश के दृढ़ संकल्प को उजागर करती है।
देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापितदरअसल, देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ा है। कभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला हमारा देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है और अब घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। यह बदलाव आत्मनिर्भरता के प्रति मजबूत वचनबद्धता को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि एक मजबूत रक्षा उद्योग का निर्माण भी करे जो आर्थिक विकास में योगदान देता हो।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए सरकार है प्रतिबद्धताआत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए यह प्रतिबद्धता सरकार की हाल ही में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) की खरीद को दी गई मंजूरी में परिलक्षित होती है, जो सेना की मारक क्षमता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सौदे में 155 मिमी/52 कैलिबर की 307 इकाइयों के साथ 327 हाई मोबिलिटी 6×6 गन टोइंग वाहन शामिल हैं।यह 7,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित व निर्मित (आईडीडीएम) श्रेणी के तहत 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को सुसज्जित करेंगे। भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ डीआरडीओ द्वारा विकसित एटीएजीएस एक अत्याधुनिक तोपखाना प्रणाली है, जिसमें 40+ किलोमीटर रेंज, उन्नत फायर कंट्रोल, सटीक लक्ष्यीकरण, स्वचालित लोडिंग तथा रिकॉइल प्रबंधन है, जिसका भारतीय सेना द्वारा सभी इलाकों में गहन परीक्षण किया गया है।स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल कीगौरतलब हो, सभी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा वस्तुएं बनाने वाली अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन का मूल्य बढ़कर 1,27,265 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174% की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है।देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ाआपको बता दें, इस वृद्धि को मेक इन इंडिया पहल से बल मिला है, जिसने धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम, एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन, लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल्स, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), आकाश मिसाइल सिस्टम, वेपन लोकेटिंग रडार, 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार और सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) सहित उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों के विकास को सक्षम किया है। इसके साथ ही विध्वंसक, स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बियां, फ्रिगेट, कोरवेट, फास्ट पेट्रोल वेसल, फास्ट अटैक क्राफ्ट तथा ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसी नौसैनिक संपत्तियां भी विकसित की हैं।
65 प्रतिशत रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर बन रहें हैंअब 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर निर्मित किए जाते हैं, जो पहले की 65-70% आयात निर्भरता से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई शामिल हैं, जो स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करते हैं। वहीं, निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कुल रक्षा उत्पादन में 21% का योगदान देता है और नवाचार एवं दक्षता को बढ़ावा देता है। भारत ने 2029 तक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जिससे वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।रक्षा निर्यात में अभूतपूर्व बढ़ोतरीभारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक की तुलना में 30 गुना वृद्धि को दर्शाता है। रक्षा निर्यात में साल-दर-साल 32.5% की बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 15,920 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए हो गया।भारत के विविध निर्यात पोर्टफोलियो में बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर (डीओ-228) विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तीव्र गति की इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो शामिल हैं।उल्लेखनीय है कि ‘मेड इन बिहार’ का उपयोग अब रूसी सेना के साजो-सामान का हिस्सा है, जो भारत के उच्च विनिर्माण मानकों को दर्शाता है।भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता हैंभारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है, जिसमें 2023-24 में अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया शीर्ष खरीदार के रूप में उभरे। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होगी।रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में सरकारी पहलआपको बता दें, हाल के वर्षों में, केंद्र सरकार ने देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी गतिविधियों को क्रियान्वित किया है। ये उपाय निवेश आकर्षित करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने और खरीद प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमाओं को उदार बनाने से लेकर स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देने तक, ये पहल भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।निम्नलिखित बिन्दु उन प्रमुख सरकारी पहलों को रेखांकित करते हैं, जो रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।* उदारीकृत एफडीआई नीति– विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सितंबर 2020 में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाया गया था, जिससे स्वचालित मार्ग से 74% तक और सरकारी मार्ग से 74% से अधिक एफडीआई की अनुमति मिल गई। अप्रैल 2000 से रक्षा उद्योग में कुल एफडीआई 21.74 मिलियन डॉलर है।* टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स– अक्टूबर 2024 में सी-295 विमान के निर्माण के लिए वडोदरा में टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया, जिससे कार्यक्रम के तहत 56 में से 40 विमान भारत में निर्मित होने के साथ रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।* मंथन– बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2025 के दौरान आयोजित वार्षिक रक्षा नवाचार कार्यक्रम मंथन ने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों के प्रमुख नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शिक्षाविदों, निवेशकों तथा उद्योग जगत के अधिकारियों को एक साथ लाया, जिससे तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में विश्वास की पुष्टि हुई।* रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (डीटीआईएस)- डीटीआईएस का उद्देश्य एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आठ ग्रीनफील्ड परीक्षण और प्रमाणन सुविधाएं स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें मानव रहित हवाई प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स तथा संचार जैसे क्षेत्रों में सात परीक्षण सुविधाएं पहले से ही स्वीकृत हैं।* घरेलू खरीद को प्राथमिकता– रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)-2020 के तहत घरेलू स्रोतों से पूंजीगत वस्तुओं की खरीद पर जोर दिया गया है।* घरेलू खरीद आवंटन– रक्षा मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आधुनिकीकरण बजट का 75% यानि 1,11,544 करोड़ रुपये घरेलू उद्योगों के माध्यम से खरीद के लिए निर्धारित किया है।दरअसल, रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उल्लेखनीय प्रगति इसके आत्मनिर्भर तथा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सैन्य विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तन को रेखांकित करती है। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से देश की रक्षा क्षमताओं में काफी तेजी आई है। -
नई दिल्ली। भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के लिए एक ग्लोबल ट्रांजिट हब बनने की प्रबल संभावना है। इसकी वजह, देश का रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर होना और बढ़ता हुआ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह बयान ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) की अध्यक्ष, अरुणा सुंदरराजन ने मंगलवार को दिया।
सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरतउन्होंने कहा कि बढ़ती हुई डेटा खपत को पूरा करने के लिए सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। सुंदरराजन ने कहा, “भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के एक ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में उभरने की प्रबल संभावना है। इसके लिए हमें अपने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाना होगा।”सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता हैराष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल सबमरीन केबल सिस्टम कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर सबमरीन केबल नेटवर्क को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जहां भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। इस इवेंट में, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता है।भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैउन्होंने बताया कि हाल ही में ग्लोबल केबल नेटवर्क में आई रुकावटों ने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर के महत्व को उजागर किया। भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है,जिसके अंतर्गत लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल नेटवर्क मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में मौजूद 14 लैंडिंग स्टेशनों से जुड़े हुए हैं।भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई हैटाटा कम्युनिकेशंस, भारती एयरटेल, ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज और बीएसएनएल जैसी भारतीय दूरसंचार कंपनियां इन महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। हाल ही में, भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इसके अलावा, दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा ने ‘प्रोजेक्ट वाटरवर्थ’ शुरू किया है। इसके तहत भारत, अमेरिका, ब्राजील और साउथ अफ्रीका को जोड़ते हुए एक सबमरीन केबल नेटवर्क बिछाया जाएगा। -
नई दिल्ली। भारत 1998 से दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और अब वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले 10 वर्षों में दूध उत्पादन में 63.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में दूध उत्पादन 2014-15 के दौरान 146.3 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 के दौरान 239.2 मिलियन टन हो गया है।
दूध उत्पादन में पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है, जबकि विश्व में दूध उत्पादन 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले दशक में 48 प्रतिशत बढ़ी है, जो वर्ष 2023-24 के दौरान 471 ग्राम/व्यक्ति/दिन से अधिक है, जबकि दुनिया में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 322 ग्राम/व्यक्ति/दिन है।पशुपालन और डेयरी विभाग देश भर में निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है-–राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी): एनपीडीडी को निम्नलिखित 2 घटकों के साथ कार्यान्वित किया जाता है:एनपीडीडी का घटक ‘ए’ राज्य सहकारी डेयरी संघों/जिला सहकारी दूध उत्पादक संघों/स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)/दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों के लिए गुणवत्तायुक्त दूध परीक्षण उपकरणों के साथ-साथ प्राथमिक शीतलन सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे के सृजन/सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित है।एनपीडीडी योजना के घटक ‘बी’ “सहकारिता के माध्यम से डेयरी” का उद्देश्य संगठित बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन बुनियादी ढांचे को उन्नत करके और उत्पादक स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि करके दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री में वृद्धि करना है।–डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एसडीसीएफपीओ) को सहायता प्रदान करना: राज्य डेयरी सहकारी संघों को गंभीर प्रतिकूल बाजार स्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के संबंध में ब्याज अनुदान प्रदान करके सहायता प्रदान करना।–पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ): एएचआईडीएफ को व्यक्तिगत उद्यमियों, डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, निजी कंपनियों, एमएसएमई और धारा 8 कंपनियों द्वारा पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए उनके निवेश के लिए अनुसूचित बैंकों द्वारा स्थापित पात्र परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना, पशु चारा विनिर्माण संयंत्र, नस्ल सुधार प्रौद्योगिकी और नस्ल गुणन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा टीका और दवा उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं।–राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम): गोवंशीय पशुओं के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सरकार देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा गोवंशीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन का क्रियान्वयन कर रही है।–राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम): उद्यमिता विकास के लिए व्यक्ति, एफपीओ, एसएचजी, धारा 8 कंपनियों और नस्ल सुधार बुनियादी ढांचे के लिए राज्य सरकार को प्रोत्साहन प्रदान करके मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सूअर पालन में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार पर तीव्र ध्यान केंद्रित करना।–पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी): इसका उद्देश्य पशु रोगों के विरुद्ध रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता निर्माण, रोग निगरानी तथा पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।पशुपालन एवं डेयरी विभाग लोगों को दूध के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूक करने के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से लगातार सोशल मीडिया अभियान चला रहा है। इन अभियानों में जागरूकता पोस्ट, इन्फोग्राफिक्स, रील्स और हैशटैग और डिजिटल आउटरीच के माध्यम से जुड़ाव शामिल हैं। -
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने आज पहली बार एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। जिसमें बुनियादी ढांचा मजबूत करने, यमुना की सफाई, महिला सम्मान योजना, प्रदूषण से राहत देने के साथ ही औद्योगिक विकास के लिए अहम प्रावधान किए गए। इसके साथ ही दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 लाख रुपये का इलाज मुफ्त करने का प्रावधान भी बजट में किया गया है। 100 करोड़ रुपये के बजट से 100 झुग्गी झोपड़ी कॉलोनियों में अटल कैंटीन की स्थापना कर जरूरतमंदों को सस्ता और पौष्टिक भोजन प्रदान करने की घोषणा भी बजट में की गई।
दिल्ली के बजट में 30 फीसदी से ज्यादा इजाफादिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये खर्च का बजट पेश किया। चालू वित्त वर्ष के लिए दिल्ली का बजट 76 हजार करोड़ रुपये है। इस हिसाब से आगामी वित्त वर्ष के बजट में 31.5 फीसदी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में 78,800 करोड़ का बजट पेश किया गया था, जो 2024-25 का घटकर 76 हजार करोड़ रह गया। ये दिल्ली में सबसे खराब स्थिति थी। इस बार का दिल्ली का बजट एक लाख करोड़ रुपए का है, जो ऐतिहासिक है।महिला सम्मान और आयुष्मान भारत के लिए आवंटनमहिला समृद्धि योजना के लिए बजट में 5100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इसके जरिए दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए दिए जाएंगे। आयुष्मान योजना के लिए 2,144 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है। केंद्र सरकार से 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज तो मिलेगा ही। साथ ही दिल्ली सरकार भी इसमें अपनी ओर से 5 लाख रुपए जोड़ रही है। इससे दिल्ली में अब आयुष्मान योजना के तहत 10 लाख का इलाज मुफ्त मिलेगा। मातृत्व वंदन परियोजना के लिए 210 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को एकमुश्त 21 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए 50 हजार अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे।बजट में नई औद्योगिक नीति लाने का ऐलानमुख्यमंत्री गुप्ता ने अपने बजट भाषण में कहा कि दिल्ली कभी व्यापार, संस्कृति और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र थी। आज कुप्रबंधन की शिकार है। कोई अधिकारी जाकर व्यापारी को धमका देता है। अब हमने संकल्प लिया है कि दिल्ली को देश का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाएंगे। हम नवाचार, औद्योगिक क्रांति की नींव रख रहे हैं। ये बजट नीतियों की घोषणा नहीं है, व्यापारियों, स्टार्टअप को सुविधाएं देने का रोड मैप है। हमारी सरकार नई औद्योगिक नीति लेकर आएगी। इससे औद्योगिक मुद्दों का समाधान होगा। एक नई वेयर हाउसिंग पॉलिसी को नया रूप दिया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम लाया जाएगा। डीडीए के साथ बात करके लीज वाली इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने का काम करेंगे।बजट में दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की घोषणादिल्ली के बजट में राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन करने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि हर दो साल में एक बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाए। अब फाइलों में योजनाएं नहीं अटकेंगी, बल्कि जमीन पर उद्योग फूले-फलेंगे।यमुना और सीवर की सफाई के लिए 9 हजार करोड़ रुपये का बजटबजट में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यमुना की सफाई के अहम मुद्दे का भी ख्याल रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा दिल्ली में यमुना गंदी है और तकलीफ की बात है। लेकिन अब स्वच्छता, स्वच्छ पानी और स्वच्छ यमुना दिल्ली की नई पहचान बनेगी। दिल्ली में हर नागरिक को साफ पानी और सफाई उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए बजट में 9 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह पुरानी सरकारों से तिगुना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब परिवारों द्वारा रिफिल कराए गए एलपीजी सिलेंडरों की संख्या बीते पांच वर्षों में दोगुनी हो गई है। यह जानकारी सरकार द्वारा संसद में दी गई। सरकार के मुताबिक, पीएमयूवाई योजना के तहत लाभार्थी परिवारों की एलपीजी खपत बढ़कर 4.5 सिलेंडर प्रति वर्ष हो गई है।
रिफिल सिलेंडर की संख्या पांच साल में दोगुनी हुईपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संसद को बताया कि 1 मार्च 2025 तक देश भर में 10.33 करोड़ पीएमयूवाई कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस योजना के तहत रिफिल सिलेंडर की संख्या पांच साल में दोगुनी हो गई है।चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में 41.95 करोड़ रिफिल वितरित किए गए, जबकि 2023-24 के 12 महीनों में 39.38 करोड़ रिफिल वितरित किए गए थे। वहीं, 2019-20 में रिफिल की संख्या 22.80 करोड़ थी, जो पांच साल पहले की तुलना में इस वित्त वर्ष में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।वित्त वर्ष 2024-25 फरवरी तक में तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 12.6 लाख एलपीजी रिफिल वितरित की हैंसरकार ने कहा कि पीएमयूवाई की शुरुआत के बाद से, तेल विपणन कंपनियों ने फरवरी 2025 तक पीएमयूवाई ग्राहकों को प्रारंभिक इंस्टॉलेशन रिफिल सहित कुल 234.02 करोड़ एलपीजी रिफिल वितरित किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 (फरवरी 2025 तक) में तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 12.6 लाख एलपीजी रिफिल वितरित कर रही हैं।योजना के तहत सितंबर 2019 में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया थापीएमयूवाई को मई 2016 में देश भर के गरीब परिवारों की महिलाओं को जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत सितंबर 2019 में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया था। शेष गरीब परिवारों को कवर करने के लिए उज्ज्वला 2.0 योजना का दूसरा चरण अगस्त 2021 में शुरू किया गया और जनवरी 2023 तक 1.60 करोड़ कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने 75 लाख अतिरिक्त पीएमयूवाई एलपीजी कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी थीइसके अलावा, सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने 75 लाख अतिरिक्त पीएमयूवाई एलपीजी कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी थी। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 8 जुलाई 2024 तक 75 लाख पीएमयूवाई कनेक्शन जारी करने का काम पूरा कर लिया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का एक लेख साझा करते हुए कहा कि हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगतिप्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पोस्ट में कहा, “टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिसने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है, इसे अवश्य पढ़ें।”100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान ने नवाचार की शक्ति का किया प्रदर्शनवहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने एक्स पोस्ट में कहा कि इस विश्व क्षयरोग दिवस पर मैं इस बात पर बहुत गर्व के साथ विचार करता हूं कि भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में किस तरह से अपनी रणनीति को फिर से लिख रहा है। हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने न केवल नवाचार की शक्ति का प्रदर्शन किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि समुदायों को संगठित करना कार्यक्रम संबंधी दृष्टिकोण को बदलने जितना ही महत्वपूर्ण है। मामलों का पता लगाने में तेजी लाकर, मृत्यु दर को कम करके और नए संक्रमणों को रोककर, इस अभियान ने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत नींव रखी है। भारत सिर्फ टीबी से नहीं लड़ रहा है, हम इसे हरा रहे हैं।यह अभियान देश के कोने-कोने तक पहुंचाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने लेख में कहा कि यह अभियान 7 दिसंबर, 2024 को टीबी के मामलों का पता लगाने, मृत्यु दर को कम करने और नए मामलों को रोकने के उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया था। 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने टीबी का समय रहते पता लगाने के लिए अत्याधुनिक रणनीतियां शुरू कीं, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बिना लक्षण वाले लोगों की भी पहचान की गई- जिनका अन्यथा निदान नहीं हो पाता और उनका इलाज किया गया। पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों को सीधे उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के पास ले जाया गया, जिनमें मधुमेह, धूम्रपान करने वाले, शराब पीने वाले, एचआईवी से पीड़ित, बुजुर्ग, कम बीएमआई वाले और टीबी रोगियों के घरेलू संपर्क शामिल थे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित एक्स-रे ने संदिग्ध टीबी मामलों को तुरंत चिह्नित किया और स्वर्ण-मानक न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) का उपयोग कर पुष्टि की गई। इन प्रयासों ने सुनिश्चित किया कि संक्रामक मामलों की पहचान की गई और उनका जल्दी से जल्दी इलाज किया गया, जिससे संक्रमण पर लगाम लगी और लोगों की जान बच गई। यह अभियान देश के कोने-कोने तक पहुंचा, जिसमें कमजोर आबादी वाले 12.97 करोड़ लोगों की जांच की गई। इस गहन प्रयास के कारण 7.19 लाख टीबी रोगियों की पहचान की गई, जिनमें से 2.85 लाख मामले बिना लक्षण वाले थे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- ‘100 दिवसीय अभियान अभी शुरुआत है’केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने अपने लेख के माध्यम से कहा है कि 100 दिवसीय अभियान अभी शुरुआत है। भारत इन प्रयासों को पूरे देश में बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर नागरिक चाहे वे कहीं भी रहते हों, को आधुनिक निदान, गुणवत्तापूर्ण उपचार और अटूट सामुदायिक समर्थन तक पहुंच प्राप्त हो। जिस तरह भारत ने कोविड-19 परीक्षण को तेज़ी से बढ़ाया, उसी तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अगली पीढ़ी के टीबी निदान में निवेश कर रहा है ताकि अंतिम मील तक तेज़ और अधिक सटीक परीक्षण लाया जा सके। -
नयी दिल्ली. उत्तर प्रदेश के एटा लोकसभा क्षेत्र में स्थित महान कवि गोस्वामी तुलसीदास और अमीर खुसरो की जन्मस्थलियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार के तहत ‘संरक्षित स्मारक नहीं हैं तथा किसी योजना के अंतर्गत इनके विकास एवं संरक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को यह जानकारी दी। उनसे सवाल किया गया था कि क्या एटा संसदीय क्षेत्र में स्थित खुसरो और तुलसीदास की जन्मस्थली क्रमश: पटियाली और सोरों को उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान के मद्देनजर किसी विशेष योजना के तहत संरक्षित और विकसित करने का प्रस्ताव है? शेखावत ने कहा कि एएसआई देश भर में 3,698 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों या स्थलों का संरक्षण करता है। उनका कहना था, ‘‘हालांकि, एटा लोकसभा क्षेत्र में स्थित अमीर खुसरो और तुलसीदास जी के जन्मस्थान पटियाली और सोरों एएसआई के अधिकार क्षेत्र के तहत संरक्षित स्मारक नहीं हैं। वर्तमान में किसी भी योजना के तहत इन स्मारकों के संरक्षण और विकास का कोई प्रस्ताव नहीं है।" पटियाली और सोरों कासगंज जिले के अंतर्गत आते हैं।
उल्लेखनीय है कि ख़ुसरो का जन्म 13वीं शताब्दी में और गोस्वामी तुलसीदास का 16वीं शताब्दी में हुआ था। तुलसीदास ने पवित्र ग्रंथ ‘रामचरितमानस' की रचना की थी। खुसरो भी विद्वान थे तथा उन्हें उनके दोहों के लिए याद किया जाता है। -
नई दिल्ली। दिल्ली में एक अनोखे और मीठे अंदाज में बजट सत्र की शुरुआत हुई। सोमवार को मंत्री प्रवेश वर्मा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को हाथ से खीर खिलाई। वहीं मुख्यमंत्री ने प्रवेश वर्मा और कैबिनेट के अन्य सदस्यों को खीर परोसकर इस खास मौके को यादगार बनाया। यह पहल दिल्ली सरकार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, क्योंकि 27 साल बाद दिल्ली सरकार अपना बजट पेश करने जा रही है।
दिल्ली सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर कदमताल करेगीमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मौके पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार को यह मौका मिला है। हमने जनता से मिले हजारों सुझावों को इस बजट में शामिल करने की कोशिश की है।” उन्होंने बताया कि दिल्ली की जनता ने व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों से करीब 3500 ईमेल और 6000 संदेश भेजकर अपने विचार साझा किए। सीएम ने इसे ‘डबल इंजन सरकार’ का बजट करार देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार अब केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी।बजट सत्र के पहले दिन विभिन्न वर्गों के लोग हुए शामिलबजट सत्र के पहले दिन विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। वकील, छात्र, महिलाएं, सिख समुदाय और ऑटो ड्राइवर जैसे तमाम लोग खीर खाते नजर आए। सीएम ने इसे दिल्ली की आम जनता का बजट बताया और कहा कि यह विकसित दिल्ली के सपने की शुरुआत है। उन्होंने अपनी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं और इस मौके को ऐतिहासिक करार दिया।बजट में सबकी भागीदारीरेखा गुप्ता ने भगवान श्री राम के 14 साल बाद वनवास से लौटने की तुलना इस घटना से की। उन्होंने कहा, “27 साल बाद हम पहली बार खीर समारोह के साथ बजट सत्र की शुरुआत कर रहे हैं। आज मैंने सभी वर्गों के लोगों को बुलाया ताकि यह बजट सबकी भागीदारी से बने। इस बजट को लेकर दिल्लीवासियों में उत्साह देखा जा रहा है। यह बजट दिल्ली के विकास के लिए एक नई दिशा तय करने का वादा करता है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से तैयार इस बजट से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।” -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित एवं दीर्घकालिक आधार पर गुणवत्ता वाला और पीने योग्य नल का पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में केंद्र सरकार अगस्त, 2019 से राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन (जेजेएम) को लागू कर रही है। जल राज्य का विषय होने के कारण, जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति योजनाओं/कार्यों की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों की सहायता करती है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमण्णा ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य नल कनेक्शन प्रदान किए गए घरों और शेष घरों पर क्षेत्र सर्वेक्षण के माध्यम से या इस संबंध में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई पद्धति के अनुसार डेटा (नल कनेक्शनों की कवरेज और मिशन की प्रगति से संबंधित) की रिपोर्ट करते हैं। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ऐसे सर्वेक्षणों का विवरण नहीं रखा जाता है।जेजेएम डैशबोर्ड पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में लगभग 89 प्रतिशत स्कूलों और 85 प्रतिशत आंगनवाड़ियों में नल के पानी की आपूर्ति हो चुकी है।यह जानकारी आज द्वारा दी गई।इसके साथ उन्होंने बताया कि राज्यों शासित प्रदेशों में नल कनेक्शनों की कवरेज को दर्ज करने के लिए, जल शक्ति मंत्रालय ने एक मजबूत ऑनलाइन जेजेएम डैशबोर्ड विकसित किया है जो मिशन की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, जिला और गांव-वार प्रगति की जानकारी प्रदान करता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जेजेएम डैशबोर्ड पर जेजेएम की प्रगति के बारे में डेटा की रिपोर्टिंग के बाद, इसे रिकॉर्ड किया जाता है और जेजेएम डैशबोर्ड पर दिखाई देना शुरू हो जाता है जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और इसे https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspx पर एक्सेस किया जा सकता है। -
गांधीनगर । नीति आयोग द्वारा गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में “भारतीय नवाचार इकोसिस्टम में तालमेल का निर्माण” विषय पर शनिवार को एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी मेजबानी गुजरात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (गुजकॉस्ट),विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार ने की। कार्यशाला में नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रख्यात नेताओं द्वारा संचालित कई संवादात्मक चर्चाएं शामिल थीं।
डॉ. वी.के. सारस्वत ने उद्घाटन भाषण में भारत के नवाचार परिदृश्य को आगे बढ़ाने में सरकारी निकायों, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अनुवाद संबंधी शोध पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया जो सार्थक नवाचार को बढ़ावा देता है और प्रभावशाली स्टार्टअप बनाता है। उन्होंने कहा कि यह नवाचार की ओर वैश्विक बदलाव को दर्शाता है।डॉ. सारस्वत ने डीपटेक स्टार्टअप को समर्थन देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और भारत को सेवा-आधारित से उत्पाद-आधारित उद्योग मॉडल में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, डॉ. सारस्वत ने देश भर में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई प्रमुख सरकारी पहलों के बारे में बहुमूल्य जानकारी साझा की।इस दौरान, “भारत नवाचार करता है: राष्ट्रीय नवाचार इकोसिस्टम का अवलोकन” विषय पर केंद्रित सत्र में नवाचार-अनुकूल भारत के निर्माण के लिए रणनीतियों की खोज की गई।इसका संचालन अटल नवाचार मिशन के पूर्व एमडी डॉ. आर. रामनन ने किया। इसके बाद “नवाचार नीति और राज्य योजनाएं: सर्वश्रेष्ठ से सीखना” विषय पर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नवाचार को बढ़ावा देने में राज्य-स्तरीय पहलों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. रश्मि शर्मा, प्रमुख, एनसीएसटीसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने की।एक अन्य ज्ञानवर्धक सत्र, “नवाचार के सारथी: अग्रणी नवाचार” में जमीनी स्तर के नवोन्मेषकों और स्टार्ट-अप की प्रेरक कहानियों पर चर्चा की गई, जिसका संचालन राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे ने किया।इसके अतिरिक्त, “विश्व में उभरता भारत: भारत के वैश्विक नवाचार पदचिह्न को मजबूत करना” में वैश्विक नवाचार परिदृश्य में भारत की बढ़ती उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के डॉ. सच्चा वुन्श-विंसेंट और गुजरात प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजुल गज्जर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का प्रमुख योगदान रहा। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के डॉ. साचा वुन्श-विंसेंट ने भारत की अनूठी विकास यात्रा के लिए अगले 10 वर्षों के लिए कार्य बिंदुओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारत का आईपी प्रोफाइल छोटा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि हुई है, भारतीय मूल के पेटेंट दाखिल करने में वृद्धि हुई है, और देश निकट भविष्य में और अधिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर जोड़ेगा। -
नई दिल्ली। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पासला कृष्ण मूर्ति की बेटी कृष्णा भारती का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृष्णा भारती के निधन पर शोक जताया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, पीएम मोदी ने एक एक्स पोस्ट कहा, “पासला कृष्णा भारती जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। वे गांधीवादी मूल्यों के प्रति समर्पित थीं और उन्होंने अपना जीवन बापू के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने माता-पिता की विरासत को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रिय थे। मुझे भीमावरम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनसे मुलाकात याद है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के भीमावरम में 2022 में स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में गांधीवादी कृष्णा भारती के पैर छुए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पासला कृष्ण मूर्ति के अन्य पारिवारिक सदस्यों से भी मुलाकात की थी।कृष्णा भारती ने संक्षिप्त बीमारी के बाद हैदराबाद के स्नेहपुरी कॉलोनी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले की रहने वाली, वह स्वतंत्रता सेनानी पासला कृष्ण मूर्ति और अंजा लक्ष्मी की दूसरी बेटी थीं।कृष्णा भारती, गांधीवादी मूल्यों में दृढ़ विश्वास रखती थीं और उन्होंने जीवन भर उन्हीं मूल्यों को बनाए रखा। उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए भी प्रयास किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और गोशालाओं को दान दिया था। वह अविवाहित थी। उनके चार भाई और तीन बहनें हैं।वहीं,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कृष्णा भारती के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के शैक्षणिक उत्थान के लिए उनके योगदान को याद किया। -
शिवपुरी. मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में रविवार सुबह एक एसयूवी के पुलिया से टकरा जाने के कारण दो महिला चिकित्सकों की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। उपमंडल पुलिस अधिकारी विजय यादव ने बताया कि महाराष्ट्र से छह चिकित्सकों के एक समूह को ले जा रहा एसयूवी वाहन सुबह करीब साढ़े सात बजे कोलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुना-शिवपुरी रोड पर एक पुलिया से टकराकर खाई में गिर गया। यादव ने कहा कि संबंधित लोग महाराष्ट्र के निवासी थे और तीर्थयात्रा पर अयोध्या से उज्जैन जा रहे थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना में तन्वी आचार्य (50) की मौके पर ही मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल नीलम पंडित (55) ने बाद में दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि घायलों की पहचान मुंबई के दादर निवासी उदय जोशी (64) और उनकी पत्नी सीमा जोशी (59), पालघर जिले के वसई निवासी सुबोध पंडित (62) और ठाणे जिले के भिवंडी निवासी अतुल आचार्य (55) के रूप में हुई है। यादव ने बताया कि घायलों का शिवपुरी जिला अस्पताल में इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का यह समूह 10 दिन पहले तीर्थयात्रा के लिए रवाना हुआ था और अयोध्या से उज्जैन जा रहा था।











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