- Home
- देश
- आदिवासी समुदायों के लिए वन आधारित जीविकोपार्जन के अवसर विषय पर कार्यशाला को मुख्यमंत्री श्री साय ने किया संबोधितवनोपज से समृद्धि पर नीति आयोग और सरकार की साझा पहल:वन संसाधनों के समुचित उपयोग और रोजगार सृजन पर जोररायपुर/जनजातीय समाज और वनों के मध्य गहरा संबंध है और दोनों एक दूसरे के पूरक के रूप में संरक्षित - संवर्धित हो रहे हैं। प्रकृति की गोद में ही जनजाति समाज का पीढ़ी दर पीढ़ी विकास हुआ है। यह कार्यशाला आदिवासियों और वनों के सहअस्तित्व को केंद्र में रखकर उनके उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर में आदिवासी समुदायों के लिए वन आधारित जीविकोपार्जन के अवसर विषय पर नीति आयोग तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला में सभी प्रबुद्धजनों, विषय विशेषज्ञों और अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज को जीविकोपार्जन के समुचित अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी हम सभी पर है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजाति समुदाय निवासरत है और 44 प्रतिशत इलाका वन आच्छादित है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले 35 वर्षों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में मैने प्रदेश के जनजाति समुदाय और विशेष पिछड़ी जनजातियों के संघर्ष और पीड़ा को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की व्यथा को समझा और एक आदिवासी बहुल नए राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। श्री साय ने कहा कि अटल जी ने आदिवासियों के कल्याण के लिए पृथक मंत्रालय का भी गठन किया और आदिवासियों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजी जा रही राशि का सही उपयोग हो पाया। अटल जी के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ में विकास के नए आयाम स्थापित हुए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में कोई भी भूखा न रहे, इस उद्देश्य से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर पीडीएस सिस्टम लागू कर लोगो को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराया। उन्होंने समर्थन मूल्य पर वनोपज की खरीदी प्रारंभ की, जिसने आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज पर्याप्त मात्रा में है। कुल 67 प्रकार के लघु वनोपजों का संग्रहण, प्रसंस्करण और विक्रय महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वनोपजों से जुड़ी प्रोत्साहक नीतियों का लाभ उठाकर स्व सहायता समूह की बहनें आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के आजीविका और उत्थान के लिए संचालित पीएम-जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस मौके पर श्री साय ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजाति समुदायों के उत्थान के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नीति आयोग और वन विभाग की इस संयुक्त कार्यशाला से जनजातीय समाज को तकनीक और नवाचार से जोड़ने के साथ ही आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नीति आयोग के सहयोग से एक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय पर आज एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि जनजातीय समुदाय के लिए संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन अब तेजी से हो रहा है और वनवासी क्षेत्रों में व्यवस्थाएं अब सुदृढ़ हुई है। उन्होंने पर्यावरण संतुलन के साथ वन संसाधनों के समुचित उपयोग पर जोर देने और रोजगार सृजन की बात कही।कार्यशाला में नीति आयोग के सलाहकार श्री सुरेंद्र मेहता, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और वन बल प्रमुख श्री व्ही श्रीनिवास राव ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर एपीसीसीएफ श्रीमती शालिनी रैना, नीति आयोग के निदेशक श्री अमित वर्मा, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण और झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों से आए प्रबुद्धजन, विषय विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।मुख्यमंत्री श्री साय ने वनोपज आधारित स्टालों का किया अवलोकनमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अरण्य भवन परिसर में वन उत्पादों पर आधारित स्टालों का भी अवलोकन किया। लीफ प्लेट टेक्नोलॉजी, हैदराबाद की टीम ने मुख्यमंत्री श्री साय को लीफ से तैयार डिनर सेट भेंट किया। इस दौरान भोपालपट्टनम, बीजापुर जिले से आये श्री बी. आर. राव ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वे पिछले 35 वर्षों से वनौषधीय पौधों के बीजों का संरक्षण कर रहे हैं। वे अपने 'गमलों से जंगल की ओर' अभियान के तहत निःशुल्क बीजों का वितरण भी करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने श्री राव के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। बलौदाबाजार जिले के अमरवा बांस प्रसंस्करण केन्द्र के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बांस शिल्प से बना गुलदस्ता भेंट करते हुए केन्द्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। श्री साय ने लाख उत्पादक किसान समिति कांकेर, छत्तीसगढ़ हर्बल और जशप्योर एफपीसी जशपुर के स्टालों का अवलोकन कर समूह के सदस्यों के साथ चर्चा की।
- मुख्यमंत्री श्री साय ने “सौगात-ए-मोदी” के तहत मुस्लिम बहनों को बांटी खुशियाँरायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम समाज की जरूरतमंद बहनों को सौगातें भेंट कर सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल “सौगात-ए-मोदी” के तहत मुख्यमंत्री श्री साय ने गरीब महिलाओं को गिफ्ट पैकेट वितरित किए जिसमें लेडीज़ सूट का कपड़ा, सेवइयां, खजूर और मिठाइयां शामिल थीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी को ईद की बधाई देते हुए कहा कि ईद का पर्व प्रेम, सद्भाव और एकजुटता का प्रतीक है।डॉ. सलीम राज ने बताया कि इसके पहले रायपुर में अल्प संख्यक मोर्चे और छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में 500 महिलाओं को गिफ्ट पैकेट वितरित किए गए।इस अवसर पर अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जमाल सिद्दीकी, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, प्रदेश अध्यक्ष श्री शकील अहमद, श्री एम. इकबाल, श्री संजय श्रीवास्तव, शाहिद खान, रजिया खान, आबिदा खान सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।
-
नयी दिल्ली/ भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की अंतिम (फाइनल) परीक्षाएं साल में तीन बार आयोजित करने का निर्णय लिया है। मौजूदा समय में यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है।
आईसीएआई ने बृहस्पतिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है और इससे छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे। पिछले वर्ष आईसीएआई ने फाउंडेशन और इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम की परीक्षाएं वर्ष में तीन बार आयोजित करने का निर्णय लिया था। अब अंतिम परीक्षा भी प्रतिवर्ष तीन बार आयोजित की जाएगी। विज्ञप्ति के मुताबिक अंतिम परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर में आयोजित की जाएंगी।
आईसीएआई में 10 लाख से अधिक छात्र और लगभग चार लाख सदस्य हैं।
आईसीएआई द्वारा बृहस्पतिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा में योग्यता-पश्चात पाठ्यक्रम के लिए मूल्यांकन परीक्षा वर्ष में तीन बार - फरवरी, जून और अक्टूबर में आयोजित की जाएगी। मौजूदा समय में यह परीक्षा साल में दो बार होती है। -
चेन्नई/दक्षिण रेलवे ने बताया कि बृहस्पतिवार को एनएमजी रेक के तीन खाली माल डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। दक्षिण रेलवे ने कहा, "आज, शाम छह बजकर 52 मिनट पर, एनएमजी (न्यू मॉडिफाइड गुड्स) रेक के तीन खाली माल डिब्बे (8वां, 9वां और 10वां डिब्बा) तांबरम यार्ड में स्थानांतरित किए जाने के दौरान पटरी से उतर गए। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।'' एनएमजी रेक का इस्तेमाल गाड़ियों के परिवहन के लिए किया जाता है। रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया।
-
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के सुदूर जंगली इलाके में दिनभर चली भीषण मुठभेड़ में तीन आतंकवादी ढेर हो गए और इतनी ही संख्या में पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा एक पुलिस उपाधीक्षक समेत सात अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ सुबह करीब आठ बजे शुरू हुई, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के एक समूह के खिलाफ अभियान तेज किया। माना जा रहा है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान में स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान भीषण गोलीबारी और विस्फोट हुए। कई स्थानीय युवक भारी हथियारों और गोला-बारूद को जंगल के अंदर ले जाने में सुरक्षा बलों की मदद करते देखे गए।
अधिकारियों ने बताया कि राजबाग के घाटी जूथाना क्षेत्र में जखोले गांव के पास हुई मुठभेड़ में लगभग पांच आतंकवादियों का एक समूह शामिल था और शुरुआती गोलीबारी में तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के नेतृत्व में सेना और सीआरपीएफ की सहायता से की गई कार्रवाई में तीन आतंकवादी ढेर हो गए। इस दौरान एक उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समेत तीन सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर मुठभेड़ स्थल के पास फंस गए, जो घने पेड़ों से घिरे एक नाले के पास है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसडीपीओ (डीएसपी रैंक के अधिकारी) को देर शाम घटनास्थल से निकाल लिया गया, जबकि उनके तीन निजी सुरक्षा अधिकारी मृत पाए गए। उन्होंने बताया कि एक अन्य लापता पुलिसकर्मी के बारे में तत्काल पता नहीं चल पाया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलिसकर्मियों की मौत की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है।
पुलिस ने कहा है कि शुक्रवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने रात में अभियान रोक दिया है, इसलिए अभी तक आतंकवादियों के शव बरामद नहीं किए जा सके हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा, क्योंकि माना जा रहा है कि इलाके में दो और आतंकवादी घिरे हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि माना जा रहा है कि वे भी मारे गए हैं, लेकिन ड्रोन से उनके शव नहीं मिल पाए हैं। एसडीपीओ के अलावा दो और पुलिसकर्मियों को कठुआ अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। सेना के दो जवान भी घायल हुए हैं और उन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। -
संसद में नवीन जिंदल ने उठाया अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड तेलों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों का मुद्दा
स्वस्थ भारत की ओर...रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर सख्त नियम जरूरी : नवीन जिंदल
जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा जरूरी : संसद में नवीन जिंदल ने की रिफाइंड तेल और प्रोसेस्ड फूड पर कानूनों को और सख्त करने की अपील
रायपुर। सांसद नवीन जिंदल ने संसद में रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सख्त नियमन, पारदर्शिता, और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि जनता को स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार मिले।
श्री नवीन जिंदल द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु:
✅ रिफाइंड बीज तेलों के दुष्प्रभाव: कई अध्ययनों से पता चला है कि बार-बार किए गए रिफाइनिंग प्रोसेस के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और हानिकारक ट्रांस फैट उत्पन्न होते हैं, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
✅ अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का खतरा: इन खाद्य उत्पादों में अत्यधिक कैमिकल प्रिसरवेटिव, और हानिकारक फैट होते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देते हैं।
✅ स्पष्ट लेबलिंग की कमी: उपभोक्ता अक्सर भ्रामक पैकेजिंग और लेबलिंग के कारण यह समझ ही नहीं पाते कि वे क्या खा रहे हैं।
कानूनों को और सख्त करना जरूरी
???? स्पष्ट खाद्य लेबलिंग अनिवार्य की जाए: श्री जिंदल ने सरकार से आग्रह किया कि खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट रूप से बताया जाए कि वे रिफाइंड तेलों का उपयोग करते हैं या अल्ट्रा प्रोसेस्ड श्रेणी में आते हैं।
???? ‘White Paper’ जारी करने की मांग: उन्होंने सरकार से रिफाइंड तेल और अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों के स्वास्थ्य पर प्रभावों को लेकर एक वाईट पेपर प्रकाशित करने की मांग की, ताकि इस विषय पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गहन अध्ययन हो सके।
???? स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा: पारंपरिक और कोल्ड-प्रेस्ड तेलों, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
श्री नवीन जिंदल ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरकार से उपभोक्ताओं को छिपे हुए स्वास्थ्य खतरों से बचाने और एक प्रभावी खाद्य नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।
-
बेंगलुरु/ छत्तीसगढ़ को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए Keynes Technology के प्रमुख राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की और आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश की योजना प्रस्तुत की। कंपनी उन्नत तकनीक, डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर काम करती है। राजेश शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सरकार की नई औद्योगिक नीति और अनुकूल वातावरण के कारण राज्य में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने यहां नवाचार (Innovation) और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा देने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने Keynes Technology के इस प्रस्ताव का स्वागत किया और राज्य में नई तकनीकी इकाइयों को स्थापित करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया। इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई नौकरियों और आधुनिक तकनीक सीखने के अवसर मिलेंगे, जिससे राज्य तकनीकी क्षेत्र में एक नया केंद्र बन सकेगा।
-
बेंगलुरु/ छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख उद्योगपति मनोज अग्रवाल, जो Punit Creations के प्रमुख हैं, ने राज्य में निवेश का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ को टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
मनोज अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में श्रमशक्ति (लेबर) और अनुकूल औद्योगिक माहौल की वजह से टेक्सटाइल उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार की नीतियों के तहत यदि किसी उद्योग में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है, तो सरकार अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान करेगी। इस पहल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में काम करने के बेहतर अवसर मिलेंगे। -
बेंगलुरु/छत्तीसगढ़ में हरित ईंधन के क्षेत्र में निवेश को लेकर उद्योग जगत की दिलचस्पी बढ़ रही है। बेंगलुरु में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से GPRS Arya Pvt. Ltd. के दीपक अग्रवाल ने मुलाकात कर बताया कि उनकी कंपनी राज्य में पराली से Compressed Bio-Gas (CBG) बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में CBG प्लांट लगाने की योजना है, जिससे किसानों को फसल अवशेषों से अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
कंपनी ने हाल ही में बेमेतरा जिले में इंडियन ऑयल के साथ मिलकर एक CBG प्लांट स्थापित किया है, जो अब पूरी तरह से कार्य करने की दिशा में है। दीपक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस परियोजना के सफल होने के बाद वे छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को अपनाना चाहते हैं। इस पहल से जैविक ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत जैविक ईंधन और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस बैठक में उद्योग जगत के अन्य प्रतिनिधियों ने भी छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर उत्सुकता जताई। -
छत्तीसगढ़ सरकार ने नैसकॉम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा
नई दिल्ली/ छत्तीसगढ़ जल्द ही आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार और नैसकॉम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है, जिससे छत्तीसगढ़ में कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में नैसकॉम के उपाध्यक्ष श्रीकांत श्रीनिवासन व अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की और राज्य की कौशल विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रायपुर देश का ऐसा प्रमुख शहर है, जहां आईआईटी, एनआईटी, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, जो उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल युवा तैयार कर रहे हैं।
नया रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कई आईटी कंपनियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। सरकार बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर नया रायपुर को एक प्रमुख टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत आईटी और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्किलिंग प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि अभी तक 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाता है। इस बैठक के दौरान दिल्ली, मुंबई और रायपुर में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में मिले सकारात्मक प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई। - नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए अधिक वित्तीय आवंटन और धरोहर स्थलों पर नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के लिए त्वरित अदालतें गठित करने की सिफारिश की है। समिति ने पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये की धनराशि के साथ विशेष धरोहर संरक्षण कोष बनाने की भी सिफारिश की है, जिसमें पर्यटन राजस्व, सीएसआर (कंपनी सामाजिक दायित्व) पहल और राष्ट्रीय संस्कृति कोष ढांचे के जरिए सरकारी अनुदान के माध्यम से योगदान दिया जाएगा। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘यह निधि विशेष रूप से संरक्षित स्मारकों पर आपातकालीन संरक्षण आवश्यकताओं और जलवायु के प्रभाव के शमन से जुड़े उपायों के लिए होगी।'' संस्कृति मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम, 1958 के अंतर्गत 3,698 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की देखरेख करता है, जिनमें मंदिर, किले, मकबरे और प्रागैतिहासिक स्थल शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के प्रयासों के बावजूद, जिसमें 2023-24 में बजट में 70 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे 443.53 करोड़ रुपये करना और दिल्ली के बाराखम्बा कब्रिस्तान और हरियाणा के कोस मीनार नंबर 13 जैसे 18 अज्ञात स्मारकों को सूची से हटाना शामिल है, ‘‘अतिक्रमण, जलवायु खतरे और संसाधन में कमी जैसी चुनौतियां बरकरार हैं।'' इन मुद्दों का हल करने के लिए, संसदीय समिति ने ‘‘बहुआयामी रणनीति'' की सिफारिश की है।समिति ने संरक्षित स्मारकों, विशेषकर विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण, पुनरुद्धार और रखरखाव के लिए ‘‘अधिक वित्तीय आवंटन'' की सिफारिश की है।
- नयी दिल्ली. देश में इस साल अधिक गर्मी पड़ने के मौसमी अनुमानों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि भारत को इस गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग में नौ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पिछले साल अखिल भारतीय स्तर पर बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 250 गीगावाट को पार कर गई थी जो अनुमान से 6.3 प्रतिशत अधिक थी। जलवायु परिवर्तन से प्रेरित गर्मी का तनाव बिजली की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। वर्तमान में उद्योग, घरेलू उपभोग और कृषि क्षेत्र की कुल बिजली खपत में क्रमशः 33 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 19 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दिल्ली स्थित शोध संस्थान ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर' में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रमुख दिशा अग्रवाल के मुताबिक, पिछले एक दशक में घरेलू बिजली की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। घरेलू बिजली की खपत का हिस्सा 2012-13 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 25 प्रतिशत हो गया। यह तेजी आर्थिक वृद्धि और बढ़ते तापमान के कारण घरों एवं दफ्तरों को ठंडा रखने की बढ़ती जरूरतों के कारण है। अग्रवाल ने कहा कि 2024 की गर्मियों में रिकॉर्डतोड़ तापमान के बीच कमरे के एयर कंडीशनर की बिक्री में सालाना आधार पर 40-50 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को अब लंबी गर्मी और 9-10 प्रतिशत की बिजली की मांग में वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि यह चरम मांग केवल थोड़े समय तक ही रहेगी।'' अग्रवाल ने कहा कि भारत की बिजली की खपत 2020-21 से सालाना लगभग नौ प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जबकि इससे पहले के दशक में यह पांच प्रतिशत प्रति वर्ष थी। पिछले सप्ताह नैचुरल रिसोर्स डिफेंस काउंसिल की तरफ से आयोजित एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण एयर कंडीशनिंग की मांग बढ़ने को लेकर चिंता जताई। विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के लिए ढांचागत नीति एवं वित्त के प्रबंधक आभास झा ने कहा कि मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य के तहत, भारत में लू चलने के मामले तिगुना होने के आसार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत वैश्विक स्तर पर एयर कंडीशनर (एसी) का सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है। हर 15 सेकंड में भारत में एक एसी बेचा जाता है। देश में एसी की पहुंच वर्तमान में लगभग आठ प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में यह 90 प्रतिशत है। ऐसे में भारत में एसी की पहुंच बढ़ने जा रही है।'' ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की शोध निदेशक ऋषिका खोसला ने कहा, ‘‘संख्या बढ़ने के बावजूद 2050 में दो से पांच अरब लोगों की एयर कंडीशनर तक पहुंच नहीं होगी।'' मौसम विज्ञान विभाग ने मार्च से मई तक चलने वाले गर्मी के मौसम के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अनुमान लगाया है।
-
नयी दिल्ली. आपदा प्रबंधन में आर्थिक सहायता देने में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन के मामले में राष्ट्रीय ही नहीं क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा है तथा इसे दुनिया भी यह स्वीकार कर रही है। उच्च सदन में शाह ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसमें सत्ता के केंद्रीयकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में इस विधेयक में न केवल प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने बल्कि पहले से तैयारी करने, अभिनव प्रयासों वाले और सभी की भागीदारी वाले रवैये को अपनाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्री के जवाब के उच्च सदन ने सरकारी संशोधनों के साथ इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इसके साथ ही सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश संशोधनों को खारिज कर दिया। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा के जोखिमों को घटाने के लिए विश्व के समक्ष जो 10 सूत्री एजेंडा रखा है, उसे 40 देशों ने अपना लिया है और उसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधयक में न केवल राज्य सरकारों बल्कि आम लोगों की भागीदारी का प्रावधान किया गया है। शाह ने कहा, ‘‘पिछले दस सालों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, हम राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरे हैं, यह पूरी दुनिया स्वीकार करती है। भारत की सफलता गाथा को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सफलता गाथा सरकार की नहीं पूरे देश की है।
शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन की लड़ाई संस्थाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ-साथ जवाबदेह बनाये बिना नहीं लड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है। उन्होंने कहा कि आपदा रोकने के लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जाए और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए। उन्होंने वेदों का जिक्र किया और कहा कि इसमें न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष तक को बचाने की बात कही गयी है। गृह मंत्री ने सृष्टि को बचाने के लिए भारत द्वारा प्राचीन समय से किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए हड़प्पा सभ्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने सत्ता के केंद्रीयकरण को लेकर चिंता व्यक्त की है किंतु यदि विधेयक को ध्यान से देखा जाए तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है जो राज्य सरकार के तहत आता है। शाह ने कहा कि विधेयक में कहीं भी संघीय ढांचे को नुकसान करने की संभावना ही नहीं है। चर्चा में कई विपक्षी सदस्यों ने आपदा सहायता के मामले में केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। इसी का जवाब देते हुए शाह ने कहा, ‘‘वित्त आयोग ने आपदा सहायता के लिए एक वैज्ञानिक व्यवस्था की है। इससे एक भी कानी पाई कम किसी भी राज्य को नरेन्द्र मोदी सरकार ने नहीं दी है, बल्कि हमने ज्यादा दिया है।'' विधेयक पर संशोधन लाये जाने की जरूरत को स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यदि किसी इमारत की समय-समय पर मरम्मत न हो तो वह खराब हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम समय की जरूरत के अनुसार कानून में बदलाव करें तो क्या आपत्ति है।'' उन्होंने कहा, ‘‘शायद उनको (विपक्षी सदस्यों को) लगता है कि हम (सत्ता में) आयेंगे तो बदलेंगे तो बहुत देर है...पंद्रह-बीस साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला। जो कुछ करना है, हमें करना है, लंबे समय तक।'' शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं का आकार और स्तर, दोनों बदला है, तो इससे निबटने के तरीके और व्यवस्था भी बदलनी पड़ेगी और संस्थाओं की जवाबदेही तय करनी पड़ेगी एवं शक्तियां देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि केवल इसी उद्देश्य से ही यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर विभिन्न पक्षों से बातचीत की गयी और उनके 89 प्रतिशत सुझावों को मानकर इसे तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में दक्षता, सटीकता, क्षमता, तीव्रता को समाहित करने के लिए यह विधेयक बनाया गया है। शाह ने आपदा प्रबंधन के लिए गुजरात सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में ‘‘शून्य हताहत'' के लक्ष्य को लेकर काम किए गए और इसमें सफलता भी मिली। गृह मंत्री ने कहा कि आज किसानों, मछुआरों सहित समाज के सभी वर्गों को प्राकृतिक आपदाओं के बारे में ऐप के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पर्यावरण संरक्षण के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं और इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ' की उपाधि देकर सम्मानित किया है। शाह ने विपक्ष के कई नेताओं पर कोविड आपदा के समय लोगों को टीकाकरण के मामले में गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोविड आपदा में केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ही नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता मिलकर लड़ रही थी और यही हमारी विजय का कारण है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने घटिया वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से ‘कब्जे' के लिए अनिवार्य गुणवत्ता मानदंड जारी किए हैं। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। कब्जे का इस्तेमाल दरवाजे, खिड़की के पल्ले सहित दो चीजों के इस तरह जोड़ने के लिए किया जाता है, ताकि वे आसानी से घूम भी सकें। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इस साल 21 मार्च को इस संबंध में कब्जा (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2025 जारी किया गया था। इसके तहत अगर इन वस्तुओं पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का निशान न हो, तो उनका उत्पादन, बिक्री, व्यापार, आयात और भंडारण नहीं किया जा सकता है। अधिसूचना में कहा गया कि यह आदेश निर्यात के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित वस्तुओं पर लागू नहीं होगा।
-
नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस साल 28 फरवरी तक डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े 7.81 लाख से ज्यादा सिम कार्ड ब्लॉक किए हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने सदन को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा चिह्नित कुल 2,08,469 आईएमईआई को भारत सरकार ने ब्लॉक कर दिया है। इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) हर फोन को दिया जाने वाला एक विशिष्ट नंबर होता है। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने डिजिटल अरेस्ट के लिए इस्तेमाल किए गए 3,962 से ज्यादा स्काइप आईडी और 83,668 व्हॉट्सऐप अकाउंट की पहचान करके उन्हें ब्लॉक कर दिया है। कुमार ने जवाब में कहा, ‘‘वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए आई4सी के तहत नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली 2021 में शुरू की गई है। अब तक 13.36 लाख से अधिक शिकायतों में लगभग 4,386 करोड़ रुपये बचाए गए हैं।
-
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस' से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। शाह ने कहा कि यह कदम भारत की एकता को मजबूत करेगा। उन्होंने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को बाहर कर दिया है। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में अहम इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं तथा अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें।'' उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ी जीत है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का एक अलगाववादी संगठन है। इसके अधिकतर घटकों पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है।
-
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय संदर्भ के लिए प्रासंगिक सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में नर्सरी कविताओं का एक संग्रह तैयार करने के लिए “बालपन की कविता पहल : छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनर्स्थापित करना” शुरू किया है। यह प्रतियोगिता 22 मार्च से शुरू होकर 22 अप्रैल तक चलेगी। इसमें 3 से 8 आयु वर्ग के बच्चे भाग ले सकते हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में आसानी से समझ में आने वाली और आनंददायक कविताओं के माध्यम से अपने आसपास की दुनिया से परिचित होकर फाउंडेशनल स्टेज पर बेहतर सीख सकें। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल), एमवाईजीऑवी के सहयोग से “बालपन की कविता पहल: छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनःस्थापित करना” में योगदान आमंत्रित कर रहा है। प्रतियोगिता के प्रतिभागी प्री-प्राइमरी (आयु 3-6), ग्रेड 1 (आयु 6-7) और ग्रेड 2 (आयु 7-8) सहित प्रतिभागी तीन श्रेणियों के अंतर्गत लोकसाहित्य में प्रचलित मौजूदा कविताएं (लेखक का नाम बताते हुए) या नई रचित मजेदार कविताएं भी भेज सकते हैं।प्रविष्टियां सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में भी आमंत्रित की जाती हैं। इसमें क्षेत्रीय कविताएं शामिल हो सकती हैं जिनका भारतीय संदर्भ में सांस्कृतिक महत्व हो। प्रतियोगिता 26 मार्च से 22 अप्रैल तक एमवाईजीओवी वेबसाइट पर शुरू हो रही है। इसमें भाग लेने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। प्रतियोगिता के अन्य विवरण एमवाईजीओवी वेबसाइट (https://www.mygov.in/) पर देखे जा सकते हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) का नाम वर्ष 2024-25 के दौरान बदलकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) कर दिया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्लू) देश में दालों, पोषक अनाजों, चावल, गेहूं और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए एनएफएसएनएम को लागू कर रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि एनएफएसएनएम के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन एवं सुरक्षा प्रौद्योगिकियों, फसल प्रणाली आधारित प्रदर्शनों, नई जारी किस्मों/संकरों के प्रमाणित बीजों के उत्पादन एवं वितरण, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन तकनीकों, फसल मौसम के दौरान प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण आदि पर प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।इसके अलावा, भारत सरकार प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत राज्य की विशिष्ट जरूरतों/प्राथमिकताओं के लिए राज्यों को लचीलापन भी प्रदान करती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय मंजूरी समिति (एसएलएससी) की मंजूरी से राज्य पीएम-आरकेवीवाई के तहत मोटे अनाज और बाजरा (श्री अन्न) को बढ़ावा दे सकते हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों के लिए 24 कोचिंग संस्थानों पर 77 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में 600 से अधिक उम्मीदवारों और छात्रों के लिए 1.56 करोड़ रुपये की राशि का रिफंड सफलतापूर्वक सुरक्षित किया है।
छात्रों के लिए 1.56 करोड़ रुपये की राशि का रिफंड सफलतापूर्वक किया सुरक्षितयह जानकारी केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। इसमें बताया गया कि सिविल सेवा, इंजीनियरिंग कोर्स और अन्य कार्यक्रमों के लिए कोचिंग सेंटरों में नामांकित इन छात्रों को पहले कोचिंग संस्थानों द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने के बावजूद सही रिफंड से वंचित किया गया था। विभाग की इस कार्रवाई से छात्रों को अधूरी सेवाओं, देर से आने वाली कक्षाओं या रद्द किए गए पाठ्यक्रमों के लिए मुआवजा प्राप्त करने में मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि वे अनुचित व्यावसायिक प्रथाओं का वित्तीय बोझ नहीं उठा रहे हैं।ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ भी की कार्रवाईसीसीपीए द्वारा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, झूठे और भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत परिभाषित अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य बीआईएस मानकों को पूरा नहीं करने वाले घरेलू प्रेशर कुकर की बिक्री के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।सीसीपीए ने वेबसाइटों पर रिफंड दावों पर स्पष्ट निर्देशों और स्थिति अपडेट करने को कहाइसके अतिरिक्त, सीसीपीए के निर्देशों के अनुसार ट्रैवल कंपनियों ने कोविड-19 लॉकडाउन के कारण रद्द की गई उड़ानों के लिए उपभोक्ताओं को 20 मार्च 2024 तक 1,454 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। सीसीपीए ने यह भी अनिवार्य किया है कि ये कंपनियां रद्द टिकटों से संबंधित रिफंड दावों पर स्पष्ट निर्देशों और स्थिति अपडेट के साथ अपनी वेबसाइटों को अपडेट करें।इसके अलावा सीसीपीए द्वारा पारित आदेशों के आधार पर प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कार सीट बेल्ट अलार्म स्टॉपर क्लिप की 13,118 लिस्टिंग हटा दी गई हैं, ताकि ऐसे सभी उत्पादों को सूची से हटाया जा सके, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार हैं, क्योंकि उक्त उत्पाद की बिक्री या विपणन सीट बेल्ट न पहनने पर अलार्म बीप बंद करके उपभोक्ता के जीवन और सुरक्षा के साथ समझौता करता है। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि कश्मीर में अब अलगाववाद इतिहास बनकर रह गया है। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, एकीकरण की मोदी सरकार की नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी रिश्ते तोड़ने की घोषणा की है। श्री अमित शाह ने कहा कि वह भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करते हैं और ऐसे सभी समूहों से अनुरोध करते हैं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म करें। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत बनाने के विजन की बड़ी जीत है।
-
नई दिल्ली। नया इनकम टैक्स बिल संसद के अगले सत्र यानी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दी। नया इनकम टैक्स बिल-2025 छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट-1961 का स्थान लेगा। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों को सरल बनाएगा, अस्पष्टताएं दूर करेगा और कर विवादों को कम करेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें स्पष्टता के लिए पाठ्य और संरचनात्मक सरलीकरण, निश्चितता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कर नीति में कोई भी बदलाव नहीं और करदाताओं के लिए पूर्वानुमान को बनाए रखने के लिए कर दरों में कोई संशोधन नहीं शामिल हैं।ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित, इस बिल का उद्देश्य कर नियमों में स्पष्टता प्रदान करके व्यापार में आसानी लाना है। नए इनकम टैक्स बिल में शब्दों की संख्या को घटाकर 2,59,676 कर दिया गया है। यह आंकड़ा पुराने इनकम टैक्स बिल में 5,12,535 पर था।आधिकारिक सरकारी बयान में कहा गया कि नए इनकम टैक्स बिल में चैप्टर्स की संख्या को घटाकर 23 कर दिया गया है, जबकि पुराने इनकम टैक्स बिल में यह संख्या 47 थी। इसके अलावा सेक्शंस की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है।इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए इनकम टैक्स बिल-2025 से देश में टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा और इसके साथ ही इससे करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा।सरकार ने आयकर विधेयक 2025 को 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जो मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। इस विधयेक का उद्देश्य 1961 के अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों को बड़े पैमाने पर संरक्षित करते हुए भाषा को सुव्यवस्थित करना और दक्षता बढ़ाने के लिए पुराने प्रावधानों को हटाना है। -
नई दिल्ली। भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह मेक इन इंडिया पहल से प्रेरित होकर 2014-15 से 174% की वृद्धि दर्शाता है। रक्षा बजट में 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपए से 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए तक की वृद्धि, सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देश के दृढ़ संकल्प को उजागर करती है।
देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापितदरअसल, देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ा है। कभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला हमारा देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है और अब घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। यह बदलाव आत्मनिर्भरता के प्रति मजबूत वचनबद्धता को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि एक मजबूत रक्षा उद्योग का निर्माण भी करे जो आर्थिक विकास में योगदान देता हो।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए सरकार है प्रतिबद्धताआत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए यह प्रतिबद्धता सरकार की हाल ही में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) की खरीद को दी गई मंजूरी में परिलक्षित होती है, जो सेना की मारक क्षमता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सौदे में 155 मिमी/52 कैलिबर की 307 इकाइयों के साथ 327 हाई मोबिलिटी 6×6 गन टोइंग वाहन शामिल हैं।यह 7,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित व निर्मित (आईडीडीएम) श्रेणी के तहत 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को सुसज्जित करेंगे। भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ डीआरडीओ द्वारा विकसित एटीएजीएस एक अत्याधुनिक तोपखाना प्रणाली है, जिसमें 40+ किलोमीटर रेंज, उन्नत फायर कंट्रोल, सटीक लक्ष्यीकरण, स्वचालित लोडिंग तथा रिकॉइल प्रबंधन है, जिसका भारतीय सेना द्वारा सभी इलाकों में गहन परीक्षण किया गया है।स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल कीगौरतलब हो, सभी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा वस्तुएं बनाने वाली अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन का मूल्य बढ़कर 1,27,265 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174% की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है।देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ाआपको बता दें, इस वृद्धि को मेक इन इंडिया पहल से बल मिला है, जिसने धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम, एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन, लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल्स, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), आकाश मिसाइल सिस्टम, वेपन लोकेटिंग रडार, 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार और सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) सहित उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों के विकास को सक्षम किया है। इसके साथ ही विध्वंसक, स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बियां, फ्रिगेट, कोरवेट, फास्ट पेट्रोल वेसल, फास्ट अटैक क्राफ्ट तथा ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसी नौसैनिक संपत्तियां भी विकसित की हैं।
65 प्रतिशत रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर बन रहें हैंअब 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर निर्मित किए जाते हैं, जो पहले की 65-70% आयात निर्भरता से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई शामिल हैं, जो स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करते हैं। वहीं, निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कुल रक्षा उत्पादन में 21% का योगदान देता है और नवाचार एवं दक्षता को बढ़ावा देता है। भारत ने 2029 तक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जिससे वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।रक्षा निर्यात में अभूतपूर्व बढ़ोतरीभारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक की तुलना में 30 गुना वृद्धि को दर्शाता है। रक्षा निर्यात में साल-दर-साल 32.5% की बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 15,920 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए हो गया।भारत के विविध निर्यात पोर्टफोलियो में बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर (डीओ-228) विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तीव्र गति की इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो शामिल हैं।उल्लेखनीय है कि ‘मेड इन बिहार’ का उपयोग अब रूसी सेना के साजो-सामान का हिस्सा है, जो भारत के उच्च विनिर्माण मानकों को दर्शाता है।भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता हैंभारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है, जिसमें 2023-24 में अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया शीर्ष खरीदार के रूप में उभरे। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होगी।रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में सरकारी पहलआपको बता दें, हाल के वर्षों में, केंद्र सरकार ने देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी गतिविधियों को क्रियान्वित किया है। ये उपाय निवेश आकर्षित करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने और खरीद प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमाओं को उदार बनाने से लेकर स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देने तक, ये पहल भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।निम्नलिखित बिन्दु उन प्रमुख सरकारी पहलों को रेखांकित करते हैं, जो रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।* उदारीकृत एफडीआई नीति– विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सितंबर 2020 में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाया गया था, जिससे स्वचालित मार्ग से 74% तक और सरकारी मार्ग से 74% से अधिक एफडीआई की अनुमति मिल गई। अप्रैल 2000 से रक्षा उद्योग में कुल एफडीआई 21.74 मिलियन डॉलर है।* टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स– अक्टूबर 2024 में सी-295 विमान के निर्माण के लिए वडोदरा में टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया, जिससे कार्यक्रम के तहत 56 में से 40 विमान भारत में निर्मित होने के साथ रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।* मंथन– बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2025 के दौरान आयोजित वार्षिक रक्षा नवाचार कार्यक्रम मंथन ने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों के प्रमुख नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शिक्षाविदों, निवेशकों तथा उद्योग जगत के अधिकारियों को एक साथ लाया, जिससे तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में विश्वास की पुष्टि हुई।* रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (डीटीआईएस)- डीटीआईएस का उद्देश्य एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आठ ग्रीनफील्ड परीक्षण और प्रमाणन सुविधाएं स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें मानव रहित हवाई प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स तथा संचार जैसे क्षेत्रों में सात परीक्षण सुविधाएं पहले से ही स्वीकृत हैं।* घरेलू खरीद को प्राथमिकता– रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)-2020 के तहत घरेलू स्रोतों से पूंजीगत वस्तुओं की खरीद पर जोर दिया गया है।* घरेलू खरीद आवंटन– रक्षा मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आधुनिकीकरण बजट का 75% यानि 1,11,544 करोड़ रुपये घरेलू उद्योगों के माध्यम से खरीद के लिए निर्धारित किया है।दरअसल, रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उल्लेखनीय प्रगति इसके आत्मनिर्भर तथा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सैन्य विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तन को रेखांकित करती है। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से देश की रक्षा क्षमताओं में काफी तेजी आई है। -
नई दिल्ली। भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के लिए एक ग्लोबल ट्रांजिट हब बनने की प्रबल संभावना है। इसकी वजह, देश का रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर होना और बढ़ता हुआ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह बयान ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) की अध्यक्ष, अरुणा सुंदरराजन ने मंगलवार को दिया।
सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरतउन्होंने कहा कि बढ़ती हुई डेटा खपत को पूरा करने के लिए सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। सुंदरराजन ने कहा, “भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के एक ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में उभरने की प्रबल संभावना है। इसके लिए हमें अपने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाना होगा।”सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता हैराष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल सबमरीन केबल सिस्टम कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर सबमरीन केबल नेटवर्क को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जहां भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। इस इवेंट में, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता है।भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैउन्होंने बताया कि हाल ही में ग्लोबल केबल नेटवर्क में आई रुकावटों ने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर के महत्व को उजागर किया। भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है,जिसके अंतर्गत लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल नेटवर्क मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में मौजूद 14 लैंडिंग स्टेशनों से जुड़े हुए हैं।भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई हैटाटा कम्युनिकेशंस, भारती एयरटेल, ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज और बीएसएनएल जैसी भारतीय दूरसंचार कंपनियां इन महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। हाल ही में, भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इसके अलावा, दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा ने ‘प्रोजेक्ट वाटरवर्थ’ शुरू किया है। इसके तहत भारत, अमेरिका, ब्राजील और साउथ अफ्रीका को जोड़ते हुए एक सबमरीन केबल नेटवर्क बिछाया जाएगा। -
नई दिल्ली। भारत 1998 से दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और अब वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले 10 वर्षों में दूध उत्पादन में 63.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में दूध उत्पादन 2014-15 के दौरान 146.3 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 के दौरान 239.2 मिलियन टन हो गया है।
दूध उत्पादन में पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है, जबकि विश्व में दूध उत्पादन 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले दशक में 48 प्रतिशत बढ़ी है, जो वर्ष 2023-24 के दौरान 471 ग्राम/व्यक्ति/दिन से अधिक है, जबकि दुनिया में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 322 ग्राम/व्यक्ति/दिन है।पशुपालन और डेयरी विभाग देश भर में निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है-–राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी): एनपीडीडी को निम्नलिखित 2 घटकों के साथ कार्यान्वित किया जाता है:एनपीडीडी का घटक ‘ए’ राज्य सहकारी डेयरी संघों/जिला सहकारी दूध उत्पादक संघों/स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)/दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों के लिए गुणवत्तायुक्त दूध परीक्षण उपकरणों के साथ-साथ प्राथमिक शीतलन सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे के सृजन/सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित है।एनपीडीडी योजना के घटक ‘बी’ “सहकारिता के माध्यम से डेयरी” का उद्देश्य संगठित बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन बुनियादी ढांचे को उन्नत करके और उत्पादक स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि करके दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री में वृद्धि करना है।–डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एसडीसीएफपीओ) को सहायता प्रदान करना: राज्य डेयरी सहकारी संघों को गंभीर प्रतिकूल बाजार स्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के संबंध में ब्याज अनुदान प्रदान करके सहायता प्रदान करना।–पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ): एएचआईडीएफ को व्यक्तिगत उद्यमियों, डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, निजी कंपनियों, एमएसएमई और धारा 8 कंपनियों द्वारा पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए उनके निवेश के लिए अनुसूचित बैंकों द्वारा स्थापित पात्र परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना, पशु चारा विनिर्माण संयंत्र, नस्ल सुधार प्रौद्योगिकी और नस्ल गुणन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा टीका और दवा उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं।–राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम): गोवंशीय पशुओं के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सरकार देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा गोवंशीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन का क्रियान्वयन कर रही है।–राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम): उद्यमिता विकास के लिए व्यक्ति, एफपीओ, एसएचजी, धारा 8 कंपनियों और नस्ल सुधार बुनियादी ढांचे के लिए राज्य सरकार को प्रोत्साहन प्रदान करके मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सूअर पालन में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार पर तीव्र ध्यान केंद्रित करना।–पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी): इसका उद्देश्य पशु रोगों के विरुद्ध रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता निर्माण, रोग निगरानी तथा पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।पशुपालन एवं डेयरी विभाग लोगों को दूध के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूक करने के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से लगातार सोशल मीडिया अभियान चला रहा है। इन अभियानों में जागरूकता पोस्ट, इन्फोग्राफिक्स, रील्स और हैशटैग और डिजिटल आउटरीच के माध्यम से जुड़ाव शामिल हैं। -
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने आज पहली बार एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। जिसमें बुनियादी ढांचा मजबूत करने, यमुना की सफाई, महिला सम्मान योजना, प्रदूषण से राहत देने के साथ ही औद्योगिक विकास के लिए अहम प्रावधान किए गए। इसके साथ ही दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 लाख रुपये का इलाज मुफ्त करने का प्रावधान भी बजट में किया गया है। 100 करोड़ रुपये के बजट से 100 झुग्गी झोपड़ी कॉलोनियों में अटल कैंटीन की स्थापना कर जरूरतमंदों को सस्ता और पौष्टिक भोजन प्रदान करने की घोषणा भी बजट में की गई।
दिल्ली के बजट में 30 फीसदी से ज्यादा इजाफादिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये खर्च का बजट पेश किया। चालू वित्त वर्ष के लिए दिल्ली का बजट 76 हजार करोड़ रुपये है। इस हिसाब से आगामी वित्त वर्ष के बजट में 31.5 फीसदी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में 78,800 करोड़ का बजट पेश किया गया था, जो 2024-25 का घटकर 76 हजार करोड़ रह गया। ये दिल्ली में सबसे खराब स्थिति थी। इस बार का दिल्ली का बजट एक लाख करोड़ रुपए का है, जो ऐतिहासिक है।महिला सम्मान और आयुष्मान भारत के लिए आवंटनमहिला समृद्धि योजना के लिए बजट में 5100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इसके जरिए दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए दिए जाएंगे। आयुष्मान योजना के लिए 2,144 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है। केंद्र सरकार से 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज तो मिलेगा ही। साथ ही दिल्ली सरकार भी इसमें अपनी ओर से 5 लाख रुपए जोड़ रही है। इससे दिल्ली में अब आयुष्मान योजना के तहत 10 लाख का इलाज मुफ्त मिलेगा। मातृत्व वंदन परियोजना के लिए 210 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को एकमुश्त 21 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए 50 हजार अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे।बजट में नई औद्योगिक नीति लाने का ऐलानमुख्यमंत्री गुप्ता ने अपने बजट भाषण में कहा कि दिल्ली कभी व्यापार, संस्कृति और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र थी। आज कुप्रबंधन की शिकार है। कोई अधिकारी जाकर व्यापारी को धमका देता है। अब हमने संकल्प लिया है कि दिल्ली को देश का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाएंगे। हम नवाचार, औद्योगिक क्रांति की नींव रख रहे हैं। ये बजट नीतियों की घोषणा नहीं है, व्यापारियों, स्टार्टअप को सुविधाएं देने का रोड मैप है। हमारी सरकार नई औद्योगिक नीति लेकर आएगी। इससे औद्योगिक मुद्दों का समाधान होगा। एक नई वेयर हाउसिंग पॉलिसी को नया रूप दिया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम लाया जाएगा। डीडीए के साथ बात करके लीज वाली इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने का काम करेंगे।बजट में दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की घोषणादिल्ली के बजट में राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन करने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि हर दो साल में एक बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाए। अब फाइलों में योजनाएं नहीं अटकेंगी, बल्कि जमीन पर उद्योग फूले-फलेंगे।यमुना और सीवर की सफाई के लिए 9 हजार करोड़ रुपये का बजटबजट में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यमुना की सफाई के अहम मुद्दे का भी ख्याल रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा दिल्ली में यमुना गंदी है और तकलीफ की बात है। लेकिन अब स्वच्छता, स्वच्छ पानी और स्वच्छ यमुना दिल्ली की नई पहचान बनेगी। दिल्ली में हर नागरिक को साफ पानी और सफाई उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए बजट में 9 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह पुरानी सरकारों से तिगुना है।



















.jpg)
.jpg)




.jpg)
.jpeg)
.jpg)