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- नई दिल्ली। एक अहम कूटनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से द्विपक्षीय बातचीत की। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की दिशा में ट्रंप के नेतृत्व प्रयासों की सराहना की और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।वैश्विक समुद्री मार्गों में भारत के रणनीतिक हितों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बेहतर सहयोग की वकालत की। पीएम मोदी ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने हमेशा नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया है, और हमें इस मुद्दे पर मिलकर काम करना चाहिए। दुनिया भर में, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, लाखों नाविक अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”प्रधानमंत्री की बातों का जवाब देते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। मौजूदा प्रशासन के तहत नई दिल्ली के भू-राजनीतिक प्रभाव पर जोर देते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब तक प्रधानमंत्री मोदी नेता हैं, पश्चिम एशिया में भारत की बड़ी भूमिका है।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की भी सराहना की और अमेरिका में भारत के निवेश का जिक्र किया।अमेरिकी बाजार में भारतीय व्यावसायिक उपस्थिति के पैमाने की तारीफ करते हुए, ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बहुत कुछ बना रहे हैं। वह अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं।” फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने यह बात कही। ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ अपने व्यक्तिगत अच्छे संबंधों पर भी जोर दिया और कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि वह लंबे समय से मेरे दोस्त रहे हैं। आपके साथ होना बहुत अच्छा है। बहुत-बहुत धन्यवाद।” दोनों नेताओं ने मंगलवार को G7 नेताओं की बैठक में मुलाकात की, एक-दूसरे का हाल-चाल जाना और संक्षिप्त बातचीत की। यह 16 महीनों में उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।यह कूटनीतिक मुलाकात पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष अब द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की पिछली आमने-सामने की मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी, जो ट्रंप के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह के कुछ हफ़्ते बाद थी। इसके बाद, ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने और बाद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म करने के उनके दावे के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया।
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उदयपुर (राजस्थान). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि आक्रमणकारियों के खिलाफ निरंतर प्रतिरोध का है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और विदेश में भारत के उत्थान को रोकने के लिए झूठे विमर्श गढ़े जा रहे हैं। भागवत हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ''आज भारत को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिशें हो रही हैं। झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत के उत्थान का विरोध करने वाले लोग जनसंख्या, शक्ति, आर्थिक संसाधन और संगठनात्मक क्षमता रखते हैं, फिर भी हमें अपने मूल्यों के आधार पर दृढ़ रहना होगा।'' भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक संकल्प का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ''वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें अपने आदर्शों और सभ्यतागत मूल्यों पर टिके रहना होगा।'' भागवत ने राजपूत शासक महाराणा प्रताप की विरासत और ऐतिहासिक हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए इसे भारत के सभ्यतागत प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, ''हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ संघर्ष का है जिन्होंने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की।'' भागवत ने कहा, ''महाराणा प्रताप ने अत्याचारों के खिलाफ, धर्म और संस्कृति के लिए तथा अपनी भूमि की स्वतंत्रता के लिए युद्ध किया।'' आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन ऐतिहासिक महापुरुषों से सीख लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और संकल्प पर अडिग रहकर संघर्ष किया। भागवत ने कहा कि भारत की शक्ति केवल उसकी जनसंख्या या भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके सभ्यतागत मूल्यों में निहित है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और संकीर्ण पहचान की सीमाओं से ऊपर उठने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा, ''हमें उसी प्रकार एकजुट रहना चाहिए, जैसे मेवाड़ की जनता महाराणा प्रताप के साथ खड़ी रही थी। भारत की प्रगति के लिए हमें मिलकर कार्य करना होगा।'' हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि इसे केवल एक सैन्य संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक लड़ाई नहीं था। यह विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय समाज के दीर्घकालीन संघर्ष का प्रतीक था।'' भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप इस युद्ध में विजयी होकर उभरे थे।
उन्होंने कहा, ''विभिन्न आक्रमणकारी आए, कुछ ने सत्ता भी प्राप्त की, लेकिन भारत ने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर कभी भी गुलामी को स्वीकार नहीं किया। इतिहास के कठिन दौर में भी भारत ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा। हमने अच्छे और बुरे दोनों समय देखे हैं, लेकिन हमारा धर्म और हमारी संस्कृति अक्षुण्ण बनी रही।'' भागवत ने कहा कि भारत का उत्थान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है और एक सशक्त भारत दुनिया के लिए भी आवश्यक है। हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 को मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की ओर से आमेर के राजा मानसिंह के नेतृत्व वाली सेना के बीच लड़ा गया था। कई इतिहासकारसें का मानना है कि इसमें मुगलों को सामरिक जीत मिली। वहीं, कुछ इतिहासकार इसे अनिर्णायक युद्ध मानते हैं, क्योंकि मुगल महाराणा प्रताप को पकड़ने या मेवाड़ को पूरी तरह अपने अधीन करने में असफल रहे। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर मुगलों का लगातार प्रतिरोध किया। -
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को यहां मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास में स्थानांतरित हो गए। नवीन के नये आवास (टाइप-8 बंगला) पर उनके करीबी परिजनों की उपस्थिति में 'गृह प्रवेश' समारोह आयोजित किया गया। यह बंगला (1, मोतीलाल नेहरू मार्ग) पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को आवंटित था।
इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, अर्जुन राम मेघवाल, किरेन रीजीजू तथा जी किशन रेड्डी सहित भाजपा के कई नेता नितिन नवीन के आवास पर पहुंचे। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसदों के अलावा भाजपा के कई अन्य नेता भी नवीन के सरकारी आवास पर पहुंचे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के नेता भी इस अवसर पर मौजूद रहे, जिनमें जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। नवीन 20 जनवरी को निर्विरोध चुने जाने के बाद केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा के स्थान पर भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। वे बिहार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और मार्च में राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। - नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा की कि 'दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026' को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर रहने वाले चार लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर महीने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित कम से कम पांच पुनर्वास परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी करनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी वासियों के पुनर्वास को लेकर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को 45 दिनों के भीतर पांच झुग्गी बस्तियों के लिए निविदाएं जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिरिक्त 50 झुग्गी बस्तियों के लिए परियोजना दस्तावेज और निविदा प्रपत्र तैयार करने के भी निर्देश दिए। शाह ने कहा कि झुग्गी बस्तियों के लिए पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए।बैठक में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधु, दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता तथा अन्य वरिष्ठ मंत्री तथा अधिकारी शामिल हुए।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले 12 वर्षों में आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है और अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाओं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आदि को बेहतर बनाने के लिए काम किया है। अपनी सरकार को 'मध्यम वर्ग की सरकार' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि इस वर्ग ने अनगिनत तरीकों से राष्ट्र-निर्माण में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''पिछले एक दशक में शासन का ध्यान लगातार आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित रहा है। हमारे प्रयास अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाएं, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ शहरों और दैनिक जीवन में बोझ कम करने आदि का है।'' केंद्र सरकार के नागरिकों से जुड़ने के मुख्य मंच 'माई जीओवी इंडिया' में कहा गया है कि मोदी के नेतृत्व में, पिछले 12 सालों में भारत के मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है। इसमें बेहतर आधारभूत ढांचा, बेहतर संपर्क, कर में राहत और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार का अहम योगदान रहा है। इसमें कहा गया है कि बेहतर परिवहन से लेकर मज़बूत डिजिटल पहुंच तक, देश भर के लाखों परिवारों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी ज़्यादा आसान और अवसरों से भरी हो गई है। 'माई जीओवी इंडिया' के अनुसार, ग्रामीण और शहरी भारत में इंटरनेट के विस्तार के साथ संपर्क अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। इसमें कहा गया है कि 103 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन और डेटा की कीमतों में भारी कमी के कारण अब नागरिक बहुत कम खर्च में शिक्षा, रोज़गार के अवसर, डिजिटल पेमेंट और मनोरंजन का आसानी से लाभ उठा पा रहे हैं। 'माई जीओवी इंडिया' ने कहा है कि वंदे भारत सेवाओं के विस्तार से रेल यात्रा तेज़ और ज़्यादा आरामदायक हो गई है। 164 ट्रेन और नौ करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को सेवा देने के साथ, मुख्य मार्गों पर यात्रा का समय काफ़ी कम हो गया है। इसमें कहा गया, ''बेहतर राजमार्गों और आसान टोल प्रणाली की वजह से भारत का सड़क आधारभूत ढांचा अच्छा हो गया है, जिससे यात्रा जल्दी पूरी होती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील से प्रेरित होकर महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पुलगांव निवासी सतीश गौरीशंकर चौबे के परिवार ने बेटे के विवाह में सोने की आभूषण नहीं खरीदने का निर्णय किया है। चौबे परिवार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं से दशकों पहले महाराष्ट्र आकर बस गया था। सतीश के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे यश का विवाह एक जुलाई को होना है। इस संबंध में सतीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिवार के फैसले की जानकारी दी। सतीश ने बताया कि होने वाली बहू के लिए नया मंगलसूत्र खरीदने पर चर्चा चल रही थी, लेकिन उनकी पत्नी सीमा ने अपना ही मंगलसूत्र पॉलिश और मरम्मत करवाकर बहू को उपहार स्वरूप देने का फैसला किया। पत्र में सतीश चौबे ने लिखा कि यह केवल धन बचाने का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में जिम्मेदार खर्च की भावना को अपनाने का प्रयास है। परिवार ने प्रधानमंत्री को भी विवाह में शामिल होने का न्यौता दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई को हैदराबाद की एक रैली में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक वर्ष तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने तथा ईंधन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील की थी।
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नयी दिल्ली. भारतीय ध्वज वाला एलएनजी से भरा जहाज 'दिशा' तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला जहाज बन गया है। भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (एससीआई) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा प्रबंधित यह जहाज 62,370 टन एलएनजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आगे बढ़ चुका है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, "एलएनजी पोत 'दिशा' सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और यह 62,370 टन एलएनजी लेकर आ रहा है। इसके 18 जून के आसपास भारत के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।" मंत्रालय ने कहा कि नौवहन महानिदेशालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार समन्वय में है। मंत्रालय के मुताबिक, स्थापित नियंत्रण कक्ष ने पिछले 96 घंटों में 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटान किया है। इस दौरान नाविकों, उनके परिवारों और अन्य समुद्री हितधारकों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि महानिदेशालय ने अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिनमें पिछले 96 घंटे में 50 नाविक शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि देशभर में बंदरगाह परिचालन सामान्य हैं और कहीं से भी जाम की स्थिति की सूचना नहीं है।
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भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को 12वीं कक्षा की राज्य बोर्ड परीक्षा की टॉपर चांदनी विश्वकर्मा से मिलने के लिए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से यहां एक झुग्गी बस्ती स्थित उसके घर पहुंचे और उसे उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। भोपाल के भीमनगर क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय चांदनी विश्वकर्मा ने इस वर्ष मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। यादव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भगवानदास सबनानी के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर से चांदनी के घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की संकरी गलियों से होकर सफर किया। मुख्यमंत्री ने चांदनी को उसकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि उसकी उपलब्धि ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यादव ने बाद में कहा कि उनकी चांदनी और उसके परिवार से आत्मीय मुलाकात हुई तथा उन्होंने उनके साथ 'सेल्फी' भी ली। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद चांदनी ने परिश्रम, समर्पण और दृढ़ संकल्प के बल पर यह सफलता हासिल की है, जो प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भीमनगर तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का उनका अनुभव अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम ईंधन संरक्षण में सहायक होते हैं और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करते हैं।
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शांति बहाल होने की उम्मीद जताई
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का सोमवार को स्वागत किया, साथ ही उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति बहाल करने और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान ने अपने 107 दिन लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार, इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, '' मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति को अमल में लाने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नौवहन व व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बाकी मुद्दों पर बातचीत से एक टिकाऊ समझौता हो सकेगा। -
आगरा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को जोर देकर कहा कि भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन यह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों से अच्छी तरह से निपटने में पूर्ण रूप से सक्षम है। यहां महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, "हम शांति चाहने वाले लोग हैं, लेकिन जो लोग अशांति फैलाते हैं, उन्हें स्थायी रूप से शांत करना हमें आता है।" राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार की यह कहते हुए आलोचना की कि 2014 से पहले आतंकवादी हमले आम थे और उस समय के राजनेता आतंकवाद के प्रति नरम रवैया अपनाते थे। उन्होंने कहा, "आज हमारे सशस्त्र बलों को पूरी स्वतंत्रता है। यदि कोई आतंकवादी हमला होता है तो आतंकवादियों को खत्म कर दिया जाता है। यदि उन्हें खत्म करने के लिए सीमा पार करना आवश्यक है तो यह भी किया जाना चाहिए।" अर्थव्यवस्था को लेकर सिंह ने कहा कि भारत फिलहाल विश्व की सबसे तेजी से प्रगति कर रही अर्थव्यवस्था वाला देश है और यह एक प्रमुख विनिर्माण स्थल के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, "आईफोन का विनिर्माण भारत में किया जा रहा है और पूरे विश्व को इसकी आपूर्ति की जा रही है। वर्ष 2014 से पहले निराश और हताश रहा भारत अब उम्मीद, ऊर्जा, विश्वास और संकल्प से परिपूर्ण है।" सिंह ने कहा, "इस बदलाव के पीछे का कारण लोगों का विश्वास और इस सरकार का सही इरादा एवं नीतियां हैं।"
महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि महान शासक की बहादुरी और बलिदान किसी सरकार या इतिहासकार की मंजूरी की मोहताज नहीं है। सिंह ने कहा, "अकबर चला गया, मुगल चले गए और यहां तक कि उनके वंशज भी इतिहास के पन्नों में खो गए। लेकिन महाराणा प्रताप हर भारतीय के दिल में बसे हुए हैं।" महाराणा प्रताप को सिर्फ एक राजा से कहीं बढ़कर बताते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व किया जो आत्म सम्मान और मूल्यों से कभी समझौता नहीं करता। सिंह ने कहा कि उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया, लेकिन मुगलों के सामने कभी नहीं झुके।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने हल्दीघाटी की पीली मिट्टी को दुश्मनों के खून से लाल कर दिया। सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन यह शिक्षा देता है कि राष्ट्र और इसके लोगों की गरिमा से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, "इसी विचार के मार्गदर्शन पर हमने भारत का गौरव बढ़ाने और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए पिछले 12 वर्षों से काम कर रहे हैं।" आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में सिंह ने कहा कि एक दशक पूर्व कोई कल्पना भी कर सकता था कि भारत नक्सली हिंसा से मुक्ति की दिशा में बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलियों ने निर्दोष लोगों और सुरक्षा कर्मियों का खून बहाया और हिंसा की वजह से उद्योग स्थापित नहीं हुए, सड़कों का निर्माण नहीं किया जा सका और स्कूल नहीं चल सके। -
सोलापुर (महाराष्ट्र). सोलापुर जिले की मालशिरस तहसील में रविवार को एक पिकअप वैन सड़क किनारे बने कुएं में गिर गई, जिससे चार बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हुए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना तंदुलवाड़ी गांव के निकट हुई और वाहन में 15 लोग सवार थे।
सोलापुर के पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी ने बताया, ''शुरुआती जानकारी के मुताबिक 15 लोगों को ले जा रही एक पिकअप वैन का चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा, और वाहन सड़क किनारे बने एक कुएं में गिर गया। इस हादसे में चार महिलाओं और चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हुए हैं।'' उन्होंने बताया कि वाहन को कुएं से बाहर निकाला जा रहा है और घायलों को अस्पताल ले जाया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुर्घटना में हुई मौतों पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। फडणवीस ने बताया कि सात लोगों को बचाया गया है और अभी उनका इलाज जारी है।
उन्होंने कहा कि सोलापुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे और राज्य सरकार हालात पर नजर रखने के लिए स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। - पणजी. गोवा सरकार द्वारा नियुक्त जीवनरक्षक एजेंसी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से मानसून के दौरान समुद्र में न जाने की अपील की। एजेंसी ने कहा कि इस मौसम में स्थिति कभी भी अचानक बदल सकती है और हालात खतरनाक हो सकते हैं। 'दृष्टि मरीन' जीवनरक्षक एजेंसी ने शुक्रवार को जारी एक परामर्श में कहा कि मानसून के दौरान समुद्र में तैराकी और तटीय जल क्रीड़ा गतिविधियों पर रोक है। पर्यटकों की सहायता और आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए राज्य के 54 समुद्र तटों पर 450 से अधिक प्रशिक्षित जीवन रक्षकों और बीच मार्शल तैनात किए गए हैं।इनमें दक्षिण गोवा के 30 और उत्तर गोवा के 24 समुद्र तट शामिल हैं।बयान में बताया गया कि समुद्र तटों के अलावा मायेम झील, दूधसागर जलप्रपात, सवरी जलप्रपात और म्होवाचो गुनो में भी जीवन रक्षक तैनात किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, लोगों को पानी में उतरने से रोकने और खतरे के प्रति आगाह करने के लिए गोवा के विभिन्न समुद्र तटों पर लाल झंडे लगाए गए हैं। 'दृष्टि मरीन' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नवीन अवस्थी ने बताया, "मानसून के दौरान समुद्र एक पल शांत दिखाई दे सकता है और अगले ही पल खतरनाक हो सकता है। तेज धाराएं, ऊंची लहरें और तेजी से बदलता मौसम सामान्य से दिखते पानी को भी असुरक्षित बना देता है।" उन्होंने कहा कि सबसे सुरक्षित विकल्प यही है कि लोग पानी में जाने से बचें और समुद्र तटों पर जारी सभी सुरक्षा सलाहों का पालन करें।
- लातेहार/गोड्डा. झारखंड के लातेहार और गोड्डा जिलों में शनिवार को हुई दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। लातेहार में सदर थाना क्षेत्र के खुटगढ़ी गांव के पास एक मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहन की आमने-सामने की भिड़ंत में दो भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। सदर थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने कहा, ''मृतकों की पहचान चंदवा थाना क्षेत्र के मूर्तिया गांव निवासी बीरेंद्र लोहरा और सुरेंद्र लोहरा के रूप में हुई है। दोनों मोटरसाइकिल से लातेहार शहर जा रहे थे, जबकि कार विपरीत दिशा से आ रही थी। प्रारंभिक तौर पर दुर्घटना तेज रफ्तार के कारण होने की आशंका है।मोटरसाइकिल सवारों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।'' उन्होंने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। चारपहिया वाहन घटनास्थल पर लावारिस अवस्था में मिला और उसके चालक की तलाश के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। दोनों वाहनों को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। एक अन्य दुर्घटना में गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र स्थित बसुआ चौक के पास सुबह की सैर पर निकले 55 वर्षीय एक व्यक्ति को पीछे से आ रही एक पिकअप वैन ने कुचल दिया। महागामा थाना प्रभारी मनोज कुमार पाल ने बताया, ''मृतक की पहचान उसी क्षेत्र की रविदास कॉलोनी के निवासी अर्जुन रविदास के रूप में हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।'' उन्होंने कहा, ''दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पिकअप वैन को जब्त कर लिया गया है और चालक की गिरफ्तारी के लिए तलाश अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।''
- भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ससुराल - पहाड़पुर गांव - का दौरा करेंगे और कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति मुर्मू के दिवंगत पति श्याम चरण मुर्मू के पैतृक गांव पहाड़पुर रायरंगपुर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रायरंगपुर में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। मुर्मू का जन्म रायरंगपुर उपखंड के उपरबेड़ा गांव में हुआ था और उनका विवाह पहाड़पुर निवासी श्याम चरण मुर्मू से हुआ था। वर्ष 2022 में राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले ही उनके पति और दो बेटों का निधन हो गया था।गांव में मुर्मू के पति और बेटों की याद में एक स्मारक बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 20 जून को रायरंगपुर के डंडाबोश में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, नए बुनियादी ढांचा कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी और गणमान्य व्यक्ति एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
- नयी दिल्ली. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कर रही 'नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड' (एनएचएसआरसीएल) ट्रेनों के परिचालन के दौरान पैदा होने वाली तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए आठ पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर कुल 16 वेंटिलेटेड हुड (हवादार संरचनाएं) बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक भारत में पहली बार इस्तेमाल की जा रही है, क्योंकि मौजूदा रेलवे सुरंगों में 'वेंटिलेटेड हुड' की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी वजह यह है कि पारंपरिक ट्रेनें अपेक्षाकृत काफी कम गति से चलती हैं।बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। लगभग 500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात तथा गुजरात में एक, कुल आठ पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं। परियोजना से जुड़े एक विशेषज्ञ ने बताया कि जब कोई तेज रफ्तार ट्रेन किसी सुरंग में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धकेलती है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे किसी सिलेंडर के भीतर पिस्टन आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, ''हवा के इस अचानक दबाव से दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) उत्पन्न होती हैं, जो पूरी सुरंग में आगे बढ़ती हैं। यदि इनका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ट्रेन के सुरंग से बाहर निकलने पर ये तरंगें तेज गूंजती हुई आवाज पैदा कर सकती हैं।'' इसके लाभों का उल्लेख करते हुए इंजीनियरों ने बताया कि 'टनल हुड' खुले वातावरण और सुरंग के सीमित दायरे वाले हिस्से के बीच एक 'ट्रांजिशन ज़ोन' का काम करते हैं।
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भोपाल. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज के जरिए लोगों का विश्वास अर्जित किया है। प्रधान ने यहां संवाददाताओं से कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में राजनीतिक अनिश्चितता का दौर था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में स्थिरता आई और जनता का विश्वास मजबूत हुआ। उन्होंने कहा, ''देश में कामकाज के प्रदर्शन की राजनीति केंद्र में आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज के जरिए लोगों का विश्वास अर्जित किया है।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले 12 वर्षों में महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के कल्याण तथा सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधान ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में लोगों की आकांक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं, लेकिन इन आकांक्षाओं को पूरा करने की प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की क्षमता पर जनता का भरोसा भी उतना ही मजबूत है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश की बेटियों ने शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं और इससे जुड़े कई वैश्विक संकेतक इस प्रगति को दर्शाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार के कार्यकाल में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार, निर्यात में वृद्धि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''स्टार्टअप की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है और भारत ने प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।'' प्रधान ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार और वर्तमान मोदी सरकार ने कुल 18 वर्षों में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर परिणाम दिए तथा भारत के विकास की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि ''सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास'' के मंत्र और जनता के समर्थन के बल पर देश विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
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नयी दिल्ली. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ अगले भारतीय थल सेनाध्यक्ष होंगे। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। थलसेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान और रणनीतिक योजना बनाने की क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ फिलहाल थलसेना के उप प्रमुख हैं। वह 30 जून को जनरल द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने पर पदभार संभालेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ की नियुक्ति में सरकार ने वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन किया है।
मंत्रालय ने कहा, "सरकार ने फिलहाल थलसेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को अगला थलसेना प्रमुख नियुक्त किया है और उनकी नियुक्ति 30 जून से प्रभावी होगी। " वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं और उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में शामिल किया गया। लगभग चार दशकों के अपने विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने परिचालन, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है, जिससे भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेना के आधुनिकीकरण में उनके योगदान की व्यापक रूप से सराहना हुई है। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार क्षमता विकास और दीर्घकालिक सैन्य संरचना संबंधी पहलों को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंत्रालय के अनुसार उनके कमान में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवाद-विरोधी बल शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली, जो भारतीय सेना की प्रमुख 'स्ट्राइक फॉर्मेशन' में से एक है। मंत्रालय के अनुसार उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया हैं, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों और औपचारिक जिम्मेदारियों की देखरेख की। मंत्रालय के बयान के अनुसार सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने पर, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान की कमान संभाली, जिससे उन्हें दो परिचालन सेना कमानों की कमान संभालने और ढाई वर्षों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण मोर्चों पर रणनीतिक पर्यवेक्षण प्रदान करने का विशिष्ट गौरव प्राप्त हुआ। बयान में कहा गया है कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है, जिनका परिचालन योजना, बल प्रबंधन और क्षमता विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। मंत्रालय के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ एक कुशल सैन्य पेशेवर हैं, जिन्होंने पेशेवर सैन्य शिक्षा में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में शीर्ष स्थान प्राप्त किए हैं। बयान के मुताबिक वह उच्च कमान पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के स्नातक हैं, और उन्होंने पेरिस में आयोजित प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स में भी भाग लिया है। -
अयोध्या . अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को कहा कि उनकी भूमिका सिर्फ निर्माण कार्य की देखरेख करने तक ही सीमित है। उन्होंने मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी और पैसों में गड़बड़ी के आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। निर्माण समिति की बैठक में शामिल होने आये मिश्र ने कहा कि उनकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ निर्माण कार्यों की निगरानी करना है। उन्होंने बताया कि वह निर्माण से जुड़े कार्यों का जायज़ा लेने अयोध्या आए हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में कई निर्माण परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी।
मंदिर में कथित दान घोटाले के बारे में पूछे जाने मिश्र ने कहा, ''मैं सिर्फ़ निर्माण कार्य देखता हूं, और कुछ नहीं।'' उन्होंने दान घोटाले से जुड़े सवालों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। -
नयी दिल्ली. असम के जोरहाट में रूसी मूल के एएन-32 परिवहन विमान के शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त होने से भारतीय वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई। वायुसेना ने बताया कि विमान सुबह करीब 10 बजे एक नियमित उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इसने एक बयान में कहा, ''जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना में पांच कर्मियों की मौत पर भारतीय वायुसेना गहरा दुख व्यक्त करती है।'' मृतक कर्मियों की पहचान स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम के रूप में हुई है। वायुसेना ने शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह ''दुख की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और विभिन्न द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। यात्रा पर रवाना होने से पहले मोदी ने एक वक्तव्य में कहा कि भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि में फ्रांस का एक खास स्थान है, जबकि स्लोवाकिया की उनकी यात्रा एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाएगी। यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा होगी। मोदी ने कहा, ''भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि में फ्रांस का खास स्थान है। इसी वर्ष राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और हमने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था।'' उन्होंने कहा, ''जब मैं नीस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करूंगा, तब हम फरवरी के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और सहयोग के अगले चरणों की रूपरेखा तय करेंगे। मैं परस्पर हितों के महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा के लिए उत्सकु हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ ब्रातिस्लावा में चर्चा को लेकर उत्साहित हैं। मोदी ने कहा कि फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी, भारत के प्रति उसके साझेदार देशों के विश्वास और उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ''यह लगातार आठवां जी-7 शिखर सम्मेलन है, जिसमें भारत को आमंत्रित किया गया है। जी-7 में भारत केवल अपनी बात ही नहीं रखेगा, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को भी आवाज देगा।''
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गुवाहाटी. मशहूर गायक एवं संगीतकार जुबिन गर्ग ने दशकों तक अपनी खास गुनगुनाहट से अनगिनत प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इस गुनगुनाहट के पीछे असल में ध्वनि के गुणों से संबंधित विज्ञान है जो आवाज को मधुर और सुरीला बनाने के साथ भावपूर्ण बनाता है। यह दावा हैंडिक गर्ल्स कॉलेज के दो अनुसंधानकर्ताओं ने किया है। इनका कहना है कि जुबिन की गुनगुनाहट की सबसे बड़ी खासियत समय के साथ ध्वनि का उतार-चढ़ाव, पैटर्न और आवृत्ति का सटीक संतुलन था। दरअसल उनकी गुनगुनाहट की वैज्ञानिक आवृत्ति, संचरण बारम्बरता इतनी सटीक थी कि लोगों में जोश का संचार करके उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ती थी। ध्वनि की आवृत्ति, संचरण बारम्बरता जैसी विशेषताओं को संयुक्त रूप से 'ध्वानिक गुणधर्म' कहते हैं । ये विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि ध्वनि तरंगें उनके भीतर कैसे व्यवहार करती हैं। भौतिक शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर किशोर दत्ता और ज्योत्स्ना सैकिया ने ''क्वांटिटेटिव एक्यूस्टिक प्रोफाइलिंग ऑफ जुबिन गर्ग्स हमिंग: टेम्पोरल पैटर्निंग एंड स्पेक्ट्रल बैलेंस'' (जुबिन गर्ग की गुनगुनाने का मात्रात्मक ध्वनिक प्रोफाइलिंग: समयगत परिपाटी और स्पेक्ट्रल संतुलन )शीर्षक से प्रकाशित अनुसंधानपत्र में जुबिन गर्ग की आवाज की खासियत को समझने की कोशिश की है। अनुसंधान पत्र में कहा गया, ''जुबिन गर्ग की गायन शैली अपनी विशिष्ट गुनगुनाहट के लिए जानी जाती है। उनकी गुनगुनाहट अक्सर एक ऐसे विशेष संगीतात्मक पहचान के रूप में कार्य करती है जो भाषाई सीमाओं से परे होती है। संवाददाताओं और श्रोताओं ने उनकी गुनगुनाहट को 'सुकून दायक', 'भावपूर्ण' और 'आकर्षक' बताया है।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ''लोगों को जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट इसलिए पसंद नहीं आती कि उसमें कोई शब्द या भाषा का अर्थ होता है, बल्कि इसलिए कि उनकी ध्वनि की बनावट, लय, संरचना और आवाज़ के भावपूर्ण ध्वानिक गुणधर्म श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं।'' इस अनुसंधानपत्र को 'जर्नल ऑफ वॉइस' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक गुनगुनाहट भारतीय लोकप्रिय संगीत की एक अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका अपना अलग स्थान और पहचान है। अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ''जुबिन गर्ग की गुनगुनाने की शैली बहुत सहज, मधुर और भावनात्मक है। इसलिए यह समझने के लिए वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना जरूरी है कि उनकी आवाज और गुनगुनाहट में ऐसा क्या खास है जो लोगों को इतना आकर्षित करता है।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ''अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि उनकी आवाज के कौन-कौन से मापे जा सकने वाले गुण उनकी गुनगुनाहट को इतना अलग, पहचानने योग्य और आकर्षक बनाते हैं।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आवाज के कई तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जिनमें स्वर में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव, आवाज की तीव्रता में सूक्ष्म बदलाव, आवाज की स्पष्टता और उसमें शोर का स्तर, ध्वनि कितनी खुरदरी या मखमली है,ध्वनि की ऐसी विशेषताएं जो मानव श्रवण प्रणाली के अनुसार आवाज की पहचान करने में मदद करती हैं शामिल हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया, '' अध्ययन में पाया गया कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का अपना एक अलग समयगत ढांचा और शैली है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट और उनके सामान्य गायन की आवाज़ की मूल सुर-आवृत्ति में स्पष्ट अंतर है। इसके अलावा, उनकी गुनगुनाहट में स्वर की सूक्ष्म स्थिरता अन्य गायकों की तुलना में अलग पाई गई, जो उनकी आवाज़ की विशिष्ट पहचान का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।'' अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन के दौरान हमें जुबिन की आवाज की बनावट और ध्वनि-गुणों से जुड़े कई मापदंडों (एमएफसीसी) में उल्लेखनीय अंतर मिले। इससे पता चलता है कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट की ध्वनि-रचना कुछ मामलों में अन्य आवाज़ों से अलग है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट अपेक्षाकृत थोड़ी खुरदरी प्रतीत हुई, लेकिन इन अंतर को वैज्ञानिक रूप से निर्णायक नहीं माना गया।'' अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे की कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट के प्रति आकर्षण केवल श्रोताओं की धारणा की वजह से नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से मापे जा सकने वाले ध्वनि-गुणों के आधार पर भी विशिष्ट और अलग पहचान रखती है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वे अपने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए लोगों से जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट को सुनाकर उनकी राय नहीं ली, बल्कि ध्वनि-विज्ञान और मनोध्वनिकी के पहले से स्थापित वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर निष्कर्ष निकाले। इन अध्ययनों में कुछ ध्वनिक गुण यह समझाने में मदद करते हैं कि किसी आवाज़ को लोग कितना मधुर, गर्माहट भरा और स्थिर महसूस करते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अनुसंधानपत्र में लिखा कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट में लय, स्वर और ध्वनि-संरचना से जुड़े कुछ खास गुणों का ऐसा मेल है जिसे वैज्ञानिक रूप से मापा जा सकता है। यही गुण शायद उनकी गुनगुनाहट को गहराई और आकर्षण प्रदान करती है, जिसे श्रोता महसूस करते हैं। प्रख्यात गायक जुबिन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल' के चौथे संस्करण में शामिल होने के लिए पूर्वी एशिया के द्विपीय देश गए थे।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को ''राष्ट्र निर्माता'' के रूप में मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि पत्नी द्वारा घर-परिवार की देखभाल से मिलने वाली सेवाओं की क्षति का मौद्रिक मूल्यांकन कम से कम 30,000 रुपये प्रतिमाह के आधार पर किया जाना चाहिए। मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े मामलों पर व्यापक प्रभाव डालने वाले एक फैसले में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के कारण अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने कहा, ''हमारा यह भी मत है कि गृहिणी व्यक्ति और राष्ट्र, दोनों के विकास में योगदान देती है। गृहिणी राष्ट्र का निर्माण करती है। इसलिए हमने इस संबंध में सिद्धांत निर्धारित किए हैं और गृहिणी को 'राष्ट्र निर्माता' मानते हुए उसकी घरेलू देखभाल संबंधी सेवाओं के नुकसान का मासिक मूल्य किसी भी स्थिति में न्यूनतम 30,000 रुपये निर्धारित किया है।'' मृत गृहिणियों के लिए मुआवजे का निर्धारण पहले प्रचलित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर काल्पनिक आय तय करके किया जाता था, जिसमें उन्हें कुशल या अकुशल श्रमिकों के समान माना जाता था। शीर्ष अदालत ने कहा कि गृहिणी को परिवार के कमाने वाले सदस्यों पर निर्भर बताना विडंबनापूर्ण है, जबकि वास्तव में परिवार का संचालन काफी हद तक गृहिणी पर निर्भर करता है। पीठ ने कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि घर की महिला के योगदान को मान्यता देते हुए भविष्य में 'हाउसवाइफ' या 'होममेकर' (गृहिणी) के लिए 'राष्ट्र निर्माता' शब्द का प्रयोग किया जाएगा।'' अदालत ने कहा, ''वास्तव में कमाने वाले सदस्य पूरी तरह गृहिणी पर निर्भर होते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश इस वास्तविकता को वह मान्यता नहीं मिलती जो उसे मिलनी चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में इस दिशा में कुछ हद तक प्रयास हुए हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभी लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है।'' शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाओं का बिना वेतन वाला देखभाल कार्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 15 से 17 प्रतिशत का योगदान देने का अनुमान है, फिर भी यह कार्य अवैतनिक ही बना हुआ है और इस कोई मान्यता नहीं मिलती। पीठ ने कहा, ''समाज में महिलाओं का योगदान केवल जैविक प्रजनन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मानव पूंजी के निर्माण की भी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, जिस पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के सपने सहित अन्य लक्ष्य आधारित हैं।'' अदालत ने कहा, ''सीधे शब्दों में कहें तो 'गृहिणियां' वास्तव में 'राष्ट्र निर्माता' हैं और उन्हें उसी रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।'' मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों के मामलों में होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित मामलों की प्रगति की निगरानी करने को कहा। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से कहा गया कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी निर्देश दें जो बहुत लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें अपील दायर करने की तारीख के अनुसार उचित पीठों के समक्ष सूचीबद्ध कराएं। उच्चतम न्यायालय का यह फैसला पंजाब से जुड़े एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में आया, जिसमें 25 नवंबर 2001 को एक सड़क दुर्घटना में एक महिला की मृत्यु हो गई थी। मृतका के पति और उसके तीन बच्चों ने मुआवजे का अनुरोध करते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का रुख किया था, जिसने उन्हें 2.42 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया। मुआवजे की राशि से असंतोष जताते हुए शिकायतकर्ताओं ने राशि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8.43 लाख रुपये कर दी और उस पर 7.5 प्रतिशत ब्याज देने का भी आदेश दिया। इसके बावजूद असंतोष जताते हुए याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
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नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुश्किल समय में वह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी रहीं थीं। आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद सिन्हा ने ' एक न्यूज़ एजेंसी' को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि कुछ लोग मजबूरी, डर या प्रलोभन के कारण बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं, लेकिन उनका सैद्धांतिक रुख यह है कि वह न तो पार्टी को छोड़ेंगे और न ही उसके नेता को। सिन्हा ने कहा, ''मैं ममता बनर्जी का साथ उनके मुश्किल समय में नहीं छोड़ूंगा। जब मैं पटना में चुनाव हारने के बाद कठिन दौर से गुजर रहा था, तब वह मेरे साथ खड़ी थीं।'' उन्होंने कहा कि बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्होंने हाल में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अभी भी पश्चिम बंगाल में मत हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है। सिन्हा ने कहा, ''मैं उन लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहना चाहिए।'' विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल में फूट के साथ-साथ उसके ज्यादातर सांसदों ने भी बागी तेवर अपना लिये हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा का आधार हैं और सरकार उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मोदी ने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी पहल किसानों की आय सुरक्षित कर रही है और खेती को मजबूत बना रही है, जबकि पीएम-कुसुम योजना आसानी से सौर ऊर्जा उपलब्ध कराती है, जिससे खेती का खर्च कम होता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया, ''हमारे किसान भाई-बहन देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और समृद्धि के आधार हैं और सरकार उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।'' प्रधानमंत्री ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को आसानी से कम ब्याज पर ऋण दिलाने में बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है, जबकि ''बीज से बाजार तक'' पहल फसलों के लिए सही दाम सुनिश्चित कर रही है। मोदी ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, इसीलिए उन्हें खेती की आधुनिक सुविधाएं देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रोन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और प्राकृतिक खाद से जुड़े अभियान किसानों को फसल की पैदावार बढ़ाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं।
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भोपाल. मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने चुनाव परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्वाचित हो गए हैं। भाजपा के तीनों उम्मीदवार यहां मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी से जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। बाद में तीनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदर्शित किए। तीन विजयी उम्मीदवारों के साथ भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी और राज्य के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी थे। जीत के बाद भाजपा के तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। खंडेलवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मध्यप्रदेश से राज्यसभा हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट से भोपाल स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उन्हें विजयश्री की आत्मीय बधाई दी।'' खंडेलवाल ने कहा, ''आप तीनों का संगठन के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम तथा जनसेवा का व्यापक अनुभव निश्चित रूप से संसद के उच्च सदन में मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रहित के विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आप सभी विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा जनआकांक्षाओं को नयी ऊर्जा प्रदान करेंगे।'' उन्होंने तीनों नेताओं को सफल, प्रभावी एवं जनकल्याणकारी संसदीय कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
कांग्रेस ने राज्यसभा के इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया था। कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध बताते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है। निर्वाचन अधिकारी शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत में की गई शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है। नटराजन ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि वह याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की एक अंशकालिक कार्यदिवस पीठ ने हालांकि यह भी सवाल उठाया कि चुनावी प्रक्रिया जारी रहने के बीच यह याचिका कैसे सुनवाई योग्य है। नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पीठ से आग्रह किया कि उनके गैर सूचीबद्ध उल्लेख के अनुरोध पर इस आधार पर विचार किया जाए कि निर्वाचन अधिकारी ने एक कथित आपराधिक मामले के खुलासे में चूक का हवाला देकर उनके नामांकन पत्र को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गलत तरीके से खारिज कर दिया है। सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है जिनमें कम से कम दो वर्ष की न्यूनतम सजा का प्रावधान हो, जबकि वर्तमान मामले में केवल समन जारी किए गए हैं। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना था। ये तीनों सीटें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुई हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है। मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आराम से जीत रही थी जबकि संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत थी। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत थी। ऐसे में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी सदस्यों के मतदान से दूर रहने पर निर्भर थी। हालांकि नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मतदान की नौबत ही नहीं आई।



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